बड़ी मम्मी और चाची को एक साथ चोदा
हॉट फॅमिली Xxx कहानी में मैं गाँव गया तो एक दिन ताई को साड़ी ऊपर करके चूत में उंगली करते देखा. मुझे उसी वक्त उनको चोदने का मन करने लगा था.
दोस्तो, आप कैसे हैं? मैं आशा करता हूँ कि आप सब सही से होंगे.
मैं आम आदमी से कुछ अधिक ही कामुक हूँ, ऐसा मुझे खुद से लगता है क्योंकि मैं सदैव ही चोदने के लिए चूत खोजता रहता हूँ.
मेरे मन में सिर्फ चुदाई घुसी रहती है, फिर चाहे जिसकी भी चूत सामने आ जाए, मेरा लंड बिना किसी सोच विचार के उसकी सवारी करने लगता है.
मेरे कहने का आशय यह कि मैं बुरवाली की आयु नहीं देखता कि ये किस उम्र की है.
अब सीधा अपनी हॉट फॅमिली Xxx कहानी पर आता हूँ.
मैं कुछ समय पहले अपने गांव गया था.
मेरे बगल में मेरी ताई रहती थीं.
वे पद में मेरी बड़ी मम्मी यानि ताई हैं लेकिन उनका पोता मेरे उम्र का है और हम लोग गांव में एक साथ पढ़ते थे. इसलिए मैं भी उन्हें दादी कहता था.
हालांकि वे ताऊ जी की दूसरी बीवी हैं और उनसे ताऊ जी ने एक भी औलाद पैदा नहीं की है, पहले वाली ताई से तीन लड़के और दो लड़कियां हैं और ताई जी किसी बीमारी के चलते गुजर गई थीं तो बच्चों को मां का सहारा देने के लिए ताऊ जी की दूसरी शादी हो गई थी.
ताऊ जी और ताई जी में उम्र कर बड़ा अंतर था तब भी शादी हो गई थी और बाद में ताऊ जी भी गुजर गए थे तो ताई जी गांव में अकेली रह कर खेती का काम देखती थीं.
उनके यहां काफी मजदूर लगे हैं तो काम देखने के लिए किसी का गांव में रहना जरूरी था.
मेरी इन ताई जी के सभी बच्चे वर्तमान समय में सब शहर में रह कर लड़के अपनी पढ़ाई कर रहे हैं … उनकी एक बड़ी लड़की की शादी हो गई है तो वे बहन जी भी शहर में रहती हैं.
अब गांव में ताई के पास कोई नहीं रहता.
हालांकि परिवार के सभी लोग समय-समय पर गांव आते रहते हैं.
ताई गांव में केवल अपनी लड़की की लड़की यानि अपनी नातिन के साथ रहती हैं.
ताई के परिवार के बारे में ज्यादा नहीं बताना चाहता क्योंकि कहानी लंबी हो सकती है.
ताई की उम्र इस समय लगभग 55 साल से ऊपर होगी.
उनकी नातिन की उम्र लगभग जवानी शुरू होने जैसी ही है.
मैं जब भी गांव में आता हूँ तो एक बार ताई से मिलता जरूर हूँ.
जब भी मैं उनसे मिलने जाता था तो अक्सर वे बाहर बरामदे में ही मिल जाती थीं.
इस बार जब मैं उनसे मिलने उनके घर गया, तो देखा कि वे बरामदे में नहीं थीं.
मैंने सोचा कहीं गांव में गई होंगी. लेकिन मेरा ध्यान बरामदे से घर की तरफ गया.
घर का दरवाजा खुला था, तो मैं सीधे घर में चला गया.
दोपहर का समय था और उस समय इतने बड़े घर में कोई भी नहीं था.
जब मैं अन्दर गया तो देखा कि ताई लेटकर अपनी साड़ी ऊपर करके अपनी चूत में उंगली डालकर आहें भर रही थीं और उनकी आंखें बंद थीं.
मैं वहीं खड़े होकर उनकी इस हरकत को देखने लगा था.
मेरी ताई जी मस्त गोरी हैं और उनकी मरमरी जांघों को देखने में मुझे वासना चढ़ने लगी थी.
मुझे उस वक्त वे ताई कम और चुत वाली माल ज्यादा नजर आने लगी थीं.
कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि कोई खड़ा है तो उन्होंने अपनी आंखें खोलीं और देखा कि मैं खड़ा हूँ.
