सहेली के दोस्त संग थ्रीसम सेक्स- 1
माय हॉट फ्रेंड स्टोरी में मैं अपनी सहेली के सामने वाले फ्लैट में शिफ्ट हुई. वह मस्त केयरफ्री लड़की थी. सेक्सी बातें करती थी. एक दिन उसने पिकनिक का प्रोग्राम बना लिया.
यह कहानी सुनें.
दोस्तो, हम तीनों सेक्स के दीवाने एक साथ कैसे आन मिले, यह सेक्स कहानी बताने के लिए आज आपको फ़्लैशबैक में ले चलते हैं.
इस सेक्स कहानी के दो भाग हैं.
बारी बारी से उन दोनों के मुँह से ही इस घटना को विस्तार से सुनते हैं कि वे दोनों इस लव गैंग का हिस्सा कैसे बनी थीं.
दोस्तो, मैं सोनू हूँ. एक कुंवारी जवान लड़की और देखने में एकदम हॉट माल.
हाल ही में मैं नई जॉब जॉइन करने के बाद रेलोकेट होकर नए फ्लैट में शिफ्ट हुई ही थी कि मेरे ही फ्लोर पर बिल्कुल सामने वाले फ्लॅट से निकलती हुयी मेरी दूर की चचेरी बहन पिंकू इतने सालों के बाद मेरे सामने खड़ी थी.
एक दूसरे को हग करने के बाद आपस में गप्पें मारने के लिए कभी डिनर पर मिलने की बात हुई, लेकिन महानगर की बिज़ी लाइफ में बात आई-गई हो गई.
हम लोग अक्सर लिफ्ट में ही आते जाते हुए मिलते और अपना फुर्सत से बैठने का प्रोमिस दोहराते.
मैंने नोटिस किया कि पटाखा सी दिखने वाली पिंकू हमेशा कम से कम कपड़ों में ही घूमती रहती है और अक्सर द्विअर्थी और अश्लील संवाद बोलती रहती है.
जैसे एक दिन मेरी नई सैंडल के काटने से मैं थोड़ा लंगड़ा लंगड़ा कर चल रही थी तो बोली- क्या गांड में लेकर आ रही है?
एक दिन किसी क्रीम से मेरे गालों पर रेशेस हो गए तो बोली- अरे गाल थोड़ा कम चुसवाया कर!
कभी थोड़ा थकी हुई लगती तो कहती कि आज क्या ऑफिस से ही बजवा कर आ रही है?
मेरा सेक्स और खास तौर अश्लील भाषा की तरफ कभी रुझान नहीं रहा, लेकिन इतने बड़े और नए शहर में उस एकलौती जानकार और कजिन को नाराज़ भी नहीं करना चाहती थी, इसलिए हंस कर टाल देती थी.
एक बार पांच दिनों की लगातार मीटिंग्स, कोंफेरेन्सेज़ प्रेसेंटेशंज के बिज़ी शेड्यूल के बाद एक शांत और इत्मीनान वाले वीकेंड की उम्मीद में घर में घुसी ही थी कि पिंकू का फोन आया- कल फ्री है तो पिकनिक पर चलते हैं!
मैं कुछ कहती कि वह दुबारा से बोल उठी- ऐसे तो कभी फुर्सत से बैठने का टाइम मिलेगा ही नहीं, चलो ऐसे ही कुछ समय साथ गुज़ारने का प्रोमिस पूरा हो जाएगा!
यही सोच कर मैंने भी हामी भर दी.
‘ठीक है, बाकी बातें मिल कर करते हैं, कल सुबह सात बजे तैयार रहना!’ कह कर पिंकू ने फोन काट दिया.
अचानक पिकनिक का प्रोग्राम बना लेने पर मुझे कुछ ताज्जुब तो हुआ लेकिन मैंने अपने शक्की मिजाज को दबाते हुए सिर झटका और शॉवर लेने चली गई.
अगली सुबह माय हॉट फ्रेंड पिंकू सात बजे अपनी कार में हाजिर थी.
मैंने भी अपना डफल बैग कंधे पर टांगा और बाहर आ गई.
हमने एक दूसरे को हग किया और पिंकू ने मेरे गालों पर कसके चुम्मी ली.
मैंने नोटिस किया कि उसकी चुम्मी एक आम सहेली के किस से कहीं ज्यादा गीली और गहरी थी.
