ब्रा-पैंटी चुराने के शौक ने चुत दिलाई
यंग आंटी सेक्स कहानी में मैं ट्यूशन पढने जाता तो मैडम की ब्रा पैंटी को सूँघता था. उनकी पड़ोसन ने मुझे देख लिया. उसने मुझे अपने घर आने का इशारा किया.
नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम रोहन है.
मेरी उम्र 26 साल की है.
मैं दिल्ली के मयूर विहार में रहता हूँ.
मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ और एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत हूँ.
अच्छी खासी कमाई होने के बावजूद मुझे कुछ अच्छी और कुछ बुरी आदतें हैं.
मेरी अच्छी आदतों में जिम जाना और दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाना शामिल है.
लेकिन मुझे एक बुरी आदत है और वह ये कि अगर किसी के आंगन में ब्रा या पैंटी दिखी तो मैं उसे चुरा लेता हूँ.
ये आदत मुझसे छूटती ही नहीं है.
करीब-करीब 6 साल से मैंने बहुत सी ब्रा-पैंटी चुराई हैं.
लगभग सभी कलर और सभी टाइप की ब्रा और पैंटी चुराई हैं और उनका अच्छा-खासा कलेक्शन मेरे पास है.
चलो, अब ब्रा पैंटी चुराने से मुझे चुत कैसे मिली, इस बात पर आते हैं.
यह यंग आंटी सेक्स कहानी मेरे कॉलेज के दिनों से शुरू होती है.
मैं इंजीनियरिंग के पहले साल में था.
हमारे कॉलेज में एक मैडम थीं जो हमें मैथ्स पढ़ाती थीं.
उनका नाम सुप्रिया था.
वे दिखने में तो एकदम खूबसूरत थीं लेकिन बहुत सख्त थीं.
उनके सामने हम सब स्टूडेंट्स थोड़ा डर कर रहते थे.
एक बार क्लास में सरप्राइज टेस्ट हुआ, जिसमें मेरे कम मार्क्स आए थे.
मेरे बाकी विषयों की स्टडी देखकर मैडम ने मुझे स्टाफ रूम में मिलने के लिए बुलाया.
उनके बुलावे पर मैं उनके पास गया.
उन्होंने मुझे बोला- रोहन, क्यों मेरा पढ़ाया हुआ समझ में नहीं आता क्या?
मैंने बोला- मैडम, मुझे मैथ्स समझ में नहीं आती है और मैं गणित में कमजोर हूँ.
मैडम ने पूछा- तुम्हारा घर कहां है?
मैंने बताया.
तब सुप्रिया मैडम ने कहा- सोमवार से तुम कॉलेज खत्म होने के बाद मेरे पास एक्स्ट्रा क्लास के लिए घर पर आया करो. वैसे भी तुम्हारा घर मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है.
यह कहते हुए उन्होंने मुझे अपने घर का पता बताया.
मैंने हां कर दी और सोमवार से उनके यहां जाने लगा.
मैडम का घर अन्दर से काफी अच्छा था.
अब मैडम मुझे पढ़ाने में लग गई थीं.
मैडम की इस मदद से मैं काफी कुछ सीख गया था.
एक दिन मैडम ने मुझे क्लास खत्म होने के बाद थोड़ी देर रुकने को बोला.
वे अपने घर के किचन से कुछ खाने को लाईं और मुझे देने लगीं.
मैंने उन्हें मना कर दिया.
लेकिन उनकी बेटी ने बोला- आज मेरा जन्मदिन है. आप खा लीजिए न भैया!
अब मैंने उस बच्ची का मन रखने के लिए स्नैक्स खा लिया.
पानी पीने के बाद मुझे बड़ी जोर से पेशाब लग आई थी.
तो मैंने मैडम से वॉशरूम के लिए पूछा.
उन्होंने किचन से बाईं ओर मुड़ने को कहा.
मैंने भी वैसा ही किया.
बरामदे से जाते वक्त मेरी नजर मैडम की काली ब्रा और लाल पैंटी पर पड़ गई.
मैंने बाथरूम से वापस आते वक्त दोनों को मस्ती से सूँघा और वापस आ गया.
अब मैं रोज यहीं करने लगा.
एक दिन मेरी नजर मैडम के बाजू वाले घर पर पड़ी. वहां से एक औरत मेरी उस ब्रा पैंटी सूंघने वाली हरकत को देख चुकी थी.
उसे देख कर मैं थोड़ा डर गया था कि कहीं मेरे जाने के बाद ये औरत मैडम को सब बता न दे.
