जिन्दगी में पहली चूत का मजा मिला मामा की बेटी से- 2
डर्टी कजिन रफ सेक्स कहानी में मेरी ममेरी बहन हमारे घर रहकर जॉब कर रही थी. एक रात वह पीकर आई और मुझसे चुद गयी. अगली रात हम दोनों ने बहुत गंदा वाला सेक्स किया.
दोस्तो, मैं रोहित आपको अपनी ममेरी बहन निधि के साथ चुदाई की मस्ती से भरी सेक्स कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
मेरी जिंदगी में पहली बार चूत चाटी ममेरी बहन की
में अभी तक आपने जाना था कि रात को निधि शराब के न.शे में घर आई और मेरे साथ चुद गई.
उसके बाद सुबह भी जब वह ऑफिस जाने को रेडी थी, तो मैंने उसे चोद दिया था.
उसे जॉब पर जाने में देरी हो रही थी तो मैं उसे अपनी बाइक पर बिठा कर उसके ऑफिस तक छोड़ने चल दिया था.
अब आगे डर्टी कजिन रफ सेक्स कहानी:
रास्ते में मैं निधि से बात करने लगा.
‘दीदी, यार आपको दो बार चोद चुका हूँ, लेकिन अब तक भरपूर नजर से नहीं देखा है!’
‘चल कोई बात नहीं आज रात देख लेना.’
मैंने कहा- हां आज सही से नंगी करके मजा लूँगा.
‘रोहित, तू दारू पीता है?’
‘हां पी लेता हूँ और आप?’
‘हां मैं भी पी लेती हूँ. इस ऑफिस में आने के बाद हर चीज करना सीख गयी हूँ.’
‘हां वह कल से मैं देख रहा हूँ. काफी एक्सपर्ट हो गयी हो. पहली बार किससे चुदी थी?’
‘मेरे बॉस ने मुझे पहली बार चोदा था. पहले प्यार से चोदता था, लेकिन अब खुद भी कुत्ता हो जाता है और मुझे भी कुतिया बना देता है. साला गांड तक मेरी मार चुका है. लेकिन उसके साथ चुदने का अपना ही मजा है.’
‘जरा डिटेल में बताओ न!’
‘ज्यादा कुछ नहीं, जैसे ही मैं ऑफिस पहुंचूगी, वह मेरी पैंटी लेगा और उसे चाटेगा और फिर उसी पैंटी में मुठ मारकर अपना वीर्य उसमें गिराकर मुझे चाटने के लिए देगा. उसके बाद मूतने जाएगा और अपना लंड मुझे पकड़ा देगा.
‘वाओ दीदी … फिर?’
‘फिर क्या, जब तक भोसड़ी का मूत नहीं लेगा … तब तक उसका लंड मेरे हाथ में रहेगा और मूतने के बाद लंड को मेरी नाक पर ले जाएगा, मुझे सुंघाएगा और फिर मुझे उसके लौड़े को चूसना पड़ता है.’
‘आपके साथ फिर क्या करता है?’
‘बस वही, जब मैं मूतने जाती हूँ तो वो मुझे मुताता है और मेरी चूत चाटता है!’
‘दीदी आपके तो मजे हैं.’
‘हां मजे तो हैं, लेकिन कल रात से जो मजा तेरे लंड का मिल रहा है, वह कुछ अलग ही लगा है.’
‘तब तो ठीक है, जब भी मुझे मुतास लगेगी तो मैं भी आपको अपना लंड पकड़ा दूंगा.’
‘हां-हां ठीक है, तुझे भी मुता दिया करूँगी.’
तभी ऑफिस आ गया.
मैंने पार्क में गाड़ी रोकी … निधि उतरी.
तभी मैंने सबकी नजर से बचते हुए उसकी चूत को सहला दी.
वह मुस्कुराती हुई और हल्की सी चपत मेरे गाल में मार कर बोली- चल शाम को जल्दी मिलते हैं.
‘बॉय दीदी!’ कहते हुए मैं वापिस घर आ गया.
दिन भर मैं अपना काम निपटाते हुए शाम होने का इंतजार करता रहा.
आज निधि ने ज्यादा इंतजार नहीं कराया.
वह करीब दस बजे तक आ गयी.
इस समय तक मम्मी-पापा खाना-पीना निपटा कर अपने कमरे में चले जाते हैं.
लेकिन जैसे ही डोर बेल बजी, पापा के कमरे से आवाज आयी ‘निधि आ गयी है क्या?’
यह कहते हुए पापा अपने कमरे से बाहर आ गए.
उनको देखते ही निधि ने उत्तर दिया- हां मामा, मैं आ गयी हूँ.
‘खाना-वाना खा लिया है?’
‘हां मामा मैं खाकर आयी हूँ.’
‘अरे बेटा कभी हम लोग के साथ भी खाना खा लिया करो.’
‘ठीक है मामा जी, कल रविवार है और कल मैं ऑफिस नहीं जा रही हूँ. कल मैं दिनभर आप लोगों के साथ रहूँगी. हम सब मिलकर खाना खायेंगे और मस्ती करेंगे!’
फिर पापा ने निधि के सर को सहलाया और बोले- जा जाकर आराम कर ले और कुछ चाहिये तो बता देना.
‘ठीक है मामा!’ कहती हुई वह अपने कमरे में चली गयी.
उधर पापा भी अपने कमरे में चले गए.