खैर … हम लोग कार में बैठ कर आगे बढ़े.
थोड़ी ही दूर पर एक लड़का खड़ा था.
हमारी कार को देख कर उसने हाथ दिया.
तो ‘पुराना दोस्त है लकी. यह भी साथ चलेगा!’ पिंकू ने कैजुयली बोला और कार रोक दी.
वह जब पिछला दरवाजा खोल कर अन्दर घुस रहा था तो मैं उसकी डेशिंग पर्सनेलिटी नोटिस किए बगैर नहीं रह सकी.
कुछ पल बाद मैंने डर कर सोचा कि यह सब क्या खेल है? पिंकू मेरी दूर की कजिन ज़रूर है, लेकिन पिछले कई सालों में वह कहां रही है, उसने क्या किया है, कैसे दोस्त बनाए हैं … मैं कुछ भी तो नहीं जानती? मैं कहीं लपेटे में तो नहीं फंसी जा रही हूँ.
खैर … अब ओखली में सर दिया तो मूसलों से क्या डरना? मैंने खुद को तसल्ली दी.
कुछ ही देर चले होंगे कि उस हैंडसम नौजवान ने पीछे से पिंकू के साथ छेड़खानी शुरू कर दी.
मैं ना देखने का बहाना करके मोबाइल में नज़रें गड़ाए रही.
करीब चार पांच घंटे के सफर के बाद हम पिकनिक स्पॉट पर पहुंच गए.
वहां पर उन लोगों का पूरा ग्रुप जमा था.
सब एंजॉय कर रहे थे.
यह देख कर मुझे तसल्ली हुई और धीरे धीरे मैं भी पिकनिक को एंजॉय करने लगी.
सब ड्रिंक करके डांस कर रहे थे, लेकिन मैं ड्रिंक नहीं करती इसलिए डाइट कोक पीती हुई अकेली ही थिरक रही थी.
मैंने नोट किया कि पिंकू और लकी कुछ ज्यादा ही लिपट लिपट कर डांस कर रहे थे और चूमा-चाटी भी कर रहे थे.
सब लोग जोड़ों में ही आए थे, मैं ही एक अकेली लड़की सिंगल आई थी.
उन जोड़ों की हरकतें देख कर मुझे भी एक मर्द साथी की कमी थोड़ी थोड़ी खलने लगी.
मैंने देखा कि वह लड़का लकी भी कनखियों से मुझे देख देख कर पिंकू के कानों में खुसुर फुसुर कर रहा था.
हालांकि पूरी पिकनिक में और कोई खास बात नहीं हुई.
सब ने खूब खाया पिया, डांस किया और एंजॉय करते रहे.
वैसे तो अगले दिन लौटने का प्रोग्राम था लेकिन तभी लकी के ऑफिस से फोन आ गया.
उसे संडे को ही एक इंपोर्टेंट मीटिंग अटेण्ड करनी थी.
‘अब साथ लाये हैं तो छोड़ने तो चलना ही पड़ेगा!’ पिंकू ने मायूसी से बोला.
‘अब एंजॉय कर तो लिया है, चले ही चलते हैं!’ मैंने भी बेमन से कहा और सभी दोस्तों से विदा लेकर हम लोग वापसी के लिए चल पड़े.
अंधेरा होने लगा था, लेकिन लकी ने ड्राइव करने की ज़िम्मेदारी सम्हाल ली और मुझे और पिंकू को पीछे की सीट पर बैठा कर गाड़ी स्टार्ट कर दी.
अंधेरा गहराता जा रहा था.
अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी.
चारों ओर सुनसान था, सिर्फ हवा की साएं साएं की आवाज और कभी कभी जानवरों की आवाज़ों के सिवाय कहीं कोई आवाज नहीं थी.
अचानक गाड़ी जंगल के बीच में झटके खाकर रुक गयी.
लकी टॉर्च लेकर नीचे उतरा.
उसने बोनट उठा कर कर कुछ देर गाड़ी चेक किया मगर कोई खराबी पकड़ में नहीं आयी.
कुछ देर बाद वह वापस आ गया.
उसने अपनी गीली शर्ट को उतार कर पीछे फेंक दिया.
‘कुछ नहीं हो सकता. चलो नीचे उतर कर धक्के लगाओ. हो सकता है कि गाड़ी चल जाए.