लेकिन मैं कुछ कर ही नहीं सकता था तो बस अपने मन में डर बिठाए वापस आ गया.
अगले दिन गया तो मेरी गांड फट रही थी.
लेकिन मैडम ने अगले 2 दिन तक कुछ नहीं कहा तो मैं सामान्य हो गया.
मैंने समझ लिया था कि उस औरत ने मैडम से कुछ नहीं कहा.
तीसरे दिन मैडम के घर से मेरी क्लास खत्म होने के बाद जब मैं घर जाने को निकला, तब उस औरत ने मुझे इशारे से रोका और अपने घर पर आने का इशारा किया.
मैं डर गया और उस औरत के पीछे पीछे चल दिया.
फिर उसके घर में जाकर जब मैंने उस औरत को पहली बार ध्यान से पूरा देखा तो वह कोई परी से खूबसूरत सी थी.
उसके 34 इंच के उठे हुए चूचे, कमर 30 की और लगभग 36 इंच की भरी हुई गांड थी.
हाय क्या कमाल की माल लग रही थी.
उसने मुझसे पूछा- ये क्या करते रहते हो तुम सुप्रिया की अंडरगारमेंट्स के साथ? मैं पिछले 15 दिन से देख रही हूँ.
मैं उनसे बोला- माफ कर दीजिए मैडम … आगे से नहीं करूंगा … पर आप प्लीज ये सब मैडम को मत बताइएगा.
इतना कह कर मैं रोने लगा.
उसने मुझे चुप कराया.
फिर वह बोली कि अपना नाम बताओ?
मैं- रोहन.
वह- अच्छा रोहन सुनो, मैं किसी को कुछ भी नहीं बताऊंगी … बस तुम ये सब करना बन्द कर दो.
मैंने कसम देकर इस काम को बंद करने का कहा और वहां से निकलने लगा.
जाते वक्त मैंने पीछे मुड़कर एक बार और उनका शुक्रिया किया, साथ में उनका नाम भी पूछ लिया.
उसने अपना नाम ऋतु बताया.
अब मैं पढ़ने के लिए सुप्रिया मैडम के घर तो आता लेकिन कभी भी उनके बाथरूम की तरफ नहीं जाता.
शायद ये बात ऋतु को भी समझ में आ गयी थी कि मैं पढ़ने के बाद सीधा घर निकल जाता हूं.
एक दिन उसने मुझे घर जाते हुए देख बीच रास्ते में रोक लिया और बोली- तुम तो एक बार में ही बात समझ गए!
मैंने बोला- आपने समझ दी ही ऐसी कि मैं समझ गया.
वह हंसकर बोली कि कितने नादान बनते हो.
मैं वहां से जाने लगा तो ऋतु ने मुझसे कहा- मेरा एक काम करके दोगे?
मैंने बोला- कौन सा काम?
उसने कहा- देखो, मुझे कुछ सामान यहां से हटवाना है, तुम मेरी मदद कर दो!
मैंने जवाब दिया- मेरे एग्ज़ाम नज़दीक आ रहे हैं, मुझे पढ़ना है, प्लीज़ मुझे घर जाने दो!
ऋतु थोड़ी गुस्से में बोली- अच्छा बेटा! वैसे हरकतें करते वक़्त तुझे पढ़ाई का कुछ याद नहीं आता था!
अब मैं मजबूर था, तो मैंने उसकी मदद करनी शुरू कर दी.
उसने कमरे में ऊपर की टांड़ पर कुछ सामान रखा था, जिसे उसने निकाल कर देने का कहा.
तो मैंने ऊंचाई पर चढ़ने के लिए एक सीढ़ी लगाई और उस पर चढ़ कर सामान निकाल निकाल कर उसे देने लगा.
अचानक सीढ़ी पर मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मैं नीचे गिर पड़ा.
मेरे सिर में चोट लगी और मेरा पैर भी मुड़ गया.
मेरे सिर से खून निकलता देखकर ऋतु थोड़ी टेंशन में आ गई और बोली- तुम रुको! मैं डेटोल से तुम्हारा घाव साफ़ कर देती हूँ!
उसने डेटोल और एक क्रीम लाकर मुझे लगाई, जिससे मेरा दर्द कुछ कम हुआ.
मैंने कहा- मुझे घर जाने दो.
ऋतु ने रोकते हुए कहा- कुछ देर रुक जाओ, थोड़ा आराम करके जाना … तुम्हारे पैरों में सूजन है, इसलिए रुकना सही रहेगा.
उसके कहने पर मैंने घर फोन करके बता दिया कि क्लास थोड़ी देर और चलेगी.
