ये चूत मांगे सेक्स- 3
हॉट गर्ल्स नीड सेक्स स्टोरी में लड़की को जब पति से लंड का पूरा सुख नहीं मिला तो उसने यह आनन्द बाहर तलाशना शुरू किया.
कहानी का दूसरा भाग: गोवा में फुल न्यूड लड़कियों की मसाज़
अब आगे हॉट गर्ल्स नीड सेक्स स्टोरी:
लंच लेकर दोनों उदयपुर लेक की ओर चल दिए।
बहुत खूबसूरत समा था।
चूँकि शादियों का सीजन था तो हर ओर नव विवाहित जोड़े एक दूसरे में खोए घूम रहे थे।
रूपाली को भी अपने पुराने दिन याद आ गए।
उसने विनय को छेड़ते हुए कहा, “यार तुम्हारा मन नहीं करता रीना के पास जाने का? मैं तुम्हारी जगह होती तो नौकरी छोड़ देती।”
विनय हंस दिया, बोला, “कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। रीना को अपनी शादी से नहीं बल्कि अपने कैरियर से प्यार है। मां-पिताजी की वजह से सतना रुकना तो केवल एक बहाना है। मुझे बहुत बुरा लगता है, पर मैंने भी ऐसी जिंदगी को अपनी नियति मान लिया है। और फिर सर और आप जैसे दोस्त मिलते कहां हैं।”
उसके मुंह से आप सुनते ही रूपाली ने एक धौल लगाया उसके तो हंसते हुए विनय बोला, “सॉरी रमोला!”
रूपाली उससे लिपटते हुए झूल सी गई उसके ऊपर।
अब दोनों एक दूसरे के हाथ में हाथ लिए घूम रहे थे।
विनय रूपाली को भी अच्छा दोस्त मानता था और उससे अभिजीत ने कह रखा था कि रूपाली मेरी वजह से बहुत अपसेट रहती है तो हर तरीके से उसे खुश रखना।
रूपाली ने उससे कह ही दिया, “अभिजीत तो अब केवल व्यापार के लिए जीता है, मेरे लिए तो उस पर समय ही नहीं। मेरी भावनाओं को भी वो नहीं समझता।”
विनय बोला, “भगवान हर जोड़ी इसी तरह बनाता है। मेरी मां बार-बार रीना से कहती हैं कि वो मेरे पास हफ्ते-दस दिन रुक जाए, पर उसे अपने कैरियर की इतनी सनक है कि वो काम छोड़ती ही नहीं। मुझे भी खराब लगता है, पर अब मैंने कहना ही छोड़ दिया। सोच लिया कि शायद यही मेरे भाग्य में है।”
रूपाली ने उसका हाथ कस के पकड़ लिया और बोली, “कोई बात नहीं, सब ठीक हो जाएगा। हम दोनों की कहानी एक सी है।”
रूपाली एक आइसक्रीम वेंडर पर रुकी और आइसक्रीम ली।
विनय बोला, “मेरा मन नहीं है।”
रूपाली ने चलते-चलते अपनी स्टिक से ही उसे भी खिला दी।
ऐसा पहली बार हो रहा था विनय के साथ।
पर उसे भी रूपाली का साथ बहुत अच्छा लग रहा था।
इस समय रूपाली उसकी दोस्त थी, एमडी नहीं।
लेक में बोटिंग करके और डिनर लेकर देर रात तक दोनों होटल पहुंचे।
रूपाली ने विनय से कहा, “चेंज करके मेरे रूम में आ जाना; ड्रिंक लेंगे।”
विनय ने अभिजीत और रूपाली के साथ कभी एक-आध बार ड्रिंक ली थीं, पर वो बात अलग थी।
आज जब रूपाली अकेली थी तो उसे कुछ अटपटा लगा।
रूपाली समझ गई, उसने हंसते हुए कहा, “इट्स योर एमडीज़ ऑर्डर!”
