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अपनी चूत देकर कर्ज चुकाया- 2

0 बार पढ़ी गई10 मिनट का पाठलगभग ९ घंटे पहले

डेली सेक्स विद बॉस स्टोरी में कर्ज माफ़ करवाने के लिए मैंने साहूकार की नौकरी कर ली. वहां मुझे रोज चुदाई करवानी थी. सेठ ने पहली बार मुझे कैसे चोदा?

यह कहानी सुनें.

दोस्तो, मैं आपकी प्यारी सी जाह्नवी शर्मा आपको अपने पति के कर्ज न चुका पाने की स्थिति में साहूकार से चुत चुदवा कर मजा लेने वाली सेक्स कहानी सुना रही थी.

कहानी के पहले भाग

कर्ज पर चूत भारी पड़ी

में अब तक आपने पढ़ा था कि एक साहूकार से अपने पति का कर्ज माफ करवाने के लिए मैं उसकी बांहों में चली गई थी और वह मुझे चूमने लगा था.

अब आगे डेली सेक्स विद बॉस स्टोरी:

फिर उस साहूकार ने मेरे मुँह में जीभ डाल दी और रस चूसने लगा.

ये सब करते समय मेरी भी वासना भड़कने लगी थी.

उसका ये सब करने की ही देर थी कि मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया.

हम दोनों की जीभ आपस में लिपट रही थीं. हम दोनों एक दूसरे का मुँह के थूक को चूस रहे थे.

उसने अब अपनी पतलून का बटन खोल दिया.

अपने एक हाथ से मेरी गांड पकड़ी और दूसरा हाथ मेरे पेटीकोट में डालकर, चड्डी के ऊपर से मेरी चूत रगड़ने लगा.

उसकी भीगी हुई काली चड्डी में उसका लंड उभरता हुआ दिख रहा था.

मैं अपने दोनों हाथों को उसकी चड्डी में डालकर उसका लंड पकड़ा और मसलने लगी.

साथ ही मैं उसके लंड को पानी से धोकर साफ भी करने लगी थी क्योंकि यह मुझसे लंड चुसवाए बिना मानने वाला नहीं था.

इस दौरान हमारे होंठ जुदा नहीं हुए थे.

उसने मेरी गांड पर रखे हाथ को ब्लाउज में डाला और मेरे चूचों के निप्पल मसलने लगा.

इससे अब मेरी कामवासना की ज्वाला फूट पड़ी.

मैं दीवार के सहारे खड़ी हो गई और अपने एक पैर को थोड़ा सा उठा कर उसके हाथ से अपनी चूत रगड़वा रही थी.

इस चुसाई और रगड़ाई ने हमें बहुत गर्म कर दिया था.

शादी के बाद में पहली बार किसी पराए मर्द से चुम्मा-चाटी करके इतनी गर्म हुई थी.

फिर धनपत ने अपने होंठ हटाकर शॉवर बंद किया.

मीणा बोला- अब क्या बस भीग कर चाटेगी, नंगी मालिश क्या तेरी मां करेगी छिनाल?

उसके मुँह से खुद के लिए गाली सुनकर भी मैं हंस दी.

इसके बाद हम दोनों कमरे में आ गए.

वहां एक गद्देदार मेज़ थी.

उस पर धनपत पेट के बल चड्डी में लेट गया.

उसने मुझसे कहा- चल रंडी अब साड़ी उतार और उस कटोरी में तेल निकाल कर मालिश शुरू कर.

उसके इस तरह से मुझे गाली देने पर मुझे जरा सा भी गुस्सा नहीं आ रहा था.

मैंने उसका कहा माना और साड़ी पेटीकोट उतर कर ब्रा पैंटी में होकर तेल कटोरे में निकाल लिया.

मैंने पहले धनपत की पीठ की मालिश शुरू की.

उसे मेरे हाथों की मालिश का मजा आ रहा था.

