फैमिली सेक्सपूर्ण

चाची की कसी चूत को चोदकर ढीला किया- 2

0 बार पढ़ी गई10 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

मेरी पहली सच्ची सेक्सी चाची फक स्टोरी में मैंने अपनी भरी पूरी माल जैसी दूधारू चाची को अपनी वासना का आभास करवाकर, अपने लंड से उनकी चूत की गर्मी मिटाई.

दोस्तो, मैं अजय राजपूत आपको वापस अपनी प्यासी चाची की चुदाई की कहानी में स्वागत करता हूँ.

कहानी के पहले भाग

जवान सेक्सी चाची को नंगी देखा

में अब तक आपने पढ़ लिया था कि चाची मुझसे चुदवाने के लिए मुझे अपने कमरे में बुला चुकी थीं और मैं उनके रूप की तारीफ कर रहा था, जिससे वे शर्मा गई थीं.

अब आगे सेक्सी चाची फक स्टोरी:

फिर चाची मुझे देखती हुई वासना भरी आवाज में बोलीं- अजय, आज ये अप्सरा तेरी है. अगर इसे तूने खुश कर दिया तो तू ही मेरा देवता रहेगा हमेशा!

ये सुनते ही मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा दोस्तो … मैं जो सुनना चाहता था, वह सुनते ही मैंने उनको उनकी चिकनी गोरी कमर से पकड़ कर अपनी और खींच लिया.

मैं उनके होंठों के नजदीक अपने होंठ ले जाकर बोला- चाची, आपको कैसे पता है कि मैं इस सुख को पाने के लिए ही आपके पीछे पड़ा हूँ!

वे गाली देती हुई बोलीं- भोसड़ी के, जब से आया है, तभी से कभी मुठ मार रहा है … तो कभी मेरे चूचे घूर रहा है. क्या मुझे पता नहीं चलेगा कि तुझे और तेरे लंड को क्या चाहिए?

ये सुनते ही मैंने उन्हें बांहों में भर लिया और उनके रसीले गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों को चूसते हुए अपने एक हाथ से उनके चर्बीदार चूतड़ को मसलने लगा.

वे भी मेरे होंठों को खाने लगी थीं.

हम दोनों की गर्म सांसें बता रही थीं कि हम दोनों ही कितने ज्यादा प्यासे हैं.

चाची एकदम जवान लौंडिया के जैसे मेरे होंठों से चिपकी हुई थीं.

कभी वे मेरी जीभ को चूसतीं तो कभी मैं उनकी.

हम दोनों का थूक एक दूसरे के मुँह में ऐसे आ जा रहा था, जैसे मधुमक्खी शहद से चिपकी होती है.

कम से कम 15 मिनट की चूमा-चाटी के बाद चाची का एक हाथ मेरे कड़क लंड पर आ गया जो किसी हथौड़े से कम नहीं था.

लंड की सख्ती देख कर चाची ने मुझे बिस्तर पर धक्का देते हुए मेरे शॉर्ट को उतार दिया.

उन्होंने मेरा वी-शेप वाली फ्रेंची को देखा तो वे चौंक गईं क्योंकि उसमें मेरा लंड इतना तनाव में था कि किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था.

पहले तो चाची कुछ नहीं बोलीं.

वे मेरी फ्रेंची के ऊपर से ही मेरे लंड की सुगंध को सूंघने लगीं और एकदम से चाटने लगीं.

उन्होंने मेरे लौड़े को चड्डी के ऊपर से ही तब तक चाटा, जब तक वह पूरा थूक से सन न गया.

उफ़ … चाची की जुबान कच्छे के ऊपर से इतनी मस्त चल रही थी कि मैं बस यही सोचने लगा था कि मेरे नंगे लौड़े का हश्र होगा.

ये सब सोच सोच कर मेरा तो हाल बेहाल हो गया था.

तभी चाची ने मेरी चड्डी को अपने मुँह से खींचते हुए नीचे उतार दिया, मेरे 8 इंच के तने हुए लौड़े को चड्डी की कैद से आजाद कर दिया.

लंड किसी तम्बू के बांस की तरह खड़ा हो गया था और गुस्से से फनफना रहा था.

चाची लंड का ये रूप देख कर हैरान हो गई थीं और वे अपनी आंखें खोल कर चौंक गयी थीं.

वे उसे अपने बालिश्त से नापती हुई बोलीं- भेनचोद रंडी के … साले इतने दिन से कहां था तू, इस दानव जैसे लंड को अपनी रंडी चाची से कहां छुपा रखा था?

चाची के मुँह से इस तरह की भाषा को सुनते ही मेरा जानवर और ज्यादा ऐंठ गया और मैं उनके एक दूध को मसलते हुए बोला- कुतिया साली रांड … लगता है काफी चुदासी होकर भटक रही है लंड के लिए … आज मेरा ये लंड तेरी टांगों के बीच जाकर तेरी सारी गर्मी निकाल देगा.

