विधवा मौसी को मेरे लंड से प्यार हुआ- 2
Xxx मौसी चुदाई कहानी में कार में आते हुए मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया था. अब घर आकर मेरा मकसद जल्दी से मौसी की चूत का मजा लेना था.
फ्रेंड्स, मैं शरद आपको अपनी विधवा मौसी की चुदाई की कहानी का मजा देने के लिए पुनः हाजिर हुआ हूँ.
कहानी के पहले भाग
मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मौसी ने चलती कार में मेरे लंड को पकड़ लिया था.
अब आगे Xxx मौसी चुदाई कहानी:
मैं हैरान था कि मेरी मौसी जो मुझसे उम्र में दस साल बड़ी थीं, वे मेरा खड़ा लंड पकड़े हुई थीं.
उनकी इस हरकत ने मुझे थोड़ी हिम्मत दी और अब मुझे लगा कि मौसी ने मुझे अपने इस गदराये बदन से खेलने की इजाज़त दे दी है.
लेकिन ड्राइवर के होते हुए कुछ भी ऐसा नहीं कर सकते थे, जो कि उसे पता लग जाए.
इसलिए मैंने अपना दाहिना हाथ मौसी जी के पेट रखा और उसे सहलाने लगा.
यकीन मानिये दोस्तो, पेट छूने पर लगा जैसे कि मक्खन पर हाथ फिरा रहा हूं.
मैंने ये शुरू ही किया था कि टोल बूथ आ गया और ड्राइवर ने सहजता से पूछा- भइया, फास्ट टैग में पर्याप्त पैसे तो बचे होंगे ना?
ड्राइवर की इस बात ने हम दोनों की उस हरकत को रोक दिया जो मौसी और बेटे के रिश्ते की हद पार करने वाली थी.
अब मौसी वापस से उठकर बैठ गयीं और बहुत नार्मल से अंदाज में मुझसे पूछा- बेटा शरद, घर आने वाला है क्या? मुझे तो जाने कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला!
मैंने भी उसी अंदाज में जवाब दे दिया- हां मौसी जी कुछ ही मिनट में घर आने ही वाला है. आप थक भी गयी थीं तो नींद आ गयी होगी. कोई बात नहीं, मैं भी थोड़ी देर के लिए सो गया था!
मुझे अब थोड़ा डर और थोड़ी खुशी दोनों हो रही थी.
डर इसलिए क्यूंकि अभी जो हुआ था वह हमारे रिश्ते के लिहाज़ से बिल्कुल गलत था और खुशी इसलिए क्यूंकि मौसी अब एक महीना हमारे घर में हमारे साथ ही रहने वाली थीं.
बहरहाल हम लोग घर पहुंचे.
पहुंचते-पहुंचते रात के दस बज गए.
घर पर मां पापा काफी परेशान लग रहे थे कि गाड़ी खराब होने पर हम दोनों दिक्कत में आ गए होंगे … वगैरह वगैरह.
ये सब बातें भी हुईं.
मौसी काफी दिनों बाद अपनी बहन (यानी मेरी मां) और जीजा जी (यानी मेरे पिता जी) से मिल रही थीं तो उन सबने देर रात तक बातें की.
इधर मेरे दिमाग में इतनी उथल-पुथल थी कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.
मां ने मुझे आवाज़ लगाई- शरद ओ शरद बेटा … इधर आना ज़रा!
‘हां मां बोलिए!’
‘बेटा मैंने तेरा और मौसी का बिस्तर तेरे ही कमरे में लगा दिया है, जाकर बता दे अपनी मौसी को … और ड्राइंग रूम से सामान उठाकर अपने कमरे में रख दे उसका!’
सामने से मौसी आते दिखीं तो मां फिर से मुझसे बोलीं- और हां बचपन की तरह कहानियां सुनाने की जि़द ना करने लगना अपनी मौसी से!
ये सुनकर सब हंसने लगे.
मैं भी मुस्कुरा दिया और सामान लेकर अपने कमरे के लिए जीना चढ़ने लगा.
कमरे में पहुंचा तो कमरे में बिस्तर लगा हुआ था, मैंने सामान रखा और कपड़े बदलने लगा.
मैं कपड़े बदल ही रहा था और मौसी अन्दर आ गयीं.
