फैमिली सेक्सपूर्ण

जिन्दगी में पहली चूत का मजा मिला मामा की बेटी से- 1

0 बार पढ़ी गई14 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

इंडियन कजिन सेक्स स्टोरी में मेरे मामा की बेटी कि जॉब हमारे शहर में लगी तो वो हमारे घर में रहने लगी. एक रात को वो बहुत लेट आई और नशे में थी. मैंने उसे छोड़ने उसके कमरे में गया.

दोस्तो, आप लोगों का इतना प्यार मिलता है कि न चाहते हुए भी आप लोगों के खुशी के लिए कहानी लिखना पड़ता ही है.

बहुत सी लड़कियों की भी डिमांड आती है, तो मन भी कामुक हो जाता है.

आज पुनः आप लोगों की इच्छानुसार एक बार फिर से सेक्स कहानी लिखने बैठा हूँ.

मेरी सभी पिछली कहानियों की तरह यह कहानी भी काल्पनिक है.

इस इंडियन कजिन सेक्स स्टोरी का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है.

यह कहानी केवल और केवल आप के मनोरंजन के लिए ही लिख रहा हूँ.

तो चलो मेरे प्यारे पाठको, आपके मनोरंजन के लिए यह सेक्स कहानी, मेरी जिंदगी की पहली चूत चटाई और चुदाई की कहानी मेरी चुदासी बहन के साथ की है.

अगर आपको कहानी पसंद आए तो अपने मेल के माध्यम से मुझे अपना प्यार देना न भूलें.

मेरा नाम रोहित है और यह कहानी मेरी प्यारी ममेरी बहन निधि की है.

निधि हमारे घर में इसलिए आयी है कि उसकी जॉब एक अच्छी कम्पनी में एचआर के पोस्ट पर लग गई थी.

उसके आने से हम लोग बहुत खुश थे.

इसी बहाने मेरे मामा-मामी भी हमारे यहां आने जाने लगे थे.

मेरी बहन को जॉब करते हुए अब साल भर से ज्यादा हो गया था.

पहले वह एकदम सिम्पल सी दिखती थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके रूप रंग और चाल ढाल में थोड़ा परिवर्तन आने लगा था.

वह घर भी देरी से आने लगी थी, ओवर टाईम का बोलकर एक-दो दिन तो आती नहीं थी.

चूंकि मैं भी खुद एक जवान लड़का हूँ और जवानी की कशिश को समझता हूँ तो मेरी नजर को उसका रात को घर न आना थोड़ा अजीब सा लगा.

लेकिन मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था और घर में भी किसी को ऐसा कुछ नहीं लगा तो सब कुछ ऐसे ही चलता रहा.

निधि से सभी बहुत खुश थे.

पर पता नहीं क्यों मेरा नजरिया निधि के प्रति बदल गया था.

अब उसमें मुझे एक खूबसूरत लड़की नजर आने लगी थी, जिसके पहनने ओढ़ने के सलीके उसे और भी खूबसूरत बना रहे थे.

मैं भी उसके साथ रहने का एक भी मौका नहीं गंवाता था और वह मुझसे जैसे ही कोई काम कहती, मैं बिना किसी विरोध के कर देता था.

मुझे उसका साथ बहुत अच्छा लगने लगा था.

एक रात जब वह 12 या 1 बजे के आसपास घर लौटी.

उसने डोर बेल बजायी.

मैंने दरवाजा खोला तो निधि सीधे मेरे ऊपर ही गिर पड़ी, क्योंकि वह काफी न.शे में थी.

उसके कदम लड़खड़ा रहे थे.

अच्छा हुआ उस समय मम्मी और पापा सो रहे थे.

मैंने झट से दरवाजा बंद किया और निधि को सहारा देते हुए उसके कमरे की तरफ ले गया.

‘भाई तुम कितने अच्छे हो कितना मेरा ख्याल रखते हो!’

उसकी जुबान लड़खड़ा रही थी.

मैंने उसका कमरा खोला और उसे उसके कमरे में छोड़कर जब वापिस आने लगा, तो उसके रूम से बाहर जाने के लिए दरवाजा खोलते समय अपनी आदत के अनुसार मैंने निधि को देखने के लिए गर्दन घुमायी.

