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दोस्त की बहन ने रखी चुदाई पार्टी- 2

0 बार पढ़ी गई11 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

पुसी हैवन ऑफ़ फेयरी वर्ल्ड स्टोरी में मेरे दोस्त की बहन ने मेरे लिए 3 और चूतों का इंतजाम कर रखा था. मेरे पास 4 चूत परियां थी चुदाई के लिए अलग अलग उम्र की!

फ्रेंड्स, मैं प्रिंस आपको सामूहिक चुत चुदाई की इस मस्त सेक्स कहानी में चार चूतों के साथ अकेले लंड से चुदाई को लिख रहा था.

कहानी के पहले भाग

दोस्त की बहन ने घर बुलाकर चूत मरवाई

में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैं पूनम दीदी को चोद कर खाने की टेबल पर आ गया था और उधर हम सभी पांचों ने मस्ती करते हुए खाना खत्म किया.

अब आगे पुसी हैवन ऑफ़ फेयरी वर्ल्ड स्टोरी:

खाना खाने के बाद पूनम दी ने मुझे काजू, किशमिश, बादाम, शिलाजीत और केसर से युक्त एक बड़ा ग्लास दूध पीने को दिया, जिसमें उन्होंने सेक्स की दो गोलियां पहले ही मिला दी थीं.

इसे पीने के दस मिनट बाद ही लगने लगा कि मेरे अन्दर गजब की शक्ति और उत्साह आ गया है.

ऐसा लग रहा था कि अभी मैं सौ सौ लोगों से एक साथ निपट सकता हूँ या सौ सौ स्त्रियों के एक साथ लगातार संभोग कर उन्हें पूर्ण संतुष्ट कर परास्त कर सकता हूँ.

खाना खाने और दूध पीने के बाद पूनम दी बर्तनों को समेट कर रखा और उसके बाद पूनम दी ने अन्दर वाले विशेष बेडरूम का दरवाजा खोला.

हम पांचों उस बेडरूम में आ गए.

मैंने देखा कि वह काफी बड़ा बेडरूम था और उसमें एक ही बेड था.

मैंने आपको इस बेडरूम की खासियत के बारे में पिछले भाग में लिखा था.

बड़ा बेड देख कर मैंने दीदी से पूछा- यह क्या बनवाया है जीजा जी ने?

मैं हैरान था कि वह डबल ट्रिपल बेड इतना बड़ा था कि उस पर पांच से छ: लोग आराम से सो सकते थे.

दीदी ने मुझे बताया कि तुम्हारे जीजाजी ने पता नहीं क्या सोचकर इतने बड़े बेड का डिजाईन सैट करवाया है.

मैंने गद्दे को छूकर देखा कि जीजा जी ने उस बेड पर काफी मुलायम और काफी गद्देदार बिस्तर डलवाया था.

अटैच्ड बाथरूम भी बड़ा सा, एकदम सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त था.

शॉवर और बड़ा सा बाथटब भी था, जिसमें तीन चार लोग तो आराम से नहा सकते थे.

उस बेडरूम में काफी ज्यादा सुविधाएं थीं, जिनको दोहराने का कोई मतलब नहीं है, आप लोग चाहें तो पिछले भाग को एक बार पुनः पढ़ कर कमरे की खूबियों को जान लें.

मुझे लगा कि मैं सपनों की दुनिया में आ गया हूँ.

दूधिया रोशनी में नहाया हुआ कमरा गजब लग रहा था … और ऊपर से चारों ओर नग्न अप्सरायें मेरे इर्द गिर्द थीं.

एक बार को तो मुझे लगा कि मैं कहीं मरकर स्वर्ग में तो नहीं आ गया हूँ.

लेकिन यहां इन्द्र भगवान नहीं दिख रहे थे.

तभी पूनम दी ने पीछे से मुझे झंझोड़ा- प्रिंस कहां खो गए?

