गे सेक्सपूर्ण

बुआ के बेटे ने गांड फाड़ी

0 बार पढ़ी गई16 मिनट का पाठलगभग ८ घंटे पहले

Xxx गे स्टोरी में मैं बुआ के घर गया तो उनके बेटे की नजर मेरी गांड पर थी. मैं भी खुश हो गया. मैंने अपने फुफेरे भाई से गांड मरवा ली.

नमस्कार दोस्तो, मैं गुल्लू एक बार फिर से हाजिर हूँ अपनी एक और एस-फकिंग स्टोरी लेकर.

मेरी पिछली सेक्स कहानी

सहपाठी दोस्त से गांड चुदाई के संबंध

में आप सबने पढ़ा होगा कि कैसे मैंने अपने सहपाठी से यौन संबंध बनाए और गांड मरवाने-मारने लगा.

आइए चलते हैं नई Xxx गे स्टोरी की ओर … जो कि मेरी बड़ी बुआ के छोटे बेटे नोरंग के साथ हुई चुदाई पर आधारित है.

बात गर्मियों की छुट्टियों की है.

उस समय मैं स्कूल से फ्री हो गया था और छुट्टियों के कारण घर पर ही रहता था.

मैंने स्कूल का सारा होमवर्क पूरा कर लिया था.

तेज गर्मी की वजह से घर से बाहर निकलना भी मुश्किल था, तो घर पर ही रहता.

इस वजह से मैं बोर होने लगा.

मुझे सेक्स करने का भी मन होता मगर घर में सब रहते थे तो मैं अपने सहपाठी को भी घर नहीं बुला सकता था.

इसी तरह छुट्टियां बीतने लगीं.

एक दिन मेरी मां ने मुझे सुझाव दिया- तुम दो-तीन दिन बुआ के यहां चले जाओ. तो तुम्हारा मन थोड़ा बहल जाएगा … साथ में तुम वहां सबसे मिल भी लेना.

मैंने सोचा कि ये ठीक है.

मैं अगले ही दिन बुआ के यहां जाने को तैयार हो गया.

अभी 20 दिन की छुट्टियां बाकी थीं तो मैंने सोचा कि दो तीन दिन तो सही से कटेंगे.

मेरी बुआ का गांव हमारे गांव से 20 किलोमीटर दूर है.

वहां जाने के लिए 2 बार बस बदलनी पड़ती है.

मैं अकेला ही घर से चल पड़ा.

लगभग 2 घंटे बाद मैं बुआ के घर पहुंच गया.

मैंने उधर जाकर देखा तो वहां चिनाई का काम चल रहा था.

फूफा जी खुद मिस्त्री थे.

सब लोग मुझे देखकर खुश हुए और सबने मेरा स्वागत किया.

आपको पहले मेरी बड़ी बुआ की फैमिली के बारे में बता दूँ.

उनकी फैमिली में बुआ-फूफा जी, उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं.

उनमें से बड़ी बेटी की शादी हो गई थी. उसे दो बेटे भी हो गए थे.

उसका बड़ा बेटा भी बुआ के पास यहां अपने ननिहाल में रहता था.

यानि मेरा भांजा भी वहीं था.

बुआ की बड़ी बेटी (जिसकी शादी हो गई) बहुत सुंदर थी.

उसका जिस्म पूरा भरा हुआ था.

गोल-गोल गाल, लाल-लाल होंठ, बड़े-बड़े बूब्स और पतली कमर के बिल्कुल नीचे उभरी हुई मतवाली गोल-गोल गांड.

वह मेरी बहन किसी अप्सरा से कम नहीं थी.

पर शादी और दो बच्चे हो जाने के बाद अब उसमें पहले वाली बात नहीं रही.

अब वह मोटी हो गई है.

उससे बड़ा लड़का, यानि बड़ा भाई सोहन है.

तीसरे नंबर वाली मेरी बहन का नाम सौम्या है.

वह भी गजब की सुंदर है. उसने अपनी सुंदरता को अभी भी कायम रखा है.

वह एकदम गोरी-चिट्टी है.