मुझे देख कर उनकी सारी मस्ती गायब हो गई.
वे झट से अपनी साड़ी नीचे करके बैठ गईं और बोलीं- अरे अंकित, तुझे आए हुए कितना समय हुआ?
तो मैं हंस कर बोला- जब से आप आंखें बंद करके अपनी प्यास मिटाने में मस्त थीं!
मेरे मुँह से इतना सुनते ही वे शर्मा गईं.
तब मैं बोला- क्या ताई, मेरे रहते आप उंगली कर रही हैं? आप आदेश करो न … मैं आपकी सेवा में सदैव उपलब्ध रहूँगा!
ये सुनकर भी वे कुछ नहीं बोलीं; उनका सर नीचे झुक गया.
फिर मैं वहां से वापस अपने घर आ गया.
लेकिन मैंने ताई को इतना बता दिया कि मैं उन्हें चोदना चाहता हूँ.
अगले दिन दोपहर को मैं पुनः उनके घर गया.
उस समय ताई बाहर ही बैठी थीं.
ताई ने मुझे देखकर अपना सर नीचे झुका लिया.
मैं उनके पास गया, उनकी ठुड्डी से पकड़ कर उनका सर ऊपर किया और बोला- काहे आप इतना शर्मा रही हैं? मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा. आप उदास मत होइए.
यह सुनकर ताई को कुछ राहत मिली.
मैं मौका पाकर ताई की पीठ सहलाने लगा था.
उनके जिस्म की गर्मी मुझे ठरकी बना रही थी.
ताई ने कुछ नहीं कहा और मैं उनकी पीठ को सहलाता और मसलता रहा.
फिर मैं जाने लगा तब उनसे बोला- ताई, मैं एक दिन आपकी जरूर लूँगा … लेकिन आपकी मर्जी से.
ये कहकर मैं वहां से वापस चला आया.
फिर अगले दिन जब मैं दोपहर को ताई के घर गया तो वे सदा की तरह बाहर ही बैठी थीं.
मैं दोपहर में उनके पास इसलिए जाता था क्योंकि उनकी नातिन उस समय स्कूल में रहती थी.
ताई भी जान गई थीं कि मैं जब तक उन्हें चोद न लूँगा, तब तक उनके पास जरूर आता रहूँगा.
ताई मुझे जब आते देखा तो वे घर के अन्दर चली गईं.
मैं भी उनके पीछे-पीछे गया.
वे कमरे में जाकर अपने बेड पर बैठ गईं.
आज उनके मन में शायद यही चल रहा था कि वे देने को राजी हैं.
फिर मैं ताई के बगल में बैठ गया.
मैंने उनकी ठोड़ी पकड़ कर पूछा- और डार्लिंग का हाल-चाल है?
वे मेरे मुँह से डार्लिंग सुनकर मुस्कुरा दीं.
मैं उनकी पीठ को सहलाने लगा था.
वे कुछ बोल नहीं रही थीं.
कुछ पल बाद मैंने हिम्मत करके उनकी जांघ पर हाथ रखा.
तब ताई बोलीं- अंकित ये गलत है.
मैं बोला- कुछ नहीं गलत है. आपको एक मर्द की जरूरत है और मैं आपकी जरूरत पूरी करने के लिए रेडी हूँ. आप किसी गैर से अपनी जरूरत पूरी करो, इससे तो मैं आपके घर का हूँ और आपका भला ही करूंगा.
वे मेरी बात से शायद सहमत थीं.
मैं ताई की जांघ को दबाने लगा.
इस बार ताई भी आराम से अपनी जांघ मुझसे दबवा रही थीं.
कुछ देर बाद मैंने कहा- जब तक आपका मन अपराधबोध से ग्रस्त रहेगा, तब तक आप मुझे सही से साथ नहीं दे पाएंगी. मैं आपको खुश तभी करूंगा, जब आप खुद से देने के लिए राजी होंगी.
वे कुछ नहीं बोलीं.
फिर मैं वहां से वापस चला आया.
आते वक्त मैं पुनः यह बात कहकर आया कि ताई, आपकी मर्जी से ही आपकी लूँगा.
मैं ताई पर दबाव नहीं डालना चाहता था क्योंकि मैं चाहता था कि ताई भी मेरे साथ चुदाई का मजा लें.