मैं अवाक रह गया और अचकचा कर बोला- पूनम दी, मुझे लगा मैं मरकर स्वर्ग में तो नहीं आ गया हूँ. इतना सुन्दर कमरा … और चारों ओर अप्सरा ही अप्सरा!

पूनम दी गंभीर स्वर में बोलीं- वत्स तुम स्वर्ग में ही हो. इसे Heaven of Fairy World कहा जाता है यानि परीलोक का स्वर्ग. यहां हम परियों का ही राज चलता है और यहां आने वाले हर पुरूष को वही करना पड़ता है जो हम चाहती हैं … और जो हम कहती हैं.

मैं भी किसी मृतात्मा की तरह उनकी बातें सुन रहा था.

दीदी बोलीं- जो हमारी बात सर झुकाकर मानता है, उसे यहां की परियां स्वर्ग से भी ज्यादा आनन्द देती हैं. कोई सवाल कोई संकोच नहीं. यहां जो कुछ है … केवल हम ही हैं और मैं यहां की रानी हूँ. तुम्हें यहां सशरीर लाया गया है और मेरी ओर से तुम्हें सुन्दर सुन्दर चार चार अप्सरायें दी गयी हैं. स्वर्ग के चारों और आईने लगे हुए हैं … ये जो तुम अगिनत अप्सरायें देख रहे हो, ये हम चारों अप्सराओं के ही प्रतिबिम्ब हैं. अब तुम्हें इस स्वर्ग में रहकर हम अप्सराओं को अपनी काम शक्ति से संतुष्ट करना है. वरना तुम नरक में फेंक दिये जाओगे.

मैं चौक पड़ा.

मैंने झुक कर पूनम दी योनि को सहलाकर, प्रणाम किया और चुत को जीभ से चाट कर चूमते हुए और सर झुकाकर कहा- अपनी योनि में मेरा काम नमन स्वीकार करें देवी. मैं आपका परम भक्त हूँ. मैं सम्पूर्ण रूप से अपने आपको आपको अर्पित करता हूँ. आग आज्ञा करें देवी मुझे क्या करना हैं?

मेरे अंदाज को देख कर सभी हंस पड़ीं.

पूनम दी बोलीं- वत्स पहले तो तुम डॉली, शोभा और पिकीं को प्यार से वस्त्र विहीन करो और उन तीनों का योनि पान और स्तन मर्दन करो. यह मेरी आज्ञा है.

मैंने पूनम दी की योनि में एक अंगुली घुसाकर अन्दर बाहर की, योनि को सहलाते हुए और दोनों स्तनों को चूसते हुआ कहा- जो आज्ञा देवी!

फिर मैंने उन तीनों लौंडियों की योनियों को सहलाते हुए और स्तनों को चूसते हुए काम आगे बढ़ाया.

मैंने पिंकी, डॉली और शोभा के नाम मात्र के वस्त्रों को उनके शरीर से अलग कर दिया और उन्हें बारी बारी से अपनी गोद में उठा उठा कर उस आठ इंच के मोटे फूल से मुलायम गद्देदार बिस्तर पर लिटा दिया.

शोभा बीच में थी और उसके दोनों आजू बाजू पिंकी और डॉली थीं.

फिर मैंने तीनों के पैरों को मोड़ कर तीनों के पैरों को पूरा फैला दिया और शोभा की योनि की फांकों को दोनों हाथों से फैला कर उसमें अपना मुँह लगा दिया.

कुछ ही देर में मैं अपने दोनों हाथों से शोभा, पिंकी और डॉली के स्तनों का बारी बारी से मर्दन करने लगा.

बीच बीच में मैं डॉली और पिंकी की योनि भी सहला देता.

वे तीनों वासना से पागल होने लगी थीं और जोर जोर से सिसकारी भर रही थीं.

पूनम दी देख रही थीं कि मैं अच्छे से चूस रहा हूँ या नहीं.

चूंकि चारों ओर लगे आईनों में हमारा मनोरम दृश्य प्रतिबिम्बित हो रहा था तो पूनम दी कहीं भी नजर करके सब देख रही थीं.