चाची ने मेरे मुँह से यह सब सुना तो वे लपक कर मेरे लौड़े को अपने मुँह में लेने लगीं.

मैं भी अपना लंड उनके हलक तक जबरदस्ती डालने लगा.

वे किसी जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी थीं और मेरी जांघों को भींच रही थीं.

वे मेरे लंड को अपने मुँह के अन्दर से निकालने की कोशिश कर रही थीं.

मगर मेरी जोरदार पकड़ ने चाची को मुँह से लंड नहीं निकलने दिया.

मैंने उनके मुँह को अपने लंड की लंबाई का अंदाजा करवा कर ही अपने लंड को बाहर किया.

मेरे लौड़े की चोट उनके गले के अंतिम छोर तक लग रही थी तो उनके मुँह से सिर्फ थूक बहा जा रहा था और वे किसी रंडी की तरह हांफती हुई कुतिया लग रही थी.

वे जोर जोर से सांस लेती हुई बोलीं- साले रंडी के जने जान से मारेगा क्या अपनी चाची को!

मैं ये सुनते हुए उनके मुँह के करीब गया ओर होंठों को चूसते हुए बोला- साली छिनाल … मैं तो बस ये दिखा रहा था कि मेरा लंड कितना बड़ा है!

मेरे मुँह से ये सुनते ही चाची बोलीं- साले, तेरा लंड तेरे चाचा से बहुत बड़ा है. तेरे चाचा का तो इससे आधा भी नहीं है.

यह कह कर चाची ने वापिस मेरे लंड को अपने मुँह की गहराई में भर लिया और गुप्प घुप्प करके चूसने चाटने लगीं.

उफ़ यार क्या मस्त लंड चाट रही थीं चाची … किसी उम्दा किस्म की रंडी की तरह … ऐसा लग रहा था जैसे वे पहले किसी कोठे पर काम करती रही हों.

चाची के 20 मिनट लंड चूसने के बाद में अपनी चरम सीमा पर आ गया.

मैंने चाची को बिना बताए उनके मुँह में ही अपना सरा माल झाड़ दिया.

उन्होंने भी मेरे वीर्य को ऐसे पिया जैसे कोई गन्ने का रस पी रही हों. उन्होंने वीर्य की एक भी बूँद नीचे नहीं गिरने दी.

लंड चूस कर वे मेरे बगल में लेट गईं और अपनी चिकनी बगल की महक सुंघाने लगीं.

उस गंध को सूंघ कर मैं थोड़ी ही देर बाद पुनः गर्म होने लगा.

अब मैं चाची के ऊपर चढ़ गया और उनके बड़े बड़े मम्मों से खेलते हुए ऐसे चूसने लगा था, जैसे मेरे आगे कोई बड़े बड़े रसीले आम लटके हों, जिनमें से ढेर सारा रस निकल रहा हो.

दूध चूसने के बाद मैं नीचे को सरका और मेरी जुबान चाची की नाभि में चलने लगी.

मैं उसे खूब मस्ती से चाटने लगा.

चाची के पूरे जिस्म मैं एक अलग ही किस्म का करंट दौड़ने लगा था.

वे बिस्तर पर पूरी नागिन के जैसे मचलने लगी थीं.

उनके मुँह से मदभरी सिसकारियां निकलने लगी थीं ‘उफ्फ़ आह चाट अजय आह साले तूने ये सब कहां से सीखा मेरे राजा… इतना मस्त मजा देता है तू तो … तेरे चाचा ने आज तक कभी ऐसे नहीं किया. आज से इस जिस्म पर सिर्फ तेरा हक़ है … चाट अपनी चाची का जिस्म आह!’

ये सुनते सुनते मैं पागलों की तरह नाभि चाटते हुए उनकी भट्टी जैसी गर्म लावा टपकती चूत में अपनी लम्बी जुबान को रगड़ने लगा.

उफ्फ् … उनकी उस चूत का स्वाद अभी भी मेरे मुँह में ही आ रहा है … क्या मस्त नमकीन स्वाद था यार .. जैसे मै कोई स्ट्रॉबेरी खा रहा हूँ या उसका जूस पी रहा हूँ.

ऐसे ही उनकी चूत को दस मिनट चाटने के बाद चाची की चूत ने इतना गाढ़ा लावा छोड़ा मेरे मुँह में कि मजा ही आ गया.

मैं उस रस को पूरा पी गया.

उधर चाची ने मेरा सर अपनी चूत में एकदम से दबा रखा था.

वे अपने दोनों पैरों को अकड़ाती हुई मुझे दबाने लगी थीं और अचानक से वे निढाल हो गईं.

