फैमिली सेक्सपूर्ण

थैंक्यू पापा मेरी चूत, गांड और मुंह भरने के लिए- 3

0 बार पढ़ी गई13 मिनट का पाठ२ दिन पहले

पुसी लिकिंग कहानी में बहू की चूत मारने के बाद मेरी इच्छा थी कि मैं उसकी चूत चाटूं और वो मेरा लंड चूसे. लेकिन उसकी भी एक इच्छा थी … क्या दोनों की इच्छा पूरी हुई?

दोस्तो, मैं आपको अपनी बहू की चुदाई की कहानी बता रहा हूं।

कहानी के दूसरे भाग

सेक्सी बहू की पहली चुदाई का मजा

में आपने जाना कि कैसे मैंने पहली बार अपनी बहू की चूत मारी।

वो भी आराम से आंखें बंद किए चुदती रही।

अब मेरे मन में उसकी चूत चाटने की इच्छा थी।

मैंने उससे बात की तो पता चला वो खुद भी चाहती थी कि मैं उसकी चूत चाटूं।

उस दिन जब वो चाय देने आई तो मैं उसको गर्म करके बाथरूम में ले गया और उसे गीली कर दिया।

अब आगे पुसी लिकिंग कहानी:

मैं और मरियम बाथरूम में थे।

आज उसकी चूत को जीभ का सुख देने की बारी थी।

मैंने उसको नंगी कर लिया और उसकी पीठ पर चूमता हुआ नीचे जाने लगा।

क्या मस्त गुब्बारे जैसी फूली और उठी हुई गांड थी।

लेकिन मैं गांड चटवाने का मजा उसको आज ही नहीं देना चाहता था, कुछ आगे के लिए भी बचाना था।

इसलिए मैंने खुद पर भी काबू रखा।

मैं उसकी मुलायम गांड को बस थोड़ा सा दबाता रहा।

इधर मरियम भी उतावली हो रही थी मेरे लंड को अपने मुंह में लेने के लिए।

जैसे ही मैं खड़ा हुआ, मरियम तुरंत बैठते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर चूसने लगी।

आह्ह … मजा आ गया!

उसके गर्म-गर्म मुंह में लंड गया तो मैं जन्नत की सैर करने लगा।

वो बड़े ही मजे से लंड को चूस रही थी।

उसके हरेक चोपे के साथ मैं भी मस्ती में खोता जा रहा था।

लग रहा था कि लावा फूट पड़ेगा।

काफी देर लंड चूसने के बाद मरियम बोली- पापा, मेरी चूत में आग लगी है, अपने लंड से बुझा दो इस आग को!

मैंने तुरंत ही एक बार फिर मरियम को अपनी गोद में उठाया और कमरे में लाकर पलंग पर लेटा दिया।

लेटाकर मैंने उसकी टाँगों को बाहर की तरफ खींचा और हवा में उठाकर उसकी चूत की चुदाई करना शुरू किया।

अब मरियम भी मजे से सिसकारियां भरते हुए चुदाई का मजा ले रही थी- ओह्ह पापा … आह् … अम्म … इईईई स्स्स। ऐसे ही मस्त चुदाई करते रहो। आज तो आपने कमाल ही कर दिया है … आह्ह।

दोस्तो, इसी वक्त मेरा भी माल बाहर निकलने के लिए उतावला हो रहा था।

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और मरियम की चूत पर लावा उगल दिया।

मरियम ने उस मलाई को अपनी चूत और उसके आस-पास फैला लिया।

वो बोली- थैंक्यू पापा, बहुत मजा आया।

मैंने उसके बिखरे बालों को समेटते हुए और माथे पर आए पसीने को पोंछते हुए कहा- बेटा, तुम्हें मैं रोज मजा दूँगा, लेकिन पूरे दिन में बस एक बार!