तभी दी ने कैमरा भी चालू कर दिया था तो अब सब कुछ रिकार्डिंग भी होकर वीडियो बनने लगा था.

‘आह … उह … मर गयी … और अन्दर तक … आह और जोर जोर से चूसो, अन्दर तक जीभ डाल कर चुत को चूसो!’

पूरा कमरा इस तरह की मनोरम आवाजों से गूंज रहा था.

पूनम दी की योनि रस की पिचकारी छूटने के बाद मैंने उसकी योनि का सारा रस चाट कर पी लिया और उसके बाद डॉली की योनि में मुँह लगा दिया.

अब मैं शोभा की चुत को सहलाने लगा था और डॉली की चुत को चूसने लगा था.

डॉली कुछ ज्यादा ही चीख रही थी और अपनी योनि के चुसवाने का भरपूर आनन्द ले रही थी.

कुछ ही देर में डॉली उत्तेजना के चरम पर आ गई और वह इतनी ज्यादा चीखने लगी कि बाकी सबको जोश आने लगा था.

पूनम दी भी अपने दोनों स्तनों को मेरे पीठ में रगड़ने लगीं और मेरे लिंग को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

मुझे भी भरपूर जोश आने लगा और मैं जोर जोर से डॉली की चुत चूसने लगा.

डॉली अब तक दो बार झड़ चुकी थी और मैंने दोनों बार उसकी चुत का सारा रस पी लिया था.

उसके बाद पिंकी की बारी थी.

पिंकी तो पहले से ही तैयार बैठी थी.

उसने अपने पैरों को पूरा फैलाकर अपनी योनि मेरे मुँह में लगा दी.

मैं अपने होंठों से पिंकी की योनि चूसने लगा.

पिंकी दो लड़कियों की चुत चुसाई देख कर इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि कुछ ही मिनट में उसकी योनि ने रस का झरना छोड़ दिया.

तभी पूनम दी आवाज गूंजी- वत्स, तूने सभी अप्सराओं का स्तनपान और योनिपान तो कर लिया, लेकिन इससे जो अप्सराओं के शरीर में कामोत्तेजना का ज्वार उमड़ आया है, वह कैसे शांत होगा. मैं तुम्हें यह आज्ञा देती हूँ कि तुम हम चारों अप्सराओं की कामपिपासा को संभोग कर शांत करो. वरना हम तुम्हें नरक की आग में धकेल देंगी और उधर …

यह कहकर पूनम दी ने बात अधूरी छोड़ दी.

मैंने तुरंत पूनम दी के पैर पकड़ लिए और उनकी योनि को चाटकर कहा- शांत हो देवी … शांत, मुझे क्षमा करें आपकी आज्ञा मेरे सर माथे. मैं अभी आप सभी अप्सरारों से संभोग कर आपके काम क्रोध को शांत करता हूँ.

पूनम दी बोलीं- तो वत्स जाओ, सबसे पहले मेरी प्यारी ननद पिंकी का काम वासना शांत करो.

मैंने पूनम दी के स्तनों को चूसते हुए ही पिंकी की योनि में अंगुली की और आशीर्वाद मांगा.

पूनम दी मेरे लिंग को अपने मुँह में लेकर चूसती हुई बोलीं- जा वत्स, विजयी भव:!

मैंने तुरंत नंगी लेटी पिंकी की योनि में अपना लिंग पेल दिया और उसके दोनों स्तनों सहलाते, दबाते और पेलते हुए धक्के लगाने लगा.

पिंकी की उम्र कम थी इसलिए उसकी योनि टाईट थी लेकिन चुत गीली थी क्योंकि अभी अभी मैंने पिंकी की बुर को चूसा था.

उसकी टाईट योनि में लंड पेल कर संभोग करने में बहुत मजा आ रहा था.

पिंकी भी बहुत मजा ले लेकर चुदाई करवा रही थी.

मैंने उसे अच्छी तरह से दबोच लिया था और जोर जोर से धक्के मार कर पेल रहा था.

