ममेरे भाई ने बहन की कुंवारी चुत फाड़ दी- 3
कजिन फक स्टोरी में मैं मामा के घर रहती थी, ममेरे भाई ने मुझे उसकी बहन के साथ लेस्बो करते देखा तो उसने वीडियो बनाकर मुझे चोदने की योजना बना कर मेरी सील तोड़ दी.
यह कहानी सुनें.
नमस्कार, आप सभी पाठकों को मेरी प्यारी सी चूत का नमस्कार.
मेरा मुँह आपके लंड के लिए हमेशा खुला हैं और उम्मीद है कि मेरी प्यारी प्यारी बहनें भी अपनी चूत गांड की लंड से बहुत मस्त चुदाई करवा रही होंगी.
देर ना करती हुई सीधी कजिन फक स्टोरी पर आती हूँ.
जैसा कि आपने कहानी के दूसरे भाग
ममेरे भाई के साथ ओरल सेक्स का मजा
में पढ़ लिया था कि अब मैं अपने ममेरे भाई से ओरल सेक्स या कहें कि ऊपर ऊपर से सेक्स करने लगी थी.
बस उसके लंड से चुदने का कभी मौका नहीं मिला या ये कहें कि मैं खुद अभी सेक्स के लिए तैयार नहीं थी.
मेरी ममेरी बहन सुरभि की सलाह को ध्यान में रख कर मैं अपने ममेरे भाई को अभी चुदाई का मौका भी नहीं देना चाहती थी क्योंकि मुझे डर था कि सील टूटने के बाद मुझे कितना दर्द होगा?
फिर उसकी उम्र भी अभी 18 साल थी तो शायद वो भी इस जिम्मेदारी को सही से ले पाएगा या नहीं.
इन्हीं सब कारणों से पिछले 3 महीने से हमारे बीच मस्त ओरल सेक्स चल रहा था.
सुरभि दीदी को भी मैं सारी बातें बता दे रही थी.
अब आगे कजिन फक स्टोरी:
एक दिन सुरभि दीदी बोली- या तो तुम जल्दी से अपनी चुदाई करवा लो … या मुझे पहले अपने भैया से चुदाई करवा लेने दो क्योंकि अब तेरी सुरभि दीदी से भी कंट्रोल नहीं हो रहा है.
मैंने कहा- ऐसा क्यों दीदी?
सुरभि- अरे वह साली मेरी मौसी की बेटी प्रिया, जो मुझसे दो साल छोटी है, वह तक अपने ही सगे भाई के लंड से खेल लेती है और गांड उठा उठा कर फोन से बताती है कि आज उसके भाई ने ऐसे चोदा, आज ऐसे चोदा.
मैं बोली- अरे क्या बात कर रही हो दीदी, आपने तो पहले कभी बताया ही नहीं कि वह इतनी बड़ी वाली छिनाल है!
‘हां यार!’
यह सब सुनकर अब मैंने अपना पक्का मन बना लिया कि मैं अपनी पहली चुदाई अपने ममेरे भैया के लंड से ही करवाऊंगी.
कुछ टाइम बाद मेरी मामी की बहन के मतलब सुरभि दीदी और आशीष की मौसी के नए घर का उद्घाटन समारोह था.
उसमें मामी और मामा दोनों का जाना जरूरी था.
मामी की बहन का घर यहां से दूर था तो जाने में भी दो दिन का वक्त लगता हैं.
मामा मामी के जाने के बाद घर में एक हफ्ते के लिए सिर्फ हम तीनों को ही रहना था.
उन लोगों को सुबह चार बजे की ट्रेन से जाना था तो आशीष सुबह मामा मामी को स्टेशन छोड़ने चला गया.
उस समय तक हम दोनों भी जाग कर यात्रा की तैयारी करवा रही थीं.
कुछ देर बाद आशीष मामा मामी को लेकर स्टेशन निकल गया.
