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सहेली के दोस्त संग थ्रीसम सेक्स- 4

0 बार पढ़ी गई11 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

बाईसेक्सुअल गर्ल Xxx कहानी में मैं मेरी सहेली और उसके बॉयफ्रेंड के साथ जंगल में चार में थी. हम तीनों नंगे थे. मैं अपनी पहली चुदाई का मजा ले चुकी थी लेकिन मेरे जिस्म की वासना शांत नहीं हुई थी.

यह कहानी सुनें.

फ्रेंड्स, मैं आपको अपनी सेक्स कहानी में एक रात जंगल में खराब पड़ चुकी कार में कैसे अपनी कुंवारी चुत को चुदवा बैठी, यह आपने अब तक

सहेली के दोस्त के लंड से चुद गई मैं

में पढ़ लिया था.

अब आगे बाईसेक्सुअल गर्ल Xxx कहानी:

मैं नंगी पड़ी अपना मुँह लकी के सीने पर रगड़ रही थी और कभी कभी उत्तेजित होकर अपने दांत भी गड़ाए दे रही थी, जिसका वह ‘ऊह आह’ की आवाजों के अलावा कोई विरोध भी नहीं कर रहा था.

अब पता चला था कि गहन उत्तेजना के क्षणों में पार्टनर को दांतों से बिना हर्ट करे काटना भी कितना सुकून देता है!

मैंने सोचा और लकी और पिंकू को मेरे पूरे चेहरे और बदन पर ऐसी चित्रकारी बनाने के लिए मन ही मन माफ कर दिया.

तीनों के कंठ से ‘आआह अह ऊह’ की आवाजों से पूरा जंगल गूंज रहा था.

आखिर हम तीनों एक साथ ही झड़ गए.

हम लोग उसी हालत में निढाल पड़े पड़े गहरी नींद में सो गए.

नींद में भी उन दोनों के हाथ मेरे शरीर पर ही घूम रहे थे, जिसकी भी आंख थोड़ी खुलती, वह मुझे चूमने चाटने और मेरी चूचियां दबाने लगता या चुत में उंगली डाल देता.

इन सब हरकतों से मैं कोई अछूती तो नहीं रह सकती थी … तो मैं भी आधी उत्तेजित हालत में ही थी.

नौ सौ चूहे खाकर अब हज को क्या जाना?

मैंने भी सोचा और उनींदी हालत में ही लकी का लंड अपने हाथों में लेकर सहलाने लगी.

लकी की लगातार हो रही हरकतों से उसका लंड कुछ तो पहले से ही तनाव में था और कुछ मेरे हाथों का स्पर्श पाकर एकदम से खड़ा हो गया.

लकी मुझे देख कर मुस्कुराया और पिंकू की चूचियां मसलते हुए उसे जगाने लगा.

‘चलो मेरा फेवरिट और फ़ाइनल राउंड, फिर घर चलते हैं!’

अब पिंकू मेरा सिर अपनी गोद में रख कर पलथी मार कर बैठ गई और लकी मेरे ऊपर लेट कर मिशनरी पोजीशन में पहले मेरे पूरे चेहरे पर चुंबनों की बौछार करने लगा.

धीरे धीरे उसके होंठों का दबाव मेरे गालों पर बढ़ता जा रहा था.

मेरे बाएं गाल के मस्से पर तो उसकी खास अटेन्शन थी, जिसे वो बार बार चाट रहा था.

फिर उसने पहले से सूजे हुए मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए और जीभ मुँह में डाल कर घुमाने लगा.

इस बार मैंने भी शर्माते हुए ही सही, लेकिन उसे कुछ रिटर्न चुंबन दिए और उसके मुँह में अपनी जीभ भी डाल कर घुमायी, जिसे वह बेहद नरमी और प्यार के साथ आहिस्ता आहिस्ता चूसता रहा.

मतलब पूरा फोरप्ले नए सिरे से शुरू कर दिया.

फिर काफी देर बाद वह थोड़ा नीचे होकर मेरी चूचियों की आवभगत में लग गया. उसने उन्हें फिर से सहलाना, मसलना और चूसना शुरू कर दिया.

मैंने भी अपने फ्री हाथों से उसके सिर को अपनी चूचियों पर दबाना शुरू कर दिया.