मैं सोफ़े पर बैठा रहा.
ऋतु मेरे लिए हल्दी वाला दूध लाई.
बातों-बातों में मैंने पूछा- घर में अकेली रहती हो क्या?
उसने जवाब दिया- नहीं, मेरे पति दिल्ली पुलिस में हैं. उन्हें ट्रैकिंग का बड़ा शौक है. इसलिए मसूरी गए हैं दोस्तों के साथ. परसों वापस आने वाले हैं.
मैंने कहा- ओह्ह अच्छा!
फिर जैसे ही मैं जाने के लिए उठने लगा तो मुझसे चला ही नहीं गया.
मैं लड़खड़ा कर गिर गया.
यह देख कर ऋतु ने मुझसे बेडरूम में कुछ देर आराम करने को कहा.
फिर ऋतु ने सहारा देते हुए मुझे बेडरूम तक पहुंचाया.
जब वह मुझे पकड़े हुई थी तब मैं ऋतु की ख़ुशबू ले रहा था.
उसकी महक इतनी ज्यादा खास थी कि मैं उसकी महक से मदहोश हो गया और जानबूझ कर उसके आगोश में चला गया.
फिर कमरे में आकर उसने मुझे बेड पर बिठाया.
उस वक़्त मैंने ऋतु के मम्मों को कुछ इस तरह से छूने का बहाना करते हुए मसला कि वह थोड़ी असहज होकर मुझसे दूरी बना कर मेरे बाजू में बैठ गई.
एक दो पल वह असहज रही, फिर उसने मुझे देखा और कहा- लेट जाओ!
मैंने ड्रामा करते हुए कहा- हां अभी लेट जाऊंगा … जरा रुको.
वह समझी कि मुझे कुछ दिक्कत ज्यादा हो रही है, तो वह वापस मुझे पकड़ कर पूछने लगी कि कैसा लग रहा है?
मैंने कुछ नहीं कहा.
वह बोली- तुम कुछ दूसरी बात करो, अपनी चोट से दिमाग हटाओ.
मैंने उसकी बात मान ली और उससे अन्य विषय पर बात करते हुए पूछा- आपकी कोई संतान नहीं है क्या?
मेरे इस सवाल पर ऋतु का चेहरा उतर गया और वह रोने लगी.
मैंने उसे चुप कराने की कोशिश की और कहा- क्या हुआ ऋतु?
ऋतु बोली- मेरे सास-ससुर मुझे बांझ कहते हैं! इसलिए वे अपने बड़े बेटे के साथ रहते हैं. उनके पास एक बेटा और बेटी है. मैं उन्हें पोते-पोती नहीं दे पा रही हूँ.
इतना कहते हुए उसने मेरे कंधे का सहारा ले लिया.
उस वक्त मैं खुद सहारा लेने का ड्रामा कर रहा था, तो मैंने भी उसे अपने कंधे से सहारा देते हुए खुद को उससे चिपका लिया.
मैं दीवार से टिका था और वह मेरे सीने से लगी थी. मैंने उसे अपनी बांहों से पकड़ा हुआ था.
वह भी मुझे चिपक कर सुबकने लगी.
मैंने उसे चुप कराते हुए गले से लगा लिया.
उसकी गर्म सांसों से मुझे उत्तेजना होने लगी और मैं अपने हाथ से उसके हाथ को सहलाने लगा. उसने कुछ भी विरोध नहीं किया तो मुझे साहस मिल गया.
कुछ देर यूं ही उसे सहलाने के बाद मेरे लंड में सख्ती आने लगी थी जो शायद उसे समझ आ गई थी.
उसने अपने हाथ को मेरी पैंट पर रख कर मेरे लंड को अपनी उंगलियों से टच किया.
मैं समझ गया कि ऋतु को भी मुझसे कुछ चाहिए है.
यह सोच बनते ही मुझसे रहा नहीं गया और मैंने सीधा अपना मुँह ऋतु के मुँह पर रख दिया.
पता नहीं ऐसा क्या हुआ कि हम दोनों एक-दूसरे को चूमते ही चले गए.
कुछ देर बाद उसने वासना भरी नजरों से मुझे देखा तो मैं और ज्यादा जोश में आ गया.
उस वक्त मेरा लंड काफी सख्त हो गया था.
मैंने अपने घाव की चिंता किए बिना अपनी पैंट की चैन खोल दी.
ऋतु ने मेरी पैंट के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरी पैंट के हुक को भी खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया.
