अन्तर्वासनापूर्ण

मैं मनपसन्द लड़के से कैसे चुदी- 1

0 बार पढ़ी गई10 मिनट का पाठलगभग ९ घंटे पहले

बूब शो स्टोरी में मैंने नया फ्लैट लिया. एक दिन कार साफ़ करने एक नया लड़का आया. वह बहुत सेक्सी था. मैंने झीनी ड्रेस पहनी थी पर उसने मेरे जिस्म को नहीं देखा.

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पूर्व कथा : सहेली के दोस्त संग थ्रीसम सेक्स

फ्रेंड्स, मैं पिंकू आपको आज वह सेक्स कहानी सुना रही हूँ जिसमें मेरे पसंदीदा चोदू लकी से मेरी मुलाकात हुई थी.

बूब शो स्टोरी तब शुरू हुई थी जब मैं नई नई ही पैराडाईज सोसाइटी में शिफ्ट हुई थी.

ये एक नई सोसाइटी थी, अभी काफी घर खाली पड़े थे, कुछ एक घरों में ही गाड़ियां थीं बाकी सब कैब, या बाईक्स वाले ही थे, जो की सस्ते किराए के लालच में वहां शिफ्ट हुए थे.

मैं तो बेहतर फ्लैट भी ले सकती थी लेकिन मुझे एकांत और खुली हवा पसंद है, इसलिए शहर से दूर यह शांत इलाका मुझे एकदम पसंद आ गया.

एक दिन सुबह सुबह कॉल बेल बजने पर मैंने मेड की उम्मीद में बिना ब्रा पैंटी के झीनी सी फ्राक वाली नाइटी पहने पहने ही दरवाजा खोला.

लेकिन दरवाजे पर साधारण कपड़ों में लेकिन काफी कुछ गुड लुकिंग और ऐथलेटिक बॉडी वाले नौजवान को देख कर सकुचा गई.

‘गाड़ी की चाबी दे दीजिये मेम साहब, गाड़ी अन्दर से साफ करनी है!’

उसने मेरी भड़कीली ड्रेस और उसमें से झांकते मेरे ब्रेस्ट्स और झीनेपन से झांकती मेरी बुर की झलक को इग्नोर करते हुए जमीन को ताकते हुए कहा.

‘क्यूँ पुराने वाले भैया कहां गए?’ मैंने किसी कार चोर की आशंका से पूछा.

‘भैया किसी की तबीयत खराब होने के कारण गांव गए हैं. महीने भर बाद ही लौटेंगे, अपनी जगह मुझे रखवा गए हैं.’

उसने फिर पहले की तरह ही मेरे उत्तेजक अंगों को सिरे से इग्नोर करते हुए बोला.

मैंने चाबी उसे दी और भुनभुनाती हुई अन्दर आ गई.

आखिर कोई मर्द किसी भी तबके का हो, मेरे जैसी सेक्सी बॉडी को इग्नोर कैसे कर सकता है?

आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था.

लिफ्ट मैन, ड्राईवर, प्यून से लेकर मेरे कुलीग्स,जूनिअर्स, क्लाईण्ट्स, बॉस कोई भी मर्द, शिष्टता के दायरे में ही सही, बिना एक नज़र मेरे यौवन पर डाले नहीं रह पाता था.

फिर सोचा कि चलो शुरू शुरू में इंप्रेशन मार रहा है, थोड़े दिनों बाद और मर्दों की तरह अपने असली रंग में आ जाएगा.

मैंने जैसे खुद को तसल्ली दी.

मैं कैजुअल सेक्स को बुरा नहीं मानती, मेरे कई सेक्स पार्टनर रहे हैं, अभी भी हैं और अगर यह इंसान भी औरों की तरह ही मुझसे इम्प्रेस हो गया होता तो अपने और उसके स्टेटस में अंतर को देखते हुए मैं उसे कोई लिफ्ट नहीं मारती.

लेकिन जब हफ्ता बीतने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ा तो मुझे जैसे इस विश्वामित्र को डिगाने की जिद सी चढ़ती चली गई.