’मगर बरसात?’ मैं बाहर देख कर कुछ हिचकिचायी.
‘नहीं तो जब तक बरसात न रुके, तब तक इन्तजार करो, अब इस बरसात का भी क्या भरोसा. हो सकता है सारी रात पानी बरसता रहे!’
मैं और पिंकू नीचे उतर गईं.
बरसात की परवाह ना करके मैं और पिंकू पीछे से लग गए और लकी आगे से दरवाजा खोल कर स्टीयरिंग संभालते हुए गाड़ी को चलाता रहा.
हम सब यह सोच कर धक्के लगाते रहे कि शायद स्टार्ट हो जाए, मगर गाड़ी नहीं चली.
हम सब थक कर वापस गाड़ी में आ गए.
उस वक्त रात के आठ बज रहे थे.
हम पूरी तरह गीले हो गए थे और गाड़ी के अन्दर बैठ गए थे.
‘हम पैदल ही निकलते हैं!’ मैंने बोला.
‘यहां काफी रीछ और भालू मिलते हैं. रीछ बहुत सेक्सी जानवर होते हैं. सुन्दर सेक्सी महिलाओं को देख कर उन पर टूट पड़ते हैं और जम कर उनके साथ सम्भोग करते हैं … और क्या पता कोई चोर उचक्कों का गैंग ही मिल जाए, फिर तो भगवान मालिक. इसलिए सब लोग चुपचाप गाड़ी में बैठ जाओ और कोई आवाज मत करो.’
ठंड के मारे हम लोगों के दांत बज रहे थे.
‘तुम दोनों अपने अपने कपड़े उतार कर मुझे दे दो, मैं निचोड़ कर बोनट के नीचे डाल देता हूँ. इंजिन की गर्मी से कुछ सूख जाएंगे.’ लकी ने कहा.
मैं हिचकिचायी तो पिंकू ने कहा कि इस घटाटोप अंधेरे में किसको क्या दिखाई देगा?
हमने अपने अपने अपने कपड़े उतार कर लकी को दे दिए.
उसने जैसे ही बाहर निकलने के लिए दरवाजा खोला, तो कार की लाइट जल गई. उस रोशनी में उसने एक भरपूर नज़र से हम दोनों को देखा.
केवल अंडरवियर में उसकी सुडौल देह पर मेरी नज़र भी पड़ ही गई.
मैंने देखा कि पिंकू तो ब्रा और पैंटी से भी छुटकारा पा कर बिल्कुल नग्न अवस्था में थी.
अचानक से लाइट जलने पर वह भी थोड़ा सकुचा गई.
लकी ने हम दोनों को भरपूर नज़र से देखने के बाद पूरा टाइम लेते हुए दरवाजा बंद किया.
दरवाजा बंद करने के साथ ही लाइट भी बंद हो गई और मैंने राहत की सांस ली.
‘गाड़ी में पीछे एक ब्लेंकेट पड़ा है. तुम दोनों लपेट लो!’ लकी बोला.
पिंकू ने पीछे से टटोल कर कंबल उठाया और हम दोनों उसे लपेट कर बैठ गईं.
‘बहुत ठंड हो रही है लकी. तुम भी पीछे ही आ जाओ.’ पिंकू ने बोला.
‘ऐसे तो कुल्फी जम जाएगी!’ यह कहते हुए लकी ने डैश बोर्ड से एक रम की आधी से ज्यादा भरी हुई बोतल निकाली और एक बड़ा घूंट लेकर बोतल पिंकू को पकड़ा दी.
‘सोनू तू भी दो घूंट ले ले, सारी सर्दी निकल जाएगी!’ पिंकू ने मुझसे कहा.
‘अरे तुम तो बर्फ सी ठंडी हो रही हो!’लकी, जो कि अब तक बेतकल्लुफ़ी से पीछे की सीट पर ही मेरे दूसरी तरफ आ कर कंबल में घुस कर बैठ गया था, उसने हाथ बढ़ा कर मेरे गालों को छू कर कहा.
मैंने उसका हाथ झटक दिया और दारू पीने से मना कर दिया.
मैं दोनों को रम पीते हुए देख रही थी और ठंड से सिकुड़ी हुइ बैठी कांप रही थी.
कुछ ही देर में ठंडक ने मुझे मजबूर कर दिया और जब लकी ने दूसरी बार मुझे बोतल ऑफर की तो मैंने कांपते हाथों से बोतल थाम ली.
