सहेली के दोस्त संग थ्रीसम सेक्स- 3
कम्पलीट सेक्स विद फ्रेंड्स का मजा मुझे मिला जब मेरी सहेली ने मुझे अपने दोस्त के सामने नंगी करके गर्म कर दिया. मैं रुक नहीं पाई और अपनी जवानी दे दी उसे.
यह कहानी सुनें.
साथियो, मैं सोनू आपको अपनी सेक्स कहानी सुना रही थी जिसके पिछले भाग
सहेली के दोस्त का लंड चूसा
में मेरी कजिन पिंकू के ब्वॉयफ्रेंड लकी से मैं चुदने के लिए बेताब हो गई थी.
अब आगे कम्पलीट सेक्स विद फ्रेंड्स:
जब इन मामलों में अनुभवी और चतुर लकी ने जान लिया कि मैं पूरी तरह से गर्म और कामातुर हो चुकी हूँ तो वह मुझसे बिल्कुल अलग हट गया.
फिर वह बोला- देखो तुम शायद अभी तक कुंवारी ही हो. मैं तुम्हारी मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं करूंगा. बोलो अन्दर डालूँ या नहीं?
मुझे शर्म के साथ साथ कुछ डर भी लग रहा था क्योंकि मैं मस्टरबेशन के दौरान अपनी झिल्ली अपने ही हाथों फाड़ लेने के अलावा कुंवारी ही थी.
मतलब मैंने लंड का स्वाद पहले कभी नहीं चखा था.
मुँह में तो अभी चख ही चुकी थी और तमाम नकली गुस्से के बावजूद एंजॉय भी किया था, अब मेरी चूत भी पीछे नहीं रहना चाहती थी.
लेकिन मैं शर्म के मारे बोल नहीं पा रही थी.
लिहाजा मैंने केवल ऊंऊं जैसी आवाज़ें निकालीं, जिनका कोई भी कुछ भी मतलब लगा सकता था.
लकी ने अपनी मर्ज़ी से, जो कि मेरी भी मर्ज़ी थी, उसका मतलब निकाला और झट से पोजीशन सैट करके अपना लंड मेरी चुत के अन्दर घुसेड़ दिया.
‘उउईईइ माँऽऽ मर गयीऽऽ.’
मेरी आवाज़ से शायद पूरा जंगल हिल गया होगा.
’थोड़ा सब्र करो सब ठीक हो जाएगा. सारा दर्द खत्म हो जाएगा!’ लकी ने मुझे समझाने की कोशिश की.
मेरी आंखों से पानी बह निकला.
अभी तक मेरी चूत ने केवल मेरी ही दो उंगलियों का स्वाद चखा था, लेकिन कहां मेरी नाज़ुक पतली ज़नानी उंगलियां और कहां यह मोटा और लंबा मूसल … मेरी कुंवारी और एकदम टाइट चूत फट सी गई.
मैं दर्द से रोने लगी.
लेकिन अनुभवी पिंकू जो कि अब तक मेरे पेट के नीचे वाले कुशन को हटा कर मेरी चुत के पास आ गई थी, उसने तुरंत मेरे दाने को अपने मुँह में लेकर हल्के हल्के से चूसना शुरू कर दिया.
मैं ताज़ा ताज़ा फटी चूत के दर्द और कामकणिका पर पिंकू की एक्सपर्ट चुसायी के आनन्द के बीच हिचकोले ले रही थी.
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि हंसूँ या रोऊँ!
मेरी इस स्थिति का फायदा उठाते हुए लकी ने आहिस्ता आहिस्ता अपना पूरा लौड़ा अन्दर तक प्रवेश करा दिया और थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा.
तब तक पिंकू ने मेरी चूत के दाने को छोड़ कर गुरुत्वाकर्षण से नीचे लटकते हुए मेरे बड़े बड़े और भारी स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया.
अब पिंकू नीचे जाकर मेरे निपल्स को मुँह में लेकर ऐसे खींचने और चूसने लगी, जैसे वह पेड़ पर लटके हुए अंगूरों को मुँह से तोड़ रही हो.
उसने मेरे दोनों लटकते हुए निपल्स एक साथ ही मुँह में लेकर भी चूसे.
उसके मुँह में मेरे दोनों निपल्स और उसकी जीभ आपस में अठखेलियां करते बड़ी उत्तेजक अहसास दे रहे थे.
