हिंदी सेक्सपूर्ण

तलाकशुदा भाभी एक्स ब्वॉयफ्रेंड से चुद गई

0 बार पढ़ी गई17 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

एक्स BF फक स्टोरी में मैंने गैर औरत से सेक्स करने के कारण अपने पति से तलाक ले लिया. लेकिन उसके बाद मुझे मेरा पुराना बॉयफ्रेंड मिला तो मैंने उससे सेक्स कर लिया.

मेरा नाम रागिनी है और मैं मेघा की मां हूं.

मेरे पति का नाम अजय कुमार है और वे एक सरकारी कर्मचारी हैं.

लेकिन कुछ हालातों के चलते मुझे उनसे तलाक लेना पड़ा.

क्या थे वे हालात, आइए बताती हूं इस एक्स BF फक स्टोरी में.

हमारी एनिवर्सरी की रात थी और अजय अभी तक घर नहीं आए थे.

घर में बच्चे सो गए थे और मैं अपने पति का इंतजार पलकें बिछाए कर रही थी.

यह कहानी सुनें.

रात 11 बजे दरवाजे की घंटी बजी.

मैंने झट से दौड़ कर दरवाजा खोल दिया.

सामने अजय खड़े थे और वे भयंकर नशे में चूर थे.

मुझे उनकी ये बेपरवाही जरा भी पसंद नहीं आई.

मैं सहारा देकर उन्हें बेडरूम में ले गई और बेड पर लिटा दिया, उनके जूते निकाले और उनकी शर्ट भी निकाल दी.

आज की रात खास थी और मैं भी उनके साथ संभोग के मजे लेना चाहती थी.

जैसे ही मैंने उनकी शर्ट को उतारा तो मुझको उनकी छाती पर कुछ निशान दिखाई दिए जो कि गहरे चुम्बन के थे.

साथ ही किसी औरत के बाल और लिपिस्टिक के दाग भी.

मैं स्तब्ध रह गई!

आज की रात मुझे इतना दर्दनाक अनुभव होगा, ये मैंने सोचा भी नहीं था.

मैं बेड पर पड़ी सारी रात रोती रही और सुबह होते ही मेघा और रोहन को लेकर मायके चली गई.

वहां मैंने सबको अपनी दास्तान सुनाई तो बात और बिगड़ गई.

लोग मुझे ही समझाने लगे कि मुझे समझौता कर लेना चाहिए लेकिन मैं तैयार नहीं थी.

मैंने अदालत में तलाक की अर्जी दे दी और फिर हमारा तलाक हो गया.

बच्चों की कस्टडी मुझे ही मिल गई थी.

तलाक के बाद मैं अपनी सहेली सीमा के कहने पर अहमदाबाद शिफ्ट हो गई.

वहां उसने मेरे रहने का इंतजाम कर दिया और एक प्राइवेट जॉब का भी.

इसी तरह जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ने लगी.

एक शाम मैं ऑफिस से लौट रही थी तो मुझे रास्ते में विनय मिला.

विनय कॉलेज के दिनों में मेरा ब्वॉयफ्रेंड था लेकिन कुछ कारणों से हमारी बात शादी तक नहीं पहुंच सकी थी और हमें अलग होना पड़ा था.

बाद में मेरी शादी अजय से और विनय की शादी शीना से हो गई.

विनय ने मुझे देखा और हाल-चाल पूछा.

विनय के साथ उसकी पत्नी शीना भी थी जो कि निहायत खूबसूरत थी.

विनय उसे हमारे बारे में बता चुका था.

मेरे तलाक के बारे में सुनकर उसे दुख हुआ.

विनय ने पूछा- आजकल अहमदाबाद में क्या कर रही हो?

मैं- कुछ खास नहीं, एक प्राइवेट जॉब है … बस उसी से गुजारा हो रहा है.

विनय- अगर तुम चाहो तो मैं मदद कर सकता हूं.

मैं- अरे नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, थैंक यू … पर मुझे पैसे नहीं चाहिए.