जैसे ही मैंने एक छोटा सा सिप लेने की कोशिश करी, लकी ने नीचे से झटका देकर काफी सारी दारू मेरे मुँह में ढुलका दी.
मुझे फोरन जोर से उबकाई आयी.
लेकिन पिंकू ने कहा- ऐसे वेस्ट मत करो. रात भर चलानी है!
ये कहते हुए मेरे मुँह पर हाथ रख कर मेरी नाक को ज़ोर से दबा दिया और एक झटके में सारी दारू मेरे हलक से होती हुई पेट में समा गई.
मुझे ऐसा लगा मानो कोई तरल आग मेरे मुँह और गले को जलाती हुई पेट में जा रही है.
पूरे मुँह का स्वाद कसैला हो गया था.
काफी देर तक मेरा चेहरा विकृत सा रहा.
‘लो एक और घूंट ले लो.’ लकी ने कहा.
’कितनी गन्दी चीज है, तुम लोग पीते कैसे हो!’ मैंने कहा.
मगर कुछ देर बाद हाथ बढ़ा कर बोतल ले ली और एक और घूंट लिया.
इस बार मुझे वह उतनी बुरी नहीं लगी.
थोड़ी देर में मेरा सर घूम रहा था.
सीने में अजीब सी हलचल हो रही थी.
लेकिन बदन गर्म होने लगा था.
मैं अपने आप को बहुत हल्का-फुल्का मह्सूस कर रही थी.
बाहर की हवा मस्त लगने लगी थी, अगल बगल दो नंगे बदन मुझे गर्म करने लगे थे.
सारे दिन का मस्ती भरा मादक माहौल, अपने ऊपर से कंट्रोल खत्म होने सा लगा था, शरीर काफी गर्म हो चला था.
‘तुम्हें तो पसीना आ रहा है. गर्मी कुछ ज्यादा हो गई है क्या?’
ये कहते हुए उसने मेरे गले को अपने हाथों से छुआ.
मैंने उसके हाथ को एक झटका दिया और सिमटती हुई दूसरी ओर सरक गयी … मगर उधर पिंकू का नंगा बदन मुझे दबा रहा था.
‘मैं तुम्हारे साथ कोई जोर जबरदस्ती तो कर नहीं रहा हूं. मैं तो सिर्फ तुम्हारे कांपते हुए बदन को गर्मी देने की कोशिश कर रहा हूं!’
उसने वापस अपनी उंगलियां मेरे होंठों पर फिराईं और बिना मेरे जवाब का इंतजार किए ही, मेरी ओर घूम कर मुझे अपनी बांहों में समा लिया.
उसी समय पीछे से पिंकू ने मेरी पूरी तरह भीगी हुई ब्रा के हुक खोल कर उसे एक तरफ उछाल दिया.
सर्दी से तने हुए मेरे निपल्स उसकी चौड़ी छाती में दब गए.
शायद इस समय एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसको वहीं रोक देता, लेकिन पता नहीं क्यों, मैं उसको अपने हाथों से दूर करने की असफल कोशिश करके कसमसा कर रह गई.
कुछ तो मेरी कोशिश में इच्छाशक्ति का अभाव और कुछ उसके बदन में तीव्र जोश का उफान, उसका सीना और सख्ती से मेरे स्तनों को पीसने लगा और उसके होंठ मेरे होंठों से चिपक गए.
किसी मर्द की नजदीकियां, शराब का सुरूर, रात का घटाटोप अंधेरा, रीछ के साथ संभोग की भय मिश्रित कल्पना, मेरे दिमाग को मदहोश करते जा रहे थे.
धीरे धीरे मैं कमज़ोर पड़ती जा रही थी.
लकी ने मेरे नग्न बदन को अपने सीने पर खींच लिया.
दोस्तो, माय हॉट फ्रेंड स्टोरी को पढ़ कर आपको कैसा लग रहा है, प्लीज जरूर लिखें.
अभी यह पहला भाग है, आगे और भी मस्ती लिखना बाकी है.
आपके मेल व कमेंट्स मुझे हौसला देते हैं, इसलिए प्लीज अपने प्यार से मुझे जरूर नवाजें.
माय हॉट फ्रेंड स्टोरी का अगला भाग: सहेली के दोस्त संग थ्रीसम सेक्स- 2
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