जब तक वह चूचियों में मशगूल था, पिंकू ने मेरे चेहरे पर चुम्मियां लेनी शुरू कर दीं.

मैंने भी पूरे जोश के साथ जवाब दिया और हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे के गालों होंठों को चूमते, चाटते और चूसते रहे. एक दूसरे के मुँह में जीभ भी घुसेड़ घुसेड़ कर मुख चोदन किया.

ऊपर पिंकू की करामात और चूचियों पर लकी के करतब, मैं तो किसी दूसरी ही दुनिया में थी.

काफी देर इंतज़ार करवाने के बाद आखिर लकी ने अपना लौड़ा मेरी चुत में प्रवेश करा ही दिया.

वह फिर रुका और आगे उचक कर पिंकू की चूचियां चूसने लगा.

पिंकू भी आगे झुक कर अपनी चूचियां उसके मुँह में दे दे कर चुसवा रही थी.

उन दोनों की सारी अटेन्शन मेरे ऊपर ही थी.

मेरे मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं.

अचानक पिंकू ने मेरे ऊपर झुकते हुए अपनी दायीं चूची अपनी गोद में रखे मेरे मुँह में दे दी और खुद मेरे बाएं निप्पल को चूसना शुरू कर दिया.

मेरी चीखें ‘उन्ह आंह गुन्ह गुंग.’ में बदल कर रह गईं.

’वाह … यह तो चूची चुसायी का सिक्स्टी नाइन पोजीशन हो गई!‘ लकी ने हंस कर बोला.

मैं नीचे लेटी लेटी उत्तेजना से पागल हो रही थी और पिंकू के निप्पल को ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी. मेरी चुत मेरे कंट्रोल से बाहर होकर अपने आप ही लकी के लंड को निचोड़ रही थी.

पिंकू ने भी अब पोजिशन थोड़ी बदल ली.

उसने अपनी बाईं चूची मेरे मुँह में देते हुए मेरे दाहिने निप्पल को चूसना शुरू कर दिया.

इसी तरह पिंकू अपने दोनों निपल्स अदल-बदल कर मेरे मुँह में देते हुए, मेरे भी दोनों निपल्स बारी बारी अपने मुँह में लेकर ‘चूची चुसायी का 69’ वाला यह नया नया खोजा हुआ खेल खेलती रही.

बाद में मैंने सोचा कि पिंकू की हालत कितनी खराब रही होगी क्योंकि आज उसकी इतनी उत्तेजना के बाद भी उसकी चूत को एक बार भी लंड का स्वाद नहीं मिल पाया था.

खैर … किसी तरह लंबे इंतज़ार के बाद लकी ने मेरे होंठों को कसके अपने होंठों से भींचा और लंड को पूरा बाहर निकाल कर एक बार में ही अन्दर घुसा दिया.

मेरी फिर से चीख निकली लेकिन होंठ लकी के होंठों में भिंचे होने से ‘आह उफ्फ़फ्फ् श्ह्ह्’ में बदल कर रह गई.

अब लकी ने मेरे होंठों को आज़ाद किया और एक भरपूर ‘आह्हह ह्ह्ह मांम्म्म् उफ्फ मर गई!’ की आवाज़ मेरे गले से निकल कर कार में गूंज गई.

लकी ने अब मुझे अपनी बांहों में भर कर मेरी चूचियां अपने सीने से चिपकाते हुए मेरे बाएं कपोल को मुँह में भरा और ज़ोर से चूसते हुए एक धक्का मारा.

वह इसी तरह बारी बारी से कभी मेरे बाएं गाल तो कभी दायें गाल, कभी ठुड्डी तो कभी होंठों को पीते हुए धक्के मारने लगा.

उसके जोशीले धक्कों से मैं ऊपर को सरक सरक जा रही थी.

अगर मेरा सिर पिंकू की गोद में ना होता तो कार की बॉडी से टकरा टकरा कर मेरे सिर में गूमड़ ही पड़ गया होता.

करीब पंद्रह मिनट ऐसे ही धक्के लगाने के बाद वह झड़ पाया और मेरे ऊपर निढाल होकर गिर गया.

मैं उसके बाद भी काफी देर तक अपनी टांगों को क्रॉस कर करके अभी भी किसी हद तक उसके सख्त लंड को उस वक्त तक निचोड़ती रही, जब तक मेरी चुत ने उसके लंड से निकले वीर्य की आखिरी बूंद नहीं निकाल ली.

