पहली चुदाई में लंड की स्किन कट गयी
डिक इंजरी सेक्स कहानी में पड़ोस वाली आंटी ने मुझे लंड सहलाने पकड़ लिया. उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया और बेडरूम में ले गयी. वे नंगी होकर बेड पर लेट गयी. मैंने कभी कुछ नहीं किया था.
मेरी उम्र 18 साल की थी जब मुझे सेक्स का ज्यादा ज्ञान नहीं था।
कभी-कभी मेरे अंदर तनाव आता था, तो मजे के लिए लोड़े को रगड़ लिया करता था।
यह डिक इंजरी सेक्स कहानी तब शुरू हुई जब एक दिन पड़ोस की आंटी ने मुझे लोड़ा रगड़ते देख लिया।
उसने मुझे अपने घर बुलाया और मुझसे कहा, “तुम वहाँ खड़े होकर क्या कर रहे थे? मैंने सब देख लिया है! तुम्हारा तो बहुत लंबा, मोटा और बहुत चिकना है! क्या मुझे नहीं बताओगे? नहीं तो मैं तुम्हारी मम्मी को बता दूँगी!”
मैंने डरते हुए कहा, “नहीं, नहीं आंटी! किसी को मत बताना, आप जैसा कहोगी मैं वैसा ही करूँगा!”
ठीक है, तो मैं आंटी के बारे में बताना भूल गया।
वह एक नई-नई शादीशुदा महिला थीं, जिनकी उम्र 28 से 30 साल के बीच रही होगी।
उनके पति अक्सर बाहर काम से आते-जाते रहते थे, कई बार वे 8 दिन या 10 दिन भी नहीं आते थे।
उन्हें कोई बच्चा नहीं था।
वह दिखने में बहुत सुंदर, दुबली-पतली और गोरी थीं।
उनके बूब्स बहुत ही सुंदर और कसे हुए थे, जिन्हें देखकर लगता था कि किसी ने अभी तक उन्हें दबाया ही नहीं होगा।
उन्हें देखकर मेरा लवड़ा खड़ा हो रहा था और वह पैंट के ऊपर से ही दिखाई दे रहा था।
वह सब समझ गई थीं।
उसने मुझे बेडरूम में चलने को कहा।
दोनों के वहाँ जाते ही वह मुझसे लिपट गईं और मेरे ऊपर लेट गईं।
उनकी साँसें जोर-जोर से चल रही थीं, मानो वह कई दिनों की प्यासी हों।
मैंने कहा, “थोड़ा रुको, कपड़े तो उतरने दो!”
फिर उसने मेरा टी-शर्ट उतारा और जो लोअर थी, वह भी उतार दी।
मैंने अंदर जॉकी का अंडरवियर पहन रखा था जिसमें से उन्हें मेरे लौड़े का उभार साफ दिख रहा था।
मेरा लोड़ा जब इतना टाइट हो गया कि अंडरवियर भी छोटा लगने लगा, तो उसने कहा, “तुम्हारा तो घोड़े जैसा है! इसे क्या खुराक देते हो!”
उसने मेरा अंडरवियर उतार दिया।
मेरा लवड़ा एकदम उछलकर खड़ा हो गया।
इसके बाद उसने अपने कपड़े उतारना शुरू किए।
वह सिर्फ काली ब्रा और पैंटी में गजब की लग रही थीं।
मैंने उन्हें चूमना शुरू किया।
मेरा यह पहला अनुभव था।
उसने मुझसे कहा, “बूब्स चूसो!”
बूब्स पर जबान लगाते ही वह सिहर उठीं और जोर-जोर से सिसकारी भरने लगीं।
उन्होंने मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे लोड़े से खेलने लगीं।
मैंने उनकी पैंटी उतार दी।
वह पूरी गीली हो चुकी थी और उसमें से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी।
उसने कहा, “अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ!”
उनके ऊपर चढ़कर, उन्होंने मेरा लोड़ा पकड़कर अपनी भुर पर लगाया और मुझसे कहा, “जोर से धक्का दो!”