मैं रोज़ रोज़ ऐसी ही भड़कीली ड्रेसों में उसके लिए दरवाजा खोलती, बूब शो करती, उसे नशीली नज़रों से देखती और थोड़ा बहुत मज़ाक करने की कोशिश करती. लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात.

आखिर में मैंने कुछ और बोल्ड कदम उठाने की ठानी.

‘लकी, सुनो दिवाली आने वाली है,क्या तुम मेरे फ्लैट की सफाई करवाने में मदद कर दोगे? जो कहोगे दे दूँगी!’ मैंने चारा फेका.

वह हिचकिचाया तो मैंने दो हज़ार का नोट उसके हाथ में ठूंसते हुए कहा कि कम हैं तो बता दो … मैं और दे दूँगी.

काफी नखरे दिखाने के बाद वह संडे को कारें साफ करने के बाद दस बजे मेरे घर में आने को तैयार हो गया.

अगले दिन मैं अपनी सबसे लो कट वाला स्लीव लैस लूज टॉप और लूज ही शॉर्ट स्कर्ट पहन कर तैयार थी.

अन्दर ब्रा पैंटी का कोई झंझट नहीं रखा था.

मैंने शीशे में अपने को निहारा. मेरे हिलने डुलने से मेरे बूब्स जैसे फ्री बाल्स की तरह हिल रहे थे. बूब शो के साथ नीचे मेरी चूत तो जैसे शॉर्ट्स का कपड़ा फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रही थी.

तभी घंटी बजी और मैंने लकी को दरवाजा खोल कर अन्दर बुला लिया.

‘अरे तुम्हारे कपड़े खराब हो जाएगे!’ मैंने एक मादक मुस्कान उसकी तरफ फेंकते हुए बोला और उसे अपने किसी पुराने बॉय फ्रेंड के छोड़े हुए ओवर साईज्ड केपरी और टीशर्ट पहनने को दे दीं.

‘यहीं बदल डालो … तब तक मैं चाय बना लाती हूँ!’ मैंने किचेन में जाते हुए बोला और उसे छुप कर देखने लगी.

मुझे खुशी और ताज्जुब दोनों हुए कि उसने भी अंडर वियर भी नहीं पहना हुआ था.

उसका लटका हुआ लंड भी भीमकाय था.

मेरी चुत में पानी आ गया था.

खैर … हमारा सफाई अभियान शुरू हुआ.

मैंने जानबूझ कर किचेन टाइल्स पर डालने के बहाने अपने ऊपर ढेर सारा पानी गिरा लिया, जिससे मेरे टॉप का झीना कपड़ा मेरे बदन से चिपक गया और निपल्स बाहर झांकने लगे.

अब लकी ने टाइल्स पर कपड़ा घुमाते घुमाते मुझे कनखियों से देखना भी शुरू कर दिया.

’चलो अब पंखे साफ कर लेते हैं.’ मैंने एक टेबल के ऊपर स्टूल रखते हुए बोला.

जब वह ऊपर चढ़ कर पंखा साफ कर रहा था, तो मैं उसे बार बार किसी ना किसी बहाने आवाज़ दे दे कर उसे अपने बोबों के दर्शन कराती रही.

ऊपर देखने से उसका लौड़ा और उसमें बढ़ता हुआ तनाव भी साफ नज़र आ रहा था.

अब उसने भी खुल कर मुझे घूरना शुरू कर दिया था और उसके सम्बोधन धीरे धीरे मेम साहब से मैम और फिर पिंकू मैम तक पहुंच गए थे.

जब वह नीचे उतरने लगा तो मैंने उसे सहारा देने के बहाने अपने स्तनों को उसके पसीने से गीले बदन से खूब रगड़ा और उसके तने हुए लंड को भी हाथ लगाने का मौका ढूंढ ही लिया.

ऐसे ही अठखेलियां करती हुई मैं स्टूल पर चढ़ कर पेंटिंग साफ करने लगी.

