गे सेक्सपूर्ण

क्रॉसड्रेसिंग करके पहली बार टॉप पति से गांड चुदाई

0 बार पढ़ी गई16 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

क्रॉस ड्रेस गे स्टोरी में मैं अपनी माँ के कपड़े पहनने लगा तो मुझे इसमें मजा आने लगा. साथ-साथ मेरे अन्दर की औरत भी जाग रही थी, जो चाहती थी कि मैं किसी दूसरे मर्द के सामने क्रॉसड्रेसिंग करूँ.

नमस्कार दोस्तो, कैसे हैं आप सभी? मैं आप सभी का अपनी इस क्रॉस ड्रेस गे स्टोरी में स्वागत करता हूँ.

वैसे तो मैं लड़का हूँ, लेकिन जब मैं लड़कियों के कपड़े पहनकर क्रॉसड्रेसिंग करता हूँ तो खुद को लड़की समझता हूँ.

ये उस वक्त की क्रॉस ड्रेस गे स्टोरी है, जब मैंने नई-नई क्रॉसड्रेसिंग शुरू की थी.

शुरू शुरू में मैं अपनी मां के कपड़े पहन लेता था.

धीरे-धीरे मुझे इसमें मजा आने लगा.

लेकिन इसके साथ-साथ मेरे अन्दर की औरत भी जाग रही थी, जो चाहती थी कि मैं किसी दूसरे मर्द के सामने क्रॉसड्रेसिंग करूँ, पर मेरे दिल में डर था इसलिए मैं छुप छुप कर अपना शौक पूरा करता रहा.

वैसे मैं गांव में रहता हूँ, इसलिए पढ़ने के लिए रोज शहर जाना पड़ता था.

क्रॉसड्रेसिंग के बीच में मुझे ‘गे चैटिंग ब्लू’ नाम के ऐप का पता चला.

मेरे मन में भी इस ऐप को चलाने की इच्छा हुई और मैंने अपनी आईडी बना ली.

मैंने अपने सभी नकली चीजों का इस्तेमाल किया, बस अपना नाम ‘क्रॉसड्रेसर’ रखा.

धीरे-धीरे मेरे पास कई लोगों की रिक्वेस्ट आने लगी.

मैं सिर्फ उनसे चैट करता था, मिलता नहीं था.

उसी सबके बीच मेरे पास एक लड़के की रिक्वेस्ट आई जिसने अपना नाम ‘डिसेंट’ लिख रखा था.

मैंने उससे भी चैट शुरू की.

वह बाकी लोगों से काफी अलग था. वह बहुत सम्मान से मुझसे बात कर रहा था.

उसने मुझे बताया कि वह टॉप है और एक बॉटम लड़के से प्यार करता था लेकिन अब उनके रिश्ते में थोड़ी अनबन हो गई है.

मुझे ये सुनकर बुरा लगा.

जब मैंने उससे उस लड़के के बारे में पूछा, तो उसने बताने से मना कर दिया और कहा कि वह उसकी इज्जत पर कोई आंच नहीं आने देगा.

ये बात सुनकर मेरे दिल में उसके लिए इज्जत और बढ़ गई.

ऐसे ही हमारे बीच रोज बातें होने लगीं और हमारी दोस्ती गहरी हो गई.

एक दिन उसने मुझे कहा- तुमने अपनी आईडी पर क्रॉसड्रेसर लिखा है, लेकिन मैंने कभी तुम्हारी क्रॉसड्रेसिंग की तस्वीरें या वीडियो नहीं देखीं.

मैंने कहा- मैं अपलोड नहीं कर सकता, लेकिन अपने पास रखता हूँ.

फिर उसने कहा- ये छुपाने की बात नहीं है.

लेकिन मेरा मन नहीं था तो मैंने उसे नहीं दिखाईं.

तब उसने मुझसे काफी आग्रह करते हुए कहा- चलो, बाकी को मत दिखाना … लेकिन मुझे तो दिखा दो!

अब मुझे थोड़ी बेचैनी होने लगी.

फिर उसने कहा- डरो मत, किसी को तुम्हारी तस्वीर नहीं दूँगा!

तब मैंने बहुत भरोसा करके अपने बिना चेहरे की क्रॉसड्रेसिंग वाली तस्वीर उसके पास भेज दी.