अब सुरभि बोली- अब तो तेरी मस्त चुदाई हो जाएगी!
मैं बोली- हां दीदी, आप भी अपनी चुत का इंतजाम देख लो!
वह बोली- हां मैं भी सोचती हूँ. मौका भी बढ़िया है. पहले तू ले ले उसके लंड का मजा … और सुन कंडोम लगाना मत भूल जाना. वह कितना भी मनाये, पर तुम बिना कंडोम के मत चुदना!
मैं बोली- हां दीदी.
फिर दीदी बोली- तो कब करवा रही है पहली चुदाई?
मैं हंस कर बोली- आप बताएं कब का मुहूर्त सही रहेगा?
वह भी हंस कर बोली- आज रात को ही सही रहेगा. मैं नीचे तेज आवाज में टीवी देखती रहूंगी और तुम सोने का बोलकर ऊपर चली आना. फिर पीछे पीछे ये आशीष तो आ ही जाएगा!
मैं बोली- हां ये तो है.
सुरभि- मैं उससे बोल दूंगी कि आज नीचे मम्मी के रूम में सो जाऊंगी, तो आशीष को शक भी नहीं होगा कि मुझे तुम दोनों के बारे में कुछ पता है.
मैं बोली- ठीक है दीदी.
फिर सुरभि बोली- यार तू बुरा ना माने तो एक बात बोलूं?
मैं बोली- हां बोलो ना दीदी, बुरा मानने वाली कौन सी बात है?
वह बोली- मैं तुम्हारी पहली चुदाई देखना चाहती हूँ.
मैं बोली- ठीक है दीदी देख लेना. आप बताओ कि देखने का कैसे सैट करोगी?
वह बोली- मैं एकदम से रूम में आकर कुछ अलग सा करूंगी. बस तुम भी ऐसे एक्टिंग करना जैसे तुमको कुछ पता नहीं है.
मैं बोली- ठीक है.
सुरभि बोली- जब तक आशीष मम्मी पापा को स्टेशन से छोड़ कर वापस आता है, मैं सोने जा रही हूं. तुम उसका इंतजार करो.
मैं बोली- ठीक है.
फिर दीदी ऊपर सोने चली गई.
कुछ देर बाद आशीष घर आ गया.
मैं नीचे गेट के सामने ही बैठी थी तो उसने दस्तक दी और मैंने गेट खोल दिया.
वह बोला- सुरभि दीदी कहां है?
मैं बोली- ऊपर चली गई है सोने … नीचे मैं ही तेरा इंतजार करने को बैठी हूं.
वह बोला- सही है जानेमन!
मैं बोली- मैं अब सोने जाऊं?
वह बोला- अब क्या सोना, पांच तो वैसे ही बज गए हैं.
उसने मेरे पास आकर मुझे गले लगा लिया और बोला- दीदी, अब तो मिल जाएगी मुझको आपकी स्पेशल वाली ज़न्नत?
मैं इठला कर बोली- ठीक है, पर अभी सुरभि भी तो हैं घर में?
वह बोला- हां पर तुम कुछ जुगाड़ करो न!
मैं बोली- हां ठीक है, मैं करती हूँ कुछ!
वह मेरे कान की लौ को चूसने लगा और बोला कि अभी दिन में ही हो जाए!
मैं बोली- ना बाबा … मुझे अभी जाना है. रात को देखते हैं.
वह बोला- ठीक हैं, वह मम्मी बोल रही थीं कि वे गुलाबजामुन (रसगुल्ले) का डिब्बा घर पर ही रखा भूल गई हैं. उसको अच्छे से रख देना ताकि चींटी आदि ना लगें और हम सबको ही गुलाबजामुन खाकर खत्म करना हैं.
मैं बोली- ठीक है. तू अभी रहने दे न!
मगर वह नहीं माना.
उसने वापिस मेरे रसीले होंठों को चूसना शुरू कर दिया और मेरी टी-शर्ट को उतार दिया.