वाकई में उसकी थकान उतर रही थी.

धनपत ने फिर अपनी काली जॉकी की चड्डी उतार दी.

उसकी गांड पर भी घने बाल उग रहे थे किसी भालू के जैसे … साला कुत्ता. अब यह भालू मेरा शहद चाटने की तैयारी में था.

धनपत फिर अपने पीठ के बल लेटा.

जैसे ही उसने करवट बदली, उसका लंड स्प्रिंग के जैसे नाचने लगा.

उसका लंड तकरीबन 5 इंच तक का था.

मैंने पहले उसकी पैरों की फिर जांघों की मालिश की.

जांघों की मालिश करते समय उसके ढीले टट्टों के दोनों थैले ढीले-पोले से झूल रहे थे.

मैंने धनपत का लंड पकड़ा और उस पर तेल डालकर उसकी दोनों हाथों से मालिश की.

लौड़े में जरा तनाव आया तो मैंने अच्छे से तेल लगा कर लंड को मसला और उसके टट्टों को अच्छे से तेल मालिश किया.

कटोरे में तेल खत्म हो गया था तो मैंने तेल की दूसरी बोतल में से तेल निकलने लगी.

तेल का कटोरा धनपत के पास में ही था.

मैं जब उसमें तेल डालकर बॉटल को रखने झुकी तो उसने खड़े होकर, तेल हाथ में लिया और मेरे बदन, गांड और मेरे अंतर्वस्त्रों (ब्रा-चड्डी) पर डाल दिया.

अब मैं तेल से पूरी लबालब भीग गई थी.

इसके बाद धनपत ने मेरे पीछे से गले से लगते हुए एक हाथ मेरी चुत पर और दूसरा मेरे चुचूकों पर डाल तेल से मसलने लगा.

उसका हाथ मेरी चूत से होते हुए मेरे भगनासा पर जा पहुंचा.

वह एक हाथ से मेरे निप्पल और दूसरे से मेरी भगनासा को रगड़ रहा था.

मैंने भी इस आनन्द से मस्त होकर अपनी आंखें मूंद लीं.

ये देख कर वह मेरा कान गला चूमने, चाटने काटने लगा.

मैं भी अब बेशर्म रांड सी बन कर सिसकारियां निकालती हुई मज़े लेने लगी.

मेरी चूत में वासना के मारे गर्म हो रही थी.

मैं धनपत सेठ की बांहों में उसके कंधे पर सर रख कर लिपटी हुई थी और एक हाथ उसके गले पर रख दूसरे से उसका लंड हिलाने लगी थी.

धनपत सेठ समझ गया कि अब मुझसे उसको हरी झंडी मिल गई है.

इसके बाद धनपत ने मेरा निचला होंठ काटा और जीभ मेरे मुँह के सामने कर दी.

मैंने एक आज्ञाकारी कुतिया की तरह अपनी जीभ से उसकी जीभ लिपटा दी और फिर से मुँह चूसने-चुसवाने लगी.

चुदास की गर्मी मेरे सर चढ़ गई थी.

मैंने झट से चुम्बन तोड़ा और नीचे झुक कर उसका मोटा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.

वह आह आह करने लगा.

मैंने उसके सुपाड़े को लॉलीपॉप की तरह मुँह में भर लिया और वैक्यूम क्लीनर के जैसे चूसने लगी.

धनपत का लौड़ा काफी मोटा था और उसमें से बदबू भी आ रही थी मगर वह बू भी काफी मादक थी.

मेरे इस तरह चूसने से धनपत बहुत खुश हुआ.

उसने अपना हाथ मेरे सर के पीछे रखा और कहने लगा.