मैंने आगोश में आकर जोर से लोड़े को अंदर धकेला, पर मुझे बहुत तेज दर्द हुआ।
एक झटके से मेरा लोड़ा खून से भर गया।
वह भी यह देखकर डर गईं।
उसने अपनी पैंटी से मेरे लोड़े को पोंछा।
मेरे लोड़े की स्किन फट चुकी थी और उसमें से बहुत खून निकल रहा था।
डिक इंजरी देखकर वह भी घबरा गईं।
उसने मुझसे पूछा, “क्या तुमने कभी तुम्हारे लोड़े की चमड़ी आगे-पीछे नहीं की थी?”
मैंने कहा, “कभी जरूरत ही नहीं पड़ी! इससे सिर्फ पेशाब ही करता था, कभी उसे आगे-पीछे करने की जरूरत ही नहीं महसूस हुई!”
उसने मुझे एक क्रीम लगाकर थोड़ी देर सोने को कहा।
फिर उसने कहा, “चलो, हम किसी डॉक्टर को दिखा देते हैं, नहीं तो खून बहुत ज्यादा निकल जाएगा!”
फिर हम उन्हीं के साथ कार में बैठकर डॉक्टर के पास गए।
उसने डॉक्टर से कहा, “यह मेरा देवर है। पेशाब करते वक्त इसे अचानक तकलीफ होने लगी, तो मैं आपके यहाँ ले आई।”
डॉक्टर ने मेरी पैंट उतारी और देखकर बताया, “घबराने की कोई जरूरत नहीं है। स्किन थोड़ी टाइट है, इसलिए थोड़ा कट लगाना होगा। एक दिन हॉस्पिटल में रुकना होगा और सब ठीक हो जाएगा।”
मैंने अपने घर फोन लगाया और कहा, “आंटी की तबीयत ठीक नहीं है, उन्हें डॉक्टर ने एक दिन के लिए हॉस्पिटल में रुकने को कहा है, तो क्या मैं यहाँ रुक जाऊँ?”
मम्मी ने मुझे रुकने की परमिशन दे दी।
मैं बहुत डर रहा था कि पता नहीं डॉक्टर मेरे साथ क्या करेंगे।
वे मुझे चेक करने के लिए ऑपरेशन थिएटर में लेकर गए।
थोड़ी देर बाद मुझे एक इंजेक्शन दिया गया, जिससे मुझे कुछ पता नहीं चला।
आधे घंटे बाद जब मुझे होश आया, तो मेरे लोड़े पर पट्टी बंधी हुई थी।
डॉक्टर ने कहा, “सुबह आप जा सकते हो। कुछ दिनों तक टाइट कपड़े नहीं पहनना और दो दिन के बाद पट्टी निकलवाने आ जाना।”
आंटी ने कहा, “ओके!”
सुबह होते ही हम हॉस्पिटल से निकल गए।
आंटी ने मेरा वह अंडरवियर अपने पास रख लिया और कहने लगीं, “इसे बाद में ले जाना।”
बाद में मुझे अपना अंडरवियर लेने उनके पास जाना पड़ा, और बाकी का बचा हुआ काम जो अधूरा रह गया था, वह भी तो पूरा करना था!
अबकी बार मेरा लवड़ा और भी ज्यादा जोश में था क्योंकि वह पूरा खिल चुका था, जिसे देखकर आंटी बहुत खुश थीं।
उसने कहा, “अब असली लोड़ा लग रहा है तेरा!”
बहुत देर तक उसने मेरे लोड़े की तेल लगाकर मालिश की, और फिर चूत में लोड़ा डालकर जमकर चोदा।
हमें बहुत मजा आया।
उसके बाद हम दोनों अकसर जिस्मानी रिश्ते बनाते रहे और सेक्स का मजा लेते रहे.
डिक इंजरी सेक्स कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके और कमेंट्स में भी बतायेंगे तो मुझे प्रोत्साहन मिलेगा.
चर्चा(0)
चर्चा में शामिल होने के लिए साइन इन करें।
अभी कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले आप लिखिए!
विकल्प