तस्वीर देखकर वह पागल ही हो गया उसने मुझसे कहा- तुम मुझसे पहले क्यों नहीं मिली? मैं तुम्हें ही अपनी बीवी बना लेता!

ये सुनकर मैं शर्मा गया.

फिर उसने मुझे एक दिन मिलने को कहा.

मैं डर गया क्योंकि मुझे मिलने का मन नहीं था.

लेकिन उसने कहा- बस दोस्त की तरह मिलना है. उसने ये भी कहा कि हम एक ही जिले के हैं.

धीरे-धीरे करके मैंने अपना मन बना लिया और अगले दिन हम मिलने का प्लान करने लगे.

मैंने आज तक उसका चेहरा नहीं देखा था और ना ही उसने कभी मेरा चेहरा देखा था.

अगले दिन उसने मुझे बस स्टैंड के पास वाले पार्क में मिलने को बुलाया.

मैं हिम्मत करके चला गया.

लेकिन जब मैंने उस लड़के को देखा तो मुझे जोरदार झटका लगा क्योंकि मैं रोज़ उसे अपनी बस में देखता था.

वह भी मुझे देखता था, लेकिन हम एक-दूसरे को नहीं जानते थे.

उसे देखकर मैं डर गया.

उसने भी मुझे देख लिया था.

मुझे लगा कि अब ये बस में सबको बता देगा, मेरी इज्जत का क्या होगा.

मैं उससे बिना मिले ही वापस आ गया.

बाद में उसका मैसेज आया.

उसने पूछा- क्या हुआ? तुम लौट क्यों गए थे?

मैंने उससे कहा- कुछ नहीं हुआ, लेकिन आज के बाद तुम मुझसे बात नहीं करना.

इस पर उसने कहा- बताओ तो क्या हुआ? तुम्हें डर लग रहा है क्या?

मैं चुप रहा.

उसने मुझसे कहा- डरो मत, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा, गॉड प्रॉमिस!

मैंने उससे पूछा- तुम सच कह रहे हो?

उसने बोला- हां, बिल्कुल सच कह रहा हूँ.

अब मैंने उससे उसका नाम पूछा.

उसने मुझे अपना नाम बताया- प्रियांशु.

उसके बाद उसने मुझसे भी मेरा नाम पूछा, जो मैंने उसे बता दिया.

अगले दिन जब मैं बस में चढ़ा तो वह सामने ही था.

उसने मुझे एक हल्की सी मुस्कान दी और बदले में मैंने भी एक मुस्कान दे दी.

आज हम दोनों ही एक अलग भाव से मिल रहे थे.

शहर जाते वक्त बस में बहुत ज्यादा भीड़ थी.

जैसे-जैसे बस की गति बढ़ी, तब तक भीड़ काफी हो गई और इसी कारण से वह बिल्कुल मेरे बगल में खड़ा हो गया.

हम बस में दो अजनबियों की तरह खड़े थे.

भीड़ की वजह से हम एक-दूसरे के आमने-सामने थे.

बस बहुत हिल रही थी.

मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकाल लिया और कुछ रील्स देखने लगा.

रील्स देखते समय ही मैंने देखा कि वह अपना हाथ बिल्कुल मेरे स्तन के पास ले आया.

अब बस हिलने के कारण उसका हाथ भी हिल रहा था और इसी तरह वह मेरे स्तन को छेड़ रहा था.

मुझे घबराहट और अजीब-सा लग रहा था.

मैंने एक-दो बार उसका हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन बार-बार उसका हाथ आ जाता था.

मैंने उसे कुछ नहीं कहा, क्योंकि मुझे भी वह चीज अच्छी लग रही थी.

फिर मैं आखिर में उसकी तरफ कमर करके खड़ा हो गया.

लेकिन मुझे क्या पता था कि मुझे छेड़कर उसका लंड खड़ा हो गया है.

अब वह धीरे-धीरे अपने लंड से मेरी गांड पर दबाव डालने लगा.

मैं चुपचाप ऐसे ही खड़ा रहा.

ऐसे करते-करते स्टैंड आ गया.

फिर मैंने चैट में उससे पूछा- बस में तुम ये सब क्या हरकत कर रहे थे?

मैंने थोड़ी नाराजगी से पूछा था.

तब उसने मुझसे कहा- तुम्हें अपना इतना करीब देखकर मैं आपे से बाहर हो गया. मैंने तुम्हें नहीं, बल्कि तुम्हारे अन्दर की औरत को छेड़ा था.