विनय- मैं पैसे के लिए नहीं कह रहा हूं. असल में मेरा कपड़ों का बिजनेस है और मुझे मैन्युफैक्चरिंग के लिए कुछ लोग चाहिए. मैं नई कंपनी डालने की सोच रहा हूं. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगवा सकता हूं. सरकार से लोन और सब्सिडी दोनों मिल जाएंगे, इस तरह तुम्हारे पास अपनी कम्पनी होगी और इस प्राइवेट जॉब से कई गुना ज्यादा इनकम भी!

शीना ने भी कहा- ऐसे कब तक दूसरों के अंडर काम करती रहोगी रागिनी? अपने बच्चों के बारे में भी तो सोचो … और वैसे भी मुश्किल वक्त में हम फ्रेंड्स ही एक दूसरे के काम आते हैं.

ऐसा बोलकर शीना ने मेरा हाथ अपने मुलायम हथेलियों से थाम लिया.

उसका आइडिया सही था और विनय पर मुझे भरोसा भी था.

मैंने किस्मत का इशारा समझ कर हामी भर दी और फिर अपने नंबर एक्सचेंज किए.

फिर विनय मुझे अपनी कार में घर तक छोड़ कर गया.

अगले कुछ दिनो में ही विनय ने मेरे लिए लोन और कम्पनी का लाइसेंस तैयार करवा दिया और अपना एक गोदाम मुझे ऑफिस के तौर पर दे दिया.

ये गोदाम शहर के बाहर बना था और मेरे घर से करीब 20 किलोमीटर दूर था.

अब मेरे पास मेरी खुद की कम्पनी थी, मेघा गारमेंट्स.

काम बढ़िया चलने लगा और मैं अब महीने में अच्छे खासे पैसे बनाने लगी.

फिर विनय ने मुझे अपने दोस्त रवि से मिलवाया जो कि सीए था और शेयर बाजार में अच्छी जानकारी रखता था.

उसने मेरा पैसा बेहतरीन तरीके से निवेश करवा दिया जिसमें मुझे कई लाख का मुनाफा हुआ.

कुछ ही महीनों में मैं काफी पैसा कमा चुकी थी.

अब मैंने विनय के घर के पास में ही एक घर खरीद लिया और मेघा और रोहन के साथ उसमें शिफ्ट हो गई.

एक शाम मैं फैक्ट्री में थी.

शाम के 5 बजे थे और फैक्ट्री में वर्कर्स के घर जाने का वक्त हो गया था.

उनके निकलते ही बारिश शुरू हो गई.

मैंने मोबाईल पर देखा तो किसी तूफान के आने की वज़ह से बारिश शुरू हुई थी और काफी वक्त तक बारिश रुकने के आसार भी नहीं थे.

तभी मैंने देखा कि विनय भी वहां आ गया.

विनय- रागिनी, मौसम विभाग का अलर्ट है, आज बहुत बारिश होगी और तूफान की वजह से शायद हम घर भी नहीं जा पाएंगे.

मैं बोली- घर पर बच्चे अकेले हैं, पता नहीं उनका क्या होगा.

विनय- तुम चिंता मत करो, मैं शीना को बोलकर उनको अपने घर पर रुकने के लिए कह देता हूं. शीना भी अकेली है तो उसका मन भी बहल जाएगा.

विनय ने शीना को कॉल कर के उसे बच्चों को घर लाने के लिए कह दिया.

मेरी ये चिंता तो दूर हो गई.

फिर मैं और विनय वापस ऑफिस में चले गए और वहीं जाकर आराम करने लगे.

काफी देर तक इधर उधर की बातें होती रहीं.

रात के 8 बज चुके थे और बारिश अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही थी.

तभी लाइट भी चली गई.

हम दोनों अब बस इनवर्टर के सहारे थे.

विनय ने कहा- मैं तो छत पर जा रहा हूं, तुम भी आओगी?

मैं बोली- क्यों, बाहर बारिश हो रही है, भीग जाओगे.

विनय- भीगने ही जा रहा हूं, याद है ना … हम दोनों कॉलेज के दिनों में कितना भीगते थे!

उसकी ये बात सुनकर मुझे भी पुराने दिन याद आ गए.

हमने अपने अपनें मोबाईल वहीं छोड़े और फिर छत की ओर चल दिए.

बाहर मूसलाधार बारिश जारी थी.

मैं संभलते हुए हल्के हल्के कदमों से बाहर निकल गई और बारिश का मज़ा लेने लगी.