पर मैं कहां रुकने वाला था.

मेरा लौड़ा तो चाची की चूत के रस की महक से एकदम तन गया था.

मैंने झट से पोज बनाया और अपने 8 इंच के लंड को चाची की उस नरम चुदासी चूत के छेद में रगड़ने लगा था.

चाची भी लंड की गर्मी से पुनः गर्म होने लगीं.

वे बोलीं- अब मत तड़पाओ राजा, अपनी इस प्यासी रंडी चाची की आग को बुझा दो.

यह सुनते ही मेरे अन्दर जोश बढ़ गया और मैंने अपने लंड का टोपा चाची की चूत में घुसेड़ दिया.

अभी चाची सुपारे की मोटाई को समझ पातीं कि मैंने दूसरे झटके में अपना पूरा लंड चाची की टाइट चूत में पेल दिया.

मेरा समूचा लंड चाची की चूत में जाते ही उनकी आंख से आंसू निकल आए.

और वे जोर से चीखती हुई मुझे गाली देने लगीं- आह भोसड़ी के मर गयी मादरचोद रंडी के जने … आह निकाल अपना लंड आह बहुत दर्द हो रहा है!

वे मुझे पीछे धकेलने लगीं, पर मेरे अन्दर तो अब हवस का जानवर जाग चुका था.

मैं पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था.

बल्कि चाची के होंठों को चूसते हुए उन्हें प्यार करने लगा.

फिर धीरे धीरे चाची खुद अपनी गांड हिलाती हुई मेरा लंड चूत में लेने लगीं.

उनकी हरकत से मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया.

अब मैंने भी अपने लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

चाची के दोनों चूचों को चूसते हुए मैं अपनी स्पीड बढ़ाने लगा, जैसे जैसे मेरी स्पीड बढ़ने लगी … चाची की भी सिसकारियां तेज होती गईं.

वे मुझे अपना आशिक़ समझ कर मुझे चूमने लगीं और मेरा लंड भी पूरा जोश में आ गया था.

मैंने अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए चाची की चूत को इस बेकदरी से चोदा कि वे दस मिनट के अन्दर मेरे लंड पर झड़ गईं.

मेरा लंड अभी भी सांड के लंड के जैसे अकड़ा हुआ था और उनकी चूत का भोसड़ा करने में लगा रहा.

कभी मैं उन्हें उठा कर चोदने लगता तो कभी पटक कर उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें चोदने लगता.

चाची हांफती हुई मुझसे बोलीं- मेरे बस की और नहीं है. अब रहम कर मुझे छोड़ दे कमीने.

मैंने कहा- अभी क्या हुआ चाची? अभी तो मेरे लंड ने आधी चुदाई भी नहीं की है!

वे बोलीं- साले आधा घंटा से चोद रहा है और मैं इतनी देर में दो बार झड़ चुकी हूँ.

मगर सेक्सी चाची फक करते हुए मेरा अभी तक नहीं हुआ था, तो मैंने भी देरी ना करते हुए जैसे ही अपनी स्पीड बढ़ा दी.

चाची की चूत से मूत की धार छूटने लगी.

उनकी मूत की धार निकलने के बाद 5 मिनट के अन्दर मैं भी उनकी ही चूत में झड़ कर उनके ऊपर निढाल होकर गिर गया.

चाची मेरे सर को सहलाती हुई तेज तेज सांसें लेती हुई हांफ रही थीं.

हम दोनों की सांसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि एक दूसरे की दिल की धड़कन तक सुनाई पड़ रही थी.

हम पसीने से पूरा तरबतर हो गए थे.

मैंने चाची की तरफ प्यार से देखा, तो वे भी काफी खुश नज़र आ रही थीं.

क्योंकि ना जाने कितने महीनों बाद उन्हें एक मर्द का लंड मिला था.

मैंने पूछा- मजा आया?

वे हंस कर बोलीं- एक बार में ही चुत ढीली कर दी.

उस रात मैंने चाची को चार बार चोदा और उनकी चुत की न केवल आग बुझा दी बल्कि कचौड़ी सी सुजा दी.

उस दिन के बाद अब जब भी चाची की चुत में लंड की जरूरत होती, वे मुझे बुला लेतीं और मेरे फोन करने पर भी आ जातीं.

हम दोनों ने तमाम होटलों और दोस्त के फ्लैट में और ना जाने कहां कहां सेक्स किया.

तब से वे मेरी चाची कम, बाजारू रंडी ज्यादा बन चुकी थीं.

दोस्तो, मैं यहां पर एकदम नया हूँ. ये मेरी पहली सेक्स कहानी है.

आपको मेरी सेक्सी चाची फक स्टोरी पसंद आयी होगी.

प्लीज जरूर बताएं.

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