गे सेक्सपूर्ण

मेरी गांड की सील मैंने ही तोड़ी

0 बार पढ़ी गई9 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

मेरी गांड फट गयी जब मैंने अपनी गांड को मजा देने के लिए उसमें लकड़ी का हत्था घुसा लिया. मैं अनाड़ी था, मैंने तेल भी नहीं लगाया था. मैं परेशान हो गया था.

मेरा नाम यश, उम्र 22 साल है.

मैं जबलपुर एमपी का रहने वाला हूं.

मैं एक साधारण सा लड़का था, मुझे अकेले रहना पसंद था.

मैं पोर्न वीडियो देखता हूं.

एक दिन मैंने गे वीडियो देखा मेरे अंदर की लड़की जाग उठी.

मुझे गे पोर्न वीडियो देखकर यह समझ आया कि मैं गे हूँ.

किसी आदमी को देखूँ तो उसका लंड लेने का मन करने लगता.

मैं पागल हो गया था.

अपनी गांड में उंगली डालने लगा था और किसी तरह से खुद को ठंडा करने की कोशिश करता रहता था.

एक दिन घर के सब लोग बाहर गए थे.

मैंने सोचा, क्यों न कुछ करूँ?

मेरी हवस जागी.

मैं किचन में गया और कुछ लंड जैसा खोजने लगा.

मैंने तवे का हैंडल देखा … वह एकदम लंड जैसा था.

बस फिर क्या था, मैंने सोचा आज तो मज़ा ही आ जाएगा.

फिर मैं उस तवे के हैंडल को निकाल कर उस नकली लंड को लेकर अपने कमरे में आ गया.

मैंने कमरे के दरवाज़े बंद करके पोर्न वीडियो देखने लगा.

मैं नंगा होकर बिस्तर पर लेट गया.

पहले मैं हैंडल को लंड समझ कर चूसता रहा.

मेरी कामवासना और बढ़ गई थी.

फिर मैंने हैंडल को मेरी गांड के छेद पर रखा और हवस के मारे एक बार में पूरा डाल लिया.

मेरी गांड फट गई, दर्द के मारे मेरी जान निकल गई.

मैं चिल्ला पड़ा और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा.

मैं अपने आप से कहने लगा कि मैंने ये क्या कर दिया मादरचोद, गांड फट गई मेरी … साले किसी का लंड क्यों नहीं ले लिया.

मेरी गांड से खून भी निकल रहा था तो और ज्यादा रोना आ रहा था.

मेरी गांड सील टूट गई थी.

थोड़ी देर बाद मैंने सोचा कि अब जो हुआ सो हुआ, अब आगे ऐसा क्या करूँ जिससे मुझे इस संकट से निजात मिल जाए.

कुछ देर बाद मुझे याद आया कि अरे, हवस के मारे मैंने गांड में तेल ही नहीं लगाया था.

यह याद आते ही मानो ऐसा लगा कि कोई मस्त फार्मूला प्राप्त हो गया हो.

अब मैंने हैंडल पर तेल लगाया और अपनी गांड में भी.

फिर अपनी गांड में धीरे धीरे से हैंडल को अन्दर डाला.

इस बार पहले से कम दर्द हुआ था.

फिर मैं दर्द को सहते हुए धीरे-धीरे हैंडल को अन्दर-बाहर करने लगा.

दर्द हुआ, फिर मुझे मज़ा आने लगा.

मैं ज़ोर-ज़ोर से करने लगा.

मैंने लगभग 20 मिनट तक गांड में हैंडल को अन्दर-बाहर किया और लंड हिलाता हुआ झड़ गया.

मुझे चरम सुख की प्राप्ति हुई.

फिर दर्द दुबारा से हुआ तो गांड दबा कर सो गया.

जब मैं सोकर उठा, तो देखा कि रात हो गई थी.

मैं खड़ा हुआ तो गांड और कमर में दर्द हो रहा था.

मैं लंगड़ाते हुए गया और नहाया, खाना खाया और आकर वापस लेट गया.

पर मुझे नींद नहीं आ रही थी.

तभी मैंने अपना मोबाइल चलाना शुरू कर दिया.

मैंने फिर से पोर्न वेबसाइट्स खोल लीं और नई वीडियो देखने लगा.

मेरी हवस फिर जाग उठी.

मेरी गांड में बहुत दर्द था मगर मन नहीं मान रहा था.

मैंने सोचा, घर वाले सुबह आएंगे, एक बार फिर से कर लूँ.

इस बार मुझे कुछ नया करना था.