विनय भी मेरे ही पास खड़ा हो कर भीगने का मज़ा ले रहा था.

हमारे बदन पूरी तरह भीग चुके थे और कपड़े बदन से चिपक गए थे.

मेरी साड़ी और ब्लाउज मेरे जिस्म की शेप में आकर मेरे बदन से किसी लेमिनेशन की तरह चिपके हुए थे.

मैं बांहें खोले भीगने का मज़ा ले रही थी.

तभी विनय ने मेरी कलाई को थामा और मुझे अपनी ओर खींच लिया.

उसकी आंखों में मेरे लिए अभी भी पुराने जमाने जैसा प्यार था.

मैं उसकी छाती से सटी हुई थी और सिर्फ़ इतना कह सकी – वि.. वि …विनय, ये क्या कर रहे हो?

मेरी बात पूरी होती, उसके पहले ही उसके होंठ मेरे होंठों पर कब्जा जमा चुके थे.

सालों बाद मुझे विनय के होंठों का अहसास हुआ था.

मेरी अन्तर्वासना जाग उठी और मेरा विरोध धीरे धीरे खत्म हो गया.

मेरे होंठ विनय के होंठों का स्वागत करते हुए उनका साथ देने लगे.

मेरी मुलायम कमर पर उसके सख्त हाथ मुझे महसूस हो रहे थे.

बारिश की बूंदें हमारे होंठों को छूते हुए हमारे भीतर समा रही थी.

विनय धीरे धीरे मेरे जिस्म से मेरी साड़ी को अलग करने लगा.

बारिश के माहौल में हमारे बदन हवाओं के छूने से कांप रहे थे लेकिन हमारी अन्तर्वासना की आग हमें एक दूसरे से अलग नहीं होने दे रही थी.

विनय ने मेरी साड़ी को मेरे बदन से अलग कर दिया और उसे वहीं छत पर छोड़ दिया.

पानी से भीगी साड़ी छत की फर्श पर पड़ी भीग कर सिमट गई थी.

मैंने भी विनय की टी-शर्ट को उतार दिया.

उसका सुगठित बदन अभी भी मुझमें आकर्षण जगाने के लिए काफी था.

मैंने विनय की छाती पर किस किया, उसके निप्पल पर अपनी जीभ फिराती हुई मैं उसकी आंखों में देख रही थी.

उसकी आंखों में अभी भी मेरे लिए वही प्यार था.

विनय ने मेरी तरफ देख कर मेरी ठोड़ी पर हाथ रख दिया और मेरा चेहरा ऊपर उठा कर अपने होंठों के पास लाकर धीरे से कहा- नीचे चलें या सब यहीं करने का इरादा है.

मैं बोली- अभी कुछ देर मुझे और भीग लेने दो ना, सालों बाद इस तरह से भीगी हूं.

विनय मुस्कुराया और फिर अपना हाथ मेरी गर्दन पर से होते हुए मेरे क्लीवेज तक ले गया, फिर एक एक करके मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा.

कुछ ही देर में मेरे ब्लाउज के दोनों हिस्से खुल कर अलग हो गए और मेरी काली ब्रा उसके सामने आ गई.

मेरे ब्लाउज को मेरे बदन से हटा कर विनय फर्श पर बैठ गया.

तेज बारिश का पानी धीरे धीरे छत पर भी भरने लगा था और हम दोनों उस ठंडक भरे माहौल में अन्तर्वासना से तप रहे थे.

विनय की गोद में मैं काऊ गर्ल पोजीशन में बैठ गई और हमारा लिप लॉक का सिलसिला दोबारा शुरू हो गया.

मैं बेतहाशा उसे चूमे जा रही थी.

विनय ने मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगा.

मेरे मुँह में अपनी जीभ डालकर अठखेलियां करते हुए उसने मेरे क्लीवेज और फिर नाभि का रुख किया.

मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल कर उसने मुझको खूब गुदगुदी की.

इसके बाद उसने मेरे पेटीकोट का रुख किया.

मेरे पेटीकोट के नाड़े को अपने दांतों से खींचकर खोलने के बाद उसने मेरे पेटीकोट को भी मेरे जिस्म से अलग कर दिया.

अब मैं उसके सामने ब्रा पैंटी में पड़ी भीग रही थी.

