फैमिली सेक्सपूर्ण

कॉलेज स्टूडेंट को चोदने में आया खूब मज़ा

0 बार पढ़ी गई11 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

चूत गांड फक स्टोरी में मैं कॉलेज में पढ़ाता हूँ. मेरी क्लास में एक लड़की मुझे बहुत पसंद आई. पर वो शादीशुदा थी. मैं उससे बात करने लगा.

मेरा नाम शेखर है। मैं 28 साल का हूँ, अविवाहित हूँ, अकेला रहता हूँ।

मकान किराये का है।

मकान मालिक ग्राउंड फ्लोर पर रहता है और मैं फर्स्ट फ्लोर पर।

मैं एक डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हूँ।

मुझे अपने काम में बहुत मज़ा आ रहा है क्योंकि रोज ही मुझे कई लड़कियों को पढ़ाने का मौका मिलता है, उनसे बात करने और उन्हें गाइड करने का भी मौका मिलता है।

यह चूत गांड फक स्टोरी तब बनने लगी जब एक दिन मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी।

उसका नाम था अलका।

पहले मैंने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब एक दिन गौर से उसकी मांग में सिंदूर देखा तो समझ गया कि ये विवाहित है।

फिर मैंने सोचा कि इसकी अभी हाल ही में शादी हुई होगी।

उससे बात करने की हिम्मत की मैंने, क्योंकि वह बहुत खूबसूरत थी और मैं खूबसूरत लड़कियों से खूब बात करता हूँ।

मुझे अलका बहुत पसंद आई।

मैं कॉलेज में ही उससे बातें करने लगा।

धीरे-धीरे वह भी मेरी तरफ खिंचने लगी।

एक दिन मैं एक शॉपिंग मॉल में घूम रहा था तो किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया।

मैंने पीछे मुड़कर देखा तो बोला, “अरे यार नागेश तुम?”

वह बोला, “हां यार मैं! पर तुम यहाँ क्या कर रहे हो शेखर?”

मैंने कहा, “यार मैं तो शॉपिंग करने आया हूँ। यहीं पास में ही रहता हूँ।”

वह बोला, “मैं भी पास में ही रहता हूँ अपनी बीवी के साथ। तेरी शादी हुई की नहीं अभी?”

मैंने कहा, “नहीं यार अभी तो नहीं हुई। जब टाइम आएगा तो हो जाएगी।”

वह बोला, “मेरी तो हो गई है। चलो मैं तुमको अपनी बीवी से मिलवाता हूँ।”

नागेश मेरा कॉलेज का दोस्त था।

मैं उसके साथ अपने कॉलेज के दिन बहुत अच्छे गुज़ारे थे।

मैं उसके साथ उसके घर चला गया।

घर में जाकर मैं सोफे पर बैठ गया।

इतने में नागेश ने आवाज़ लगाई, “अरे अलका देखो, मेरा कॉलेज का दोस्त आया है!”

अलका नाम सुनकर मेरे कान खड़े हो गए।

थोड़ी ही देर में अलका मेरे सामने आकर खड़ी हो गई।

मैं उसे देखकर खुद खड़ा हो गया।

मेरे मुँह से अपने आप निकला, “अरे अलका तुम?”

वह बोली, “सर गुड इवनिंग!”

नागेश देखता रह गया कि ये क्या हो रहा है।

तब मैंने बताया, “यार अलका जी तो मेरे कॉलेज की स्टूडेंट है। ये हमारे कॉलेज में पढ़ती हैं।”

वह बड़ा खुश हुआ और बोला, “ये तो बड़ी अच्छी बात है यार! अब तुम अपनी भाभी का ख्याल रखना।”

मैंने कहा, “हां यार, बिलकुल रखूंगा!”

फिर हम तीनों ने मिलकर खूब नाश्ता किया और खूब बातें कीं।

दूसरे दिन कॉलेज में मैंने अलका से कहा, “अब तो तुम मेरी भाभी हो गई हो अलका जी!”