मैंने भी पैर फैला कर अपने लौड़े को ऋतु के हवाले कर दिया.
उसने भी बिना संकोच के मेरे लंड पर अपना मुँह लगाया और उसको अपने मुँह में भर कर भींच लिया.
मेरी आह निकल गई और वह मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अन्दर बाहर करने लगी.
‘उम्म उम्म गुप् उप गुप्’ की आवाज से मैं और भी दीवाना होता चला गया.
मेरा लंड अगले कुछ ही मिनट में ही जवाब देने लगा.
मैंने हल्के से कहा- हटो ऋतु, मुझे निकलना है!
वह मेरी बात को अनसुनी करती हुई लंड चूसती रही.
मैंने समझ लिया था कि आज ये मेरी रबड़ी खा कर रहेगी.
बस ये सोचना हुआ ही था कि मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और मेरा पूरा माल ऋतु के मुँह में निकल गया.
वह बिना किसी हिचकिचाहट के मेरे लंड से निकले वीर्य को खा गई और उसने लौड़े को चूस कर साफ कर दिया.
लंड चूसने के बाद वह मुझे देखने लगी.
मैं एकदम से चुदासा हो उठा था.
अब मैं उसके कपड़े उतारने लगा.
सबसे पहले मैंने उसके टॉप को निकाल दिया तो वह मेरे सामने नीली ब्रा में थी.
क्या मस्त रसभरे चूचे थे उसके … शायद 34 साइज़ के ही रहे होंगे.
मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को दबाना चालू कर दिया और मस्ती से मसलने लगा था.
उस वक्त मैं ऋतु की कामुक आवाज को सुन रहा था.
वह मादक आवाजें निकाल रही थी- हम्म हम्म और जोर से रोहन … अहह अहह अहह उम्म उम्म.
फिर मैंने ऋतु की ब्रा को निकाल दिया और उसके संतरे जैसे एक चूचे अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
हाय क्या कमाल का स्वाद था!
वह भी मेरे सर के बालों को सहलाती हुई मुझे अपने दोनों दूध बारी बारी से चुसवा रही थी.
कोई पांच मिनट तक मम्मों से खेलने के बाद मैं उसकी लैगिंग्स को निकालने लगा.
उसकी नीली पैंटी एकदम गीली हो गई थी तो मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को चाटने लगा.
उम्म उम्म करती ऋतु ने अपनी पैंटी निकाल दी और चित लेट कर नंगी चूत चुसवाने लगी.
उसके कंठ से निकल रहा था- मुझे जल्दी से चोद दो मेरे राजा!
जैसे ही उसने चुदाई के लिए बोला, तो मैंने भी अपने सख्त हो चुके लंड को ऋतु की चुत पर रख दिया.
वह वासना से मुझे देखने लगी और चुदाई का इशारा करने लगी.
मैंने चुत की फांक में लंड के सुपारे को रगड़ा और एक करारा धक्का लगा दिया.
उस धक्के से ऋतु की चीख निकल गई- उईई मां मर गई! आह आराम से डालो न रोहन!
उसने गांड उचकाई तो मेरा लंड चुत से बाहर आ गया.
मैंने थोड़ा सा थूक अपने लंड को लगाया और पुनः चुत के अन्दर पेल कर धीरे धीरे चुदाई करने लगा.
कुछ ही देर में उसकी ‘उम्म उम्म अहह …’ की आवाज से पूरा कमरा गूंज उठा.
करीब 5 मिनट चोदने के बाद मैंने स्पीड बढ़ा दी और जैसे ही झड़ने को हुआ तो अपने लंड का पूरा माल ऋतु की चुत में ही डाल दिया.
यंग आंटी सेक्स से संतुष्ट हो गई थी.
ऋतु की चुदाई के बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और मैं उसके घर से निकल आया.
उस दिन के बाद से अब जब कभी भी मेरा चुदाई का मन करता है तो मैं ऋतु को कॉल करके उसे बाहर किसी कमरे में चोदने ले आता हूं.
कुछ दिन बाद ऋतु का फोन आया कि वह हमल से हो गई है.
मैंने कहा- बधाई हो.
वह बोली- अब तुमको मुझे भूलना पड़ेगा.
मैं चुप हो गया.
अब देखते हैं कि उसके बच्चा होने का बाद वह कब से वापस चुदाई के लिए कहती है.
मुझे उसका दूध पीने का मन भी है, मगर वह सब अभी बहुत दूर की बात है.
आपको मेरी यंग आंटी सेक्स कहानी कैसी लगी. प्लीज जरूर बताएं.
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धीरज 90
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