विनय मेरे ऊपर लेट गया और मुझे चूमते हुए उसने मुझे अपने ऊपर काऊ गर्ल पोजीशन में बिठा लिया.

मैंने अपने ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा उतार के छत पर छोड़ दी.

विनय के सामने मेरे स्तन खुल गए थे.

विनय ने पहले उन्हें मसला और फिर एक को अपने मुँह में भर कर उन दोनों को बारी बारी से प्यार करने लगा.

वह मेरे स्तनों को काटता, मेरे निप्पल को अपने होंठों से दबा कर चूसता और धीरे धीरे उन्हें निचोड़ता.

मुझे इस प्रक्रिया में बहुत मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर बाद मैंने उसके पैंट का बैल्ट खोल दिया.

विनय भी मेरा इशारा समझ चुका था.

उसने अपने पैंट और अंडरवियर को उतार दिया और पूर्ण नग्न हो कर मेरे सामने खड़ा हो गया.

मैं विनय का लंड देख कर खुद को रोक नहीं पाई और झट से उसका लंड अपने मुँह में भर लिया.

मैं चॉकलेटी लॉलीपॉप की तरह उसके लंड को चाटने लगी ‘उउम्ह उउम्ह्ह…’

उसका लंड मेरे गले तक जा रहा है और मेरे मुँह से उउम्ह् ऊउम्ह की आवाजें आ रही थीं.

थोड़ी देर बाद विनय ने अपना लंड निकाल लिया और मुझसे कहा- कुतिया बन जाओ रागिनी.

मैं समझ गईं की अब विनय मेरी चुदाई करेगा.

मैंने अपनी पैंटी उतार दी और कुतिया की पोजीशन में आ गई.

विनय ने मेरे नितंबों पर चपत लगाई और फिर कमर पकड़ कर अपना लंड सटा दिया.

कुछ देर तक अपने लंड को मेरी योनि पर रगड़ने के साथ साथ वह मेरे जिस्म को सहलाता जा रहा था.

फिर अचानक से उसने अपने लंड को मेरी चूत में घुसा दिया.

उफ्फ … मेरे मुँह से आह निकल गई.

पहली बार विनय आज मेरी चुदाई करने जा रहा था.

कॉलेज में हम दोनों ने कभी किस से ज्यादा कुछ नहीं किया था.

धीरे धीरे विनय धक्के लगाने लगा.

तेज बारिश और बादलों की गरज के बीच मेरी सिसकारियां मंद पड़ गईं.

बारिश की बूंदें मेरी नंगी पीठ पर गिरतीं और विनय के धक्के से मेरा बदन हिल जाता.

विनय ने मेरे कंधे अपने दोनों हाथों से पकड़ लिए और तगड़े तगड़े धक्के लगाने लगा.

उसके जोर के धक्के मेरी बच्चेदानी तक पहुंच रहे थे.

और मेरे मुँह से वासना भरी सिसकारियां निकल रही थीं ‘आह्ह विनय, प्लीज और तेज करो … आह आई लव यू विनय, प्लीज मुझे ऐसे ही प्यार करो, आह्ह्ह.’

ऐसे शब्द अनायास ही मेरे मुँह से निकल पड़े.

विनय कुछ देर तक मुझे इसी तरह कुतिया बना कर चोदता रहा.

फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे खड़ा करके बाउंड्री वॉल के पास ले गया.

छत पर बनी 4 फुट की बाउंड्री वॉल से हमारा बदन साफ़ दिख रहा था लेकिन आउट एरिया में होने के कारण फैक्ट्री के आस-पास कोई मकान नहीं थे.

विनय ने मुझे बाउंड्री वॉल से टिका दिया और मेरी एक टांग उठा कर अपने कमर के इर्द-गिर्द लपेट ली.

चुदाई का पोज सैट करने के बाद उसने फिर से अपना लंड मेरी चुत में पेल दिया और अन्दर तक डाल कर मेरी चुदाई करने लगा.

मैं खुद को संभाले अपनी चुदाई का मज़ा उठा रही थी.

बारिश की बूंदें हमारे जिस्म के साथ साथ मन को भी भिगो चुकी थीं.

कुछ देर चले इस क्रम के बाद विनय झड़ने वाला हुआ.