उधर लकी लगातार मेरे नितंबों को प्यार से सहला रहा था और मेरी पीठ पर झुक कर चुम्मियां ले रहा था.
जब उनकी इन हरकतों से मेरी चूत कि मसल्स पूरी रिलैक्स सी होने लगीं और मेरे मुँह से फिर से ‘आह उफ्फ् श्ह्ह्.’ जैसी उत्तेजक आवाज़ें निकलने लगीं.
लकी ने धीरे धीरे अपना लंड डॉगी पोजीशन में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
जिस लौड़े का स्वाद अभी अभी मेरा मुँह ले चुका था, उसी लौड़े का स्वाद अब मेरी चूत ले रही थी.
जैसे जैसे उसके धक्कों की स्पीड बढ़ती जा रही थी, मेरा सिर मेरे बदन के झटकों के साथ कार के पिछले शीशे से टकरा रहा था.
पिंकू ने सिरहाने बैठ कर मेरा सिर अपनी गुदाज छाती में समेट लिया.
अब मेरा चेहरा उसके मेरे से कहीं छोटे लेकिन शायद काफी समय से अच्छी तरह कुचले मसले जाने के कारण कहीं ज्यादा गुदाज और सॉलिड स्तनों से टकरा रहा था.
पिंकू ने अपना एक निप्पल मेरे होंठों से रगड़ना शुरू करा और मैंने जैसे बिल्कुल सहज भाव से उसे अपने होंठों में दबा लिया.
अब पीछे से लकी के जोशीले धक्कों की लय में मैं पीछे होती, तो मेरे होंठों में दबे पिंकू के चूचुक आगे खिंचे चले आते … और जब आगे होती तो मेरा मुँह उसके गुदाज उरोजों में धंस जाता.
पिंकू बदल बदल कर कभी बायां तो कभी दायां निप्पल मेरे मुँह में दे रही थी और मैं भी मस्त होकर उसके दोनों निप्पलों की अच्छी चुसायी कर रही थी.
लकी के लंड के घर्षण से जैसे जैसे मेरी उत्तेजना बढ़ती जाती थी, उतने ही जोश से मैं पिंकू के निपल्स के साथ साथ उसके किसी एक बोबे को पूरा अपने मुँह में भर कर चूसने की कोशिश करती.
‘ये निपल्स भी अजीब चीज हैं, चूसने वाले और चुसवाने वाले, दोनों को ही मदहोश कर देते हैं!’
मेरे मन में पिंकू की तेज़ होती सांसों को महसूस करके ऐसे ही खयाल आया.
नीचे से पिंकू की चूत से निकलते पानी की खुशबू मेरी नाक में घुस कर मुझे और दीवाना कर रही थी.
ना जाने क्या सोच कर मैंने अपने बाएं हाथ से पिंकू के कंधे का सहारा लिया और दायें हाथ की दो उंगलियां उसकी चूत में पिरो दीं, लेकिन फिर झेंप कर बाहर भी निकाल लीं कि कहीं मेरी डीसेंट इमेज खराब ना हो जाए.
पिंकू ने मेरे हाथ को पकड़ कर फिर से अपनी चूत पर लगा लिया और हंसती हुई बोली- अरी शर्मा मत … यह चीज़ें नैचुरल हैं, किसी को सिखानी नहीं पड़तीं.
अब मैं मुँह से उसकी चूचियां पी रही थी, उंगलियों से चूत चोद रही थी और पीछे से अपनी चूत चुदवा रही थी.
मतलब मेरे पूरे शरीर का पूरा पूरा उपयोग हो रहा था.
पिंकू भी ज़ोर ज़ोर से हांफती सिसकारियां भर रही थी.
पिंकू की इस बात को कि नैचुरल चीज़ें किसी को सिखानी नहीं पड़तीं, साबित करते हुए मेरा मुँह अपने आप ही उसकी चूचियों से फिसलता हुआ उसकी चुत से सट गया.
मैंने लकी के मेरी मुँह चुदाई के दौरान पिंकू द्वारा मेरी चूत की आवभगत को ध्यान से याद करते हुए, एक एक करके उसका बदला चुकाना शुरू कर दिया.