उसकी ये बातें सुनकर पता नहीं, मेरा गुस्सा कहां चला गया और मुझे अपने आप पर गर्व होने लगा.

उसने मुझसे कहा- अब मैं तुम्हें लड़का नहीं, बल्कि अपनी बीवी के रूप में देखता हूँ.

तब मैंने उसे कहा- तुम तो मुझे दोस्त बना रहे थे, अब ये बीवी कहां से आ गई?

उसने कहा- जिस दिन मैंने तुम्हारी क्रॉसड्रेसिंग की तस्वीर देखी, उसी दिन मेरा मन डोल गया. अब मैं तुम्हें बस एक लड़की की तरह देखता हूँ और अब मैं तुम्हें लड़कियों की तरह बस में छेड़ूँगा.

मैंने उससे कहा- नहीं ऐसा नहीं … प्लीज ऐसा मत सोचो!

फिर उसने मुझसे कहा- मैं तुम्हें कुछ छूकर देख सकता हूँ क्या … अगर तुम कपड़ों के अन्दर ब्रा और पैंटी पहन कर आओ तो?

मैंने उससे कहा- तुम पागल तो नहीं हो गए हो?

तब उसने कहा- सोच लो, एक दिन मेरी बात मान लो, फिर मैं तुम्हें तुम्हारी मर्जी के बिना महीने भर हाथ भी नहीं लगाऊंगा … वर्ना रोज छेड़ूँगा.

मैं सोच-विचार में पड़ गया.

फिर वह मुझे ‘प्लीज प्लीज’ करने लगा और बोला- किसी को पता नहीं चलेगा. तुमने इसके बारे में क्या सोचा है?

मैंने कहा- ओके मैं देखूँगा.

उस दिन मैं उसकी बात को मानने के लिए सोच रहा था.

मुझे डर भी लग रहा था, पर कहीं ना कहीं मेरा मन भी कर रहा था.

अगले दिन मैंने चुपके-चुपके जैसे-तैसे अपनी मम्मी की ब्रा और पैंटी पहन ली.

चूंकि मेरे स्तन स्वाभाविक रूप से बड़े हैं तो ऊपर से पतली ब्रा पहन ली, किसी को शक नहीं हुआ.

अगले दिन बस में ये सोच रहा था कि ओ गॉड किसी को मुझ पर शक न हो बस!

उसने बस के आने से पहले ही मैसेज कर दिया कि बस आने वाली है, पिछले दरवाजे से बस में चढ़ना.

मैंने बस का इंतजार किया.

पांच दस मिनट बाद बस आई और जैसा उसने कहा था, मैं पिछली खिड़की से चढ़ गया.

आज उसने पहले ही कोने की सीट पकड़ रखी थी.

मैंने सोचा, पता नहीं ये क्या करेगा.

मेरे चढ़ते ही उसने बैठने का इशारा किया.

मैं चुपचाप कोने में खिड़की के पास जाकर बैठ गया.

मुझे बिठाते हुए उसने अपना हाथ मेरी कमर के ऊपर से घुमाया और ब्रा के स्ट्रैप पर जैसे ही उसका हाथ लगा, मानो वह अन्दर से एकदम खुश हो गया.

अब बस चलने लगी.

तो उसने जानबूझ कर एक आदमी को आखिरी सीट पर बैठा लिया, जिससे हम दोनों एकदम करीब करीब हो गए.

उसने मुझे फिर किसी अजनबी की तरह कहा- थोड़े साइड में हो जाओ.

मैं थोड़ा सरक गया.

उसने मुझसे धीमे से कहा- जानू, थोड़ी सीट से बाहर को निकल आओ.

मैं थोड़ा बाहर हो गया.

फिर उसने अपना एक हाथ मेरे एक कंधे पर रख लिया और यूँ ही इधर-उधर की बातें करने लगा.

वह धीरे-धीरे अपने हाथ को कंधे से नीचे ले जाने लगा.

मुझे पता था कि वह क्या कर रहा है.

अब वह धीरे-धीरे मेरी चूची और उसके ऊपर के दाने को छेड़ने लगा.

इससे मेरे अन्दर एक सनसनी सी होने लगी.

तब उसने मुझे धीरे से कहा- डर क्यों रहे हो? आराम से मजे लो ना!

मैंने कहा- मुझे डर लग रहा है, ऐसे कोई देख लेगा!