विनय ने कहा- रागिनी, मेरा निकलने वाला है.

मैं- तो बाहर निकाल लो.

विनय- नहीं, ये पहला सेक्स है, इसे ऐसे बेकार नहीं कर सकता.

मैंने उसकी भावनाऐं समझी और अपनी बांहें उसके सर के आसपास लपेट लीं.

कुछ ही धक्कों के बाद विनय आहें भरता हुआ मेरी योनि में ही झड़ गया.

इस दौरान मुझे भी स्खलन का अहसास हुआ था. हम दोनों थक चुके थे.

चालीस की उम्र में इस तरह का कामोत्तेजक संभोग मेरे तन के साथ साथ मन को भी तृप्त कर चुका था.

विनय का वीर्य बारिश के पानी के साथ मेरी टांगों से होता हुआ बह गया.

मैं आंखें नीची किए खड़ी थी.

मेरी आंखों में संतुष्टि के साथ साथ शर्म भी थी.

अपने प्रेमी के सामने नग्न होने की शर्म.

मैंने अपना बदन अपने हाथों से ढकने की कोशिश की.

तो विनय ने मुझे बांहों में भर लिया और किस किया.

विनय- रागिनी, काश शीना की जगह तुम मेरी बीवी बनतीं तो आज हमारी दुनिया अलग होती.

मैं कुछ नहीं बोली और उसके नग्न बदन से लिपट गई.

विनय ने मुझे कुछ देर तक सहलाया और फिर हमने नीचे चलने का फैसला किया.

हमें डेढ़ घंटे से ज्यादा वक्त इस बारिश में भीगते हुए हो चुका था.

हमने अपने इधर उधर फैले गीले कपड़े उठाए और नीचे चल पड़े.

हम दोनों निर्वस्त्र अवस्था में ही नीचे ऑफिस के रेस्ट रूम में आए.

हम दोनों ने अपने कपड़े निचोड़े और उन्हें सूखने के लिए छोड़ दिया.

मैंने मोबाईल चेक किया तो देखा कि शीना की 3 मिस्ड कॉल लगी थीं.

मैं ये देखकर घबरा गई तो विनय ने कहा- अरे कॉल कर लो, शायद बच्चों को लेकर कॉल किया होगा उसने.

मैंने शीना को कॉल लगाया तो शीना फोन उठाते ही बोली- कहां बिजी हो रागिनी, विनय ज्यादा परेशान कर रहा है क्या?

मैं हकलाती हुई बोली- ऐसी कोई बात नहीं है, हम तो बस बाहर बालकनी में थे और फ़ोन अन्दर रखा हुआ था.

शीना- ओके. विनय को फ़ोन दो.

मैंने विनय को फ़ोन दिया तो विनय ने कहा- हां जानेमन, यहां सब मस्त है. कुछ नहीं बस हम दोनों बारिश में भीगने का मज़ा ले रहे थे.

विनय सोफे पर लेट गया और मैं उसके ऊपर लेट गई.

विनय ने फोन का स्पीकर ऑन कर दिया.

शीना- अच्छा, तो बस भीगे ही … या फिर कुछ मजे भी किए!

विनय- हां, इस हसीन मौसम में बदन की आग बुझाने का मज़ा ही कुछ और है.

शीना- अच्छा जी, कितने राउंड हुए?

विनय- अभी तो बस पहला राउंड हुआ है, अभी 3 राउंड का खेल और चलेगा.

शीना- अच्छा और मैं यहां रात भर क्या करूंगी?

विनय- तुम रवि को कॉल कर लो, वह फ्री होगा आज रात, तुम्हारी रात भी बढ़िया गुजरेगी.

शीना- हां बुला लूंगी, चलो कुछ नजारे मुझे भी तो दिखाओ.

विनय ने व्हाट्सएप पर शीना को वीडियो कॉल लगा दिया.

मैं इस वक्त नंगे बदन उसके ऊपर लेटी थी.

कॉल उठते ही मैंने शर्म के मारे चेहरा छुपा लिया.

शीना- ओह बेबी, ये तो शर्मा रही है .. चलो कोई बात नहीं … जल्दी ही इसे भी आदत हो जाएगी, फिर हम इसे अपनी रंगीन दुनिया में एंट्री देंगे. ओके बेबी, मजे करना, लव यू.