उसका फिगर का साइज नॉर्मल ही है, लगभग 32-28-34 का फिगर है उसका.

उसकी आंखें, होंठ, गाल, बाल, चाल सब कमाल हैं.

वह किसी हीरोइन से कम नहीं लगती है.

एक बात और .. उसने मुझे एक बार हमारे यहां मेरे ताऊ जी के घर बाथरूम में मुट्ठी मारते हुए देख लिया था.

उस समय मैं लंड पर साबुन लगा कर उसकी याद में मुट्ठी पेल रहा था.

बाथरूम का गेट ठीक से बंद नहीं था.

उसी वक्त वह किसी काम से बाथरूम में आई और वह इतनी जल्दी से आई कि मुझे अपना हाथ रोकने का भी मौका नहीं मिला.

मैं पूरा नंगा खड़ा था.

मेरा लंड भी पूरा खड़ा था, जिस पर साबुन का झाग लगा हुआ था.

वह मेरे इतनी पास आ गई थी कि मेरी धड़कन एकदम से तीन गुना बढ़ गई थी.

उसने मुझे एक बार देखा, मेरे लंड की तरफ देखा … और फिर स्माइल करती हुई बाहर निकल गई.

मगर मैंने अपना काम नहीं छोड़ा. मुट्ठी मार कर ही बाहर आया.

तो सेक्स कहानी की तरफ वापस चलते हैं.

बुआ की छोटी बेटी कुछ खास नहीं.

उससे छोटा बेटा है, जो मुझसे 2-3 साल बड़ा है.

उसका नाम मैंने पहले ही बता दिया है … नोरंग.

बुआ के यहां आने के बाद उन्होंने बड़े भाई को फोन किया और मेरे घर से मेरे और कपड़े लाने को कहा.

क्योंकि मैं वहां सिर्फ 2 पैंट-शर्ट ही लेकर आया था. मैं दो या तीन दिन रुकने के हिसाब से आया था.

लेकिन बुआ बोलीं- तेरी छुट्टियां लंबी चलने वाली हैं, तो तू यहीं रह कर अपने भाई बहनों के साथ मन लगा.

बुआ ने फोन किया तो बड़ा भाई शाम को मेरे घर से मेरे कपड़े लेकर चला गया.

उसके पास बाइक थी.

बुआ ने अब मुझसे सारी छुट्टियां अपने पास ही बिताने को बोला क्योंकि फूफा जी मुझसे काम लेना चाहते थे.

मेरा मन नहीं था वहां रहने का … क्योंकि मुझे पता था कि यहां ईंटें और सीमेंट, कंक्रीट आदि उठाना पड़ेगा.

मगर मेरे घर वालों ने भी उनको बोल दिया कि मुझे वहां रखें, तो मैं क्या करता.

अब काम करते हुए दो दिन निकल गए.

शाम को थकान के कारण नींद भी जल्दी आ जाती थी.

एक दिन शाम के वक्त मोटर पाइप से पानी डाल रहे थे.

मैं और नोरंग साथ में पानी से नहाने लगे.

हमारे शरीर पर सिर्फ अंडरवियर थी.

पानी का पाइप उसके हाथ में था, तो वह मेरे ऊपर पानी डाल कर मुझे नहला रहा था.

हम दोनों छत पर थे.

वहां चौबारे जो अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए थे, उनमें हम दोनों ही थे.

वह कभी मेरे ऊपर पानी डालता, तो कभी पाइप मुझे देकर खुद पर पानी डालने को बोलता.

ऐसा करते-करते उसने एक बार पीछे से मेरी गांड पर पानी डालना शुरू कर दिया और पाइप के आगे थोड़ी उंगली लगाकर प्रेशर से मेरी गांड की दरार पर पानी डालने लगा.

उसकी इस हरकत से मुझे अंदाजा हो गया कि मेरी गांड ने उसकी सेक्स उत्तेजना को भड़का दिया है.

मैं जानबूझ कर उसकी तरफ पीठ करके खड़ा हो गया.

अब जैसे ही वह मेरी गांड पर पानी डालता, मैं भी गांड पीछे की तरफ निकाल कर हिला देता.