यदि मेरी सोच ऐसी नहीं होती तो मैं उसी दिन ताई को पेल देता और वे मना भी नहीं कर पातीं.
फिर मैं अगले दिन उसी टाइम ताई के घर गया.
ताई पहले से ही घर के अन्दर थीं.
मैं उनके पास बैठा.
आज मैं पुनः ताई की जांघ को सहलाने लगा था.
आज ताई भी कुछ मूड में थीं.
जब मैंने सहलाना शुरू किया तो ताई ने अपनी आंखें बंद कर लीं.
यह देख कर मैंने ताई की साड़ी को ऊपर करके उनकी जांघ को सहलाना शुरू कर दिया.
वे मस्त होकर आह आह करने लगीं, तो मैंने उनको बेड पर लिटा दिया और उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया.
अब मैं उनकी नंगी जांघ को सहला रहा था.
धीरे-धीरे मैंने साड़ी निकाल दी और उन्हें सिर्फ पेटीकोट पर कर दिया.
फिर पेटीकोट को ऊपर करके मैंने उनकी चूत का नजारा लिया.
एकदम जामुनी रंग की चुत थी और पानी से लिसलिसा रही थी.
मैंने उनकी चूत को फैलाया और उनके अन्दर अपनी जीभ डाल दी.
ताई एकदम सिहर उठीं और बोलीं- अ…ये क्या कर रहे हो? ये गंदी जगह है.
मैं ताई से बोला- ताई, आप मुझे करने दीजिए … और जैसे मैं करने को कहूँ, वैसा ही करती जाइए.
ताई अपनी चूत को साफ-सुथरी रखती थीं, या उन्होंने मुझसे चुदवाने के लिए अपनी चुत को साफ किया था, नहीं मालूम … पर उस समय उनकी चुत पर झांट का एक बाल भी नहीं था.
मैं ताई की चूत को फिर से चूसने लगा.
ताई की चूत को पहले शायद कभी किसी ने नहीं चूसा था.
ताई भी मजे से अपना चूत चुसवा रही थीं और काम भाव से जोर-जोर से बोल रही थीं- आह अंकित और चूसो … बहुत मजा आ रहा है!
तब मैं ताई से बोला- ताई, अपना ब्लाउज खोलकर बोलिए न कि ये चूचियां तुम्हारी हैं, जब चाहो इन्हें दबाओ और पियो.
ताई ये बातें सुनकर झट से अपना ब्लाउज खोलकर बोलीं- ये चूचियां तुम्हारी हैं … इनके साथ चाहे जैसे खेलो, मैं तुम्हें कभी मना नहीं करूँगी!
अब मैंने ताई को पूरी तरह से नंगी कर दिया.
मैं ताई से बोला- अब अपनी आंखें खोलो.
तब ताई ने आंखें खोलीं.
मैं बोला- ताई, जिसे मैं चोदता हूँ, उसे मैं पत्नी बनाकर ही चोदता हूँ!
यह कह कर मैंने उनकी टेबल पर रखी सिंदूर की डिबिया उठाई और उसमें से एक चुटकी लेकर उनकी मांग भर दी.
ताई ने भी मुझे अपने पति के रूप में स्वीकार कर लिया.
मेरी ताई का नाम निर्मला था, तो मैं बोला- निर्मला आज से तुम मेरी पत्नी हो.
वे शर्मा गईं.
फिर मैं बोला- निर्मला डार्लिंग, अब तुम्हें चोदने और चुदवाने में कोई दिक्कत नहीं है. समाज में तुम मेरी ताई हो और घर के अन्दर डार्लिंग हो.
वे हंस दीं.
मैंने ताई के बाजू में लेटकर उनको मोबाइल पर पोर्न वीडियो दिखाया.
वे चुदाई की वीडियो देख कर गर्मा गईं.
इधर मैं आपको थोड़ा ताई के बारे में बता दूँ.
मेरी ताई का रंग एकदम गोरा है. उनकी चूचियां और गांड दोनों बड़ी हैं और गांव की आबोहवा व अच्छा खान पान के कारण वे चालीस साल से ज्यादा की नहीं लगती हैं.
फिर मैं ताई के ऊपर चढ़ गया और बोला- मेरी छिनाल निर्मला डार्लिंग, अपने समय में तो एक नंबर की रंडी रही होगी न?