वह बोला- गुलाबजामुन तो तेरे भी मस्त हैं, बस इनमें से अभी रस नहीं आता!
मैं बोली- मेरे ये गुलाबजामुन की तरह काले थोड़ी हैं!
वह हंस कर बोला- हां ये भी सफेद वाले रसगुल्ले हैं.
हम दोनों चुंबन का मजा लेने लगे.
कुछ देर बाद उसने मुझे वहीं नीचे जमीन पर लेटा दिया और मेरी ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को मसलने लगा.
जब वह कामुक हो गया तो उसने अपने सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए और पूरा नंगा हो गया.
मैं बोली- कुत्ते बंद कर अपनी दुकान … अभी सुरभि ऊपर है … वह आ गई तो तेरा सारा ड्रामा खत्म हो जाएगा.
वह बोला- अरे दीदी बहुत आलसी है. तुम नहीं जानती उसको. वह अब भी 8 बजे के पहले नहीं उठेगी.
वह नंगा ही किचन में गया और उधर से एक कटोरी में 2 गुलाबजामुन और उसकी बहुत सारी चाशनी ले आया.
मैं बोली- क्या हुआ?
वह बोला- बस देखती जाओ जाह्नवी डार्लिंग!
उसने मेरा लोअर उतार दिया.
अब मैं उसके सामने नीले रंग की ब्रा और पिंक पैंटी में जमीन पर लेटी थी.
उसने एक रसगुल्ले को उठा कर मेरी पैंटी में घुसा दिया.
मैं हड़बड़ा कर बोली- पागल है क्या?
वह बोला- चुपचाप लेटी रह कुतिया!
वह मेरी ब्रा उतार कर मेरे बूब्स पीने लगा.
कुछ देर बूब्स पीने के बाद उसने अपने लंड पर गुलाब जामुन की चाशनी लगाई और मेरे मुँह में लंड डाल दिया.
मैं जमीन पर लेटी थी और वह मेरे ऊपर लेट कर लंड मेरे मुँह में जोर जोर ऊपर नीचे कर रहा था.
वह बोला- पूरा जोर लगा कर अपने रसीले होंठों को बंद करो ताकि मुझे मजा आए!
मैंने अपने होंठों में उसके लौड़े को दबा लिया.
वह झटके देने लगा तो मुझे उसका लंड मीठा लगने लगा था.
कुछ देर झटके मारने के बाद उसने अपने लंड का पूरा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया और ऊपर से दवाब बनाए रखा, जिस कारण मैं उसको अलग नहीं कर सकी और मजबूरी में पहली बार उसका पानी पी लिया.
फिर उसने चाशनी को मेरे पेट के ऊपर, जांघ और तलवों में लगा दिया.
अब वह मेरे जिस्म से चाशनी को चाटने लगा.
आखिरी में पैंटी पर आ गया, जिसके अन्दर उसने गुलाबजामुन घुसेड़ दिया था.
गुलाबजामुन के कारण पैंटी पूरी चिपचिपी हो रही थी.
वह मेरी पैंटी को ऊपर से चाटने लगा.
कुछ देर के बाद पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसने थोड़ा सा गुलाब जामुन चूत के अन्दर घुसेड़ दिया.
मैं सिसया गई.
तभी उसने एक झटके में पैंटी को खींच दिया.
तो पैंटी गीली होने के कारण एक बार में ही चिर्र की आवाज के साथ फट गई.
पैंटी फटते ही उसने मेरी चिकनी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
चुत के अन्दर गुलाब जामुन का कुछ हिस्सा भी बाहर आने लगा था तो वह उस गुलाब जामुन को चाट कर उसे वापस चुत में घुसेड़ने का प्रयास करने लगता.
तभी मैं बोली- आशीष मुझे सु सु आ रही है.
यह सुनते ही वह जमीन पर लेट गया और बोला- अब दोनों पैर मेरे सीने पर रख कर बैठ जाओ और मेरे मुँह में मूत लो!