फिर जब पाइप मेरे हाथ में होता तो मैं भी उसके लंड पर पानी डालने लगता.

अभी तक हम पानी से ही खेल रहे थे, एक-दूसरे को छुआ नहीं था.

मगर इशारा मिल गया था कि वह मेरी गांड पर मोहित हो गया है.

अब मेरे मन में उसका लंड अपनी गांड में लेने की इच्छा होने लगी थी.

मैंने उसका लंड अंडरवियर में ही देखा था तो सही से पता नहीं चला कि कितना बड़ा है.

कुछ देर बाद रात हो चली थी.

सब खाना खाकर सोने की तैयारी में थे.

हम सब भाई-बहन छत पर चारपाई डालकर सोते थे.

मैं और नोरंग साथ ही सोते थे.

हम सब सो गए.

मगर आज शाम का वह पानी का खेल मुझे कहां सोने दे रहा था.

उस खेल के कारण मेरी गांड का करंट जाग गया था और अब मेरी गांड लंड मांगने लगी थी.

मैं नोरंग की तरफ गांड करके सो गया और गांड को उसके लंड से बिल्कुल सटा दिया.

मगर इसका उस पर मुझे कोई असर नहीं दिखा, शायद वह सो गया था.

फिर मैंने करवट बदलकर अपनी गांड आसमान की तरफ कर दी और अपना हाथ (जो उसकी तरफ था) उसके लंड पर रख दिया.

थोड़ी ही देर में मेरे हाथ ने कमाल दिखाया और उसका लंड खड़ा होने लगा.

अब मुझे रास्ता साफ दिखाई दिया तो मैंने वापस करवट बदल ली और गांड उसके लंड पर सैट कर दी.

शायद वह नींद से जाग गया था तो उसने मेरी गांड पर हाथ रखा और सहलाने लगा.

पर अब मैं नींद में होने का नाटक करने लगा.

थोड़ी देर सहलाने के बाद उसका लंड मुझे मेरी गांड पर महसूस होने लगा.

मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होने से उसकी हिम्मत और बढ़ गई.

उसने धीरे से मेरे पायजामे का नाड़ा खोल दिया और वह धीरे-धीरे से मेरे पायजामे को नीचे खिसकाने लगा.

वह पूरी तरह से नीचे खिसकाने में कामयाब नहीं हो रहा था तो मैंने उसे अपनी गांड थोड़ी सी उठाकर सहायता कर दी.

वह समझ गया कि लाइन क्लियर है.

अब बारी थी मेरी अंडरवियर उतारने की … तो उसने बेखौफ मेरी चड्डी पर हाथ लगाया और उसे भी नीचे खिसकाने लगा.

मैंने फिर से उसी प्रकार गांड उठा कर उसकी मदद की.

उसके लंड के आगे अब मेरी गांड बिल्कुल नंगी हो गई थी.

ये सब चादर के अन्दर हो रहा था.

उसने अपने लंड को मेरी गांड की दरार में घिसना शुरू कर दिया.

मुझे भी उसके लंड के आकार का अहसास हुआ तो पता लग गया कि ये लंड मेरी गांड फाड़ कर रख देगा.

पर अब कुछ नहीं हो सकता था इसलिए मुझे डर लगने लगा.

मगर मेरी गांड तो लंड लेना चाहती थी तो मैंने थोड़ी हिम्मत दिखाई और सोचा कि जो होगा देखा जाएगा.

उसने अपने लंड पर और मेरी गांड पर थूक लगा दिया.

मेरी धड़कन तेज हो गई.

उसकी भी सांसें तेज चल रही थीं जो मुझे महसूस हो रही थीं.

कुछ पल बाद उसने लंड मेरी गांड पर सैट किया और अन्दर डालने लगा.

पहली बार में उसका लंड फिसल गया.

उसने दोबारा से सैट किया और दबाव डाला.

मुझे लंड मेरी गांड में जाता लगा तो मैं थोड़ा सा खिसक गया और लंड फिर से फिसल गया.

