ममेरे भाई ने बहन की कुंवारी चुत फाड़ दी- 4
रियल सिस्टर ब्रदर सेक्स कहानी में मैं अपने मामा के बेटे से चुदवा चुकी थी. अब मामा की बेटी भी अपने सगे भाई के लंड से अपनी विर्जिनिटी तोड़ना चाहती थी.
यह कहानी सुनें.
फ्रेंड्स, मैं आपको अपने ममेरे भाई के साथ हुई चुदाई की कहानी सुन रही थी.
कहानी के तीसरे भाग
ममेरे भाई ने बहन की कुंवारी चुत फाड़ दी
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि मेरा भाई मुझे चोदने लगा था.
उसका आधा लंड मेरी कुंवारी चुत में घुस चुका था और मेरा दर्द के मारे बुरा हाल हो गया था.
अब आगे रियल सिस्टर ब्रदर सेक्स कहानी:
मैं दर्द से तड़फ रही थी और दरवाजे से मेरी ममेरी बहन सुरभि दीदी मुझे चुत फड़वाती हुई देख रही थी.
अपनी सगी बहन पर आशीष की नजर नहीं पड़ सकी थी क्योंकि उस वक्त पोज ही कुछ ऐसा था.
फिर जब कुछ देर तक चुत रगड़वाने के बाद मेरी आह आह की आवाज कम हुई तो भाई ने अपना लंड वापिस थोड़ा सा बाहर को किया, इससे मुझे लगा कि शायद ये अपने लंड को पूरा बाहर निकाल रहा है.
तभी उसने जोरदार झटके के साथ अपना पूरा 7 इंच का लंड वापस मेरी चूत में उतार दिया.
मैं अकबका गई और मेरी तेज आवाज निकल पड़ी.
अगले ही पल मैंने अपने मुँह को बंद किया कि कहीं पड़ोसी न सुन लें.
मेरा भाई बेपरवाह होकर मेरी चुत के चिथड़े उड़ाने में लगा हुआ था और मैं जोर जोर से चीख रही थी.
भाई मेरी आखों में आंख डाल कर मेरे दर्द को देख कर खुश हो रहा था.
करीब दो मिनट बाद मैं बोली- आह उम्मम साले कुत्ते भोसड़ी के … आज तू बन गया पूरा बहनचोद!
वह हंस कर बोला- आई लव यू दीदी!
मैं बोली- कुत्ते पहले लंड बाहर निकाल.
वह बोला- बस थोड़ी देर.
अब उसने मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथ में भींच लिए और प्यार से मसलने लगा.
बीच बीच में वह मेरे बूब्स के ऊपर अकड़े हुए मेरे काले जामुन के जैसे निप्पलों को जोर से भींच देता, जिससे मेरी आह निकल जाती.
तभी मुझे जाह्नवी दीदी दिखाई दी.
उसने इशारे से बताया कि कंडोम?
मुझे एकदम से ध्यान आया और मैं आशीष से बोली- मादरचोद, तूने कंडोम नहीं पहना है!
वह बोला- हां.
मैं बोली- लंड बाहर निकाल कुत्ते!
वह बोला- पहली चुदाई में कौन कंडोम यूज करता है. मैं तेरे लिए दवाई ले कर आया हूँ. तुम दवा खा लेना … कुछ नहीं होगा.
यह सुनकर मेरी जान में जान आई.
अब उसने धीरे धीरे झटके लगाने शुरू कर दिए और प्यार से मुझे रौंदने लगा.
उसकी चुदाई से मुझे भी अच्छा लगने लगा था और मेरी चूत में अकड़न सी होने लगी थी.
कुछ देर बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
अब उसे लंड पेलने में आसानी होने लगी थी.
वह मेरे ऊपर लेट गया और धीरे धीरे झटके लगाने लगा.
मुझे भी कुछ देर बाद मजा आने लगा.
सुरभि दीदी भी गेट पर खड़ी होकर मेरी चुदाई का मजा लेने लगी.
आशीष बोला- मजा आ रहा है?
मैं बोली- हां यार, बहुत अच्छा लग रहा है, बस दर्द अभी भी हो रहा है!