उतनी ही देर में निधि लगभग पूरी नंगी हो चुकी थी.

इसी बीच उसने जल्दी से अपनी सफेद पैंटी भी उतार फेंकी और दौड़ती हुई बाथरूम में घुस गयी.

उसने बाथरूम का दरवाजा भी बंद नहीं किया.

वह वेस्टर्न टॉयलेट के पॉट पर अपने एक पैर को टिकाकर खड़ी हुई और अपने हाथ को शायद अपनी चूत पर ले गयी.

कुछ ही पल बाद ‘आह-आह’ की आवाज के साथ उसके हाथ भी बहुत तेज तेज चलते हुए दिख रहे थे.

‘आआह आह …’ की उसकी कामुक आवाज भी बहुत तेज होने लगी थी.

मैंने झट से उसके रूम का दरवाजा बंद किया ताकि उसकी ये तेज-तेज सेक्सी आवाज बाहर न चली जाए.

फिर मैं अपने सधे और दबे कदमों से निधि के करीब गया.

वह अभी भी अपनी चूत को तेज-तेज सहला रही थी और उसकी चूत से निकलती हुई मूत की धार टॉयलेट में सब जगह फैल चुकी थी.

वैसे तो मैं पॉर्न मूवी अक्सर देखता रहता था लेकिन आज मेरी आंखों के सामने बिल्कुल पॉर्न मूवी की तरह सीन चल रहा था.

न चाहते हुए भी मैं निधि के पीछे पहुंचा और उसकी कमर को अपनी बांहों में लेकर और दूसरे हाथ से चूची पकड़ते हुए मैंने कहा- दीदी, ये क्या कर रही हो?

निधि को मेरे होने के अहसास ने एकदम से चौंका दिया हो, ऐसा मुझे जरा भी न लगा.

वह मेरे अचानक से ऐसे पकड़ने और बोलने से चौंकी ही नहीं थी … बल्कि बहुत ही शांत भाव से बोली- भाई, पता नहीं मेरी चूत में बहुत खुजली और जलन हो रही है. ऐसा लग रहा है कि ये आग की भट्टी बनी जा रही है!

इतना कहते हुए उसने मेरे हाथ को अपनी चूत पर रख दिया और पुनः बोली- लो तुम ही देख लो भाई, इसकी आग को कैसे शांत करूँ, समझ में कुछ नहीं आ रहा है.

किसी लड़की की चूत पर मेरे हाथ का होना मेरी जिंदगी का यह पहला अवसर था.

निधि की बात भी ठीक थी, उसकी चूत को छूने से ही ऐसा लग रहा था कि जैसे गर्म तवा पर हाथ रख दिया हो.

वह मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ती हुई बोली- भाई, तू ही मेरी चूत को कस कसकर रगड़ दे तो शायद कुछ मुझे राहत मिले.

उसके बाल बिखर चुके थे.

मैंने निधि को कसकर अपने से जकड़ा और उसकी चूत को रगड़ने के साथ ही उसकी चूची को भी दबाने व मसलने लगा.

निधि गिड़गिड़ाने के अंदाज में लगभग रोती हुई बोली- आह भाई कुछ करो, नहीं तो मैं मर जाऊंगी.

मैंने उसी पल निधि को गोद में उठाया और उससे कहा- तू चिंता मत कर बहन, तेरे को कुछ नहीं होगा, मैं हूँ न!

यह कह कर मैंने उसे अपनी गोदी में उठाया और लाकर बेड पर लेटा दिया.

फिर तत्काल उसकी जांघों को पकड़ कर फैला दिया और उसकी चूत को चाटने लगा.

निधि की चूत गीली थी और पेशाब की गंध आ रही थी लेकिन चुत को चाटने में मजा भी खूब आ रहा था.

ये मेरी जिंदगी की पहली चूत चटाई थी.

निधि मेरे बालों को खींच रही थी और अब वह रंडी की भाषा बोलने लगी थी- साले भाई मादरचोद, चूत चाटने से खुजली नहीं मिट रही है मेरी … तू अपना लंड मेरी चूत में डाल और चुदाई करके इसकी खाज मिटा.