मेरी जान में जान आई क्योंकि मुझे उसका लंड कुछ ज्यादा मोटा लग रहा था.

जब तीसरी बार उसने ट्राई किया तो उसका लंड फिसल कर मेरी जांघों के बीच में घुस गया.

ये बात मुझे पता थी कि उसका लंड मेरी गांड में नहीं गया है.

उसे लगा था कि उसका लंड मेरी गांड में चला गया.

वह धीरे-धीरे झटके देने लगा.

मुझे पता था कि अगर मैं हिला तो उसे पता चल जाएगा कि उसका लंड कहां जा रहा है.

मैं चुपचाप वैसे ही लेटे रहा.

उसने अपनी स्पीड थोड़ी तेज कर दी, पर ज्यादा जोर नहीं लगाया.

उसे भी डर था कि पास में भैया और दोनों बहनें सो रही थीं.

कुछ 7-8 मिनट के बाद उसका लंड लावा उगलने को हो गया, तो उसने अन्दर नहीं छोड़ा.

उसने करवट बदलकर अपना वीर्य नीचे गिरा दिया.

फिर उसने मेरी अंडरवियर ऊपर की, मेरा पायजामा भी पहना दिया.

अब वह सो गया और मैं भी उसके लंड के अहसास को याद करके सो गया.

सुबह सब उठ गए, तो सब कुछ नॉर्मल था.

खाना-पीना करके सब काम पर लग गए.

अब जब दोपहर हुई तो सब फिर से खाना खाने लगे.

क्योंकि काम करते हुए भूख ज्यादा लगती है.

गर्मी भी खूब चटक रही थी, तो सबने दबा कर खाना खाया और आराम करने लगे.

नोरंग उठकर ऊपर चौबारे में आ गया.

मैं भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ा.

अब उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखा, तो मैं भी समझ गया.

उसने मुझसे पूछा- रात को क्या हुआ, कुछ पता है?

मैंने भी अनजान बनते हुए कहा- नहीं तो, मुझे कुछ नहीं पता!

उसने मुझसे कहा कि मैंने रात को तुम्हारी गांड मारी थी, तुम्हें शायद नींद में नींद में पता नहीं चला.

तो मैंने शर्मा कर गर्दन नीचे कर ली.

फिर मैंने धीरे से पूछा- माल कहां निकाला?

उसने कहा- वह मैंने नीचे गिरा दिया.

मैंने कहा- तुम्हारा कितना माल निकलता है?

तो उसने कहा- बहुत निकलता है और दूर तक पिचकारी छोड़ता है!

मैं चुप हो गया.

अब उसने कहा- तेरा कितना निकलता है?

मैंने कहा- तुम देखोगे?

उसने कहा- हां, मुझे देखना है.

मैंने भी कहा- मुझे भी तुम्हारा देखना है.

उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया.

मैंने उसका लंड अब सही से देखा था.

उसका लंड लंबा तो सामान्य ही था .. लगभग 4.5 इंच का होगा, मगर मोटा ज्यादा था.

सहपाठी के लंड से दो गुणा मोटा था.

उसके टोपे के ऊपर चमड़ी कटी हुई थी.

मुझे ये देखकर हैरानी हुई.

मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चमड़ी कहां गई?

वह बोला- बचपन में ही मेरी कोई दिक्कत थी, तो डॉक्टर ने ऑपरेशन करके ये चमड़ी काट दी थी.

अब तक की कामक्रीड़ा की बातों से मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था.

हम दोनों मुट्ठी मारने लगे.

करीब 5 से 7 मिनट मुट्ठी मारने के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया.

मेरा पानी ज्यादा दूर नहीं जाता और थोड़ा पतला भी निकलता है.

वह ये देखकर हंस पड़ा और बोला- ये देख, कैसे निकलता है!

अब उसने अपना पानी छुड़ाना शुरू किया, तो उसकी पिचकारी लगभग 5 फीट दूर जाकर गिरी और वीर्य भी सफेद गाढ़ा निकला … मलाई जैसा.

मैंने उससे कहा- एक बात बोलूँ?

तो उसने कहा- हां बोलो.