वह बोला- हां यही तो मजा है चुदाई का, जिसमें दर्द और मजा साथ में आता है.
मैं उसे चूमने लगी.
वह बोला- सच्ची में दीदी, मैं बहुत किस्मत वाला हूँ, जो तुम जैसी सेक्सी बहन चोदने को मिली है.
मैं बोली- परंतु मुझे बहुत शर्म और अजीब लग रहा है कि मैंने अपने भाई से अपनी सील खुलवा ली.
आशीष बोला- कोई ना बहन, अब तो जब मन हुआ करे तो बुला लेना मुझे.
अब तक मुझे अपनी चूत में जलन होने लगी थी.
मैं आशीष से बोली- कितनी देर लगेगी तुझे?
वह बोला- बस थोड़ी देर और!
मैं बोली- दवाई खाई है क्या तूने?
वह बोला- हां यार, मुझे डर था कि कहीं तेरी चूत में लंड डाल कर तुरंत पानी ना निकल जाए. उससे ना तुझे मजा आता और ना मुझे, इसलिए दवाई खाई थी जाह्नवी!
मैं बोली- यार अब बाहर निकाल ले मुझे बहुत जलन हो रही है … मुझसे सहन नहीं हो रहा है.
उसने चूत से लंड निकाल कर मुझे दिखाया.
वह पूरा खू.न से लथपथ था.
मैंने डर के मारे नीचे देखा तो बेडशीट और मेरी जांघ खू.न से सनी थी.
वह बोला- डरो मत, दवाई खा कर सो जाना. सब सही हो जाएगा.
मैं उसका लंड हाथ से हिलाने लगी.
वह बोला- नहीं कर, पांच मिनट आराम कर लो तुम.
मैं बोली- नहीं, मैं हिला कर पानी निकाल देती हूँ.
वह बोला- मुझे आज तुम्हारी चूत में ही पानी छोड़ना है.
मैं बोली- मानेगा नहीं!
वह बोला- प्लीज यार. आज तो जीवन धन्य हो गया, जो अपनी दीदी की सील खोलने मिली.
मैं बोली- अच्छा!
वह हंस कर बोला- हम्मम … तुम नहीं समझोगी किबहन को नंगी देखना ही कितनी बड़ी बात है और फिर उसकी सील खोलने मिल जाए तो ये तो बहुत बड़ी बात है.
मैं बोली- अच्छा!
वह बोला- मन करता है कि तुमको खा जाऊं तुम्हारी मोटी जांघ, तेरी फूली हुई चूत और तेरी प्यारी पतली कमर खा जाने का मन करता है!
मैं बोली- और कुछ?
वह बोला- हां, जी करता है तुमको जीवन भर अपनी आखों के सामने ऐसे ही नंगी रखूं.
मैं बोली- ओह ये सपने!
वह हंस कर बोला- चूत में आराम हुआ कुछ?
मैं बोली- हां अब ठीक लग रहा है.
वह बोला- कोई दूसरी पोजीशन में करोगी?
मैंने हां में सर हिला दिया.
अब उसने मुझे कुतिया बना दिया और फिर पीछे से मेरी चूत में पूरा लंड डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ देर तक तो उसने प्यार से झटके मारे … फिर वह सांड बन गया.
उसने एक जोर का झटका दिया कि मैं मुँह के बल बेड पर जा गिरी और लगभग उल्टी लेट गई थी.
वह अब उठ उठ कर मेरी चूत में झटके मारने लगा.
फिर कुछ देर बाद उसने मेरी चूत में अपना सारा पानी छोड़ दिया.
मेरी चूत में उसके लंड से गर्म पानी निकलता हुआ सा महसूस हुआ तो न जाने क्यों बड़ा अच्छा लगा.
अपनी चूत में गर्म वीर्य का अहसास मुझे मस्ती दिलाने लगा था.
उसका लंड अब भी मेरी चूत में ही घुसा था. वह मेरी नंगी पीठ को चाटने लगा और बोला- मजा आया?