ये कहकर शीना ने फोन रख दिया.

मैं ये सब सुनकर हैरान थी कि किस तरह विनय और शीना को एक दूसरे के नाजायज संबंध से कोई दिक्कत नहीं है.

मैं बोली- ये सब क्या है विनय? मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है?

विनय- अरे रागिनी, मैं और शीना लाइफ-स्टाइल कपल हैं … और जिंदगी खुलकर जीते हैं. जिसके साथ दिल करे सेक्स करते हैं और एक दूसरे को खुश रखते हैं. शीना को भी कोई प्राब्लम नहीं है तो हम दोनों इसी तरह खुशी से जिंदगी गुजारते हैं.

मैं ये सुनकर हैरान थी.

मुझे वह पल याद आ रहा था जब मैंने अपने पति को इसी बात का संदेह होने पर तलाक तक बात ला दी थी.

विनय ने मेरे एक दूध को मसल कर मुझे झँझोड़ा- कहां खो गईं जान!

मैंने अपनी यादों से बाहर आते हुए उससे पूछा- तुम लोगों को कोई प्रॉब्लम नहीं होती इन सबसे, कल को कोई लड़का आकर तुम्हारे साथ कोई ब्लैकमेलिंग करे तो?

विनय- उसकी नौबत नहीं आती है. हम कुछ गिने चुने कपल्स के साथ ही संबंध बनाते हैं. इससे हमारी प्राइवेसी भी बची रहती है और किसी को कुछ पता भी नहीं पड़ता.

ये विचार बहुत ही रोमांचक था.

मैंने आगे पूछा- ये तुम्हारी रंगीन दुनिया क्या है जिसके बारे में शीना बात कर रही थी?

विनय- हम लोग कभी कभी ग्रुप सेक्स का इंतजाम करते हैं और एक दूसरे की बीवी के साथ मजे करते हैं, बस वहीं हमारी रातें रंगीन होती हैं.

मैंने कहा- मतलब मुझसे ब्रेक-अप के बाद तो तुम्हारे मजे हो गए हैं.

विनय- हां, मजे तो हैं, लेकिन जो मज़ा तुम्हारी लेने में आया … वह और किसी के साथ नहीं, काश कॉलेज में ही तुम्हारी ले लेता तो इतना इंतजार न करना पड़ता.

ये कहकर उसने मेरे होंठ चूम लिए.

मैंने भी अपने शर्म के बंधन तोड़ दिए और उसका साथ देना शुरू कर दिया.

तब मैंने कहा- ऐसे नहीं, चलो 69 करते हैं.

फिर मैं विनय के ऊपर 69 की पोजीशन में आ गई.

मैंने विनय के लंड को अपने मुँह में भर लिया और विनय ने मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटना चालू कर दिया.

हम दोनों एक दूसरे में इतना खो चुके थे कि हम दोनों ही दूसरी बार 69 पोजीशन में झड़े.

उसके बाद हमने दो दफा और चुदाई की.

हमारा बदन थकान के मारे दर्द करने लगा था.

मुझे महीनों बाद चुदाई का स्वाद मिला था.

एक्स BF फक करके हम दोनों नंगे बदन ही एक दूसरे से लिपट कर सोफे पर सो गए.

अगली सुबह हम दोनों कार से घर की ओर निकले.

सुबह 7 बजे हम घर पहुंचे तो शीना ने दरवाजा खोला और पूछा- कैसी रही तुम दोनों की रात?

मैं कुछ नहीं बोली और नज़रें झुका ली.

तभी विनय ने कहा- हमारी रात तो मस्त थी, पूरे 4 राउंड चले. तुम्हारी रात कैसी रही?

शीना- हां मेरी भी मस्त रात रही. रवि के साथ 3 राउंड खेली रात की चुदाई में.

ये सुनकर हम सब हंस पड़े.

शीना ने मुझे गले लगाया और फिर हम सब एक परिवार हो गए.

इस एक्स BF फक स्टोरी पर आपके क्या विचार हैं?

यदि आपके अगले भाग को लिखने के लिए कहा गया तो मैं जल्दी ही आपके सामने उसे भी प्रस्तुत करूंगा.

आप अपने विचार मुझे पर भेजें.

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