वो मेरे सीने से और सटते हुए बोली- आपका मुझे दिन में एक बार चोदना भी बहुत मजा देगा।

फिर मैंने मरियम के ऊपर अपनी टाँग रखी और उसके होंठों को चूसने के साथ ही उसकी मुलायम-मुलायम चूचियों को मसलने लगा।

मैं- बेटा, अब एक काम करना, मुझे रोज दूध पिला दिया करना, ताकि मेरी ताकत बनी रहे।

उसने मेरी तरफ शरारती नजरों से देखते हुए कहा- पापा, थन तो आपका ही है, जब चाहना तब पी लेना।

मैंने कहा- बात तो ठीक है बेटा, लेकिन तेरा थन दूध देता भी है या नहीं?

वो बोली- आप कोशिश करो, शायद निकल आये?

इतना कहकर वो उठी और अपनी गांड को मटकाते हुए चली गई।

फिर कुछ ही देर बाद ही वो एक गिलास दूध का लेकर वापस कमरे में आई और अपनी निप्पल को मेरे मुँह में देते हुए बोली- पापा, आपके लिए दूध!

फिर उसने अपने चूचे पर दूध उड़ेलना शुरू किया।

दूध उसके चूचे से होता हुआ मेरे मुंह में जाने लगा।

मैं तो सच में धन्य हो गया था।

ऐसी बहू तो भगवान सबको दे!

मैंने उसकी पीठ और चूतडों को सहलाते हुए कहा- उम्र का तकाजा है, नहीं तो तेरे इस अंदाज पर आज तेरी एक राउंड और चुदाई कर देता।

वो बोली- क्या पापा आप भी, आप मेरे शेर हो, एक दिन में एक बार नहीं, एक दिन में कई बार आप मुझे चोदकर ठंडा कर सकते हैं।

इतना कहने के साथ ही उसने दूध को अपनी चूचियों के बीच से गिराना शुरू कर दिया।

मैं- अरे … अरे … क्या कर रही हो!

मैं उसके पेट पर से गिरते दूध को चाटने लगा।

और पता नहीं कब मेरी जीभ उसकी चूत की फांकों के बीच में चलने लगी।

वो सिसकारी- आह पापा … मैंने कहा था न कि आप बूढ़े नहीं हो … चाटो, बहुत मजा आ रहा है!

मैंने एक हाथ से उसकी जांघ को पकड़ा और दूसरे हाथ से मैं अपने लंड की सुरसुराहट को मिटाने के लिए टोपा मसलने लगा।

थोड़ी देर बाद मेरे कंधे पर हाथ रखते वो हुए बोली- पापा, अब थोड़ा मुझे भी अपने इस यार की सेवा करने का मौका दीजिए, शायद आपका ये यार मेरी बात मान जाए।

इतना बोल वो अपने घुटनों पर बैठ गयी, फिर अपने बालों को समेटने के बाद अपनी मुट्ठी में मेरे लंड को कैद कर लिया।

पहले तो सुपाड़े पर ही वो अपनी जीभ फेरने लगी।

फिर थोड़ी देर बाद ही आइसक्रीम की तरह लंड को चूसने लगी।

वो केवल लंड ही नहीं चूस रही थी, बल्कि मेरे आंडों को भी दबा रही थी।

साथ ही साथ अपनी जीभ भी लंड पर फेर देती थी।

थोड़ी ही देर में मरियम की मेहनत रंग लाने लगी।

मेरे लंड में धीरे-धीरे सख्ती आने लगी।

थोड़े और प्रयास में ही लंड ने अपना पूरा आकार ले लिया।

मरियम मेरी तरफ खुशी से ऐसे देख रही थी मानो उसने जो चाहा वो पा लिया हो।

फिर वो खुद ही पलंग पर आकर अपने पैर फैलाते हुए लेट गई।

मैं उसकी टांगों के बीच आ गया।

मैंने पहले तो मलाई से भरी हुई उसकी चूत को प्यार किया और फिर लंड महराज को उसकी चूत का रास्ता दिखा दिया।