अब वे बोलीं- हां, मुझे कम उम्र से ही चुदवाने का शौक चढ़ गया था तो मैं तभी से चुदवाती रही हूँ.
मैंने उनकी चूची को मसल कर कहा- डार्लिंग, तुम्हारे दूध तो बता रहे हैं कि तुमने काफी समय से लंड नहीं लिया है?
वे बोलीं- हां तुम्हारे ताऊ की दूसरी औरत बन कर आई थी तो तीन चार साल में ही उनके लंड की जान खत्म हो गई. फिर तुम्हारे ताऊ भी चले गए, तो समझो मैं पिछले 15 साल से चुदी नहीं हूँ.
मैंने कहा- गुड … अब से आप भूखी नहीं रहोगी!
फिर मैंने अपनी निर्मला डार्लिंग की मोटी-मोटी चूचियों को दबाना चालू कर दिया और एक को अपने मुँह से चूसने लगा.
वे मस्ती से चूचियां चुसवा रही थीं और आह आह कर रही थीं.
मुझे भी उनके दूध दबाने और चूसने में बड़ा मजा आ रहा था.
मैंने दोनों चूचियों को आटे की तरह गूँथा.
तब ताई बोलीं- तुम्हारे होंठ मुझे चूसना है.
मैंने कहा- आ जाओ!
अब ताई ने मेरे दोनों गालों को पकड़ कर मेरा मुँह अपने मुँह के करीब लिया और वे मेरे होंठों को चूसने लगीं.
कुछ ही देर में ताई ने मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया.
वे मेरे लौड़े को देख कर खुश हो गई थीं.
मैंने कहा- लो मुँह में ले लो!
वे मना करती हुई बोलीं- नहीं, मैं मुँह में नहीं ले सकती हूँ … मुझे अच्छा नहीं लगता है!
मैंने कुछ नहीं कहा और चुदाई की पोजीशन बना कर मैंने उनकी दोनों टांगें फैला दीं.
इससे उनकी चूत एकदम खुल गई थी.
मैंने पोज बनाया और अपना मोटा लंड उनकी चुत में सैट कर दिया और एक जोरदार झटके के साथ अन्दर कर दिया.
ताई की चीख निकल गई.
मैंने कहा- अरे वाह, मेरी डार्लिंग को दर्द भी होता है!
वे कराह कर बोलीं- साले धीरे कर न … कहा न 15 साल से लौड़े का स्वाद नहीं लिया!
मैं हंस दिया और कहा- आपने कभी दादा जी का चूसा भी नहीं!
वे बोलीं- कहा न कि मुझे चूसना अच्छा नहीं लगता है … और तुम मुझे आराम-आराम से पेलो!
फिर मैं धीरे-धीरे अपनी निर्मला डार्लिंग को पेलने लगा.
इससे ताई को भी मजा आने लगा.
कुछ देर बाद ताई बोलीं- कितने सालों के बाद चुद रही हूँ. सच में मुझे भी बड़ा मजा आ रहा है.
कुछ देर बाद मैंने ताई को कुतिया पोजीशन में किया. पीछे से उनके चूत में अपना लंड डालकर उन्हें चोदने लगा.
ताई भी मीठी आहें भरने लगीं और बोलने लगीं- और जोर से चोद इस रंडी को … आह अपनी इस रंडी की चूत को फाड़ दे साले!
मैं भी जोर-जोर से पेलने लगा.
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड चूत से निकाल कर गांड में सैट किया और गांड में लंड पेलने लगा.
ताई चीखने लगीं.
फिर धीरे-धीरे मैंने अपना पूरा लंड उनकी गांड में जड़ तक उतार दिया और मस्ती से अपनी निर्मला डार्लिंग की गांड को चोदने लगा.
मेरी डार्लिंग चीखें ही निकाली जा रही थीं.
चुदती हुई ताई बोलीं- मुझे बीस साल से ऊपर हो गया, जवानी में अपनी गांड में लंड लिया था. शादी के बाद तो तेरे दादा जी कभी पीछे की ली ही नहीं. इसी लिए तो बहुत कसी हुई गांड मिली तुझे चोदने के लिए!
अब मैं अपना पूरा लंड गांड में डाल कर गांड बजाने लगा.
फिर कुछ मिनट गांड मारने के बाद मैंने अपना पानी उनकी गांड में ही छोड़ दिया और मैं थककर ताई के ऊपर ही सो गया.