नीचे से स्टूल को पकड़े हुए लकी को अपनी बिना पैंटी वाली चूत और नितंबों के भरपूर दर्शन कराने के बाद उसी का सहारा लेकर उतरते टाइम जानबूझ कर लुढ़क कर उसकी बांहों में झूल गई और लड़खड़ाने की एक्टिंग करते हुए उसके खंबे जैसे खड़े लंड को मुट्ठी में कस के भींच लिया.

अब लकी के सब्र का बांध भी टूट गया लगता था.

अचानक बिना किसी चेतावनी के उसने मुझे कस कर अपनी बांहों में भींचा और उसके होंठ मेरे होंठों पर कस कर चिपक गए.

काफी देर तक उन्हें ज़ोर ज़ोर से चूसने के बाद उसने अपने होंठ मेरे गालों पर फिराने शुरू कर दिए और मेरे मुलायम गालों को बिना किसी रियायत के ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.

उसकी सांसें तेज़ तेज़ चल रही थीं और कंठ से पिंकू … पिंकू … की बुदबुदाहट सुनाई पड़ रही थी.

अब पिंकू के आगे का मैम भी गायब हो चुका था.

काफी देर तक मेरे बदन को भींच भींच कर और गालों का चूस चूस कर भुरता बनाने के बाद उसने मुझे घुमाया और मेरी पीठ से चिपक कर मेरे स्तनों का भर्ता बनाने लगा.

मेरे निपल्स को खींच खींच कर सुजा दिया और उरोजों को बेरहमी के साथ निचोड़ने लगा.

‘आज तेरी सारी गर्मी निकाल दूँगा पिंकू रानी!’ वह बुदबुदाता जा रहा था.

रफ़ सेक्स का यह मेरा पहला ही एक्सपिरियन्स था.

अभी तक तो मेरा पाला मेरी चूचियों और चूतड़ों पर लार चुआते, शहरी रोमियो टाइप्स से ही पड़ा था, जो कि मेरे हर हुक्म के गुलाम, सेक्स स्लावेस की तरह ट्रीट होकर भी खुद को धन्य समझते थे.

यह पहला ही मौका था, जब मुझे ऐसा डोमिनेटिंग सेक्स पार्टनर मिला था.

इसलिए मुझे कुछ कुछ गुस्सा भी आ रहा था.

लेकिन मेरी चूत से बहता हुआ झरना कुछ और ही कहानी बयान कर रहा था.

फिर यह आफत तो मैंने खुद ही मोल ली थी!

काफी देर तक मेरी छोटी लेकिन मांसल गुदाज और ठोस छातियों को नींबू की तरह निचोड़ने, आटे की तरह गूंधने और तने हुए चूचुकों को बेरहमी से उमेठने के बाद उसने मेरी कमर और घुटनों के नीचे हाथ डाल कर गोद में उठा लिया.

वह बोला- अब सब्र नहीं होता पिंकू रानी!

यह बोल कर उसने वहीं पड़ी डाईनिंग टेबल पर मेरे पैर नीचे लटकाते हुए बैठा दिया.

पहले उसने मेरे नाम मात्र के झीने और भीगने से पूरी तरह पारदर्शी हो चुके टॉप को करीब करीब फाड़ते हुए उतार फेंका, फिर मुझे धक्का देकर टेबेल पर ही लिटा दिया.

अब वह एक बार फिर से मेरी चूचियों पर पिल पड़ा.

वह उन्हें स्पंज की स्ट्रैस बाल्स की तरह तोड़ मरोड़ रहा था.

एक दो बार तो उसने मुझे चूचियों से ही पकड़ कर खींचते हुए टेबल से ही उठा लिया और मेरे होंठों को पीने लगा.

’उउईइ माँऽऽ मर गयीई!’

मेरी चीख ही निकल गई, लेकिन वह इससे बेपरवाह मेरे अधरों का पान करता रहा.

उसने एक बार पुनः मेरी चूचियां खींचते हुए ही मुझे उठा कर बैठाया और अब फिर से मेरी चूचियों की आवभगत अपने मुँह से शुरू कर दी.

धीरे धीरे मेरी चूचियों को चाटते चाटते उसने मेरे पूरे पूरे स्तनों को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया.