मैं एकदम से हड़बड़ा गया तो मुझे असहज होता देख मौसी थोड़ा मज़ाकिया अन्दाज़ में बोलीं- अरे मेरे सामने पैदा हुआ है तू, मुझसे क्या शर्माना, तुझे तो अपनी गोदी में सुलाया है, जैसे आज तूने सुलाया था कार में मुझे!
इतना बोलकर वे हल्की सी मुस्कुरा कर हंस दीं और लेट गयीं.
गर्मी का मौसम था तो मैं भी नेकर और बनियान पहन कर एसी चलाकर लेट गया.
एसी में ठण्डक लगने पर कम्फर्टर ओढ़ने के लिए एक खुद … और एक मौसी को दे दिया और लेटते ही ना जाने कब नींद आ गयी, पता ही नहीं चला.
हम दोनों ही सीधे सुबह उठे.
अगले दिन मैं अपने बिजनेस के लिए बाहर निकल गया और मौसी मां के साथ गप्पें लड़ाने और काम करने में मशरूफ रहीं.
दो तीन दिन ऐसे ही चलता रहा और मैं मौसी की तरफ से किसी हरकत या किसी इशारे की पहल का इंतज़ार करता रहा लेकिन कुछ हुआ नहीं.
मुझे लगा कि शायद मौसी को उस शाम की गलती का अहसास हो गया हो और अब वह इस गलती को दोहराना या और बड़ा नहीं बनाना चाहती हों.
लेकिन वह कहते हैं ना कि जब आप किसी चीज़ को पूरी शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने में लग जाती है!
मुझे कुछ ऐसा ही लगा अपने और मौसी के केस में.
चार दिन ऐसे ही निकलने के बाद एक रात जब मैं डिनर करके लेटने के लिए कमरे में आया और अपने लैपटाप पर काम कर रहा था, तो दिनभर की थकान और काम के चलते मुझे हल्का सरदर्द होने लगा.
मैंने लैपटाप बन्द किया.
उतने में मौसी भी सब निपटा कर रूम में आ गयीं और उन्होंने टीवी चला दी.
मैंने लैपटाप रख दिया और लेटने लगा
तो मौसी बोलीं- क्या हुआ शरद आज बड़ी जल्दी काम निपटा कर सोने लगा?
‘कुछ नहीं मौसी आज सर में थोड़ा दर्द है इसलिए!’
‘अरे ला, मैं तेल लगाकर मालिश कर देती हूं तेरे सर की … आराम मिल जाएगा!’
‘अरे नहीं मौसी, इसकी कोई ज़रूरत नहीं, सो जाऊंगा तो खुद ब खुद सही हो जाएगा!’
‘मैं तुझसे पूछ नहीं रही बेटा, बता रही हूं कि मैं ऐसा करने जा रही हूं!’
इतना कहकर उन्होंने ड्रेसिंग टेबल से नारियल तेल निकाला और मेरे पीछे बैठकर मेरे सर की चम्पी करने लगीं.
मसाज करते करते उनकी चूचियां कभी कभी मेरे सर से लग रही थीं तो मुझे अच्छा लग रहा था.
थोड़ी देर मसाज के बाद भी मेरा सर दर्द पूरा ठीक नहीं हुआ तो मैंने बोला कि ‘बस करिये मौसी आप थक जाएंगी. अब मैं लेट जाता हूं, सोने पर ही ठीक होगा ये!’
तो मौसी बोलीं कि ठीक है लेट जा तू, मैं तेरे बगल में लेटकर तेरा सर धीरे धीरे दबाती रहूंगी … तू आराम से सो जाना!
मैं लेटा और मौसी मेरे ठीक बगल मेरे दाहिनी ओर बेड से टेक लगा कर मेरा सर दबाने लगीं.
वे कुछ ऐसी पोजीशन में थीं कि उनकी चूचियां मेरे मुँह के ऊपर थीं और मुझे वह मोटी बड़ी चूचियां साफ साफ दिख रही थीं.
टीवी की मद्धम रोशनी में उनको देखकर ना जाने क्यूं मन मचलने लगा.
मन किया कि बस इनको ब्रा से आज़ाद कर अपने मुँह में भर लूं अपने हाथों से मसल दूं, लेकिन कुछ था जो मुझे रोक रहा था.
लेकिन मन ने आज कुछ हिमाकत करने की ठान ली थी.