हम दोनों के बीच धक्का पेल चलने लगी।

इस बार मैं थोड़ा ज्यादा देर तक टिक गया लेकिन हाँफने लगा।

थक कर मैं बिस्तर पर लेट गया।

मरियम समझ गई और खुद ही मेरे ऊपर सवारी करने लगी।

वो बहुत तेज-तेज उछल रही थी।

कुछ ही देर बाद मेरा जिस्म अकड़ने लगा और फिर मैं खल्लास हो गया।

जल्दी ही मेरा लंड सिकुड़ कर बाहर आ गया।

अब मरियम मेरे ऊपर लद गयी और बोली- पापा, ऐसे ही नहीं कहा था कि आप मेरे शेर हो!

कहते हुए उसने मेरे होंठों को एक बार फिर चूमा, बदले में मैंने उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी गांड की दरार में उँगली डाल दी।

वो मुस्कुराते हुए बोली- पापा, अब तो मेरा दो बार पक्का हो गया!

मैं- क्या बेटा, अब तुम अपने इस बूढ़े बाप की जान लोगी?

मरियम- कहाँ पापा, आपके इस लंड ने!

मैं- हाँ बोलो … मेरे इस लंड ने?

मरियम- कुछ नहीं पापा, घर का काम भी निपटाना है, मैं चलती हूं।

मैं- बात को अधूरी नहीं छोड़ते हैं। बताओ क्या बात है, मुझे भी सुनकर अच्छा लगेगा।

मेरे जोर देने पर मरियम कान में बोली- आपके लंड ने …

उसकी बात काटते हुए मैं बोला- इस पूरे घर में मैं और तुम, केवल दो जने ही हैं, जरा खुलकर और मेरी आँखों से आँखें मिलाकर बोलो, जिसमें मुझे मजा आए।

इस बार मरियम ने मेरी तरफ देखा और अपने होंठों को गोल करते हुए बोली- पापा, आपके इस लंड ने मेरी जान ले ली है, मेरी चूत अब इसकी गुलाम है।

कहते हुए वो मेरे ऊपर से उठी और अपनी गांड मटकाते हुए चलने लगी।

‘मरियम’ … मैंने पीछे से आवाज लगाई।

वो ठिठककर रूक गई।

“जब तुम अपनी गांड मटकाते हुए चलती हो तो मेरे दिल की धड़कन और बढ़ जाती है।”

उसने मुझे तिरछी नजर से देखा और मुस्कुराकर चल दी।

अब हम दोनों दिन के ज्यादा हिस्से में नंगे ही रहते थे।

सुमित के आने के बाद ही सब सामान्य हो पाता था।

अब मैं दूसरे दिन के लिए कुछ प्लान कर रहा था।

दिन में तो मेरा काम खाना, चोदना और सोना था।

तो दिन के इंतजार में रात जैसे जागकर ही बीतती थी।

मैं बड़ी बेचैनी से सुमित के जाने का इंतजार करता था।

अगले दिन जैसे ही सुमित ऑफिस के लिए निकला मैंने मरियम को पीछे से पकड़ लिया और बोला- आज मैं तुम्हारे साथ नहाना चाहता हूँ।

मरियम- मैं भी आपके साथ नहाना चाहती हूँ, लेकिन मेरी चूत?

मैं- क्या, तुम्हारी चूत क्या??

मरियम- पहले इसको आपका लंड चाहिए, नाशमुई, पूरी रात मुझसे करवट बदलवाती रहती है।

मैं- चलो तो … पहले तुम्हारी चूत को यहीं पर ठंडा कर देते हैं, फिर तुम्हारे साथ नहाने का मजा लिया जाएगा।

कहने के साथ ही मैं उसकी मुलायम-मुलायम चूची मसलने लगा और वो अपना हाथ पीछे करके मेरे लंड को मसलने लगी।

धीरे-धीरे हम दोनों प्यार के जोश में ऐसे खो गये कि कब हमारे जिस्म से हमारे कपड़े अलग हो गये पता ही नहीं चला।