उसकी काम कनिका को चाटा, चूसा. फिर उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ घुसा कर जैसा जैसा उसने किया था वैसा ही करने की कोशिश की.
पीछे से मेरी चूत में लकी का लंड मेरी जीभ और होंठों को एक्सट्रा जोश दे रहा था.
मैं एक अच्छी स्टूडेंट हूँ, इस बात की गवाही पिंकू की ज़ोर ज़ोर से फुदकती हुई क्लिटोरिस, तेज़ सांसें और मुँह से निकलती हुई ‘आह उफ्फ़ श्हह’ आवाज़ें दे रही थीं.
आखिर पता नहीं कितने समय बाद लकी के लंड ने ढेर सारे वीर्य का फव्वारा मेरी चूत में इतनी ज़ोर से छोड़ा कि उसका झटका मैंने अपने हलक तक फील किया.
वह पस्त होकर मेरी पीठ पर ही लुढ़क गया.
उसी समय समय मेरी और पिंकू की चूत ने भी साथ ही साथ पिचकारियां छोड़नी शुरू कर दीं.
मैंने होश खोते खोते भी पिंकू के आखिरी सबक को भी दोहराते हुए उसके मुँह में डीप किस करके उसके कामरस का स्वाद उसको चखाया.
उसने भी मेरी जीभ को चूस कर और मेरे मुँह में अपनी जीभ घुमा घुमा कर अपने काम रस की एक एक बूंद मेरी लार के बोनस के साथ वसूल कर ली.
गुरु आखिर गुरु ही होता है.
कम्पलीट सेक्स विद फ्रेंड्स करके हम तीनों गहरी गहरी सांसें ले रहे थे.
अभी दो घंटे पहले तक मैं जो एक कुंवारी कन्या थी, अब अपने मुँह और चूत दोनों में पुरुष लंड और मुँह में अपने, पिंकू और लकी तीनों के कामरस का स्वाद ले चुकी थी.
लेकिन खेल तो अभी शुरू ही हुआ था.
घंटे भर मुझे बीच में लेटा कर दोनों मेरे बदन से खेलते रहे.
लकी मेरे होंठों को चूस चूस कर थक जाता तो पिंकू उसके हटते ही मेरे मुँह में अपनी जीभ घुसा देती.
पिंकू एक निप्पल को उमेठना बंद करता तो पिंकू उसे मुँह में लेकर चूसने लगती.
दोनों एक साथ भी कभी मेरे एक एक गाल को मुँह में भर कर चूसने लगते, तो कभी एक एक चूची को आपस में बांट कर उसे दबाने सहलाने चूसने लगते.
मेरी कामकनिका भी मसली ही जा रही थी और चूत में तो लगातार दो उंगलियां घुसी ही हुई थीं.
मेरा तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल था और लकी के लंड में भी फिर से दम आने लगा.
‘बड़ी भूख लगी है!’ पिंकू ने बोला.
तो लकी ने पीछे से एक बॉक्स से कुछ सैन्डविच निकाले, जिन्हें हम तीनों ने मिल बांट कर खाया.
पानी के नाम पर बस एक रम की बोतल ही बची थी, मना करते करते भी उसी के दो घूंट पिंकू ने ज़बरदस्ती मुझे फिर से पिला दिए.
पीते ही सर हल्का होने लगा और बदन का दर्द काफूर होने लगा.
मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं.
लकी फिर से चित लेट गया और मुझे उपर आने का इशारा किया.
मैं कुछ कहती उस से पहले ही उसने पहले की तरह मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरी चुतद्वार पर अपना मोटा और लंबा लंड टिकाते हुए मुझे उठा कर उसके ऊपर बैठा दिया.
मैं धीरे धीरे उसके लंड पर बैठ तो गयी लेकिन ‘उईई मांआ मर गयी …’ दर्द से मेरी चीख निकल गई.
अभी मेरी चूत पूरी तरह ढीली तो हुई नहीं थी.
दोनों मुझे चुप कराने की कोशिश करने लगे.
अपना लंड अन्दर डाले डाले ही लकी उठ कर आलथी पालथी मार कर बैठ गया और मुझे अपने आलिंगन में भर कर मेरे गालों को चूमने लगा.
पिंकू मेरे पीछे से घुटनों के बल बैठ कर मेरी चूचियों से खेलने और मेरे गालों और कानों पर पुच्चियां लेती हुई उन्हें चूम चाट कर मेरी उत्तेजना बढ़ाने लगी.