एक बात मन में ये भी थी कि शायद मौसी इस बार मेरे कुछ करने का इंतज़ार तो नहीं कर रहीं.
यही सोचते हुए मैंने मौसी की तरफ करवट ले ली और अपना बांयां हाथ उनकी कमर पर रख दिया.
करवट लेने पर मेरा मुँह भी उनकी तरफ हो गया और उनकी एक चूची में धंस गया.
मौसी मेरी इस हरकत के लिए शायद तैयार थीं.
उन्होंने कोई विरोध ना करते हुए अपने दोनों स्तनों को मेरे मुँह में धंसा दिया और मुझसे लिपट गयीं.
बहुत दिनों बाद किसी महिला का आलिंगन मिला था मुझे … वह भी पूरी पकी जवानी वाली मेरी मौसी का.
अब आग दोनों तरफ लगी थी.
कमरा बन्द था, किसी के आने का डर भी नहीं था, टीवी की आवाज़ की वजह से कोई भी आवाज़ बाहर जाने का डर भी नहीं था.
बस अब कमी थी तो बस उस शर्म और डर के भागने की, जो हम दोनों के बीच थी.
मौसी किसी नागिन की तरह मेरी बांहों में मचलने लगीं. वे बार बार कपड़ों के ऊपर से ही अपनी चूत का एरिया मेरे लंड पर रगड़ने लगीं.
सच ही कहते हैं कि कमर के नीचे कोई उम्र नहीं होती और कोई रिश्ता नहीं होता.
मौसी के अन्दर की औरत … और मेरे अन्दर का मर्द आज सारे रिश्ते, सारी मर्यादा के ऊपर उठ कर सिर्फ अपने बदन की आग मिटाना चाह रहे थे.
मैंने हिम्मत की और सोचा कि मौसी से बात की जाए, उसमें और मज़ा आएगा.
मैंने बोला- मौसी!
‘हां.’
‘उस दिन लंड पकड़ कर कैसा लगा था?’
मौसी ने मेरे होंठ चूसते हुए कहा- बहुत अच्छा लगा था मेरे लाल!
‘सच मौसी!’
‘हां शरद.’
अब मैंने आव देखा ना ताव और मौसी को नंगी करने लगा.
‘मुझे पूरी नंगी कर देगा क्या मेरे लाल?’
‘हां मौसी पूरी नंगी करके तेरा बदन चाटूंगा पूरा!’
‘क्या क्या चाटेगा रे?’
‘तेरे होंठ, तेरे गाल तेरी गर्दन, तेरे बूब्स, तेरे अंडर आर्म्स, तेरे हाथ, तेरा पेट, तेरी नाभि, तेरी कमर, तेरी गांड, तेरी चूत, तेरे पैर सब कुछ!’
ये सुनकर मौसी तो जैसे पागल हो गयीं.
वे बोलीं- इतने साल से नहीं चुदी मेरे लाल … किसी ने छुआ तक नहीं, जल रही हूं मैं … लंड की प्यास में, घुसेड़ दे अपना मोटा लंड मेरे मुँह में और पिला दे अपनी मौसी को अपने लंड का रस!
मौसी के ये सब बोलने पर मेरा लंड फनफना गया और तुरन्त मौसी को लिटाकर उनके सर के नीचे दो तकिया लगा कर उनके ऊपर आकर उनके मुँह में लौड़ा दे दिया.
मेरे रूम में मैं अपनी सीमा मौसी को लंड पिला रहा था, वे मेरी तरफ नशीली आंखों से देख रही थीं.
उनको देखते हुए मैं उनका मुँह चोद रहा था.
अब लंड तैयार था अपनी मौसी की चूत भोगने के लिए … लेकिन मुझे अपनी मौसी की चूत का रस चखना था.
मैंने मौसी से कहा- सीमा डार्लिंग, अब जल्दी से घोड़ी बन जा!
‘हां शरद तेरी सीमा तेरे लिए घोड़ी जरूर बनेगी!’
ये बोलकर मौसी तुरन्त किसी एक्सपर्ट रांड की तरह अपनी गांड उठाकर, पैर फैलाकर घोड़ी बन गईं.
अब मौसी की गांड का गोल छेद और हल्की फटी, बाहर की ओर निकली हुई चूत मेरे मुँह के सामने थी.