मैंने उसे बताया- कल रात को मैं सोने का नाटक कर रहा था!

तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई.

वह बोला- मतलब तुम्हें सब कुछ पता है?

मैंने कहा- हां, मुझे सब पता है.

वह और खुश हो गया.

फिर मैंने उसे बताया कि कल रात तुमने मेरी गांड नहीं मारी बल्कि जांघों में ही घुसाकर काम चला लिया था.

उसे बड़ा अफसोस हुआ.

उसने कहा- क्या तुम्हें अच्छा लगा था?

तो मैंने शर्मा कर स्माइल पास कर दी.

वह सब कुछ समझ गया और बोला- कोई बात नहीं, आज रात को मैं तुम्हारी गांड मारूँगा!

मैंने भी उसे हामी भर दी, तो वह खुश हो गया.

बाद में हम सब काम में व्यस्त हो गए.

अब शाम होने को आ गई थी.

बुआ जी ने उसे आवाज लगाई- नीचे आओ.

वह नीचे चला गया.

बुआ जी ने उससे कहा- भैंसों के लिए खेत से चारा ले आओ. आज मुझे कोई और काम है.

वैसे लगभग चारा लेने बुआ जी और छोटी बेटी चंदा ही जाती थीं.

वह बोला- मैं अकेला नहीं जाऊंगा.

तो बुआ जी बोलीं- सब काम कर रहे हैं, तू अकेला ही चला जा.

तो वह बोला- मैं गुल्लू को साथ लेकर जाऊंगा.

तो सब मान गए और बुआ ने मुझे भी उसके साथ खेत जाने को बोला.

हम बैलगाड़ी पर सवार होकर खेत को चल पड़े.

थोड़ी दूर जाने के बाद उसने मुझे बताया कि खेत में वह मेरी गांड मारेगा.

चारा तो वह अकेला भी लेकर आ सकता था मगर मुझे साथ लेकर आने का कारण था … मेरी गांड.

मुझे भी अब जल्दी होने लगी कि कब हम खेत पहुंचेंगे और कब मेरी गांड में लंड जाएगा.

ये सोचते-सोचते हम खेत पहुंच गए.

शाम हो गई थी; अंधेरा होने को था.

हमने बैलगाड़ी को खड़ा किया और चारा काटने वाली जगह पहुंच गए.

चारे में ज्वार काटनी थी.

ज्वार भी बहुत लंबी-लंबी थी और साथ में घनी भी थी.

अगर कोई दो कदम भी अन्दर घुस जाए तो किसी को दिखाई न दे.

उसने जाते ही मुझे ज्वार में घुसने को बोला.

मैंने वैसा ही किया.

वह भी मेरे पीछे ही अन्दर घुस गया.

अब उसने इधर-उधर देखा कि हम किसी को दिखाई तो नहीं दे रहे.

जब उसे सब ठीक-ठाक लगा तो उसने मुझे पैंट उतारने को बोला.

मैंने ठीक वैसा ही किया और पैंट की हुक खोलकर पैंट नीचे कर दी; अंडरवियर भी नीचे कर दी.

उसने भी अपनी पैंट खोलकर नीचे गिरा दी.

मैंने देखा कि उसका लंड बिल्कुल खंबे की तरह खड़ा हुआ है.

उसने मुझे घुमाया और नीचे झुकने को बोला.

मैंने वैसा ही किया.

मैंने गांड उसकी तरफ करके झुक गया.

मेरे दोनों हाथ और दोनों पैर जमीन पर थे.

उसने अपने खड़े लंड पर थूक लगाया और मेरी झुकी गांड पर भी थूक गिराया.

उसने अपने लंड को मेरी गांड पर सैट किया और झटका लगा दिया.

उसका लगभग आधा लंड मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुस गया.

जितनी तेजी से लंड अन्दर घुसा, उससे भी ज्यादा स्पीड से मैंने अपनी गांड आगे को उछाल कर वापस लंड बाहर निकाल दिया.

मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया था और तारे जैसे टिमटिमाने लगे थे.

गांड तो फट ही गई थी, मैं जोर से चिल्लाया भी था.