काफी देर तक मेरे गुलाबी स्तनों को चूस चूस कर सुर्ख लाल कर देने के बाद उसने अपनी केपरी और मेरी शॉर्ट स्कर्ट भी उतार फेंकी और मुझे फिर से धक्का देकर लेटाते हुए अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में रगड़ने लगा.

उसने मेरे चूतड़ों को कस कर पकड़ते हुए अपना मोटा लेकिन पसीने से भीगा हुआ लंड मेरी कामरस के परनाले बहाती हुई चूत में डाल दिया.

अब मेरा धड़ मेज पर लेटा था, टांगें हवा में झूल रही थीं और चूत में लकी का लौड़ा घमासान मचा रहा था.

ऐसा लगता था मानो उसको न तो मेरी पसंद नापसंद की परवाह थी, ना सेक्स में मेरे सहयोग की कोई ज़रूरत.

उसको मेरा जो भी अंग पसंद आता, उसे पकड़ कर चूमने चाटने मसलने लगता … और बाकी बची हुई बॉडी को उसके मुताबिक एडजस्ट करने का काम मेरे ऊपर छोड़ देता.

मेरी यह बेबसी भी मुझे और उत्तेजित कर रही थी.

कुछ देर बाद मैं भी अपने चूतड़ हिला हिला कर उसको सहयोग दे रही थी.

आहा आहा उऽऽहू की आवाज़ों से कमरा गूंज रहा था.

अपने और एक कार साफ करने वाले के स्टेटस में फर्क का मुझे कोई ध्यान नहीं रह गया था.

अब हम सिर्फ एक मर्द और औरत थे.

पता नहीं कितना टाइम बीत गया, मुझे सुध नहीं थी.

आखिर हम दोनों एक साथ ‘उई ईई आह्ह्ह …’ की आवाज़ें निकलते हुए झड़ गए और लकी भी निढाल होकर मेरे ऊपर ही गिर गया.

दस पंद्रह मिनट बाद हम दोनों कुछ नॉर्मल हुए तो लकी मुझे अपनी बांहों में समेट कर मेरी पीठ सहलाते हुए ‘डार्लिंग, चारमिंग, स्वीटी, ब्युटी’ जैसे नाम बुड़बुड़ाते हुए मेरे कपोलों और होंठों को सॉफ्टली किस करने लगा.

शायद स्खलन के साथ उसका इतने दिनों का रोका हुआ जोश बह गया था और उसका नैचुरल सॉफ्ट स्वभाव वापिस आ रहा था.

लेकिन उसके मुँह से इंग्लिश के शब्द सुन कर मुझे थोड़ा ताज्जुब ज़रूर हुआ.

स्खलन के बावजूद लकी का लौड़ा काफी तना हुआ था.

वह अपना लंड मेरी चूत में पिरोये पिरोये ही उठा और मुझे उसी हालत में पीठ के पीछे हाथ डाल कर एक बच्चे की तरह गोदी में उठा लिया.

अब उसका लौड़ा मेरी चूत में था और चूचियां उसके सख्त सीने में पिसी जा रही थीं.

‘इतनी सफाई के बाद अब नहाना तो बनता है!’ बोल कर वह मुझे ऐसे ही गोद में लिए लिए बाथरूम में घुस गया और शॉवर ऑन कर दिया.

इतनी गर्मागर्म चुदाई के बाद एकदम ठंडे ठंडे पानी की धार पड़ी तो मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए, चूचियां तन गईं और चूत सिकुड़ गई.

मतलब सारी चीज़ें लकी के मन मुताबिक.

‘यह तो छुपा रुस्तम निकला, सारी ट्रिक्स जानता है!’ मैंने सोचा और बांहें लकी के गले में डाल कर उसके लंड पर उछलने लगी.

वह भी मेरे नितंबों के नीचे अपनी हथेलियों से मुझे उछालने लगा.

दोस्तो, आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लग रही है, प्लीज जरूर बताएं.

इस बूब शो स्टोरी में रस और रहस्य अभी काफी मात्रा में बाकी है. प्लीज बने रहें मेरे साथ.

बूब शो स्टोरी का अगला भाग: मैं मनपसन्द लड़के से कैसे चुदी- 2

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