कहकर वो खिलखिलाकर हंस दी, बोली, “चिल यार! अभी न तुम्हें नींद आएगी, न मुझे। और कल सुबह उठने की कोई जल्दी भी तो नहीं है।”
रूम में जाकर रूपाली ने शावर लिया और हल्का सा मेकअप करके शॉर्ट्स और टॉप पहन ली।
उसका जिस्म महक रहा था।
रूम में उसने हल्का सा म्यूजिक लगा लिया और लाइट धीमी कर लीं।
तभी उसका मोबाइल बजा।
अभिजीत था।
थोड़ी देर बात करके रूपाली ने उसे कह दिया कि वो अभी सोने जा रही है।
साथ ही विनय को फोन कर दिया कि वो उसका इंतजार कर रही है और यदि अभिजीत का फोन आए तो कह दे कि मैं तो सो गई।
थोड़ी देर में विनय आ गया।
उसने शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनी थीं।
वो कुछ असहज था।
रूपाली ने उसे हलके से हग किया और कहा, “यार मूड अच्छा रखो! आखिर उदयपुर आए हैं, कोई तीर्थ स्थान नहीं।”
विनय को बिठाते हुए रूपाली बोली, “अब तुमसे क्या छिपाना। तुम तो जानते ही हो कि कितना प्यार करती हूँ अभिजीत से, पर मुझे क्या मिला। व्यापार तो मेरे पिताजी का भी बहुत बड़ा है। पर मुझे कुछ और भी चाहिए था। अब अभिजीत वो भी मुझे नहीं दे रहा। अब मैंने मन बना लिया कि अपनी खुशी खुद ढूंढूंगी। और यही राय मैं तुमको भी दे रही हूँ।”
विनय मुस्कुरा दिया।
रूपाली ने उससे पेग बनाने को कहा और मेज पर रखे फ्राइड नमकीन, काजू-बादाम का पैकेट खोल लिया।
अब दोनों आपस में खुल गए थे।
विनय की दुखती रग को दबा दिया था रूपाली ने।
रूपाली ने विनय का हाथ पकड़कर उसे उठाते हुए कहा, “चलो डांस करते हैं!”
दोनों म्यूजिक पर थिरकने लगे।
रूपाली काफी नजदीक आ गई थी विनय के।
उसके जिस्म से आती मदमस्त खुशबू विनय को दीवाना कर रही थी।
उसके हाथ रूपाली के कंधे पर थे।
विनय को लगा कि कहीं वो दोनों बहक न जाएं तो उसने रूपाली से कहा, “चलो ड्रिंक खत्म कर लें।”
अब दोनों खुलकर बात कर रहे थे।
रूपाली ने गोवा की मसाज का जिक्र कर दिया पर अपनी बात छिपाते हुए प्रिया की बात बता दी।
विनय भी बहकते हुए बोला, “पिछले महीने जब मैं और सर थाईलैंड गए थे तो हम दोनों ने ही मसाज ली थी। हालांकि सर ने मना किया था किसी से भी जिक्र करने का। पर तुमसे पता नहीं क्यों बता दिया।”
रूपाली को अभिजीत की बेवफाई अच्छी नहीं लगी।
कम से कम उसने वो सब तो नहीं किया था जो प्रिया कर आई थी।
रूपाली ने विनय से पूछा, “तुम्हें रीना के साथ बेवफाई क्यों की?”
विनय बोला, “वो क्या कर रही है मेरे साथ? मेरी भी तो जिस्मानी जरूरतें हैं।”
रूपाली ने विनय को गले लगा लिया, बोली, “तुम्हारी कोई गलती नहीं है। पर मैंने तो अभिजीत को कभी मना नहीं किया।”
रात के 11 बज गए थे।
रूपाली तो सोफे पर अधलेटी हो गई थी।
विनय भी अपने रूम में जाने के लिए उठा।
रूपाली ने उसकी ओर हाथ बढ़ाया, “मुझे भी बेड पर पहुंचा दो।”
विनय ने उसका हाथ थामा तो रूपाली उसके कंधे से लिपटती-लटकती बेड तक पहुंची और फिर उसे खींचती हुई बेड पर जा गिरी।
उसने विनय को ताबड़-तोड़ चूमना शुरू कर दिया।
विनय पहले तो सकपकाया पर जल्दी ही वो भी रूपाली का साथ देने लगा।
दोनों के जिस्म आपस में गुत्थम-गुत्था हो रहे थे।
विनय की हिम्मत आगे बढ़ने की नहीं हो रही थी और रूपाली को कोई डर था नहीं।
रूपाली ने ही पहल की और विनय की टी-शर्ट उतार दी।
वो उसके निप्पल्स को चूमने लगी।
बस इतना बहुत था विनय के लौंडे में आग लगाने को।
विनय ने भी रूपाली की टी-शर्ट उतार दी।
रूपाली ने नीचे कुछ नहीं पहना था, उसके मांसल कबूतर बाहर आ गए।
विनय ने उन्हें दबोच लिया।
रूपाली खुद अपने हाथ से पकड़कर मम्मे विनय के मुंह में ठूंसने लगी।
रूपाली कसमसाते हुए विनय से बोली, “लाइट बंद कर दो।”
विनय झटपट उठा और स्विच ऑफ करके आ गया।
कमरे में बहुत हल्की रोशनी थी।
अब बाकी रहे कपड़े भी फटाफट उतर गए और दो तड़पते सुलगते जिस्म एक होने को लिपट गए।
रूपाली ने जिस बेवफाई को आज तक बचा रखा था, वो आज करने का मन बना कर ही आई थी।
उसी की पहल में उसने हाथ नीचे किया और विनय का लंड पकड़ लिया और लगी सहलाने।
एक बार तो रूपाली के मुंह से कसमसाते हुए निकला भी, “विनय, क्या हम ये सही कर रहे हैं?”