मैं वासना से गर्म हो गई थी तो उसके कहे अनुसार उसके मुँह पर चुत लगा कर बैठ गई और मूतना चालू कर दिया.
सुर्र सुर्र सी सी की आवाज के साथ मैंने उसके मुँह में अपनी पेशाब को छोड़ दिया.
वह थोड़ी पेशाब पी गया और कुछ नीचे फर्श पर फैल गई.
मैं हंस कर बोली- साले हबशी … नीचे का पूरा फर्श साफ कर देना, मैं ऊपर जा रही हूँ!
वह वासना से मेरे नग्न जिस्म को देखते हुए बोला- ठीक है मेरी जान!
मैंने अपने कपड़े नीचे लगी वाशिंग मशीन में डाल दिए और जीने से चढ़ कर ऊपर आने लगी.
मैं ऐसी ही नंगी चाशनी से छपी, ऊपर अपने कमरे में आ गई.
सुरभि अभी सो रही थी.
मैं उसके मुँह के पास चूत करके खड़ी हो गई और उसको आगे की तरफ खिसकाया तो वह उठ गई.
मैं उससे बोली- देख तेरे भाई ने आज क्या किया? बहन के लौड़े ने अब कचौरी में गुलाब जामुन डाल कर खाया है!
वह हंस कर बोली- सच्ची यार मेरा भाई इतना रोमांस करता है?
मैं बोली- इतना ही नहीं, इसके साथ उसने मेरी पेशाब भी पी ली.
वह बोली- सच्ची यार इतनी अच्छी किस्मत है तेरी?
सुरभि ने अपनी जीभ निकाली और मेरी चिकनी चूत को चाटने लगी.
ऐसे ही हम दोनों ने 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चूत चाटी और उसके बाद झड़ कर साथ में नहा लिया.
नहाने के बाद सुरभि दीदी ने नाश्ता तैयार किया और मैंने कॉलेज के लिए टिफिन लगा लिया.
हम तीनों साथ में अपने कॉलेज और स्कूल के लिए निकल लिए.
शाम को मैं और सुरभि दीदी रोज की तरह छत पर घूमने लगी और वह घर से निकल गया. शायद बाजार या फिर क्रिकेट खेलने चला गया था.
सुरभि को सिगरेट पीने की आदत है तो वह आज छत पर आड़ में खड़ी होकर सिगरेट के कश लगा रही थी.
सुरभि दीदी ने बताया- मैं तेरे लिए दर्द की गोली ले आई थी और साथ में सेक्स टाइम बढ़ाने वाली दवा भी ले आई हूँ.
मैं दवा का सुनकर चुप रही.
तभी दीदी बोली- एक सेक्स टाइम बढ़ाने वाली गोली तू भी खा ले और एक गोली उसको भी रात के खाने के साथ खिला देना.
मैं बोली- ना यार दीदी, मैं अकेली ही खा लेती हूँ. यदि पहले राउंड में उसका जल्दी हो गया तो फिर दूसरे राउंड से पहले उसको दे दूंगी.
सुरभि बोली- ठीक है.
मैं बोली- हो सकता कि वह भी कुछ लेकर आया हो या पहले ही दवा खा लेने का सैट कर रखा हो!
दीदी मेरी बात से सहमत हो गई थीं.
फिर रात को हम सबने खाना खाया और अब हम तीनों साथ में टीवी देखने लगे.
कुछ देर बाद ही मैं आशीष की तरफ इशारा करके बोली कि मैं ऊपर जा रही सोने के लिए, आप देखो जाह्नवी दीदी टीवी!
दीदी बोली- हां जाओ, मैं नीचे ही सो जाऊंगी … आज ये पूरी मूवी देख कर सोऊंगी. वैसे भी आज मम्मी नहीं हैं तो कोई रोक ने टोकने वाला भी नहीं है. मैं और आशीष नीचे टीवी देख रहे हैं, तुम जाओ.