मैंने दीदी के कपड़े अल्मारी से निकाले.

उनकी ब्रा, पैंटी, सलवार सूट, मेकअप किट आदि निकाल कर मैं कमरे में आ गया.

पहले मैंने क्लीन शेव की, ब्रा-पैंटी पहनी, ब्लैक सलवार सूट पहना और मेकअप किया.

उसके बाद होंठों पर लाल लिपस्टिक लगाई तो मैं पूरी लड़की लग रहा था

पर मेरे बॉब्स छोटे लग रहे थे तो मैंने ब्रा के अन्दर दो बॉल लगा लिए.

अब एकदम मैं लड़की लग रहा था – मस्त आइटम गर्ल.

इसके बाद गांड में खुजली होने लगी तो मैंने फ्रिज से एक मोटी सी गाजर निकाली.

उस गाजर को हाथ से सहला कर मैं सोचने लगा कि अब इस गाजर से गांड चुदाई के मज़े लूँगा.

गाजर मस्त थी पूरी 7 इंच लंबी और मोटी थी.

मैंने पोर्न वीडियो चालू किया और गाजर को मुँह में लेने लगा.

‘आह आह.’

मुझे मस्ती चढ़ रही थी और लग रहा था कि सच में लंड ले रहा हूँ.

मैंने वीडियो देखते हुए ही अपने सारे कपड़े उतारे और अपनी ब्रा उतारकर फेंक दी.

मैं अपने बॉब्स दबाने लगा. मुझे मज़ा आ रहा था तो मैं और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.

मुझे आज चरम सुख मिल रहा था.

फिर मैंने अपनी पैंटी उतारी और गाजर उठाई. उसमें तेल लगाया और गांड के छेद पर रगड़ने लगा.

‘आह आह.’

गाजर की नोक गांड में घुसने लगी, बहुत मज़ा आ रहा था.

मैंने देर न करते हुए गाजर गांड के अन्दर डाल ली.

इस बार दर्द कम हुआ.

मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ से अपनी गांड मारने की रफ्तार बढ़ा दी.

‘आह आह ऊम्म आह.’ सिसकारी भरते हुए मैंने गाजर से गांड मारना तेज़ कर दी.

मुझे मीठा मीठा दर्द हो रहा था पर परम आनन्द की अनुभूति होने लगी थी. मुझे आज तक ऐसा आनन्द नहीं आया था.

लगातार 20 से 25 मिनट तक गांड रगड़ने के बाद मैं लौड़े को हलाने लगा और झड़ गया था.

अब मैं उठा और मुड़ कर मैंने आईने में अपनी गांड देखी तो वह सूजकर गुब्बारा हो गई थी.

दर्द भी हो रहा था और एक दो दिन और भी होता रहेगा.

मगर गांड का सुख इस सबकी कोई परवाह नहीं कर रहा था.

इसी अद्भुत सुख की चाहत में मैंने एक दिन में दो बार अकेले सेक्स कर लिया था.

अब मैं पेन किलर खाकर सो गया था.

दूसरे दिन सुबह उठा तो घर वाले वापस आ गए थे.

मैं जब घर से कॉलेज के लिए निकल रहा था, तब पापा ने पूछा- अरे यश, तुम लंगड़ा कर क्यों चल रहे हो?

अब पापा को कौन बताए कि कल ही गांड की सील टूटी है.

मैंने कहा- पापा, कल सीढ़ी से गिर गया था.

पापा ने कहा- चल बेटा, पंकज को दिखा दे.

पंकज डॉक्टर था, हमारे घर के बाजू में रहता था.

मैं डर गया.

‘अरे पापा, कुछ नहीं हुआ … सही हो जाएगा!’

‘नहीं, आओ चलो!’

पापा मुझे ज़बरदस्ती ले गए.

मैं पंकज के पास गया तो वह बोला- शर्मा क्यों रहे हो? बताओ न!

उसके बार-बार पूछने पर मैंने बताया- कमर में चोट लगी है.

वह बोला- अच्छा, आ जा अन्दर केबिन में!

उसने पापा को बाहर रुकने को बोला.

मैं अन्दर गया.

वह बोला- बोलो, पैंट उतारो. मैं डॉक्टर हूँ, मुझसे मत शर्माओ!

मैंने डर के मारे पैंट उतारा और उल्टा लेट गया.

उसने कमर छुई, बोला- यहां दर्द है?

मैंने तुरंत ‘हां.’ बोल दिया.

मेरी जान में जान आई थी.

फिर उसने मज़ाक में गांड पर एक हाथ मारा, तो मैं दर्द के मारे चिल्ला उठा.