मगर उस समय मेरी चीख सुनने वाला नोरंग के अलावा कोई नहीं था.

मैं रोने लगा.

आंखों में आंसू आने लगे थे, दर्द से बुरा हाल था.

मैं अपनी गांड पकड़ कर बैठा था.

नोरंग के चेहरे पर मुस्कान थी.

अब उसने मुझे संभाला और सहलाया.

मुझे शांत होने में लगभग 20 मिनट लगे.

इतनी देर में उसने चारा भी काट लिया था.

उसने चारा इस प्रकार काटा कि हम दोनों काटी गई जगह पर आराम से लेट सकें और हमें कोई देख भी न सके.

अब उसने अन्दर की तरफ चारे वाली चादर बिछा दी, मुझे उस पर लेटा दिया और मेरी पैंट खोल दी.

मैंने उसे मना किया मगर वह नहीं माना.

मुझे भी पता था कि ये आग ही ऐसी है, जो जल्दी से नहीं बुझती.

उसने मुझे मना लिया और मैं फिर से गांड मरवाने को तैयार था.

इस बार उसने मुझे डॉगी स्टाइल में सैट किया.

अब उसने मेरी गांड और अपने लंड पर थूक लगाया.

मैंने उससे कहा- भाई, धीरे-धीरे डालना!

उसने हंस कर कहा- मैं नहीं डालूँगा, अबकी बार तुम खुद अपनी मर्जी से इसे अपनी गांड में ले लेना!

यह कह कर उसने मेरी गांड पर अपना लंड सैट करके पकड़ लिया.

उसने मुझसे कहा- अब अपने आप को पीछे धकेलो!

मैंने वैसा ही किया.

मैं धीरे-धीरे से उसके लंड पर अपनी गांड खिसका रहा था.

देखते ही देखते मैंने पूरा लंड अपनी गांड में ले लिया.

अब पूरा लंड गांड में जा चुका था. हल्का-हल्का दर्द हो रहा था.

भाई ने अपना काम शुरू कर दिया.

वह धीरे-धीरे झटके देने लगा.

थोड़ी देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा.

उसका लंड आराम से अन्दर-बाहर हो रहा था.

अब भाई ने स्पीड भी बढ़ा दी थी.

वह पूरा बाहर लंड निकाल निकाल कर अन्दर तक पेल रहा था.

मेरे मुँह से अपने आप ‘आआ … ऊऊफ … आस … ऊऊओ…’ की आवाजें आने लगी थीं.

ये आवाजें मैं धीमे स्वर में निकाल रहा था.

मेरी आवाज से भाई भी उत्तेजित होकर पूरी लय में आकर मेरी ठुकाई कर रहा था.

करीब 15 से 20 मिनट की टपाटप के बाद भाई अपना गर्म-गर्म लावा मेरी गांड में ही छोड़ने लगा.

उसका गर्म रस मुझे बड़ा ही आनंदित कर रहा था.

बाद में भाई ने अपना लंड निकालकर मेरे मुँह में भी दिया.

मैंने नाटक करते हुए बड़ी मिन्नत के बाद उसे थोड़ा सा चूसा.

उसके बाद हम घर आ गए.

अगले दिन से रोज रात को मेरी गांड में मेरे भाई का लंड जाने लगा.

एक हफ्ते तक रोजाना रात को मेरी एक बार गांड बजती रही.

फिर छुट्टियां खत्म होने को आई थीं तो मैं अपने घर आ गया.

उसके बाद मैंने भाई से सिर्फ एक बार और गांड मरवाई.

असल में भाई ने ही मेरी गांड का गुड़गांव बनाया था.

तो दोस्तो, आपको मेरी एस-फकिंग स्टोरी कैसी लगी?

मेल जरूर करना.

जहां तक हो सकेगा, मैं जवाब जरूर दूँगा और एक बात और कोई भी मेल में गांड मारने की इच्छा जाहिर न करे.

अगर इस Xxx गे स्टोरी में कोई गलती हो तो माफ करना और कहानी में मजा आए तो मुठ मारकर लौड़ा साफ कर लेना.

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