वह बोली, “नहीं, कॉलेज में मैं स्टूडेंट ही हूँ, घर में भाभी जरूर हूँ।”

मैं इस बात से खुश हो गया।

दूसरे दिन फिर मैं उसके घर पहुँच गया।

तब मुझे पता चला कि नागेश तो अपनी ड्यूटी पर बाहर चला गया है।

मैं वहीं बैठ गया।

भाभी चाय-नाश्ता लेकर आईं और हम दोनों बातें करने लगे।

मेरी नज़र उसके जिस्म पर टिक गई।

मैं तो उसे पहले से ही चाहता था और अब तो वह मेरी भाभी हो गई है, तो मेरे लंड में हलचल होने लगी।

मैं उसके बड़े-बड़े दूध देखे जा रहा था।

मेरा मन हो रहा था कि मैं लंड इन्हीं दोनों के बीच घुसेड़ दूँ।

भाभी का गोरा चेहरा, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ, सुडौल खुली बाहें, और सुराहीदार गर्दन मुझे बड़ी आकर्षित कर रही थी।

उसने केवल एक कसी ब्रा पहनी हुई थी जिसमें केवल निपल्स ही छिपे थे।

मेरा मन हुआ कि मैं अभी भाभी के दूध मसल-मसल कर मज़ा ले लूँ।

उधर लंड बहनचोद बड़ा उत्पात मचा रहा था; उसे काबू में रखना बड़ा मुश्किल हो रहा था।

मैंने फिर कहा, “अलका भाभी, मैं आपको बहुत चाहता हूँ!”

इस बार वह खुलकर बोली, “देखो शेखर, मैं इतनी भोली-भाली औरत नहीं हूँ जितनी तुम समझ रहे हो। मैं बहनचोद बड़ी घुटी हुई औरत हूँ!”

इस बात ने मेरे बदन में आग लगा दी।

मैंने कहा, “कुछ भी हो पर तुम मेरे दिल में समा गई हो, अलका!”

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।

वह बोली, “देखो हाथ पकड़ा है तो फिर पीछे मत हटना शेखर!”

मैंने कहा, “नहीं हटूंगा अलका!”

तब उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया।

तो मैंने उसके गाल थपथपा दिए और फिर उसकी चुम्मी ले ली।

मैं समझ गया कि भाभी पिघल गई हैं।

फिर मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया।

वह भी मुझसे चिपक गई।

थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही रहे और फिर वह मुझे अपने बेडरूम में ले गई।

वहां मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठी।

मेरी चुम्मियाँ लेती हुई बोली, “भोसड़ी के शेखर! तूने मेरी चूत में आग लगा दी है! अब अगर तूने मुझे अच्छी तरह नहीं चोदा तो मैं तेरी माँ चोद दूंगी! तेरी गांड फाड़ डालूंगी मैं!”

भाभी की बात में सच्चाई थी।

अलका तब तक वाकई पूरी तरह गरम हो चुकी थी।

मैंने फिर उसकी चूचियाँ दबा दीं तो उसने भी मेरा लंड ऊपर से ही दबा दिया और बोली, “अरे ये तो साला पहले से ही खड़ा है!”

फिर मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैंने अलका के कपड़े उतारना शुरू किया।

जब वह पूरी नंगी हुई तो मैं उसे बड़ी देर तक देखता ही रहा।

बड़ा मस्त माल था अलका का।

उसने मुझे नंगा किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा।

मेरा लौड़ा जब तनकर उसके आगे खड़ा हुआ तो वह पकड़कर बोली, “वाह! तेरा लौड़ा भोसड़ी का बड़ा मोटा और तगड़ा है यार! नागेश के लौड़े से बड़ा है तेरा लौड़ा!”

उसने लंड हिलाना शुरू किया, फिर उसे चूमा और फिर गप्प से मुंह में घुसा लिया।

अलका बड़े मजे से चूसने लगीं मेरा लंड और मैं चाटने लगा उसकी बुर, उसकी गांड और उसके बड़े-बड़े सेक्सी चूतड़ भी।

मुझे पहली बार कोई इतनी मस्त, खूबसूरत और गदराई जिस्म वाली औरत मिली थी।

मैंने तो उसके पूरे नंगे बदन पर हाथ फेर-फेर कर मज़ा लिया।

उसने भी मेरा लंड बड़ी मस्ती से चूसा और चाटा।

फिर मुझसे रुका नहीं गया।

मैंने लंड सटा दिया उसकी चूत पर और एक बड़ा सा झटका मारते हुए लंड पूरा एक ही बार में पेल दिया।

