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चौकीदार के लण्ड से बुझाई अपनी चूत की आग

0 बार पढ़ी गई9 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

हॉट भाभी कहानी में निकाह से पहले मैं खूब चुदती थी. पर शादी के बाद मेरे पास सिर्फ शौहर का लंड था जो मुझे रोज नहीं मिलता था. तो मैंने नया लंड तलाश किया.

मैं अपने शौहर के साथ कानपुर में रहती हूँ।

मेरा घर बहुत बड़ा है; अंदर बड़ा सा आँगन है और बाहर एक बड़ा सा बरामदा है।

मेरे शौहर की पोस्टिंग सीतापुर में है, इसलिए वह हर शुक्रवार को आते हैं और सोमवार को सुबह चले जाते हैं।

घर में हम दोनों ही रहते हैं, तीसरा कोई नहीं।

मेरा नाम मिसेज शज़रा है और मैं 24 साल की एक मस्त जवान महिला हूँ।

मैं एक बंगाली लड़की हूँ, बेहद खूबसूरत और पढ़ी-लिखी हूँ, मगर फिलहाल मैं केवल हाउसवाइफ ही हूँ।

मेरा बदन गदराया हुआ है; मेरे दूध बड़े-बड़े हैं और चूतड़ भी उभरे हुए हैं।

मेरी जाँघें मोटी और कमर पतली है।

मेरे कूल्हे ठुमके लगाने लायक हैं और मैं अक्सर लगाती भी हूँ।

मुझे सेक्स बहुत पसंद है।

18 साल की उम्र में ही मुझे लण्ड पकड़ने का मौका मिल गया था।

इसी सेक्स की चाह ने मेरी यह हॉट भाभी कहानी बनाई.

पहले ही लण्ड ने मेरे अंदर इतनी ऊर्जा भर दी कि फिर मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लण्ड पकड़ने के साथ-साथ मैं चोरी-छिपे चुदवाने भी लगी थी, जिसकी भनक किसी को नहीं लगी।

शादी के पहले मैं 3-4 लण्डों का मज़ा ले चुकी थी।

अपनी सुहागरात में मैंने शौहर से ऐसे चुदवाया कि उसे भरोसा हो गया कि उसी ने मेरी चूत की सील तोड़ी है।

मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश थी।

अब हाल यह है कि मेरा शौहर मुझे हफ्ते में तीन दिन ही चोद पाता है और बाकी के चार दिन मैं बिना चुदे रह जाती हूँ।

मैं चूत में उँगली डालकर काम तो चलाती हूँ.

पर हकीकत यह है कि मैं लण्ड के लिए छटपटाती रहती हूँ।

बड़ी मुश्किल से मेरे हफ्ते के ये चार दिन गुज़रते हैं।

हमारी कॉलोनी में सुरक्षा के लिए एक सिक्योरिटी गार्ड की व्यवस्था की गई है।

वह रात को पूरी कॉलोनी में पहरा देता है।

उसका काम रात 10 बजे शुरू होता है और सवेरे 6 बजे वह अपनी साइकिल से गाँव चला जाता है।

उसका नाम बलराम है और वह 24-25 साल का नवयुवक है।

देखने में वह काफी स्मार्ट और गोरा-चिट्टा है।

वह अपनी साइकिल मेरे ही बरामदे में खड़ी करता है।

मैं उसे रोज़ देखती थी लेकिन कभी बुरी नियत से नहीं देखा था।

एक दिन मैं अंदर से बहुत गरम थी।

मेरी चूत साली आग उगल रही थी! मैं एकदम नंगी लेटी हुई अपनी चूत में उंगली कर रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूचियाँ दबा रही थी.

तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया।

मैं समझ तो गई कि बलराम ही होगा.

मगर यकीन से नहीं कह सकती थी।

मैं किसी तरह उठी, कपड़े ठीक किए और दरवाजा खोल दिया।

देखा तो सामने बलराम खड़ा था, पर उसका पूरा बदन कीचड़ से सना हुआ था।

चेहरा भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था।

“अरे बलराम! क्या हुआ तुझे?” मैंने हैरानी से पूछा।

वह बोला, “मेम साहेब! रास्ते में अंधेरा था तो मैं एक गड्ढे में गिर गया।

पानी कम था लेकिन कीचड़ बहुत था।

निकलने में बड़ी मेहनत लगी, मैं बुरी तरह कीचड़ में सन गया हूँ!”

मैंने उसे अंदर बुलाया और बाथरूम का नल खोलकर कहा, “बलराम! तुम इसके नीचे बैठ जाओ और पहले कीचड़ साफ़ कर लो। फिर कपड़े उतारकर अच्छी तरह नहा लो। बाथरूम में तौलिया टंगी है, उसे ही लपेटकर बाहर आ जाना। कपड़े मैं मशीन में धो दूँगी, तब तक मैं तेरे लिए चाय बनाती हूँ।”

आधे घंटे बाद जब वह तौलिया लपेटकर नंगे बदन बाहर निकला, तो मैं उसे देखकर दंग रह गई!