मैं लंबी सांस लेती हुई बोली- सच्ची भाई, आज पहली बार दर्द और खुशी एक साथ महसूस कर रही हूँ.
धीरे धीरे उसका लंड चूत से बाहर आ गया.
तभी सुरभि रूम में आ गई और गुस्से से बोली- ये सब क्या चल रहा है?
आशीष डर के कारण चादर लपेट कर खड़ा हो गया.
मैं भी एक्टिंग करती हुई दूर खड़ी हो गई.
मैं नंगी ही खड़ी थी.
सुरभि दीदी ने आगे बढ़ कर आशीष के गाल पर एक जोर का थप्पड़ मार दिया और गुस्से से बोली- क्या चल रहा है?
आशीष सुरभि दीदी के पैरों में गिर गया और बोला- सॉरी दीदी.
दीदी उसको डराने लगी कि अब वह मम्मी को सब बात बताएगी.
आशीष बोला- प्लीज दीदी.
फिर दीदी मेरे पास आई और आंख से इशारा करती हुई गुस्से में बोली- तुम यहां मामा के घर पढ़ने आई हो या उनके बेटे से चुदाने आई हो?
मैं कुछ नहीं बोली.
फिर दीदी गुस्से में बाहर जाने लगी तो आशीष ने बोल दिया- दीदी, वैसे आप भी तो इनकी चूत चाटती थी. मैं भी बताऊं मां को ये बात?
यह सुनकर सुरभि ने वापस आकर एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया.
वह बोली- मां तेरी बात पर भरोसा करेगी?
फिर आशीष को याद आया कि उसने मेरे कहने पर वीडियो पहले ही डिलीट कर दिया था.
अब आशीष बहुत डर गया और उसने सुरभि के फिर से पैर पकड़ लिए.
वह उसके पैर चाटने लगा और बोला- प्लीज दीदी माफ कर दो!
सुरभि आशीष से बोली- उठ कर बैठ पहले!
आशीष उठा तो वह आशीष की शक्ल देख कर हंसने लगी.
आशीष को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या चल रहा है.
मैं तो दूर वैसी ही नंगी खड़ी थी.
दीदी ने आशीष से कहा- मैंने तुम दोनों की पूरी चुदाई देखी है. अभी तो तुम बोल रहे थे कि बहन को चोदना किस्मत से मिलता है.
दीदी के मुँह से चुदाई की भाषा सुनते ही आशीष के चेहरे पर मुस्कान आ गई.
सुरभि बोली- चल आज अपनी किस्मत को और खुश कर ले … उतार मेरी भी चड्डी … मैंने देखा था तू बहुत अच्छे से चूत चाटता है.
आशीष किलक कर बोला- सच्ची दीदी!
सुरभि बोली- हां.
मैं बेड पर लेट गई क्योंकि मुझे चूत में बहुत दर्द हो रहा था.
सुरभि भी मेरे बगल में लेट गई.
सुरभि नीचे निक्कर पहन कर आई थी तो आशीष अब उसकी जांघ चाटने लगा.
सुरभि बोली- मादरचोद, पहले निक्कर और पैंटी उतार … फिर चूत चाट जल्दी … आग लगी है.
हमारी सामान्य आवाजें आस पास किसी को सुनाई नहीं दे सकती थीं क्योंकि नीचे टीवी चल रही थी.
अब मैं अपनी आंखों से सगे भाई बहन को सेक्स करते हुए देख रही थी.
आशीष ने जैसे ही अपनी सगी बहन सुरभि की निक्कर और पैंटी उतारी तो बोला- दीदी, कितना घना जंगल है … पहले ये साफ कर दूँ!
तो सुरभि ने उसको धीरे से लात मारी और बोली- जंगल भी तुझे चाटना है.
आशीष अपनी सगी दीदी की चूत को चाटने लगा था.
सुरभि- आज तो सगी बहन की चूत मिली है, कितना खुश है बता?
आशीष- सच बताऊं तेरी चूत उतनी मस्त नहीं हैं जितनी जाह्नवी की है!
सुरभि- अच्छा तो फिर जा अपनी जाह्नवी की ही चाट!