उसके मुंह से निकला, “हाय माँ! फट गई मेरी चूत! तूने मादरचोद एक ही बार में पूरा घुसेड़ दिया! तेरी माँ का भोसड़ा साले कुत्ते! धीरे-धीरे पेलने में तेरी माँ चुद रही थी क्या? तू तो बड़ा बेरहम निकला! साले मैं भी किसी दिन तेरी गांड मारूंगी!”

मैंने कहा, “चुदक्कड़ औरत को चोदने में कोई शर्म नहीं आती बल्कि ज्यादा मज़ा आता है!”

वह बोली, “तुझे कैसे मालूम कि मैं चुदक्कड़ हूँ?”

मैंने कहा, “हर खूबसूरत बीवी चुदक्कड़ ही होती है अलका! अब सही-सही बताओ, कितने लंड खा चुकी हो तुम?”

तब तक मैं घपाघप चोदने लगा था उसे।

वह बोली, “यार सही बताऊंगी तो तेरी गांड फट जाएगी भोसड़ी के शेखर!”

मैंने कहा, “मेरी गांड फटती है तो फट जाने दो! तुम सही-सही बताओ मुझे। मुझे तेरी चूत चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है!”

वह बोली, “तेरा भोसड़ी का लंड बारहवां लंड है मेरी ज़िंदगी का! आज मेरे पूरे एक दर्जन लंड हो गए हैं! मैंने कहा था न कि मैं एक घुटी हुई औरत हूँ। अब मैं कहती हूँ कि मैं एक दर्जन लंड से चुदी हुई औरत हूँ!”

यह सुनकर मैंने चोदने की स्पीड बढ़ा दी।

मैं झटके पर झटके मारे जा रहा था और वो साली हर एक झटके का जवाब झटके से दे रही थी।

उसकी सिसकारियाँ निकलने लगीं, “आ आआह! ह्ह्ह्ह! ऊऊऊ! और चोदो! पूरा पेलो लंड! हां हां हां! तू भोसड़ी का बड़ा हरामी आदमी है! तेरी बहन की चूत कमीने! तेरी माँ का भोसड़ा! और जोर-जोर से चोदो! हचक-हचक के चोदो! अंदर तक घुसा दो लंड!”

मैंने कहा, “ले हरामजादी! पूरा पेलवा ले तेरी बहन की बुर! आज मैं तुझे रंडी बना दूंगा! फाड़ डालूंगा तेरी चूत! आआआह! होहोहो! ले साली रंडी छिनार! पूरा लौड़ा ले ले मेरा! इसे अपनी माँ के भोसड़े में भी घुसा देना! चुदवा लेना अपनी माँ भी! 12-12 लंड लेके तू रंडी नहीं, महारंडी बन गई है!”

आज मुझे मालूम हुआ कि इस खूबसूरत चेहरे के पीछे एक बड़ी चुदक्कड़ औरत छिपी हुई थी।

कुछ भी हो, अलका भाभी आज मुझे चुदाई का असली मज़ा आ रहा है।

आज मुझे यह भी मालूम हुआ कि भाभी को चोदने में जो मज़ा है वो मज़ा कहीं और नहीं है।

मेरी अलका भाभी को चोदने की यह पहली चुदाई थी तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित था और भाभी भी बहुत एक्साइटेड थी।

उसके लिए मेरा लंड एक नया लंड था और मेरे लिए उसकी चूत एक नयी चूत थी इसलिए उत्तेजना दोनों तरफ बहुत ज्यादा थी।

नतीजा यह हुआ कि भाभी की चूत ढीली हो गई और उसने पानी छोड़ दिया।

कुछ देर में मेरे लंड ने भी उगल दिया माल।

भाभी ने बड़ी मस्ती से उसे चाटा।

उसके बाद हम दोनों बिस्तर पर नंगे-नंगे लेट गए।

भाभी बोली, “शेखर तूने तो मुझसे पूछ लिया कि मैंने कितने लंड लिए हैं अब तक, अब तू बता तूने कितनी चूत ली हैं?”