हम दोनों की हथेलियां एक दूसरे से चिपक गईं।

मैंने मरियम को दीवार से सटाया और अपनी जीभ उसके होंठों पर चलाने लगा।

मरियम भी अपनी जीभ मेरे होंठों पर चलाने लगी।

फिर हम दोनों की ही जीभ आपस में एक दूसरे से खेलने लगीं।

उसके बाद मैंने मरियम के दोनों हाथों को ऊपर उठाया और खुद थोड़ा नीचे की ओर झुक गया।

नीचे से मैं उसकी निप्पलों पर बारी-बारी केवल अपनी जीभ फिराता रहा और मरियम अपनी आँखे बंद किये हुए केवल सीसी … सीसी … की आवाज ही निकालती रही।

अचानक मरियम चौंकते हुए बोली- पापा, मैं तो आपकी इस अदा पर मर ही जाऊँगी।

मैंने मरियम की काँख को सूँघते हुए उसे जोर से चाट लिया था जिससे मरिमय को गजब का मजा मिलने लगा इसलिए वो मेरी दीवानी होती जा रही थी।

मैंने दोनों कांखों को चाट-चाटकर उसको मदहोश कर दिया था।

उसकी हालत खराब हो रही थी और मुश्किल से ही वो कुछ बोल पा रही थी- अह्ह … पापा पापा … आह्ह आपने तो मेरी चूत में लंड डाले बिना ही उसे इतनी गीली कर दिया है!

मैं- कोई बात नहीं मेरी जान, अब तुम देखो, तुम्हारा पापा तुम्हारे रस के साथ क्या करता है।

कहते हुए मैं नीचे ऊकड़ू बैठ गया और उसकी टाँग को अपने कंधे पर रखकर उसकी चूत पर अपनी जीभ सटा दी।

अब मैं पुसी लिकिंग करते हुए उसके बहते हुए रस को चाट-चाटकर पीने लगा।

मरियम सिसकारी- आह्ह … पापाआआ … कहते हुए उसने मेरे सिर को पकड़ा और अपनी चूत से सटाकर मेरा उत्साह बढ़ाते हुए बोली- पापा, आप तो बिल्कुल पॉर्न फिल्मों की तरह ही मजा देते हो। आओ, पापा आओ … और मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपना जलवा दिखा दो।

बस फिर क्या था, उसी पल मरियम की टांगों को हवा में उठाते हुए उसी पोजिशन में मैंने अपना लंड उसकी चूत में पेबस्त कर दिया और धक्के मारने लगा।

चुदाई के चलते आह्ह … ऊह्ह … ओह्ह की आवाजों से कमरा गूंजने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने मरियम के हाथों को बिस्तर पर टिकवा दिया।

मैंने उसे टांगें खोलने के लिए बोला।

मेरी बात मानते हुए मरियम ने हाथों को पलंग पर टिकाकर अपनी टांगें फैला दीं।

अब मैंने अपने थूक को उसकी चूत पर लगाया और लंड चूत के अंदर पेल दिया।

लौड़ा पेलकर मैंने मरियम से अब टांगें आपस में चिपकाने के लिए कहा।

मरियम ने वैसा ही किया।

मरियम की चूत थोड़ा टाईट हो गयी।

वो बोली- वाह! पापा, वाह! मान गई … अनुभवी लौड़े के साथ चुदने का एक अलग ही सुख है। ऐसा लग रहा है कि पहली बार चुद रही हूँ।

मैं- देखती जा बेटा, तुझे कितने और मजे देता हूँ।

कहते हुए मेरा चुदाई का प्रोग्राम चालू था।

मरियम को तो मजा आ ही रहा था लेकिन मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।

कुछ देर बाद मैं हाँफने लगा और पलंग पर लेट गया।

मरियम मेरे ऊपर आई और लंड को पकड़कर अपनी चूत पर सेट कर दिया।

कूदते हुए अब उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी।

उसका हाथ मेरी छाती पर था और मेरा हाथ उसकी मुलायम गोल-गोल चूचियों को मसलने में व्यस्त हो गया।

मेरे लंड पर बैठकर मरियम बड़े मजे से मुझे चोद रही थी।

कभी वो उछाले मारती तो कभी मेरी जांघों पर अपने हाथ का वजन रखकर केवल थोड़ा उछाले मारने लगती।

जब वो मेरे से चिपककर अपनी गांड उचका-उचाकाकर मेरी चुदाई कर रही थी तो मैंने पूछ ही लिया- बेटा, इतना सब कहाँ से सीखा?