आशीष- अरे मतलब अभी इतनी बड़ी बड़ी झांटें हैं, तो कैसे अच्छी लगेगी?
आशीष चूत चाटने के साथ साथ अपनी बहन से बात कर रहा था.
सुरभि- अच्छा कभी मेरे नाम से मुठ तो मारी होगी तूने?
आशीष- हां बहुत बार, जब जाह्नवी नहीं आई थी तब तो आपके नाम से ही लंड हिलाता था!
सुरभि- अब क्यों नहीं?
आशीष- तुझसे डर लगता था कि तू मां से ना कह दे.
सुरभि- अच्छा जब तूने हम दोनों को लेस्बियन करते हुए देखा तो पहले जाह्नवी को ही क्यों चोदा?
आशीष- क्योंकि तुझे करता तो तू शायद ना करने देती … या पीट देती इसलिए जाह्नवी को पटाया.
अब तक सुरभि की चूत ने पानी छोड़ दिया था.
आशीष बड़े प्यार से सुरभि दीदी की झांट वाली चूत का पानी पी गया और बोला- दीदी, तुम्हारा बूब्स पीने का बहुत मन है!
सुरभि दीदी बोली- ठीक है आ जा.
उसने दीदी को उठने को बोला ताकि उनकी टी-शर्ट उतार सके.
दीदी वासना से बोली- बहुत पतली है … फाड़ दे न टी-शर्ट!
उसने टी-शर्ट फाड़ दी और ब्रा को ऊपर की तरफ करके बूब्स पीने लगा.
अब दीदी अपने भाई से मजा ले रही थी तो मैं उठ कर नीचे किचन में पानी लेने आ गई.
वापिस ऊपर आई तो देखा सुरभि दीदी अभी तक अपने भाई को अपने दूध पिलाने में लगी थी.
मैंने उनसे कहा- दीदी, 3 बज गए हैं रात के!
वह बोली- तो क्या हुआ, वैसे भी कल संडे है!
फिर दीदी आशीष से बोली- अभी चोद पाएगा मुझे?
आशीष बोला- दीदी, अभी बहुत थक गया हूं.
दीदी बोली- बस एक राउंड … मैं भी सील पैक माल हूँ.
आशीष बोला- झूठ तो मत बोलो यार! तुम पक्का कहीं और चुद चुकी हो.
दीदी बोली- तो खुद डाल कर देख ले न!
मैं उन दोनों की इस रसभरी बात को सुनकर मजा ले रही थी.
दीदी वापस बोली- मुझे बाहर बॉयफ्रेंड बनाकर करने में मजा नहीं आता यार … रिस्क रहती है और कोई करते देख ले या बॉय फ्रेंड ही परेशान करने लगे तो एक बड़ा सरदर्द है. इसलिए मैं खुद तुझसे घर में ही खुल कर चुदवाना चाहती थी ताकि किसी को कोई शक भी ना हो और हम दोनों खुश भी रहें! बस मैं सोचती थी कि तू बड़ा हो जाए तो तेरे लंड की सील मैं अपनी कुंवारी चुत से खोलूँगी. पर तूने तो आज जाह्नवी की सील को खोल दिया.
आशीष हंसने लगा.
दीदी बोली- अबे साले, हंस क्या रहा है .. कोई दवाई खा ले न!
वह बोला- और नहीं है यार दीदी, एक ही गोली लाया था.
दीदी बोली- ओके रुक .. पहले हम कुछ खा लेते हैं … फिर करते हैं.
हम तीनों उठ कर बैठ गए.
सुरभि दीदी नीचे किचन में चली गई.
आशीष मुझसे बोला- तुमको पहले से पता था इस सबका?
मैं हंस कर बोली- हां यार, हमारी शाम को प्लानिंग हो गई थी.
आशीष बोला- सही है यार … आज तुम दोनों की चूत मिल गई.
फिर वह मेरी गोदी में सर रख कर लेट गया.
और चूत पर हाथ रख कर बोला- अब तेरी मुनिया में दर्द कैसा है?
मैं बोली- दर्द तो है यार!
वह बोला- कोई बात नहीं, अभी कुछ खाना खा कर दवाई खा कर सो जाना!