मैं तुरंत खड़ा हुआ, अपने सब कपड़े उतारे और अपना तना लंड लेकर निधि के मुँह के पास पहुंचा.

‘भोसड़ी के अपना लंड बाद में चुसवा लेना, पहले मेरी चूत की खुजली मिटा बहन के लौड़े!’

मैंने भी आव देखा न ताव और उसकी टांगों के बीच आकर अपना लंड उसकी चूत के अन्दर डालने लगा.

लेकिन यह क्या, जैसे ही उसकी चूत के मुहाने में मैंने अपना लंड सटाया, लंड पक से अन्दर घुसने को हुआ, पर मुझे ऐसा लगा कि किसी भट्टी के मुँह से मैंने अपने लौड़े को लगा दिया हो.

मैं झटक कर दूर हो गया.

‘क्या हुआ बहन के लौड़े?’

‘कुछ नहीं दीदी, तुम्हारी चूत बिल्कुल गर्म भट्टी की तरह सुलग रही है!’

‘तभी तो कह रही हूँ पहले मुझे चोद मादरचोद!’

पर यह मेरी जिंदगी का पहला अहसास था और मैं एक अनाड़ी की तरह ही था.

पॉर्न मूवी देखना एक अलग बात थी और सामने से चूत को चोदना दूसरी बात थी.

मैंने इससे पहले कभी भी चूत को चोदना तो दूर, देखी भी नहीं थी.

तभी निधि ने मेरे लंड को पकड़ा और मुझसे उसके ऊपर झुकने के जैसे दबाती हुई बोली- पेल न बहन के लंड!

उसने मेरे लंड को पकड़ कर चुत के मुहाने पर सैट किया और मुझे धक्का लगाने को बोली.

मैंने कमर को जर्क दिया तो इस बार हल्का सा धक्का लगाने से टोपा उसकी चूत की गुफा में कैद हो गया.

निधि एक बार आह करके वापस बोली- आह … चल अब अपने लंड को मेरे अन्दर धकेल!

मैंने उसके कहे अनुसार किया और अब मेरा लंड उसकी चूत में पूरी तरह कैद हो गया था.

मैं निधि के ऊपर लेट गया.

एक बार फिर से गाली बकती हुई दीदी बोली- भोसड़ी के, मेरे ऊपर सोने आया है कि मुझे चोदने आया है … चल अब अपने लंड को धीरे-धीरे अन्दर बाहर कर.

मैं वैसा ही करता जा रहा था, जैसा मेरी बहन निधि मुझसे करने को कह रही थी.

बस फिर क्या था, मुझे ऐसा लगा कि मैं एक्सपर्ट चोदू हो गया हूँ.

मेरी चोदने की गति अपने आप बढ़ती ही जा रही थी.

उधर निधि भी आह-आह, ओह-ओह करते हुए बोले जा रही थी- आह यार रोहित बस इसी तरह चोद मुझे … आह बहुत मजा आ रहा है. शाबास मेरे भाई, चोद और जोर से चोद.

मेरा जिस्म अकड़ रहा था.

ऐसा लग रहा था कि मेरे अन्दर से कुछ निकलने को बेताब है, पर निकल नहीं रहा था.

उस वक्त मेरा पूरा जिस्म मानो सुपर फास्ट एक्सप्रेस की तरह भाग रहा था.

उधर निधि भी चिल्ला रही थी- आह आह आई एम कमिंग आह फास्ट आह फक मी!

बस वह यही सब कहती हुई बिल्कुल शिथिल सी हो गयी थी.

तभी मुझे लगा कि कुछ तरल सा मेरे लंड को लग रहा है, पर मेरी स्पीड अभी भी कम नहीं हुई.

फिर अचानक से मेरे लंड से भी वही तरल सी मलाई बाहर आने लगी और मैं ढीला पड़ने लगा.

मेरे लंड से वह तरल सा पदार्थ निकल चुका था.

मैं हांफते हुए निधि के ऊपर गिर पड़ा और कुछ देर तेज तेज सांसों के चलने की आवाज के साथ लंड निधि की चूत से बाहर निकल चुका था.

मैं भी तुरंत ही निधि के ऊपर से हटकर उसके बगल में लेट गया.