मीणा- कल तो बड़ा लाज इज्जत का ख्याल था री तुझे … आज क्या हुआ … साली एकदम सौ टके कोठे वाली के जैसे लंड चूस रही है. अब कहां गई रे तेरी लाज-शर्म. अब तुझ जैसी दो कौड़ी की औरतों को खूब चोदा है मैंने. तू पहली नहीं है कुतिया. साली तुम सब लंड के नाम से ही झुक कर जीभ हिलाने लगती हो. तुम जैसी छिनालों के पतियों को कर्ज़ मांगने की क्या जरूरत, कोठे पर बिठाने से ही रोज के 1,000 रुपए जेब में होंगे.

ये सब सुन कर मैंने उसके लंड के सुपाड़े के ऊपर ज़ोर से जीभ फेरी और फिर गले तक उसका लंड लेने लगी.

गले में पहली बार लेते ही मुझे उल्टी जैसा हुआ और मैंने तुरंत उसका लंड बाहर निकाल लिया.

मगर धनपत ने 2 सेकंड बाद ही मेरे बाल दोनों हाथों से पकड़ लिया और वह मेरा मुँह चोदने में लग गया.

मैं ज्यादा गहराई तक नहीं ले पा रही थी इस वजह से खांसने लगी मगर मुँह में लौड़ा होने से में खांस भी नहीं पाई.

मेरे मुँह से बस गक..गक…गक की आवाज आ रही थी.

मेरी आंखों से आंसू निकल गए.

मैंने विरोध के लिए उसके पैरों को धक्का दिया और उसके पैर नोंच ही दिए थे.

उसने मुझे ‘रंडी मादरचोद’ बोलकर लंड निकाला और मेरे गाल पर एक कसके थप्पड़ दे मारा.

मगर इसके बाद भी मैं कुछ नहीं कह रही थी.

मुझे कोई मलाल नहीं हो रहा था.

इसके बाद उसने मेरी ब्रा-चड्डी फ़ाड़ दी और मुझे पूरी नंगी कर दिया.

फिर उसने मुझे उस मालिश वाली मेज़ पर लेटाया और मेरी गांड को टेबल के किनारे पर रख कर मेरी चूत पर 3 बार थूका.

फिर अपने हाथ में थोड़ा सा थूक लेकर सुपाड़े पर मसला.

मेरी चूत थोड़ी गीली थी तो उसने वो रस चखा और सुपाड़ा चूत के मुँह पर सैट करके एकदम से पेल दिया.

अब वह बिना रुके अपना लंड मेरी चूत में पेलने लगा.

मेरी चूत उसके मोटे लंड के लिए थोड़ी टाइट थी, जिस कारण मेरी चीख निकल गई थी.

उसने एक बार लंड बाहर निकाला और थोड़ा तेल लंड पर और थोड़ा चूत पर डाल कर चुत को मसला, फिर से लंड लगा कर सैट कर दिया.

उसने वापिस धक्का दिया.

इस बार थोड़ी आसानी हुई मगर मुझे लगा कि मेरी चूत का मुँह फट जाएगा, तो दर्द के मारे मैंने अपने होंठ काट लिए और आंखें मूंद लीं.

दो चार धक्कों के बाद मेरे मुँह से आह.. आह.. की आनन्दमयी आहें निकलने लगीं.

मेरी कामुक आहें सुन कर धनपत को जोश चढ़ने लगा और वह किसी चुदाई मशीन की तरह मेरी कमर पकड़ कर चुत में लंड पेलने लगा.

उसने मेरी एक टांग अपने कंधे पर रख कर कहा- बोल कुतिया कैसा लगा मेरा लंड … साली सड़क छाप रांड, दो कौड़ी की औरत … बोल तुझे मेरा लंड चाहिए. भीख मांग इसके लिए बहन की लवड़ी … बोल कि तेरे मर्द से अच्छा है मेरा औजार!

ये कहते वक्त उसने लंड बाहर निकाल कर चूत के मुँह पर रख दिया और सुपाड़ा अन्दर डाले रखा.

एक हाथ से मेरी भग्नासा को रगड़ा और दूसरे से मेरी एक चूची मसली.