मैं बोली- ठीक है मेरे राजा.
तब तक सुरभि दीदी नीचे से प्लेट में नमकीन और कुछ खाने के लिए गुजिया बिस्कुट वगैरह ले आई.
हम तीनों नंगे ही नीचे जमीन पर बैठ कर नाश्ता करने लगे.
हम दोनों लड़कियां आशीष से कुछ सवाल करने लगीं.
सुरभि- अच्छा हम दोनों मैं से कौन तुझे ज्यादा अच्छा लगता है?
आशीष- दोनों ही मस्त हो यार.
सुरभि- फिर भी.
आशीष- जाह्नवी की चूत और तेरे दूध और गांड.
सुरभि- आओ बिस्तर पर … जाह्नवी का प्यार भूल जाओगे.
आशीष- गांड मारने दे दो न दीदी.
सुरभि- सब दूंगी, सब्र कर साले हबशी. अभी पहले तुझे चिकनी चुत का मजा देती हूँ.
यह कह कर सुरभि दीदी बाथरूम में अपनी चूत साफ करके आ गई.
अब आशीष उसकी चूत देख कर बोला- यार सच्ची आपकी चुत गुलाबी तो नहीं है, पर बहुत प्यारी मक्खन सी लग रही है.
आशीष ने दवाई खा ली और बोला- जब तक दवाई असर करती है, तब तक तुम दोनों डांस ही दिखा दो.
हम दोनों ने नंगे ही कुछ गानों पर 15-20 मिनट तक डांस किया.
दीदी की चूचियां मेरी चूचियों से बड़ी थीं तो मस्त लटक लटक कर हिल रही थीं.
हम दोनों ही बहुत अच्छा डांस करती हैं.
आशीष नीचे से अपनी मम्मी की सिंदूर की डिब्बी ले आया.
दीदी ने पूछा- ये किसलिए?
वह बोला- अब से तुम दोनों मेरी पत्नी हो.
मैं बोली- पागल है क्या?
वह बोला- डर मत पगली … सिर्फ बंद कमरे में तुम दोनों मेरी रखैल या पत्नी की तरह रहोगी. बाकी सब के सामने जिंदगी भर सिर्फ दीदी.
सुरभि दीदी बोली- चल ठीक है भोसड़ी के … कर ले अपने मन की.
उसने सुरभि और मेरी मांग भर दी.
अब उसने सुरभि को कुतिया बनाया और उसकी उसकी चूत में लंड डाल दिया.
सुरभि दीदी पहले ही ककड़ी मूली गाजर डालती थी, तो उसको लंड से ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ.
फिर जब आशीष ने पूरा लवड़ा अन्दर डाल दिया तो उसकी चूत से खू.न निकलने लगा.
वह- आह आह चोद मेरे राजा … आह मेरे भाई, ये चूत कब से तेरे वीर्य के इंतजार में थी बहनचोद!
आशीष सुरभि की चोटी पकड़ कर ऐसे खींच रहा था जैसे सच में घुड़सवारी कर रहा हो.
मैं आगे जाकर लेट गई तो सुरभि दीदी मेरी चूत को चाटने लगी जिससे मुझे भी दर्द को आराम मिलने लगा.
कुछ ही देर में आशीष ने अपने से 3 साल बड़ी सगी बहन की चूत को अपने वीर्य से लबालब भर दिया.
रियल सिस्टर ब्रदर सेक्स के बाद हम तीनों ऐसे ही नंगे लिपट कर सो गए.
उसके बाद से हम तीनों ने किस किस तरह से सेक्स किया, वह सब आप पढ़ना चाहते हैं तो जरूर लिखें.
और प्लीज खुद के लंड को हमारी चुत के लिए पेश न करें, कोई छेद ढूंढ लें और उसी में रस टपकाएं.
हमारी रियल सिस्टर ब्रदर सेक्स कहानी के लिए मेल करके जरूर बताएं.
चर्चा(0)
चर्चा में शामिल होने के लिए साइन इन करें।
अभी कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले आप लिखिए!
विकल्प