पिस्टन की तरह मेरा लिंग पिंकी की योनि के अन्दर बाहर हो रहा था और वह भी हचक हचक कर लंड पेलवा रही थी.

काफी देर के कठिन परिश्रम के बाद पिंकी ने अपनी टांगों को मेरी कमर में कसकर लपेट दिया और उसने मुझे पूरी तरह जकड़ कर जोर जोर से सिसियाने लगी.

‘आह … उह … मां … फ्कक मी … आह … आह … करती हुई एकाएक शांत पड़ गयी. उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे.

पिंकी ने मुझे कस कर जकड़ा और मेरे होंठों को अपने होंठों से पकड़ कर कई बार चूम लिया.

वह बोली- थैंक यू प्रिंस!

मैंने अपने लिंग में लगा वीर्य उसकी जांघों में रगड़ दिया और अपने लिंग को उसकी छोटी सी बेबी डॉल ड्रेस से पौंछ लिया.

अब शोभा की बारी थी.

वह बहुत देर से अपनी योनि को सहला रही थी.

मैंने उसे पकड़ लिया और उसके साथ फोरप्ले करने लगा.

उसको अपनी गोद में बैठा कर उसके स्तनों को धीरे धीरे से खींचते हुए चूसने लगा.

उसकी पीठ और नितंबों को सहलाने लगा, वह भी मेरे लिंग को अपने हाथों में लेकर खेलने लगी.

करीब पंद्रह मिनट बाद मेरा लिंग सलामी देने लगा. मैंने शोभा की योनि को सहलाते हुए धीरे धीरे उसकी योनि में अपना लिंग प्रवेश करवा दिया.

वह उह आह करने लगी.

मैंने उसके होंठों को चूसते हुए धीरे धीरे धक्का लगाना शुरू किया. वह आंख बंद करके संभोग का आनन्द ले रही थी.

फिर आनन्द में डूबी ही मदहोश स्वर में बोली- भैया, मेरी चूची भी पियो ना!

मैं उसकी दोनों चूचियों के निप्पलों को बारी बारी से सहलाते हुए चूस लेता … और दूसरी चूची को मसल देता … फिर मैं धीरे धीरे उसकी चुत में धक्का लगाने लगा.

वह बस आंखें बंद किए ‘आह … उह … बहुत अच्छा लग रहा है … भैया जोर से … चोदो आह!’ कहे जा रही थी.

मैं काफी देर तक लगातार धीरे धीरे उसकी चुदाई करता रहा था लेकिन अब वह भी जोर जोर से चुदाई चाह रही थी.

मैंने उसकी कामना को समझ कर धीरे धीरे स्पीड बढ़ाना शुरू कर दिया था और कुछ ही पल बाद मैं अपनी हाई स्पीड पर आ गया.

वह भी गांड उठा कर चिल्ला रही थी- आह भैया और जोर जोर से करो … आह मजा आ रहा है.

मैं धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था.

चालीस पचास धक्के में ही वह खलास हो गयी.

मैं अभी नहीं झड़ा था इसलिए मैं पूरी ताकत से जोर जोर से धक्के मारने लगा.

वह झटके लेती हुई संभोग का आनन्द लेती रही.

आखिरकार मेरे लिंग ने गर्म गर्म लावा उसकी योनि में छोड़ दिया.

मैंने तुरंत अपना लिंग उसकी चुत से बाहर निकाल लिया और उसे चूमते हुए उसके शरीर को सहलाने लगा.

शोभा बोली- भैया आज सचमुच बहुत मजा आया. मैं तो एकदम खो ही गयी थी, मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी चुत बह गई!

दोस्तो, आपको इस पुसी हैवन ऑफ़ फेयरी वर्ल्ड स्टोरी में मजा आ रहा होगा.

प्लीज मुझे जरूर बताएं कि आपको कैसा लग रहा है.

पुसी हैवन ऑफ़ फेयरी वर्ल्ड स्टोरी का अगला भाग: दोस्त की बहन ने रखी चुदाई पार्टी- 3

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