कभी कभी वो नीचे हाथ डाल कर मेरी clitoris को भी मसलने लगती.
अब इस लोटस पोजीशन में मेरा चेहरा, गर्दन, कंधे, चूचियां सभी कुछ लकी की आसान पहुंच में थे और वह इन सभी को चूमने चाटने, काटने में कोई कंजूसी नहीं कर रहा था.
इन सभी अंगों पर इस रतिक्रिया की निशानियां मुझे अगले कई दिनों तक हाइ नेक, पूरी बांहों के टॉप्स और जीन्स में रखने वाली थीं.
पीछे पूरी पीठ पर पिंकू ने चार्ज सम्हाला ही हुआ था.
वह भी इस चूमा चाटी, चुसायी, कटाई में लकी से बिल्कुल भी पीछे नहीं रह रही थी.
इस सबसे मेरा ध्यान दर्द से हट कर मस्ती की तरफ चला गया.
मैंने उसकी गोद में बैठे बैठे ही कसमसाना शुरू कर दिया और उसकी कमर को अपनी टांगों से जकड़ती हुई उसके लंड को अपनी चुत की दीवारों से घिसने की कोशिश करने लगी.
लकी मुझे अपनी बांहों में भींच कर, मेरे गालों को पीते हुए, नीचे से उचक उचक कर धक्के मार रहा था और मैं भी उसको अपनी बांहों में लपेट कर उससे चिपक कर उठक बैठक करती हुई उसका साथ दे रही थी.
कमर से ऊपर हम दोनों के बदन एक दूसरे से चिपके हुए थे इसलिए मेरी चूचियां भी उसके सीने में पिस रही थीं.
मेरे सुई जैसे तने हुए निपल्स उसके सीने में धँसे जा रहे थे.
लकी फिर से आराम से लेट गया और मैंने उसी पोजीशन में बैठे बैठे ही पूरा लंड अन्दर ले लिया.
कुछ देर पिंकू मेरे नितंबों को नीचे से दोनों हाथों का सहारा देकर ऊपर नीचे करवाती रही, लेकिन मैं जल्दी ही उस पर अपने आप ही उठने बैठने लगी.
अब किसी को मुझे कुछ बताने की जरूरत नहीं रह गई थी … सब कुछ नेचुरल सा था.
पिंकू भी मुझे लौड़े पर सैट करने के बाद उठ गई और लकी के बगल में लेट कर उसके निपल्स को चूमने चाटने लगी.
वह शायद इस कला में भी पर्फेक्ट थी.
मैंने लकी के निपल्स पर पिंकू के होंठों और जीभ के जादू को … और अपनी चूत में घुसे लकी के लौड़े में बढ़ते हुए तनाव से साफ महसूस किया.
थोड़ी देर बाद लकी ने भी पिंकू को अपने ऊपर खींच कर उसके बोबों को बुरी तरह चूस चूस कर उसका अहसान चुकाना शुरू कर दिया.
वे दोनों मुझे मेरे हाल पर छोड़ कर आपस में ही एक दूसरे को चूमने चाटने लगे.
उनकी हरकतों को देख देख कर ही मेरी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी और उनको आपस में ही मशगूल देख कर मैं नेगलेक्टेड भी फील करने लगी.
इसलिए मैंने अंधेरे में ही टटोल कर पिंकू की चूत में अपनी दो उंगलियां घुसा कर उसकी चुदाई शुरू कर दी.
पिंकू ने भी मुझे आगे खींच कर लिटा लिया और हम तीनों ही एक दूसरे की बांहों में लिपटे लिपटे फकिंग करने लगे.
पिंकू की चूत मेरी उंगलियों को निचोड़ रही थीं, तो मेरी चूत लकी के लंड को.
लकी तो आराम से लेटा हुआ हम दोनों के ही चुंबनों का आनन्द ले रहा था.
फ्रेंड्स, मुझे पूरा विश्वास है कि आपको मेरी चुदाई में मजा आया होगा.
अगले भाग में यह सेक्स कहानी आगे भी चलेगी.
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कम्पलीट सेक्स विद फ्रेंड्स का अगला भाग: सहेली के दोस्त संग थ्रीसम सेक्स- 4
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