मैं कल रात से अब तक कितनी बार चरमसुख तक पहुंची थी, मैंने गिनना छोड़ दिया था.

अब तक सुबह की लाली फैलना शुरू हो चुकी थी.

लकी मोटर के इंजिन पर फैले हमारे कपड़े उठा लाया, जो कि काफी कुछ सूख चुके थे.

हां मेरी ब्रा और पैंटी बहुत ढूँढने पर भी नहीं मिलीं. कहीं हवा में उड़ गई होंगी, या रीछ भालू उठा ले गए होंगे. बताया था ना कि उन्हें लेडीज की चूचियों और चूतों की गंध बहुत भाती है.

‘अभी जो है वही पहन लो!’ लकी ने कैजुअली कमेंट किया.

बाद में पता चला कि मेरे अंडर गारमेंट्स लकी ने मेरी इस पहली चुदाई की यादगार के तौर पर अपने पास ही रख लिए थे.

पिंकू की भी पहली चुदाई वाली ब्रा और पैन्टी उसके पास सम्हाल कर रखी हुई थी.

खैर … मैं क्या करती.

हम सबने जल्दी जल्दी कपड़े पहने.

मेरी चुत से चूता हुआ वीर्य पैंटी के अभाव में मेरी जांघों पर बह रहा था.

कार लकी की ही थी और उसने फ्रंट सीट भी पुराने जमाने की जीप या एम्बेसेडर कार की तरह एक सिंगल थ्री सीटर लगवाई हुई थी, जो कि ड्राईवर की साइड से शुरू होकर पैसेंजर सीट तक एक ही होती है.

लकी ने ड्राइविंग सीट पर बैठ कर चाभी घुमायी, तो गाड़ी एक बार में ही स्टार्ट हो गई.

पिंकू ने लगभग धकियाते हुए मुझे आगे की सीट पर धकेला और खुद भी आगे ही घुस कर बैठ गई.

मैं अब फिर से उन दोनों के बीच में फंसी बैठी थी.

‘यह कार ऐसे कैसे स्टार्ट हो गई? रात में क्यूँ नहीं हो रही थी?’

मैंने शक्की नज़रों से पिंकू को देखते हुए पूछा.

‘ऊपर वाला जाने!’ उसने गोलमोल जवाब दिया.

रास्ते भर भी वे दोनों मेरे ब्रा पैंटी विहीन शरीर से खेलते रहे.

कभी पिंकू मुझसे लिपट जाती और टॉप के अन्दर हाथ डाल कर बिना ब्रा के फ्री झूमती हुई चूचियां दबाने लगती, तो कभी लकी गियर बदलने के बहाने मेरी पैंटी से आज़ाद नंगी चुत को टटोलने लगता.

रात भर की अपनी हरकतों के बाद मैं भी किस मुँह से उन्हें सख्ती से मना करती?

फिर भी मैं दिखावा करके अपनी तरफ से रिजर्व ही रही.

‘यह अचानक फोन और पिकनिक का प्रोग्राम, लकी की अचानक मीटिंग, गाड़ी का खराब होना, गाड़ी में पहले से ब्लेंकेट, रम और पैक्ड सैन्डविच साथ में होना और फिर गाड़ी का अपने आप ठीक हो जाना!’

यह सब कुछ एक झटके में साफ हो गया था.

मैंने पिंकू को घूरते हुए कहा- अब तो सच्चाई बता दो? यह सब तुम्हारी मिली भगत है, यह तो मैं समझ ही गई हूँ!

मुझे उतना नाराज़ न देख कर पिंकू ने बताना शुरू किया.

‘देख तुझे मेरे साथ लिफ़्ट में देख कर यह लकी तो तेरा कब से दीवाना हो गया था. फिर मेरी आईडी से यह तुझे इंस्टाग्राम पर भी फॉलो करने लगा. यह भी देखा कि तेरा कोई बॉय फ्रेंड न है … न था. तभी हमने गैस किया था कि या तो तुझे सेक्स का मौका नहीं मिला है या तू लेस्बियन है. दोनों ही केसों में या तो मेरी या फिर लकी की किस्मत खुलनी थी. वह तो अच्छा हुआ कि दोनों की किस्मत एक साथ ही खुल गयी है. तू तो मेरी तरह ही बाइसेक्सुयल निकली.