मैंने कहा, “भाभी मेरी ये तीसरी चूत है। पहली चूत मैंने अपने मामा की बेटी की ली थी। दूसरी चूत मैंने अपने कॉलेज की एक फीमेल टीचर शिवानी की ली थी और तीसरी चूत आपकी।”

उसने पूछा, “गांड किसकी-किसकी मारी तूने बहनचोद?”

मैंने कहा, “अरे भाभी गांड तो मैंने किसी की भी नहीं मारी। कहो तो आज तुम्हारी गांड मार लूँ, भाभी?”

वह बोली, “नहीं, आज का दिन चूत का है। गांड किसी और दिन मारना। वैसे मैं गांड ज्यादा नहीं मरवाती लेकिन थोड़ा-बहुत मरवा ही लेती हूँ। 12 लंड में सिर्फ 5 लंड ने ही मेरी गांड मारी है और मुझे मज़ा भी आया।”

फिर चुदाई के बाद नंगे-नंगे ही हमारा खाना-पीना हुआ।

चुदाई की दूसरी पारी शुरू होने वाली थी।

हम दोनों एक दूसरे के नंगे बदन पर हाथ फेरने लगे।

मूड बनने लगा।

अलका भाभी का जिस्म वाकई बड़ा सेक्सी था, मन करता था कि लंड हर जगह घुसेड़ दूँ।

भाभी लंड पकड़कर हिलाने लगी और मैं उनकी चूचियों से खेलने लगा।

उसके बड़े-बड़े मस्ताने चूतड़ भी बड़े सेक्सी थे।

मैंने मन बना लिया कि लंड इनकी गांड में पेलूँगा जरूर।

तब तक लंड मेरा तनकर फुफकारने लगा था।

उसे देखकर भाभी बोली, “शेखर अब मैं तेरा भोसड़ी का लंड चोदूंगी! मैं तेरे लंड की सवारी करूंगी!”

ऐसा बोलकर उसने मुझे एकदम चित लिटा दिया।

लंड मेरा छत ताकने लगा।

भाभी ने मेरा लंड पकड़ा और टांग उठाकर मेरे लंड पर चढ़ गईं।

लंड उसकी चूत से सटा हुआ था इसलिए गच्च से भाभी की चूत में पूरा का पूरा घुस गया।

भाभी का मुंह मेरी तरफ था। वह थोड़ा झुकी और फिर अपने चूतड़ उठा-उठाकर लंड पर पटकने लगी।

यानी भाभी अपनी चूत से ही मेरा लंड चोदने लगी।

मुझे मज़ा आने लगा।

भाभी की स्टाइल मुझे अच्छी लग रही थी।

लेकिन थोड़ी देर बाद वह खुद बोली, “शेखर मेरी गांड में खुजली हो रही है! तुम मेरी गांड में भी लौड़ा पेल दो यार! मेरी गांड भी चोद लो लगे हाथ!”

मैं यह सुनकर खुश हो गया।

वह मेरे लंड से उतरी और फौरन घोड़ी बन गई।

मैं सीधे उसके पीछे चला गया।

मैंने पहले अलका की गांड में एक उंगली घुसेड़ी, फिर दो उंगलियाँ और फिर तीन उंगलियाँ घुसेड़ दीं।

गांड का छेद खुल गया तब मैंने लंड रगड़ना शुरू किया।

फिर मौका देखकर लंड धीरे से घुसाना शुरू किया।

मुझे भी गांड में लंड पेलना अच्छा लगने लगा।

लंड जब पूरा घुस गया तो उसके मुंह से “उफ्फ्” निकला और फिर वह भी मज़ा लेने लगी।

मुझे भी अलका की गांड मारने में मज़ा आने लगा।

मैंने फिर अलका अलका की गांड दो बार बड़ी बेरहमी से मारी।

इस तरह जब तक नागेश बाहर रहा तब तक मैं अलका भाभी को खूब चोदता रहा और उसकी गांड भी मारता रहा।

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मेरी पिछली कहानी थी: चौकीदार के लण्ड से बुझाई अपनी चूत की आग

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