विनय चुप रहा तो रूपाली खुद ही बोली, “मैंने बहुत सोचा, फिर यही सही है तय किया। हमें भी हक है अपनी खुशियां ढूंढने का। अब ज्यादा सोचो नहीं और मुझे प्यार करो।”
विनय ने हाथ नीचे किया तो रूपाली की मखमली रेशमी फांकों पर जा पहुंचाया।
रूपाली की चूत पानी बहा रही थी।
रूपाली फिर कसमसाई और विनय से खुशामद करती हुई बोली, “चूसो इसे!”
विनय नीचे हुआ।
रूपाली ने अपनी टांगें खोल दीं और अपने हाथों से अपनी फांकें चौड़ा दीं।
विनय ने बड़े आहिस्ता से उसकी फांकों को चाटा और फिर जीभ धीरे-धीरे अंदर घुसाई।
रूपाली मछली की तरह तड़प गई।
ये अहसास उसे आज बहुत दिनों बाद हो रहा था।
विनय की जीभ पूरी उसकी गुफा में अंदर पहुंच चुकी थी।
रूपाली मचल रही थी।
उसने अपने मम्मे अपने हाथों से दबा रखे थे।
वो उन्हें मसल रही थी।
रूपाली भी विनय का लंड चूसना चाह रही थी।
उसने आहें निकालते हुए विनय से कहा, “मुझे भी तुम्हारा चूसना है!”
विनय 69 हो गया।
रूपाली ने ढेर सारा थूक लंड पर लपेटा और ऊपर की चमड़ी को पीछे करते हुए लंड को मुंह में ले लिया और लगी लप-लप चूसने।
विनय को ऐसा लगने लगा कि वो रूपाली के मुंह में ही छूट जाएगा।
विनय ने रूपाली से अपने को छुड़ाया और फिर सीधे होकर रूपाली की टांगें चौड़ाईं।
अब रूपाली की मखमली चूत उसके सामने थी।
थूक से सराबोर।
उसने रूपाली की टांगों को टखने से पकड़ा और ऊपर पंखे की ओर करके अपने लंड को उसकी चूत के पास ले गया।
रूपाली भी बेकरार थी उसका लंड अंदर लेने के लिए।
विनय ने कुछ पल अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर इधर-उधर मसला।
रूपाली की आहें निकल रही थीं।
वो तड़पती हुई बोली, “अब मत तरसाओ! करो अंदर। पर करना धीरे-धीरे। अब मुझे आदत खत्म हो गई है।”
विनय ने अब देर न करते हुए अपने लंड को उसकी गुफा में घुसा दिया।
ज़रा सा इशारा पाते ही, लंड सीधा दरक गया रूपाली की चूत में।
अब विनय लगा धक्के लगाने।
रूपाली भी उचक-उचक कर उसका साथ दे रही थी और उसे उकसा रही थी।
विनय ने अब अपने हाथ रूपाली के मम्मों पर टिका लिए।
वो उन्हें मसलता हुआ धक्के लगा रहा था।
रूपाली तो अब गाली-गलौच पर उतर आई थी।
वो उसे देसी भाषा में उकसा रही थी, “आज मेरी गर्मी निकाल दो! फाड़ दो मेरी चूत को! देखूं तुम्हारी लंड में कितना दम है!”
रूपाली कसमसा रही थी ऊपर आने के लिए।
पर विनय से उसे कस के जकड़ा हुआ था अपने नीचे।
तभी अचानक रूपाली को होश आया कि विनय ने कंडोम तो लगाया ही नहीं है।
बिना कंडोम के तो वो अभिजीत को भी नहीं करने देती थी।
रूपाली ने पूरा दम लगाकर विनय को अपने ऊपर से हटाया।
विनय कुछ समझ पाता इससे पहले उसके लंड ने उसका साथ छोड़ दिया।
उसका गाढ़ा ढेर सारा वीर्य रूपाली के पेट और मम्मों पर गिर गया।
उसने हैरानी से पूछा, “ये क्या किया?”