कुछ देर बाद एक प्यार भरा चपत लगाती हुई निधि बोली- थैंक्यू भाई, तूने बहुत अच्छा किया, अब मुझे अच्छे से नींद आएगी!

यह कहती हुई उसने मेरी तरफ अपनी पीठ कर दी.

उसके गोल-गोल चूतड़ मेरी तरफ थे.

मैंने उन गोल-गोल चूतड़ पर हल्की चपत लगाते हुए और अपने कपड़े उठाते हुए कहा- कम से कम अपना कमरा अन्दर से बंद कर लो. अचानक मम्मी-पापा आ गए तो क्या कहेंगे?

वह अलसाई सी उठी और मेरे बाहर आने के बाद उसने अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया.

मैं भी नंगा ही दौड़कर अपने कमरे में आ गया और लेटे हुए अपने लंड को पकड़ कर अपनी बहन की चुदाई का चलचित्र वापस अपनी आंखों में देखने लगा.

फिर पता नहीं कब मुझे नींद आ गयी.

दूसरे दिन करीब 9 के बाद मेरी नींद खुली.

लंड पर नजर पड़ी तो साला तना हुआ था.

पर कभी-कभी पेशाब न करने के कारण भी लंड में तनाव हो जाता है, सो मैं चुपचाप उठा और बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गया.

तभी मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, पूरे 10 बज रहे थे.

मैं निधि के रूम की तरफ गया, रूम अन्दर से लॉक था.

मैंने खटखटाया.

तभी मम्मी की पीछे से आवाज आयी- क्या हुआ?

मैं सकपका गया, पर संयम धरते हुए बोला- दीदी से कुछ काम है.

‘ठीक है, ले उसका नाश्ता भी लेता जा.’

मैं नाश्ता लेकर दरवाजे को खटखटाने वाला ही था तभी निधि ने दरवाजा खोल दिया.

काली पैंट और सफेद शर्ट पर काली टाई, हल्का गुलाबी लिपस्टिक, आंखों में हल्का काजल लगाये क्या मस्त रांड लग रही थी मेरी बहन.

उसने जल्दी में मेरा हाथ पकड़ा, मेरे हाथ से ट्रे ली और अन्दर खींचते हुए मुझे अपने बेड पर लगभग पटक ही दिया.

फिर मेरे ऊपर चढ़ती हुई बोली- मेरी पैंटी और ब्रा कहां है?

‘मेरे पास है.’

‘तू उसका क्या करेगा?’

‘कुछ भी … वह अब मेरी निशानी है. पर बहुत ज्यादा तुम मस्त लग रही हो?’ मैंने निधि को अपनी तरफ खींचते हुए और उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए कहा.

‘मक्खन क्यों लगा रहे हो?’

‘मक्खन नहीं सच में तुम बहुत सेक्सी लग रही हो.’

‘आज से पहले तेरी नजर नहीं पड़ी थी मुझ पर!’

‘पड़ती थी, पर उस तरह से नहीं देखता था. मेरा एक काम कर दे.’

‘अब समझी … अच्छा जल्दी से बोल. ऑफिस के लिए लेट हो रही हूँ!’

उसने ब्रेड का एक कौर खाते हुए कहा.

‘बस वही, कल मैंने तेरी चूत की खाज मिटायी थी, आज तू मेरे लंड की मिटा दे.’

‘ओ-ओह, एक ही रात में बहुत बड़ा चोदू हो गया. चल अभी मैं लेट हो रही हूँ. रात में तेरी खुजली मिटा दूँगी!’

‘दीदी, खुजली अभी हो रही है, जैसे कल आप बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, वैसे मैं नहीं बर्दाश्त कर पा रहा हूँ!’

यह कहते हुए मैंने अपना लंड बाहर निकाला.

‘देख जिद न कर, ऑफिस को लेट हो रही हूँ. रात में तेरी खुजली मिटा दूँगी!’

‘प्लीज दीदी, अभी समय है … प्लीज.’

‘तू मानेगा नहीं.’ कहती हुई उसने अपनी पैंट खोलकर नीचे की और कमीज को पेट के ऊपर करके सामने लगी टेबल पर लेट गई.