तब उसने मुझसे कहा- एक काम करो, अपना बैग पर सर रख कर सोने की एक्टिंग करो और अपने हाथ खुले रखना.

मैंने वैसा ही किया.

धीरे-धीरे वह मेरा एक दूध दबाने लगा.

मुझे अच्छा भी लग रहा था और डर भी लग रहा था.

वह करीब 5 मिनट तक मेरे स्तन दबाता रहा.

उसके बाद उसने अपना एक हाथ टी-शर्ट में डाला.

मैंने उसे मना किया लेकिन वह नहीं माना और टी-शर्ट के अन्दर ब्रा के ऊपर से मेरे स्तन दबाने लगा.

वह बहुत प्यार से और आराम से मेरे स्तनों को दबा रहा था.

मुझे तो ऐसा लग रहा था मानो मेरे स्तनों से आज दूध निकल आएगा.

मैं उसी घटना के बारे में सोचता रहा.

फिर उसने मुझसे कहा- मैंने अपना वादा पूरा किया ब्रा-पैंटी वाला, अब मैं तुम्हें बिना तुम्हारी मर्जी के हाथ भी नहीं लगाऊंगा.

अगले दिन वह मुझसे दूर ही रहा और उसने कुछ नहीं किया.

लेकिन पता नहीं क्यों, मेरा मन कर रहा था कि वह कुछ करे.

जबकि मैं खुद भी उसे इस बात अनुमति नहीं देना चाहता था.

ऐसे ही कुछ दिन चलता रहा

फिर एक दिन उसने खुद ही पूछ लिया- थोड़ा छेड़ लूँ?

मैं भी इसी चीज का इंतजार कर रहा था.

मैंने थोड़े घमंड में कहा- हां हां, थोड़ा बहुत तो चलता है.

अब वह कभी मेरी गांड में उंगली कर देता, कभी मेरे स्तन दबा देता.

कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा.

अब उसे मेरी और मुझे उसकी आदत हो गई थी.

एक दिन उसने मुझे एक खाली पार्क में बुलाया.

उसके पास थोड़ा सिंदूर था और एक मंगलसूत्र भी था.

मैंने उससे पूछा- ये क्या है?

तब उसने मुझसे कहा- मैं तुम्हें अपनी बीवी बनाना चाहता हूँ.

मैंने उसे कहा- तुम मजाक कर रहे हो क्या?

तब उसने कहा- नहीं, मैं गंभीर हूँ.

मैंने उससे कहा- ये गलत है.

तब उसने कहा- कुछ गलत नहीं है.

उसने थोड़ा सिंदूर लगा दिया और मुझे मंगलसूत्र पहना दिया.

फिर उसने कहा कि उसने मेरे अन्दर की औरत से शादी कर ली है.

यकीन मानो, उस दिन मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे अन्दर की औरत पूरी तरह जाग गई हो.

अब मैं प्रियांशु को अब दोस्त नहीं, बल्कि पति की तरह देखने लगी.

उसके बाद उसका मुझे छूना मुझे अच्छा लगने लगा.

फिर एक दिन उसने मुझसे कहा- हमारी शादी तो हो गई है, लेकिन सुहागरात नहीं हुई है.

मैं थोड़ा डर गया. मैंने पूछा- मतलब?

तब उसने कहा- हमारी आत्मा तो एक हो गई है, लेकिन शरीर का मिलन नहीं हुआ है.

मैं थोड़ा शर्मा गया.

वह बोला- शर्मा क्यों रही हो? आखिर हम पति-पत्नी हैं डरो मत, कुछ नहीं होगा.

उस दिन से मेरा उसके प्रति भाव बदल गया था और अब मैं उसे न कह कर उन्हें कहने लगी थी.

फिर पता नहीं एक दिन चमत्कार हो गया.

मेरे घर वालों को किसी काम से 2-3 दिन बाहर जाना पड़ा.

मैंने ये बात प्रियांशु को बताई.

ये बात सुनकर प्रियांशु बहुत खुश हो गए और उन्होंने मुझसे कहा- रात को मैं तुम्हारे घर आता हूँ, तुम दरवाजा खुला रखना.

मैंने उनसे पति के भाव से कहा- ठीक है जी.

मैं किसी सुहागन की तरह अपने पति का इंतजार करने लगी.

रात के करीब 8 बजे प्रियांशु ने मेरे घर के पास आकर मुझे कॉल किया.