उसकी चौड़ी छाती, उस पर घने बाल, बॉडी बिल्डर जैसी मजबूत भुजाएं, पतली कमर और कसरती जंघाएं देखकर मैं उस पर बुरी तरह मोहित हो गई।

मैंने मन में कहा, “क्या मस्त मर्द है बलराम! इसका लौड़ा भी बड़ा मस्त होगा! अगर ऐसा लौड़ा हाथ आ जाए तो मज़ा आ जाए!”

मैंने उसे स्टूल पर बैठाया और चाय पकड़ा दी।

मैं उसके सामने कुर्सी पर बैठकर चाय पीने लगी।

चाय खत्म होने के बाद जैसे ही वह कप रखने के लिए खड़ा हुआ, अचानक उसकी तौलिया खुलकर नीचे गिर पड़ी!

वह पल भर के लिए मेरे सामने पूरा नंगा हो गया और मुझे उसके लण्ड की झलक मिल गई।

लंड की झलक मिलते ही मेरी चूत की आग भड़क गई।

मैं बहुत उत्तेजित हो गई!

उसने फौरन तौलिया उठाकर लपेटना चाहा, पर मैंने उसकी तौलिया खींच ली!

“अब लपेटने से क्या फायदा बलराम! अब तो मैंने सब देख ही लिया है! अब तू बस ऐसे ही नंगा मेरे सामने खड़ा हो जा!” मैंने शरारत से कहा।

मैंने हाथ बढ़ाकर उसका लण्ड पकड़ लिया और उसे हिलाते हुए बोली, “लण्ड तो साला तेरा बड़ा मस्त है बलराम!”

मेरे मुँह से ‘लण्ड’ शब्द सुनते ही उसका औज़ार पूरा खड़ा हो गया।

यह देखकर मुझे बड़ा मज़ा आया।

मैंने उसके लण्ड पर चुम्मी ले ली।

वह शर्माकर बोला, “मेम साहेब! आप तो बहुत अच्छी हैं!”

मैं उसी स्टूल पर बैठ गई जिस पर वह बैठा था और उसे अपने सामने खड़ा कर लिया।

उसका लण्ड एकदम मेरे मुँह के सामने था।

मैंने कुछ सोचा नहीं, बस उसका लौड़ा मुँह में घुसेड़ लिया!

मैंने एक हाथ से उसके पेल्हड़ थामे और दूसरे हाथ से लण्ड पकड़कर चूसने लगी।

वह कुछ बोला नहीं, बस सिसकारियाँ लेने लगा।

“मेम साहेब! मैं मुँह में ही झड़ जाऊँगा, इसे बाहर निकालो! आपका मुँह गन्दा हो जाएगा!” उसने घबराकर कहा।

“तू भोसड़ी के चिंता न कर! झड़ना है तो मेरे मुँह में ही झड़ जा! मैं सब चाट जाऊँगी!” मैंने उत्तेजना में कहा।

मेरी बात सुनकर उसकी उत्तेजना और बढ़ गई।

लण्ड मेरे मुँह में और ज्यादा कड़क हो गया।

मुझे एक नया और मस्त लौड़ा मिला था, भला मैं उसे कैसे छोड़ती?

मैं उसे मुँह से निकाल-निकाल कर ऊपर से नीचे तक चाट रही थी।

लण्ड का टोपा मुझे बड़ा प्यारा लग रहा था।

मैं सच में बलराम के लण्ड की दीवानी हो गई थी।

वह सच में मेरे मुँह में ही झड़ गया।

मैंने उसका सारा वीर्य गटक लिया और लण्ड का टोपा चाट-चाट कर लाल कर दिया।

फिर मैं उसे बाथरूम ले गई, एक बार फिर नहलाया और नंगा ही उसे बेडरूम में ले जाकर लिटा दिया।

मैं भी नंगी होकर उसके बगल में लेट गई।

मुझे बलराम अब अपने शौहर से भी ज्यादा प्यारा लग रहा था।

मेरा हाथ फिर उसके लण्ड पर पहुँच गया।

उसने मुझे चूमा और बोला, “मेम साहेब…!”

मैंने उसे बीच में ही रोक दिया, “मुझे मेम साहब मत कहो! मुझे शज़रा कहो… बुर-चोदी शज़रा, भोसड़ी वाली शज़रा, रंडी शज़रा कहो! मुझे अच्छा लगेगा!”

वह जोश में आकर बोला, “अच्छा रंडी शज़रा! तुम बहुत खूबसूरत हो, मुझे बहुत अच्छी लगती हो! अब मैं तुम्हें चोद-चोद कर बुर-चोदी बना दूँगा!”

उसका जोश देखने लायक था!

वह मेरे ऊपर चढ़ बैठा और अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ दिया।

लण्ड जब चूत की दीवारों से रगड़ खाता हुआ अंदर गया, तो मुझे थोड़ा दर्द हुआ पर मज़ा बहुत आया!

मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने बदन से चिपका लिया।

“मुझे खूब चोदो मेरे राजा! फाड़ डालो मेरी चूत! तेरा लण्ड बड़ा दमदार है बहनचोद! मुझे इसी तरह चोदते रहो!” मैं चिल्लाई।

उसने रफ्तार बढ़ा दी तो मैं भी नीचे से अपनी गांड़ उठा-उठाकर उसका साथ देने लगी।

मैंने मन में सोचा कि मुझे चोदने के लिए बलराम जैसा ही मर्द चाहिए था।

वह झटके मार रहा था और मैं हर झटके का जवाब दे रही थी।

हम दोनों पूरी तरह जोश में थे।

न मुझे पहले इतना बढ़िया लण्ड मिला था और न उसे इतनी बढ़िया चूत।

उसका लौड़ा अंदर गहराई तक चोट कर रहा था— इतनी दूर तक तो मेरे शौहर का लण्ड कभी नहीं पहुँचा था!

मैं पूरी तरह समर्पित हो गई थी और मन ही मन उसे अपना शौहर मान चुकी थी।

मैं चुद रही थी और झड़ रही थी।

मैं दो बार झड़ चुकी थी, पर उस मादरचोद का लण्ड बैठने का नाम नहीं ले रहा था!

वह बिना रुके मेरी चूत पेले जा रहा था।

“उई माँ! बड़ा मज़ा आ रहा है! और कितना चोदेगा तू मुझे बलराम?” मैंने आहें भरते हुए पूछा।

वह बोला, “मैं तुझे चोद-चोद कर बुर-चोदी बना दूँगा हरामजादी शज़रा! तेरी चूत में बड़ा मज़ा है, ऐसा मज़ा मुझे पहले कभी नहीं आया!”

जब उसने 8-10 तेज धक्के मारे, तो मेरी चूत ढीली हो गई और उसका भी माल अंदर उगलने लगा।

सवेरे घर जाने से पहले उसने फिर मुझे खूब हचक-हचक कर चोदा और बोला, “मैं फाड़ डालूँगा तेरी हरामजादी चूत, रंडी शज़रा!”

अगले दिन वह रात को बड़ा बन-ठन कर आया।

अपनी साइकिल रखी और दरवाजा खटखटाया।

मैंने दरवाजा खोला तो उसे देखकर खुश हो गई, वह बहुत हैंडसम लग रहा था।

वह आते ही बोला, “मेम साहेब…!”

“फिर वही?” मैंने टोका।

“अरे हाँ! मेरी बुर-चोदी भोसड़ी वाली शज़रा! आज मैं पहले तुझे चोदूँगा और फिर राउंड पर जाऊँगा!

दो राउंड लगाकर आऊँगा और फिर चोदकर ही जाऊँगा!” उसने हक से कहा।

“ऐसा क्यों करेगा तू?” मैंने हँसते हुए पूछा।

“अब मुझे तुझे बिना चोदे चैन नहीं मिलेगा! तेरे नाम से ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है! मेरी चीज़ तेरी चूत को पहचान गई है, अब वह बिना चोदे नहीं मानेगा!” वह बोला।

“अच्छा! तो फिर आ जा और लौड़ा खोलकर नंगा बिस्तर पर लेट जा! मैं बाथरूम से आती हूँ!” मैंने जवाब दिया।

मैं थोड़ी देर में उसके पास पहुँची और नंगी होकर उसका लण्ड हिलाने और चूसने लगी।

इस बार मैं उसके आगे घोड़ी बन गई।

“लो! अब तुम मुझे पीछे से चोदो!” मैंने आदेश दिया।

उसने पीछे से अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसाया तो मुझे जन्नत का अहसास हुआ।

उसने अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर टिकाए और पिस्टन की तरह आगे-पीछे होकर मुझे चोदने लगा।

उस रात बलराम ने पूरी कॉलोनी के सिर्फ तीन चक्कर लगाए और बीच-बीच में आकर मुझे तीन बार चोदा।

सवेरे जाते वक्त वह बोला, “मेरी बुर-चोदी शज़रा यार! तू मेरा लौड़ा फिर से चूस ले अभी! मैं तुझे लौड़ा चुसाकर ही घर जाऊँगा!”

वह मेरे आगे नंगा खड़ा हो गया, उसका लण्ड पूरा कड़क था।

मैं भी नंगी हो गई और उसका लण्ड मुँह में भर लिया।

मैं सोफे पर बैठी उसका लण्ड तब तक चूसती रही जब तक वह मेरे मुँह में झड़ नहीं गया।

मैंने उसका सारा वीर्य चाट लिया और लौड़ा लाल कर दिया।

फिर वह चला गया।

इस तरह वह मुझे हफ्ते में चार दिन बड़े मज़े से चोदने लगा।

मेरी चूत की आग बलराम के उस मोटे लण्ड से ही बुझी।

हॉट भाभी कहानी पढ़ कर आपको बहुत मजा आया होगा.

अपने विचार मुझे बताएं.

मेरी पिछली कहानी थी: होली पर बीवियों की अदला बदली

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