मैंने बिना किसी देरी के मौसी की चूत में मुँह दे दिया और पागलों की तरह चाटने लगा.
चूत में जीभ डालकर चाट रहा था, तभी मौसी ने कहा- मेरे लाल तेरे मौसा के बाद आज तू चाट रहा है अपनी मौसी की चूत, अपनी मौसी की गांड का छेद भी चाट मेरे लाल!
मौसी की ये बातें सुनकर और उत्तेजित हो गया मैं … और मौसी को चाट चाट कर और मजे देने लगा.
मेरे चाटने भर से मौसी एक बार झड़ गयीं और मेरे मुँह पर सारा रस छोड़ दिया.
इतने दिन बाद चिपचिपा सा कुछ निकला मौसी की बुर से … लेकिन उत्तेजना में मैं सब चाट गया.
मौसी ने कहा- शरद, अब चोद दे अपनी सीमा को!
मेरा भी लंड फटा जा रहा था सीमा को चोदने के लिए …
मैंने सीमा मौसी को वापस से लिटाया और उनके ऊपर आकर उनकी चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया.
उनको दबादब चोदने लगा.
मौसी भी अपने चूतड़ उछाल उछाल कर चुदाई का मज़ा ले रही थीं और पागलों की तरह मेरा चेहरा पकड़ कर मुझे चूमे जा रही थीं, जैसे कि उनकी कोई मन्नत पूरी हो रही हो.
थोड़ी देर चोदने के बाद मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूं तो मौसी से मैंने बोला- सीमा मौसी, लंड पियोगी मेरा?
वे बोलीं- हां पिला दे मेरे लाल … सारा जूस पिला दे!
मैंने सारा वीर्य मौसी के गले में टपका दिया, वे बड़े प्यार से मुझे देख रही थीं और मेरे लंड पर एकदम एक्सपर्ट रंडी की तरह अपनी जीभ चला रही थीं.
Xxx मौसी चुदाई के बाद हम दोनों यूं ही नंगे ही चिपक कर सो गए.
अगले दिन उठने के बाद हम दोनों ने एक दूसरे को प्यार से चूमा.
फ्रेश होकर नहा धो लिया, ब्रेक फास्ट करने के बाद मौसी ने मुझसे कहा- शरद जाने से पहले मुझसे मिलकर जाना, कुछ बात करनी है!
मुझे लगा कि जाने क्या बात हो गयी.
मैं काम निपटा कर अपने कमरे में तैयार होने आ गया, तैयार हुआ ही था कि मौसी आ गयीं.
मैंने पूछा कि मौसी क्या बात थी?
उन्होंने कहा- शरद मुझे तुमसे प्यार हो गया है. वह भी बहुत ज्यादा वाला!
मैं बस उन्हें देख रहा था.
‘अब तुम चाहे जो भी समझो मैं तुम्हारी हो गयी हूं!’
मैं मुस्कुरा दिया.
‘तुम जैसे चाहो मुझे रखो … तुम शादी भी कर लेना तो भी मुझसे अलग मत होना.’
मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया.
‘हर अकेली जगह, हर बन्द कमरे में मैं तुम्हारी बीवी हूँ, जैसे मन चाहे, जब मन चाहे चोद लेना … पर कभी छोड़ना मत!’
सीमा मौसी ये सब बोलती हुई एकदम से रोने लगीं.
उनको रोती हुई देख मैंने उनको जोर से गले लगा लिया.
मैंने कहा- आप अब बस मेरी हो हमेशा साथ रहूंगा आपके, कभी अलग नहीं होउंगा!
फिर मैंने उनको स्मूच किया और जाने को होने लगा तो उन्होंने रोक लिया और कहा कि जाने से पहले मुझे रोज़ लंड चुसा कर जाओगे!
उनका इतना कहना था कि सुनकर मेरा लंड टाइट होने लगा.
उन्होंने झट से दरवाज़ा बन्द किया.
पैंट की चेन खोलकर मेरा लंड निकाल लिया और अपने मुँह में लेकर झड़वा लिया.
एक महीने तक हर रोज़ मौसी ने दिन में जाने से पहले मेरा लंड चूसा और अब हम जब भी मिलते हैं, अकेले में मौसी मेरी बीवी होती हैं.
मेरी इस Xxx मौसी चुदाई कहानी पर आपके विचारों का स्वागत है.
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