मैंने फट से दरवाजा खोलकर उन्हें झट से अन्दर ले लिया और फिर दरवाजे को बंद कर दिया.

हम दोनों अन्दर वाले कमरे में आ गए.

उन्होंने मुझे एक बैग दिया और कहा- ये तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है!

तब मैंने पूछा- कैसा सरप्राइज?

उन्होंने कहा- खुद खोलकर देख लो.

उसमें एक ब्रा-पैंटी, एक शादी का जोड़ा और कुछ गहने थे.

उन्हें देखकर मैं शर्मा गया.

तब उन्होंने मुझसे कहा- शर्मा मत पगली, झट से तैयार हो जा.

मैंने उनसे कहा- मुझे थोड़ा वक्त दो.

उन्होंने समझ लिया कि मुझे वक्त क्यों चाहिए है.

मैंने जल्दी से बाथरूम में जाकर अपनी पूरी बॉडी के बाल शेव किए, नहाया और अपने जिस्म को अपनी सुहागरात के लिए चमकाने लगी.

इतनी देर के लिए मैंने उन्हें दूसरे कमरे में बैठा दिया था.

इसी बीच उन्होंने बाथरूम के बाहर आकर पूछा- और कितना इंतजार कराओगी?

मैंने उनसे कहा- सब्र का फल मीठा होता है, आप बस थोड़ी देर और इंतजार करो.

फिर मैंने अपने बाथरूम से जुड़े ड्रेसिंग रूम में आकर फटाफट से ब्रा पैंटी साड़ी ब्लाउज आदि पहना और बाकी के सब आभूषण भी पहन लिए.

मेकअप करके मैं बाहर वाले कमरे में आई और खुद घूंघट करके बैठ गई.

जैसे ही उन्होंने मुझे शादी के जोड़े में घूंघट के पीछे बैठे देखा, उनकी आंखें चमक गईं.

मैंने शर्म के मारे अपनी नजर झुका ली.

उसके बाद उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया और मेरे पास आकर मेरा घूंघट उठाया.

उस समय शर्म के मारे मेरी जान निकली जा रही थी क्योंकि आज मेरी सुहागरात थी.

पहले उन्होंने मेरे माथे पर किस किया और फिर होंठों पर किस करने लगे.

मेरी तो जान निकली जा रही थी.

उन्होंने मुझे लेटा दिया और अपनी सांसों से मेरे बदन की गर्मी बढ़ाने लगे.

धीरे-धीरे हम एक-दूसरे की आगोश में लिपटे जा रहे थे.

उनकी सांसें तेज हो रही थीं और वह मेरे होंठ चूस रहे थे.

मेरे दोनों हाथ उनकी बदन की गर्मी नाप रहे थे.

कुछ पल बाद वे उठे और मुझसे अपने कपड़े उतारने को कहा.

एक बीवी की तरह मैंने वह सब किया.

देखते ही देखते वे पूरी तरह नंगे हो गए.

मैं उनका मोटा-लंबा लंड देखकर चौंक गई.

उनका लंड करीब 7 इंच का तो होगा ही.

मैंने उनसे कहा- इतना लंबा? मेरी तो जान ही निकल जाएगी!

तब उन्होंने मुझे छेड़ते हुए कहा- सजा में ही मजा है मेरी जान-ए-मन.

फिर उन्होंने मुझे लंड चूसने का इशारा किया.

मैं घुटनों के बल झुक गई.

मैंने उनका लंड पकड़ लिया, अपने मुँह में उनके लौड़े का टोपा ले लिया और किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने और चाटने लगी.

जितना ज्यादा मैं उनका लंड चूस रही थी, उतना तेज मैं हांफ रही थी और सिसकारियां ले रही थी.

लेकिन पूरी कोशिश करने के बाद भी मेरे पति का आधा लंड ही मेरे मुँह में जा पा रहा था.

वे अपने हाथ से मेरा सर सहलाने लगे और कहने लगे- डरो मत!

फिर धीरे-धीरे वे अपने लंड को मेरे मुँह के अन्दर ले जाने लगे.

अब मुझे उनका लंड अपने गले को टच होता महसूस होने लगा.

उन्होंने मुझसे कहा- अच्छा कर रही हो थोड़ा और जोर से चूसो बेगम!