रूपाली बोली, “बिना प्रोटेक्शन के कर रहे थे हम लोग। कुछ गड़बड़ हो जाती तो…”
विनय का मूड खराब हो गया, बोला, “यार सारा मजा खराब कर दिया। सुबह दवाई ले लेतीं।”
रूपाली ने उसे चूमते हुए कहा, “कोई बात नहीं। अभी खड़ा कर देती हूँ इसे।”
रूपाली ने पास रखे टॉवेल से पहले उसके लंड को पोंछा।
फिर इंटरकॉम पर कॉफी शॉप में दो कॉफी का ऑर्डर दिया।
विनय चौंका, “इस समय तुमने दो कॉफी मंगाई हैं? मैं तुम्हारे कमरे में हूँ।”
रूपाली हंसी, “कौन सा अभिजीत कॉफी लेकर आएगा? जब वेटर आए, तुम वॉशरूम में चले जाना।”
अब दोनों वॉशरूम में आ गए और शावर लेने लगे।
दोनों चिपटे हुए थे।
अब विनय का मूड ठीक हो गया था।
नहाते-नहाते रूपाली ने दो बार उसके लंड को चूसा।
तभी डोर बेल बजी। रूपाली ने बाथरोब लपेटा और डोर खोल कर वेटर से कॉफी ली और फिर विनय को बुलाया।
विनय भी टॉवेल लपेट कर आया।
क्योंकि गाउन तो एक ही था वॉशरूम में।
रूपाली ने कॉफी विनय को दी और अपना गाउन उतारकर नंगी ही उसकी गोदी में जा बैठी।
अब कोई शर्म तो बची नहीं थी।
कॉफी की चुस्कियां लेते-लेते रूपाली ने विनय से कहा, “मुझे मालूम है कि तुम सोच रहे हो कि ये हमने क्या किया। हमने कुछ नहीं किया, केवल अपनी जिस्मानी आग ठंडी की। सोचो अगर हम ये काम बाजार में या किसी मसाज पार्लर में करते जैसा कि तुम दोनों ने थाईलैंड में किया, वो रिस्की था। उससे बीमारी भी आ सकती थी। मैं ये नहीं कहती कि हम ये सब रोज करेंगे। पर अगर हम दोनों को सूट किया तो जब मौका मिलेगा तब करेंगे। मैं तो तुम्हारे और अभिजीत के अलावा किसी और से कभी नहीं करूंगी।”
विनय ने उसे चिपटा लिया और उसके मम्मे चूमते हुए बोला, “मेरा भी वादा है कि तुम्हारे और रीना के अलावा किसी और से नहीं करूंगा। पर किसी भी हालत में इसकी भनक अभिजीत को नहीं पड़नी चाहिए वरना वो इतना पावरफुल है कि हम दोनों को मार देगा।”
रूपाली जोर से हंसी, बोली, “लगी शर्त! अगले हफ्ते वो ही तुम्हें मेरे पास भेजेगा। मुझे मालूम है कितना बड़ा मर्द है वो!”