उसने बिना पूछे चड्डी नीचे कर दी और बोला- साले, किससे गांड मरा कर आया है? पूरी गांड गुब्बारा हो गई है … रुक जा, बताता हूँ तेरे बाप को!

मैंने कहा- प्लीज मत बताना!

मैं डर गया.

वह बोला- ठीक है, पर मुझे सब सच बता.

मैंने सब कुछ सच बता दिया.

वह हंसने लगा और बोला- वाह रे हवसी!

मैं चुप रहा.

वह बोला- मैं कुछ नहीं बता रहा, पर एक शर्त पर!

मैंने कहा- क्या?

वह बोला- दो दिन बाद संडे को मेरे घर आना तू … मैं सब ठीक कर दूँगा.

मैंने कहा- ऐसे नहीं, पहले पूरी बात बताओ.

वह बोला- अब मुझे तेरी गांड चाहिए!

मैंने कहा- ये गलत है!

वह बोला- नकली चीज़ गांड में कब तक डालेगा?

फिर मैं हां कर दवाई लेकर घर आ गया.

उसने पापा से बोला- संडे को इसे मेरे घर भेजना, दवाई देनी है.

पापा ने हां बोल दिया.

अब संडे को गया.

मुझे डर भी लग रहा था और सोच रहा था, मज़ा भी आ रहा था कि आज असली लंड मिलेगा.

मैंने दरवाज़ा खटखटाया.

वह आया, बोला- आजा अन्दर.

मैं गया.

उसने कहा- दर्द कैसा, यश?

मैं बोला- सही हो गया, मैं जाऊं?

वह बोला- चले जाना? दवाई ले लो!

मैंने कहा- कौन-सी दवाई? मैं तो सही हो गया!

उसने अल्मारी से वाइफ के कपड़े निकाले और बोला- पहन ले … आज मजा आएगा.

मैंने मना कर दिया.

वह बोला- तेरे बाप को बुलाऊं क्या?

मैंने कहा- नहीं, तुम जैसा बोलो, मैं वैसा करूँगा!

मैंने कपड़े पहने और उसके सामने गया. वह बोला- मस्त लग रही हो रानी!

वह मुझे किस करने लगा.

मैं भी हवस के मारे उसका पूरा साथ देने लगा.

उसने मेरे एक-एक करके कपड़े उतारे और मेरे बॉब्स दबाने लगा.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर मैंने उसके कपड़े उतारे. उसका मस्त शरीर था … हट्टा-कट्टा नौजवान.

उसका लंड देखकर मेरा मन मचल गया.

शायद 7 इंच से ज्यादा का लंड था, ऐसा मैंने सिर्फ़ पोर्न में देखा था.

वह बोला- चूस!

मैंने उसका लंड पूरा मुँह में भर लिया और चूसने लगा.

उसने भी जोश में आकर पूरा लंड गले में उतार दिया.

मेरी जान ही निकल गई सांस तक लेते नहीं बन रही थी.

वह ज़ालिम की तरह मेरे मुँह को चोदता गया.

फिर मैंने मुँह हटाकर बोला- मर जाऊंगा मैं!

वह बोला- ठीक है, मुँह नहीं डालूँगा अब!

मेरी जान में जान आई.

वह बोला- घोड़ी बन!

मैं बोला- रुक ज़रा, सांस ले लेने दे!

उसने मुझे घोड़ी बनाया और एक बार में पूरा लंड मेरी गांड में अन्दर तक डाल दिया.

‘आह आह रुक जाओ प्लीज़!’

वह नहीं रुका और बोला- अब तुझे देता हूँ दवाई साले … आज के बाद तुझे मजा ही मजा आएगा.

वह बिना रुके लगातार पेलता रहा.

मुझे बहुत दर्द हो रहा था क्योंकि वह ज़ोर-ज़ोर से झटके मार रहा था.

फिर मुझे भी मज़ा आने लगा.

मैं चुदवाने लगा और ज़ोर-ज़ोर से आवाज निकालने लगा ‘आह आह ऊं आह.’

उसने एक घंटे तक पेला, फिर झड़ गया.

उसने कोई-सी दवाई खा ली थी इसलिए उसने एक घंटे तक पेला.

फिर मैंने कहा- बस करो, अब गांड में और दर्द हो रहा है!

वह हंस कर बोला- तो फिर से दवाई ले लो न!

मैं भी हंस दिया.

उसके बाद हर संडे को डॉक्टर साहब मेरी लेते रहे और मैं गांड मरवाता रहा.

आपको मेरी गे सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.

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