मैं ऊपर आ गई. जाते जाते मैंने आशीष को मुस्कुरा कर देखा और गांड मटकाती हुई ऊपर चली गई.
थोड़ी देर बाद आशीष भी मेरे रूम में आ गया.
कमरे में आते ही साथ उसने सबसे पहले अपने कपड़े उतार कर अलग कर दिए और पीछे से मुझे पकड़ लिया.
वह मेरी गर्दन को चूसने लगा.
मुझे पीछे गांड में उसका लंड अहसास हो रहा था, तो मैं समझ गई कि ये नंगा है.
उसने जल्दी ही मेरी टी-शर्ट फाड़ दी और बोला- चल अब लेट जा!
मैं उससे गुस्सा हुई तो वह बोला- चुप कर रंडी … बहन की लौड़ी ड्रामा ज्यादा करती है!
यह कह कर उसने एक जोर से झापड़ मेरे बूब्स पर मार दिया.
मैं कराह कर बोली- साले आराम से कर न यार!
वह बोला- तुम पिछले 3 महीने से मुझे तड़पा रही हो. आज तो चोदने दे न!
मैं बोली- तो आज ही मार दोगे क्या?
वह बोला- ना यार, तुझे तो पूरी जिंदगी, जी भर के चोदना है … और उससे भी ज्यादा तेरी चूत को खाना है.
यह कह कर उसने मेरे लोअर और पैंटी को एक साथ उतार दिया और चूत को चाटने लगा.
कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और वह सारा पानी पी गया.
फिर उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और मेरे मुँह को चोदने लगा.
उसने मेरे मुँह में ही पानी छोड़ दिया.
मैं उसका पानी पी गई.
वह पुनः मेरी चूत को चाटने लगा और एक उंगली को अन्दर डाल दिया.
मैं बोली- यार अब चोद दे जल्दी से!
वह बोला- ऐसे नहीं. पहले बोलो कि प्लीज आशीष, अपनी रंडी को कुतिया बना कर चोद दो!
मैं ऐसे ही उससे बोली- प्लीज आशीष, अपनी रंडी रखैल जो तुम कहना चाहो और जैसे चाहो … बस चोद दो.
वह बोला- हां अब तू सही लगी.
उसने मुझे बेड के कोने की तरफ खिसकाया और खुद नीचे खड़ा हो गया.
उसने मेरी दोनों टांगों को कंधे के ऊपर रख लिया.
अब उसने चूत के ऊपर लंड रख कर रगड़ना शुरू कर दिया.
मुझे मजा आ रहा था.
तभी उसने एकदम से जोरदार धक्का लगा कर आधा लंड मेरी चूत में उतार दिया.
मैं दर्द के मारे कराह रही थी ‘अह्ह्ह आह्ह आराम से … प्लीज बाहर निकाल लो … मैं मर जाऊंगी!’
मैं दर्द भरे शब्दों में उससे से दया की भीख मांग रही थी.
पर उसको मेरी एक सुनाई नहीं दे रही थी और वह मेरा चेहरा देख कर बस हंस रहा था.
तभी मैंने पीछे दरवाजे की तरफ देखा कि सुरभि दीदी गेट से छुप कर मेरी चुदाई का मजा ले रही थी.
आशीष की गांड दीदी की तरफ थी और दीदी को मेरी चूत आराम से दिख रही थी.
जिस तरह का पोज था, उसमें मैं तो दीदी को देख सकती थी, पर आशीष नहीं देख सकता था.
दोस्तो, अगले भाग में मैं आपको सुनाऊंगी कि किस तरह से मेरी चुत की सील टूटी और दीदी का क्या हुआ.
उसकी चुत भी चुदी या क्या हुआ, वह सब अगले भाग में लिखूँगी.
कजिन फक स्टोरी पर आप अपने मेल जरूर भेजें.
कजिन फक स्टोरी का अगला भाग:
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