अब उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी चूत पर घिसती हुई बोली- रोहित जानता है मैं तेरी बात क्यों मान रही हूँ!

‘क्यों दीदी?’

‘तेरा लंड लम्बा और मोटा है और लंबी चुदाई करता है.’

‘थैक्स दीदी.’

इसी बीच निधि ने अपनी पैंटी को उतार दी और लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ती हुए चूत के अन्दर डालने लगी.

उसने ऐसा कई बार किया और मुझे अच्छा लग रहा था.

तभी निधि बोली- रोहित मेरे भाई, जल्दी से अपनी दीदी को चोद दे … नहीं तो ऑफिस को देरी हो जाएगी और हां कल की तरह मेरी चूत के अन्दर अपना माल मत गिरा देना!

मैंने हल्का सा मुँह बनाते हुए कहा- क्या दीदी … कल सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ मुझे कुछ समझ में नहीं आया, नहीं तो तेरे मुँह के अन्दर ही गिरा देता.

‘हम्म … फिर किया क्यों नहीं?’

‘अरे यार उसी समय मेरा शरीर अकड़ने लगा और फिर अचानक से लंड ने अपना माल तुम्हारी चूत के अन्दर छोड़ दिया था.’

‘ठीक है … जल्दी जल्दी चोद साले.’

यह कहती हुई उसने मेरे लंड को एक बार फिर से अपनी चूत में घिसना चालू कर दिया.

वह गांड को आगे पीछे करती हुई बोली- आज जरा ध्यान रखियो, नहीं तो मैं गाभिन हो जाऊंगी!

‘तू चिंता मत कर दीदी, कल जो होना था हो गया. आज कुछ नहीं होगा!’

मैं तेज-तेज धक्के मारते हुए बोला.

तभी उसकी नजर घड़ी पर पड़ी और लगभग चीखती हुई बोली- रोहित और तेज-तेज चोद, ऑफिस के लिए लेट हो रही हूँ.

मेरी स्पीड और तेज हो गयी.

‘आह शाबास रोहित!’

‘आह दीदी आह ले ले आह दीदी!’

यह कहते हुए मैंने जल्दी से लंड को बाहर खींच लिया और निधि के मुँह के पास ले गया.

वह मुझे रोकती हुई बोली- मुँह में अभी नहीं! सारा मेकअप खराब हो जाएगा.

उसने लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ा और मुश्किल से 30 सेकेंड के बाद ही मेरे लंड का वीर्य निधि की चूत के ऊपर गिरने लगा.

मेरा जिस्म हल्का होने लगा.

तभी निधि की नजर घड़ी पर पड़ी.

‘ओह अब बहुत देर हो गयी है. अब तो लगता है मेरे पास नहाने का समय भी नहीं बचा है.

थोड़ा मुस्कुराती हुई और मेरे गालों पर चिकोटी काटते हुए बोली- आज मुझे तुम्हारे वीर्य के साथ ही ऑफिस जाना पड़ेगा!

दीदी ने अपनी पैंटी पहन ली और फिर जल्दी से अपने बाकी कपड़ों को सैट करने के बाद जल्दी से उसने नाश्ता किया.

एक बार फिर मेरी तरफ देखती हुई बोली- आज देर हो गयी, पर कोई बात नहीं, तुम्हें मजा आया न!

अब तक नाश्ता लगभग मुँह में ठूंस लिया था और वह हँसती हुई रूम का दरवाजा खोल कर बाहर निकल गयी.

मैं उसे देख रहा था, वह तेज कदमों से ऑफिस जाने लगी.

‘रूको दीदी मैं आपको छोड़ दे रहा हूँ!’

मैंने झटपट मोटरसाइकिल निकाली और दीदी को बैठा कर उसके ऑफिस की तरफ चल दिया.

दोस्तो, आपको रोहित की यह बहन की चुत चाटने व चोदने वाली इंडियन कजिन सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है, प्लीज जरूर बताएं.

अगले भाग में और ज्यादा मजा आने वाला है.

इंडियन कजिन सेक्स स्टोरी का अगला भाग: जिन्दगी में पहली चूत का मजा मिला मामा की बेटी से- 2

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