मैं चुप होकर पिंकू को देख रही थी.

पिंकू- बस फिर क्या था, हमने यह प्लान बनाया. जंगल का रास्ता हमारा जाना पहचाना और सेफ है. हम पहले भी यहां कई बार आकर रंगरेलियां मना चुके हैं. वह रीछ भालू और डकैतों की कहानियां तो बस तुझे डराने और अकेली ही आगे न चल पड़ने से रोकने के लिए थीं. उसके आगे की कहानी तो तुझे मालूम ही है!

पिंकू इतनी लंबी कहानी बेझिझक बताती चली गई.

मैंने पूछा- लेकिन वह जानवरों की आवाज़ें और तेज बारिश तूफान, वह सब कैसे मैनेज़ किया?

‘अरे चिड़ियाघर यहां से पास ही है और वहां के जानवरों की रात में ऐसी आवाज़ें यहां तक सुनाई पड़ती हैं. यह हमें मालूम था … और बारिश, वह तो ऊपर वाले की मेहरबानी हो गई, नहीं तो कुछ और जुगाड़ देखते!’ कह कर पिंकू ने मुझे चूम लिया.

‘चलो जो हुआ अच्छा हुआ, हमने तय कर रखा है कि जो भी मिलेगा मिल बांट कर एंजॉय करेंगे. हमें तुम भी मिलीं तो ऐसी जिसे हमने मिल कर एंजॉय किया. बोलो हमारे ग्रुप का हिस्सा बनोगी? चाहो तो ना कर सकती हो … और फिर हम कभी नहीं मिलेंगे … और चाहो तो पिंकू को मिस कॉल मार देना. आगे का प्लान हमारी ज़िम्मेदारी!’ लकी ने बोला.

तब तक हमारी सोसायटी का गेट आ गया और मैं बिना कुछ कहे कार से उतर गई.

मुझसे चुदाई की थकावट से और दारू के नशे से सीधा खड़ा नहीं हुआ जा रहा था.

मेरी चूत और चूचियों में ही नहीं, पूरे बदन में मीठा मीठा सा दर्द हो रहा था.

मुझे खुद पता नहीं था कि उन दोनों ने कितनी बार मेरी चूत में अपने अपने औजार पेले थे.

लेकिन रात की रंगरेलियों को याद कर करके एक मीठी मीठी सी मुस्कुराहट भी मेरे होंठों पर बरबस बार बार तैर जा रही थी.

आज संडे है, आराम करूंगी. यह सोच कर अपने फ्लैट में पहुंच कर मैंने सबसे पहले पिंकू की दी हुई एंटी प्रेगनेंसी पिल निगली और फिर जल्दी जल्दी एक बर्गर तैयार किया और दूध में खूब सारा बोर्नविटा डाल कर पिया.

फिर दो क्रोसिन और दो ही अलेग्रा की गोली खाकर बेडरूम में आ गई.

नहाने की ताकत तो बची ही नहीं थी.

सोने से पहले वाशबेसिन के मिरर में नजर पड़ी तो वहां किसी लालची बच्चे के द्वारा अपने आम की गुठली की तरह चूसी गई ठोड़ी, सेब की तरह कचकचाए गए और आम की फांकों की तरह चूसे गए चब्बी चीक्स अपनी अलग ही कहानी कह रहे थे.

मैंने अपने ऑफिस में मेल करके अगले तीन दिनों के अपोइण्ट्मेंट्स और मीटिंग्स कैन्सेल कर दीं.

आखिर मेरे इतने जतन से मैंटेन करे हुए सुनहरे रंगत वाले चेहरे और बदन से कामक्रीड़ा की निशानियां जाने में कुछ टाइम तो लगेगा ही!

मेल करके फोन स्विच ऑफ कर ही रही थी कि लास्ट काल लिस्ट में पिंकू का नंबर सबसे ऊपर तैर गया और जैसे अंजाने में ही मैंने कॉल बटन दबा दिया और फिर फोन बंद करके आंखें बंद कर लीं.

नींद के आगोश में समाते समाते लकी और पिंकू के मुस्कुराते हुए चेहरे नज़रों के आगे तैर रहे थे.

दोस्तो, अगली कहानी लकी से पिंकू के मिलने की होगी.

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