मैंने भी हवस की पुजारन के जैसे बोली- हां सेठ, तेरा लंड मेरे मर्द के नुन्ने से बहुत बढ़िया है. इसने बस दो सेकंड में मेरे अन्दर की रंडी जगा दी. चोद मुझे सेठ कोठे के माल के जैसे चोद, मादरचोद.

मेरी ज़बान, बदन और दिमाग अब उसके लंड के वश में था.

ये सुनकर धनपत ने जोरदार तेजी से मुझे चोदा और मेरी चीखें निकाल दीं.

कुछ मैं भी जानबूझ कर उसके सामने चीख रही थी ताकि उसे लगे कि वह भोसड़ी का खुश हो जाए.

इसके बाद उसने मुझे सोफे पर घोड़ी बनने को कहा.

मैं उसकी हर बात सुन रही थी.

उसने फिर से मेरी चूत चाट कर गीली की और वापस मेरी गांड पकड़ कर लंड चूत में ठेल दिया.

अब हम दोनों बिल्कुल कुत्ते कुतिया की तरह चुदाई कर रहे थे.

चुदाई के बीच वह बार बार मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. मैं भी इसमें खूब मज़े ले रही थी.

धनपत को चुदाई का अच्छा ज्ञान था. इस पूरी चुदाई क्रिया में उसने मुझे दो बार चरमसीमा पर पहुंचा दिया था.

सोफे पर चुदाई के समय उसने मुझे उतर कर घुटनों पर बैठने को कहा और मेरे मुँह और छाती पर अपना वीर्य छोड़ दिया.

उसने मुझसे सारा माल चाटने को कहा, मगर उसके कहने के पहले ही मैंने मुँह से माल साफ करके चाटने लगी थी.

मैंने वीर्य पहली बार पिया था.

वह काफी गाढ़ा, लिसलिसा और चिपचिपा मगर गर्म था.

उसका स्वाद कुछ नमकीन और कसैला सा लग रहा था.

फिर सेठ ने मुझे नहाने के लिए बुलाया और हमने एक दूसरे को साफ किया.

इतना सब होने के बाद भी मुझे शर्म नहीं आ रही थी.

उसके बाद सेठ ने मेरे लिए साड़ी और ब्रा-चड्डी का नया सैट अपनी रिसेप्शनिस्ट से मंगवाया.

मीणा बोला- मेरे यहां एक सचिव की जगह खाली है. जो मेरा काम और मेरी यात्रा का हिसाब रखे. कल से तू आ जाना, सुबह 9 से शाम 6 बजे तक के लिए फिक्स है. तुझे 25,000 महीना मिलेंगे, उसमें से 10,000 मुझे देते हुए कर्ज़ चुका देना. हां, मगर सचिव का काम बस मेरा हिसाब किताब नहीं, मेरा ख्याल रखने का भी होगा, समझी जानेमन.

मैंने इस पर हां में सर हिला दिया.

इसके बाद कपड़े पहने और कमरे से बाहर जाने के लिए दरवाजे तक गई, तो सेठ ने आवाज दी- अरे ओ मेरी पर्सनल असिस्टेंट तेरा नाम तो बता साली, टेबल पर क्या लिखवाऊं?

मैंने कहा- सिर्फ आपकी जाह्नवी शर्मा.

मैं उसे देख कर मुस्कुराई और आंख दबा कर घर के लिए निकल गई.

दोस्तो, कैसी लगी आपको ये सेक्स कहानी?

डेली सेक्स विद बॉस स्टोरी पसंद आई होगी, लंडधारकों का माल और चूत की मलिकाओं का पानी निकला होगा.

मुझे मेल लिख कर ज़रूर बताएं.

अगर कुछ अच्छा न लगा हो या कोई सलाह हो तो बेझिझक बताइएगा.

मैं आपकी जाह्नवी जवां अगली सेक्स कहानी में जरूर सुधारने का प्रयास करूंगी.

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