गांड मरवाने से ताई की हालत भी बहुत खराब हो गई थी.
कुछ देर बाद मैंने ताई को अपने ऊपर ले लिया.
ताई बोलीं- आज तुझसे चुदवाने में बहुत मजा आया.
मैंने कहा- मुझसे जितनी भी चुदी हैं न, वे सब यही कहती हैं!
ताई हंस कर बोलीं- कितनी चोद चुका?
मैंने कहा- अब तक सोलह की ले चुका था आप सत्रहवीं हो!
हम दोनों में इसी तरह की मस्ती होती रही.
फिर हम दोनों कपड़े पहन कर बाहर आ गए.
कुछ देर बातें करने के बाद मैं अपने घर आ गया.
अगले दिन मैं ताई के घर उस टाइम नहीं गया.
शाम को ताई मेरे घर आईं.
जब मैंने ताई को आते देखा तो रूम में चला गया.
ताई ने सरिता चाची से बात की और मेरे रूम में आ गईं.
जैसे ही रूम में आईं तो न आने का कारण पूछने लगीं.
मैंने उन्हें झटके से पकड़ कर अपने बेड पर गिरा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया.
ताई बोलीं- ये क्या कर रहे हो? सरिता आ जाएगी!
मैं बोला- मैं वही कर रहा हूँ, जो आप मुझसे करवाने आई हो!
वे हंस दीं और बोलीं- करवाना तो है लेकिन मेरे घर चलो न!
मैं बोला- घबराओ मत निर्मला डार्लिंग, सरिता भी अपनी डार्लिंग ही है.
फिर मैंने उन्हें सब बता दिया कि सरिता चाची भी मेरे लंड के नीचे से निकल चुकी हैं.
घर पर उस समय मैं, सरिता चाची और उनके छोटे बच्चे ही थे.
मैंने आवाज लगाई- सरिता डार्लिंग, इधर आओ!
ताई बोलीं- साले, आज तू मुझे रंडी साबित करके रहेगा!
मैंने उनसे कहा- यहां केवल अपनी सरिता डार्लिंग की लेने आता हूँ और कल मैंने उन्हें आपके बारे में सब बता दिया है.
मैंने ताई की चुदाई के बारे में सरिता चाची को पहले ही बता दिया था.
अब मैं अपनी निर्मला डार्लिंग को किस करने लगा.
तभी चाची रूम में आईं. मैंने चाची के होंठों को चूसने लगा.
फिर मैं बोला- सरिता डार्लिंग, इस छिनाल को नंगी करो.
यह सुनते ही सरिता डार्लिंग ने ताई को पूरी नंगी कर दिया.
हम दोनों मिलकर ताई की चूचियों को दबाने लगे. फिर मैं भी नंगा हो गया. मैंने चाची को भी नंगी कर दिया.
चाची अपनी चूत को ताई के मुँह पर ले जाकर चटवाने लगीं.
ताई भी अपनी जीभ से चाटने लगीं.
फिर चाची को ताई ने अपने नीचे सुलाकर चाची के होंठों का रसपान करने लगीं.
तब ताई बोलीं- मेरी बहुत इच्छा थी कि किसी औरत के साथ उसके जिस्म के साथ खेलूँ और उसे भी अपने साथ खिलवाऊं!
मैंने कहा- आज अपनी कामना पूरी कर लो डार्लिंग … मेरे पास इसका पूरा इंतजाम है.
निर्मला ताई मुझे देखने लगीं कि मेरे पास क्या इंतजाम है!
मैंने अपने बैग से प्लास्टिक वाला लंड निकाला, जो कमर में बांधकर चोदा जाता है.
उसकी लंबाई आठ इंच थी.
मैंने उसे ताई की कमर में बांध दिया.
फिर मैंने जोर से ताई के गालों को दाँतों से काटा और कहा- निर्मला डार्लिंग, आज जम कर पेलो अपनी इस देवरानी को!
ताई ने सरिता चाची की टांगें चौड़ी कर दीं और उनकी चूत में लंड डाल दिया.
वे अपनी देवरानी की चुत को पेलने लगीं.
ताई की इस चुदाई से सरिता चाची की हालत खराब हो गई थी और वे जोर-जोर से चीख रही थीं.
फिर मैंने भी अपना लंड सरिता डार्लिंग के मुँह में डाल दिया.