अब विनय का लंड दोबारा तन चुका था।
कॉफी भी खत्म हो चुकी थी।
रूपाली ने अपने पर्स से कंडोम निकालकर विनय को दिया।
विनय ने आश्चर्यचकित होते हुए उसे लिया।
रूपाली ने बात संभाली, “अभिजीत के साथ जब भी बाहर जाती हूँ तो पर्स में तो ये हमेशा ही रहता है।”
अब होंठ से होंठ मिलाए दोनों बेड पर फिर लिपट गए।
विनय उसके मम्मों को बारी-बारी से चूस रहा था।
रूपाली ने उसके लंड को टटोला।
वो पूरी मजबूती से खड़ा था।
रूपाली ने पास रखी क्रीम से थोड़ी क्रीम अपनी फांकों पर लगाई और फिर विनय से कंडोम पहनने को कहा।
रूपाली ऊपर आना चाहती थी पर विनय को चुदाई की बारीकी मालूम थी।
उसने पहले सोचा कि पहले रूपाली को गर्म कर लूं।
इसलिए उसने कंडोम पहने लंड को रूपाली की चूत के आसपास मसलते हुए एक झटके में ही चूत में घुसेड़ा और पेलम-पेल शुरू की।
रूपाली तो जैसे भूखी बैठी थी, उसने अपने लंबे नाखून विनय की पीठ पर गड़ा दिए और झूल गई।
विनय की चुदाई एक्सप्रेस फुल स्पीड पर थी।
रूपाली को तो ऊपर आना था।
उसने विनय से कहा, “अब मैं ऊपर आती हूँ, तुम नीचे आ जाओ।”
विनय उसके ऊपर से हटा और फिर नीचे लेट गया।
रूपाली मटकती हुई उसके ऊपर चढ़ बैठी और फिर अपने हाथ से उसका लंड अपनी फांकों के बीच सेट किया और फिर नीचे होती गई।
लंड सीधा उसकी चूत में घुस गया।
रूपाली की आह निकली।
फिर उसने घुड़सवारी शुरू कर दी।
उसके मम्मे हवा में लहरा रहे थे।
विनय बीच-बीच में उन्हें लपक लेता।
रूपाली अब हांफ रही थी।
उसके मुंह से थूक निकल रहा था।
वो थक गई थी।
विनय ने उसे वापस नीचे पलटा और फिर उसकी चूत में लंड घुसा कर फाइनल शॉट लगाने लगा।
कुछ ही झटकों में विनय खलास हो गया।
रूपाली ने मुस्कुराते हुए उसका कंडोम उतारा और डस्टबिन में डाल दिया।
दोनों ऐसे ही बिना कपड़ों के लिपट कर सो गए।
सुबह जल्दी ही विनय उठा और कपड़े पहन कर अपने रूम में चला गया।
दिन में उन लोगों ने अपने बाकी काम निपटाए।
काम पूरा हो चुका था।
फ्लाइट अगले दिन सुबह की थी।
रात को रूपाली ने पहले तो कोई प्रोग्राम बनाया नहीं।
हालांकि दोनों बहुत सहज थे।
डिनर के बाद विनय ने रूपाली से कहा, “चलो कॉफी शॉप में बैठते हैं।”
रूपाली मुस्कुराई, “नहीं मैं तो थक गई हूँ। नहाकर सोऊंगी।”
विनय का लंड तो उफान मार रहा था।
पर उसकी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो रूपाली से कह सकता कि मेरा मन सेक्स का है।
वो भी मन मारकर अपने रूम में चला गया।
तभी रूपाली का फोन आया।
वो जोर-जोर से हंस रही थी। बोली, “जब मन था तो कहा क्यों नहीं? कैसा बच्चों जैसा मुंह फुला लिया। अब आ जाओ! पहले साथ-साथ नहाएंगे। फिर कॉफी पियेंगे। और फिर… हाँ, अपने कपड़े और बाथरूम गाउन साथ लेते आना।”
विनय खिल उठा।
उसने अपना टॉवेल, बाथरोब और एक नाइट ड्रेस ली और रूपाली के रूम में पहुंच गया।
रूपाली तो कपड़े उतार चुकी थी।
उसने केवल टॉवेल लपेटा हुआ था।
विनय के रूम में आते ही उसने मुस्कुराते उसे हग किया और बोली, “चलो पहले शावर लेते हैं।”
विनय ने फटाफट कपड़े उतारे और दोनों शावर के नीचे खड़े हो गए।
दोनों के जिस्म आपस में लिपटे हुए थे।
रूपाली को आज वो ही तड़प महसूस हो रही थी जैसी उसने और अभिजीत ने यूरोप से वापस आती रात को होटल में महसूस की थी।
रूपाली आज की रात के हर पल को जीना चाहती थी।
शावर लेकर दोनों ने बाथरोब को लपेटा और बाहर आ गए कॉफी पीने।
रूपाली के कहने पर विनय ने सिगरेट भी जला दी।
आज रूपाली बहुत शांत थी।
उसे वो खुशी मिल गई थी, जिसे पाने के लिए वो तरस रही थी।
उसने बहुत शांत होकर विनय से कहा, “देखो मुझे गलत मत समझना। मैं अभी भी अभिजीत से बहुत प्यार करती हूँ। पर मेरी भी जिस्मानी जरूरतें थीं। अगर वो तुमसे पूरी नहीं करती तो मुझे ये अफसोस होता कि मैंने गोवा में क्यों मौका छोड़ दिया। अब मैं शांत हूँ। तुम्हारे साथ मुझे बहुत अच्छा लगा। जब भी हमें मौका मिलेगा और हम दोनों चाहेंगे, तब ये फिर हो सकेगा। पर अब सेक्स के लिए वो तड़प नहीं होगी कि हम किसी स्तर तक भी गिर जाएं। मैं तो कहती हूँ कि ये सामाजिक व्यवस्था बहुत अच्छी है, बजाय इसके कि हम कोठे पर या मसाज पार्लर में अपनी जिस्मानी जरूरत पूरी करें।”
कहते-कहते रूपाली विनय से लिपट गई और जोर-जोर से रोने लगी।
विनय ने उसे सीने से लगाया और पुचकारा और चूमा।
रूपाली उससे ये कहते और जोर से लिपट गई, “मुझे आज रात भर इतना प्यार दो कि फिर मुझे कभी प्यार के लिए तरसना न पड़े!”