मुस्कुराते हुए वो बोली- पापा, मैं भी पोर्न मूवी देख लेती हूँ।

मैं- हम्म! चलो इसी बहाने मुझे मजा मिल रहा है।

वो बोली- चिंता मत करो पापा, आप मुझे मजा दो, मैं आपको मजा दूँगी।

फिर वो मुझसे अलग हुई और फिर पीठ को मेरी तरफ करके उसने एक बार फिर अपनी चूत के मुहाने को मेरे लंड पर सेट कर दिया।

लंड को चूत के अंदर लेते हुए वो फिर से उछाले मारने लगी।

उसके इस पोजीशन में आने से उसकी गांड भी बड़ी प्यारी लग रही थी।

मन कर रहा था कि पटक पटककर उसकी गांड मार लूँ।

पर फिर मैंने सोचा कि जल्दबाजी में सब मजा किरकिरा हो सकता है।

इसलिए मैं उसकी ऊपर नीचे होती गांड का आनंद लेने लगा।

लेकिन इस आनंद का मजा पल पर भी नहीं चल सका और मैं चिल्ला पड़ा- बेटा, मेरा निकलने वाला है।

वो बोली- कोई बात नहीं पापा!

कहते हुए वो झट से उतरी और फिर अपनी चूत को मेरे लंड से सटाकर मेरे सुपाड़े पर अंगूठा चलाने लगी।

उफ्फ … इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊं!

30 सेकेंड से ज्यादा नहीं लगा और मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी।

मेरा वीर्य बहू की चूत पर बिखर गया।

उसने बड़े इत्मिनान से चूत पर लगे हुए वीर्य को अपने हाथ से साफ किया।

फिर उसी वीर्य से उसने मेरे लंड की मालिश की।

फिर हम दोनों बाथरूम में जाकर एक दूसरे के जिस्मों से खेलते हुए नहाने लगे।

नहाने के बाद भी हम नंगे ही रहे।

जब सुमित के आने का समय हुआ तो मैं मरियम को कपड़े पहनाते हुए बोला- बेटा, मेरी एक इच्छा थी … क्या तुम पूरी कर पाओगी?

वो बोली- अरे पापा, कहो ना … आपकी हर बात मैं मानूँगी।

मैं- बोल तो दूँ लेकिन कहीं तुम बुरा न मान जाओ।

मैंने मरियम को अपने से सटाते हुए बोला।

उसने कहा- नहीं पापा, आपकी किसी बात का बुरा नहीं मानूँगी मैं!

मैं- मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे लंड का रस पियो और मैं तुम्हारी चूत का रस पीकर मजा लूँ।

मरियम- बस इतनी सी बात पापा? आप खुलकर कुछ भी करो, आप मेरे मुँह में लंड डालकर अपना रस उड़ेल दो, मैं तो कब से चाह रही हूँ! लेकिन एक बात आपको मेरी भी माननी पड़ेगी?

मैं- बोल बेटा?

मरियम- पापा, पहले बाथरूम में चलो, वहीं बताऊँगी।

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी।

दोस्तो, मेरी पुसी लिकिंग कहानी कैसी लग रही है, मुझे जरूर अपनी राय भेजते रहें।

मेरे लिए आप लोगों का फीडबैक बहुत मायने रखता है।

आप सभी के मेल के इंतजार में।

पुसी लिकिंग कहानी का अगला भाग: थैंक्यू पापा मेरी चूत, गांड और मुंह भरने के लिए- 4

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