ताई ने लगभग तीस मिनट तक सरिता की चूत को चोदा.
मैंने अपना लंड सरिता के मुँह से निकाल कर ताई को चुदने के लिए इशारा किया.
फिर ताई की कमर से प्लास्टिक का लंड निकाल कर मैंने सरिता चाची की कमर में बांध दिया.
अब मैं और ताई सरिता चाची की एक-एक चूची पकड़ कर पीने लगे.
उस वक्त सरिता चाची के बच्चे छोटे थे और वे अभी भी दुधारू थीं.
दूध पीने के बाद हमने निर्मला डार्लिंग को लिटाया और मैंने ताई की टांगें चौड़ी करके अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया.
वे आह करके लौड़े को खा गईं.
मैं ताई को पेलने लगा.
उधर सरिता चाची, ताई की चूचियों को जोर-जोर से मसल रही थीं.
कुछ समय पेलने के बाद मैंने अपना लंड ताई की गांड में डालकर गांड मारना शुरू कर दिया.
फिर मैंने ताई को अपने ऊपर ले लिया, उनकी टांगें फैलाईं और सरिता को इशारा किया.
सरिता चाची ने मेरे लंड को पकड़ कर ताई की गांड में सैट किया और मैंने एक जोरदार धक्का लगाकर अपना पूरा लंड ताई की गांड में डाल दिया.
फिर सरिता ने भी अपनी कमर से बंधे लंड को ताई की चूत में डाल दिया और ताई को पेलने लगीं.
अब ताई की सैंडविच चुदाई होने लगी थी.
जब सरिता चाची, ताई को पेल रही थीं, तब उनकी दूध से भरी चूचियां हिल रही थीं, जो देखने में और भी मजेदार लग रही थीं.
उधर दोनों छेदों में लंड चलवाने से ताई की हालत खराब थी और वे बहुत जोर जोर से चीख रही थीं.
ताई की आवाजें सुनकर सरिता डार्लिंग ने ताई के गाल पर एक जोरदार तमाचा मारा और बोली- चुप रह रंडी और पेलने दे मुझे!
ताई चीखे ही जा रही थीं.
सरिता चाची ने पूरा लंड अन्दर डाल ही दिया और तेज तेज चुदाई करने लगीं.
फिर सरिता चाची ने अपना प्लास्टिक का लंड ताई की चूत से बाहर निकाल लिया.
मैंने ताई को कुतिया बना लिया और उनकी गांड मारने लगा.
फिर मैंने गांड में ही अपना पानी छोड़ दिया.
थककर हम तीनों लोग बेड पर सो गए.
कुछ मिनट बाद ताई सरिता चाची के ऊपर सोकर उनके होंठों को चूसने लगीं.
कुछ देर चूसने के बाद ताई अपने कपड़े पहन कर जाने लगीं, तब मैं बोला- ताई, जब मन करे आ जाना, सरिता चाची के पास … अब तो तुम दोनों आपस में भी मजा ले लोगी!
ये सुनकर ताई हंस दीं और बोलीं- हां अब तो दिन में एक बार जरूर आऊंगी.
फिर ताई मेरे और सरिता चाची के होंठों को एक बार फिर से चूमकर हॉट फॅमिली Xxx करके अपने घर चली गईं.
उनके जाने के बाद मैंने एक बार फिर सरिता चाची के होंठों को चूसना शुरू किया और अपना लंड सरिता चाची की चूत में डालकर पेलने लगा.
मैं सरिता चाची को चोदते हुए उनसे बोला- चाची, मेरा एक दोस्त तुम्हें पेलना चाहता है. पेलवा लोगी न!
सरिता चाची बोलीं- बाद में बताऊंगी. तुम अभी मुझे हचक कर चोदो!
मेरा लंड चाची की चूत की गहराइयों को नाप रहा था.
फिर मैंने अपना पानी उनकी चूत में ही छोड़ दिया.
चाची बोलीं- अब बता किसका लंड लेने की कह रहा था!
मैं हंस दिया.
बाद में मैं अपने दोस्त को लेकर आया और चाची के साथ चुदाई का मजा लिया.
तो दोस्तो, कैसी लगी ये हॉट फॅमिली Xxx कहानी?
जरूर बताइएगा.
धन्यवाद.
लेखक की पिछली कहानी थी: दीदी और माँ के साथ चुदाई का खेल
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