विनय ने उसे गोदी में उठाया।
उसका बाथरोब एक तरफ जा पड़ा था।
रूपाली ने उसके होंठों से अपने होंठ मिला रखे थे।
विनय ने आहिस्ता से रूपाली को बेड पर लिटाया और खुद नीचे खड़ा रहा।
रूपाली उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।
हल्की नीली रोशनी में उसका नग्न जिस्म दमक रहा था।
विनय ने उसकी टांगें पकड़ कर उसे नीचे की ओर खींचा और फिर उसकी टांगों के बीच अपनी जीभ घुसा दी।
रूपाली की चूत महक रही थी।
आज रूपाली ने उसे डियो से महका रखा था।
विनय पूरी जीभ अंदर घुसा कर उसकी चूत चूस रहा था।
उसका एक हाथ ऊपर होकर उसके मम्मे मसल रहा था।
बल्कि खुद रूपाली अपने मम्मे मसल रही थी।
रूपाली की आहें निकलने लगीं।
उसकी चूत अब लंड चाहती थी।
उसने आहें निकालते हुए विनय से कहा, “अब मत तड़पाओ और अंदर आ जाओ!”
विनय ने नीचे खड़े-खड़े ही उसकी टांगें चौड़ाते हुए अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया।
हाँ, उसने लंड पर कंडोम चढ़ा लिया था।
रूपाली ने कहा, “ऊपर क्यों नहीं आ रहे?”
विनय मुस्कुराया और फिर धीरे से रूपाली की टांगें चौड़ाते हुए ऊपर कर दीं।
अब उसके सामने रूपाली की चमकती-दमकती चूत थी।
विनय ने आहिस्ता से तेज करते हुए एक ही झटके में अपना लंड घुसेड़ दिया उसकी चूत में।
रूपाली की आह निकल गई।
अब विनय ने धीरे-धीरे पेल लगाते हुए फिर फुल स्पीड पकड़ ली।
नीचे खड़े होने से उसके घुटनों को बेड की सपोर्ट मिल रही थी, जिस कारण से उसके धक्के दमदार हो रहे थे।
हर धक्के पर रूपाली की आह निकलती।
ऐसे धक्के वो भी पहली बार खा रही थी।
उसे मजा आ रहा था।
उसने विनय को उकसाया, “यार मजा आ गया! थोड़ी स्पीड और बढ़ाओ!”
विनय ने और जोश से चुदाई को स्पीड दी।
अब रुकने की स्थिति नहीं थी।
धक्के दमदार थे तो विनय भी जल्दी ही पस्त हो गया।
उसका होने को था।
उसने आगे झुकते हुए अपना माल खाली कर दिया और रूपाली के मम्मे मुंह में लेकर चूसते हुए उसी के ऊपर निढाल सा हो गया।
रूपाली ने उसे चिपटा लिया अपने से।
अब दोनों बेड पर आ गए थे।
रूपाली ने उसे चूमते हुए कहा, “आज की रात मेरी जिंदगी की बेस्ट रातों से एक रहेगी!”
अगले दिन दोनों फ्लाइट से वापस अहमदाबाद आ गए।
सबसे पहला काम जो रूपाली ने किया वो था प्रिया को फोन।
पर उसने बस इतना ही कहा, “यार मैंने बहुत सोचा, तू सही है। जो सीधी तरह से नहीं मिलता उसके लिए टेढ़ी उंगली करनी ठीक है।”
प्रिया बोली, “ढूंढूं तेरे लिए कोई?”
रूपाली हंसी, “तू है न मेरे लिए। बता कब आ रही है?”
तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी कहानी ‘ये चूत मांगे सेक्स’?
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