बेगम सुनकर मेरा जोश भी बढ़ गया. मैं भी थोड़ी और कोशिश करने लगी.

अब लंड मेरे गले के अन्दर तक जाने लगा और मैं ‘उन्न्ग्ग … उन्न्घ्ह … उम्म्म्म … पप्प … उन्न्घ्ह … उंघ्ह्ह … .’ की आवाजें निकालने लगी.

प्रियांशु भी ‘उफ्फ्फ … . हां बेबी.’ जैसी आवाजें निकालने लगे.

उसके बाद उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ा और वे जोर-जोर से मेरा मुँह चोदने लगे.

मेरी आवाजें ‘उन्न्ग्ग … अज … पप्प … उन्न्न … उन्न्न … पप्प्प … रुको.’ निकलने लगीं.

मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे. मेरा सांस लेना भी मुश्किल हो गया.

उसके बाद उन्होंने मेरे सर को सहलाया और मुझे 69 पोजीशन में आने को कहा.

वे लेट गए और मैं उनका लंड चूसने लगी.

उन्होंने साड़ी को ऊपर करके मेरी पैंटी उतार दी और मेरी नंगी चिकनी गांड पर हाथ फेरने लगे.

मैं इधर उनका लंड चूस रही थी और दूसरी तरफ वे मेरी गांड में उंगली डालने लगे.

मुझे हल्का-सा दर्द हुआ लेकिन मजा भी आने लगा.

एक तरफ लंड से मेरे मुँह की चुदाई हो रही थी और दूसरी तरफ गांड की.

उसके बाद उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मुझे नीचे लेटा दिया.

एक तकिया मेरी कमर के नीचे लगा दिया.

फिर वे एक तेल की बोतल लेकर आए और मुझे अपनी टांगें खोलने को कहा.

मैंने टांगें फैला लीं.

उसके बाद उन्होंने उंगली तेल से भरकर मेरी गांड में डाल दी.

मुझे हल्का दर्द हुआ.

कुछ देर बाद उन्होंने दो उंगलियां डाल दीं.

मुझे और ज्यादा दर्द हुआ लेकिन मैंने उसे सह लिया.

उन्होंने कहा- अगर इसे सह लोगी तो लंड से दर्द नहीं होगा!

उसके बाद वे मेरे दोनों टांगों के बीच आ गए.

कुछ तेल उन्होंने अपने लंड पर भी लगा लिया था.

वे मेरे होंठों को किस करने लगे.

उनके लंड का दबाव मुझे अपनी गांड पर महसूस हो रहा था, लेकिन वह बस थोड़ा-थोड़ा ही अन्दर-बाहर कर रहे थे.

अब वे मेरे मम्मे चूसने और दबाने लगे. मैं मदहोश हो गई.

मेरी आवाज में सिसकारियां थीं- उम्म्म … आ..हां.

धीरे-धीरे मेरी गांड और खुली और लंड और अन्दर गया.

करीब आधे लंड के बाद मुझे दर्द हुआ तो मैंने कहा- बस यहीं रुक जाइए!

उन्होंने कहा- ठीक है.

फिर वे मेरे मम्मे चूसने लगे, उन्हें काटने लगे और मैं उसमें पूरी तरह से नशे में हो गई.

मेरा दर्द कम हुआ.

ये देख उन्होंने एक तेज झटका मारा और लंड मेरी गांड को चीरता हुआ पूरा अन्दर चला गया.

मैं एकदम छटपटा गई.

मेरी आवाज भी नहीं निकली.

मुझे बहुत दर्द हुआ और मैंने दर्द भरी आवाज में कहा- आह निकालो इसे!

लेकिन उन्होंने तेज-तेज झटके मारने शुरू कर दिए और मेरी चीखें निकलने लगीं ‘आआ … मर गई आआ … आआआ … बस्स्स … आआ … निकाल लो.’

लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी.

करीब दस मिनट के बाद दर्द कम हुआ.

अब मुझे मजा आने लगा और मुझे पता भी नहीं चला कि कब मेरी चीखें सिसकारियों में बदल गईं.

अब मेरे स्वर बदल गए थे- अह्ह्ह … बाबू … अह्ह … हां हां … अह्ह्ह् … उन्ह्ह … हां …

उन्होंने उस रात मुझे 3 बार चोदा.

आगे की क्रॉस ड्रेस गे स्टोरी आपके मेल मिलने के बाद लिखना सोचूँगी.

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