पापा के कमरे में जाते ही, मैंने सभी लाईटें ऑफ की और निधि के कमरे में चला गया.
निधि पूर्ण नग्न बाथरूम में शॉवर के नीचे शॉवर ले रही थी और साथ ही वाइन का सिप भी ले रही थी.
मुझे देखते ही निधि ने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया.
मैंने भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारे और झट से बाथरूम में घुस गया.
मेरे सामने उसके खरबूजे जैसी चूचियां, जिनके निप्पल तने हुए थे और मुझे आमंत्रण दे रहे थे कि आओ और चूसो.
मेरे दोनों हाथों का कंट्रोल मानो कहीं खो चुका था, बरबस ही बहन की दोनों चूचियां मेरी कैद में थीं और मैं उन्हें जोर-जोर से दबाए जा रहा था.
एक को मैं अपने मुँह में भरने लगा था और दूसरी को मसल कर आटा जैसा माड़ने लगा था.
‘आह-आह रोहित बहुत अच्छे … लो और मजा लो.‘
यह कहते हुए उसने थोड़ी सी वाइन दोनों चूचियों पर बारी-बारी से गिरा दी.
एक तो निधि की चूची दबाने का मजा, उस पर से निप्पल पीने का मजा.
फिर निधि ने जो वाइन अपनी चूचियों पर गिरायी थी, उस पर शॉवर से टपकते हुई पानी की बूँदें गिरीं.
जब वे बूंदें वाइन बूँदों के साथ मिलकर चूचियों से गिरती हुई मेरी जीभ से लगी, तो वाइन पीने का असली आनन्द उसी दिन आया.
निधि अभी भी रूक रूक कर अपनी चूचियों पर वाइन गिरा रही थी, जो शॉवर के पानी से मिक्स होते हुए मेरी जीभ से टकरा रही थी.
कुछ देर बाद मैंने घुटनों के बल बैठ कर बहन की चूत की फांकों को फैलाया और उसके मूत्र मार्ग द्वार पर जीभ चलाने लगा.
बीच-बीच में उन मुलायम फांकों को चबा भी डालता था.
मेरे दोनों हाथ उसके कूल्हे को जकड़े हुए थे और उंगलियां गुदा द्वार के अन्दर जाने के लिए मचली हुई थीं.
मेरी मचली हुई उंगली का कुछ हिस्सा उसकी गुदा द्वार के अन्दर जा चुका था और मैं उसकी चूत को पी जाना या खा जाना चाहता था.
मैं बड़ी ही तल्लीनता के साथ उसकी चुत की प्यारी-प्यारी उन दोनों कलियों को ऐसे चूसता था मानो ऑरेंज टॉफी का लास्ट बचा हुआ हिस्सा हो.
या यूं समझें कि बची हुई टॉफी को जिस तरह चूसा जाता था, बस मैं उसी से चुत को तरह चूस रहा था.
बीच में कई बार तो ऐसा हुआ कि उसकी पाव रोटी टाईप फूली चूत को मैं अपना मुँह फैलाकर अन्दर भरने की कोशिश करता.
मेरे इन हरकतों से निधि लगभग मेरे ऊपर ही झुक गयी.
वह अपनी उखड़ी हुई सांसों को लगभग समेटती हुई बोली- आह साले रोहित … मैं मर जाऊंगी. तू तो जादूगर निकला रे!
यह कहते हुए निधि एक बार फिर से अपने गिलास की बची हुई वाइन को अपनी चूत के ऊपर गिराने लगी.
मैं झट से चुल्लू बनाकर उस गिरती हुई वाइन को पीने लगा.
जब वह वाइन गिराना बंद कर देती, तो मैं कुत्ते की तरह उसकी चूत को चाटने लगता.
मेरे को जो मजा आ रहा था, उसे लिख कर तो बता ही नहीं सकता.
मेरे ऊपर नशा हावी होने लगा था.
मैंने निधि के चूतड़ को थपथपाते हुए उसे घूमने का इशारा किया.
मैं इस समय उसके जिस्म का कोई हिस्सा छोड़ने के मूड में कतई नहीं था.
निधि भी घूम गयी.
मैंने उसके चूतड़ों को फैलाया और उसके हल्के भूरे रंग के गुदा द्वार पर जीभ सटा दी.
‘रोहित ईईई साले क्या कर रहा है … मैं पागल हो जाऊंगी!’
‘दीदी, मुझे करने दो!’ मैं उसकी गांड चाटते हुए बोला.
दीदी के कंठ से आह आह निकल रहा था.
‘मत रोक … मैं तेरे जिस्म के एक-एक अंग का मजा लेना चाहता हूँ!’
यह कहते हुए मैंने फिर उसकी गांड में जीभ चलाना शुरू कर दिया.
फिर धीरे-धीरे उसकी पीठ चाटते हुए ऊपर की तरफ आया और पीछे से उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाने लगा, निप्पल को मसलने लगा.
‘रोहित धीरे-धीरे कर दर्द हो रहा है!’
मैं उसकी बातों को अनसुना करते हुए अपना काम चालू रखे हुए था.
मैंने एक बार फिर से निधि की गांड फैलायी और लंड को अन्दर पेवस्त करने लगा.
‘रोहित तू पहले मेरी गांड ही मार लेगा क्या?’
‘हां, पहले तुम्हारी गांड मारूँगा!’
‘ठीक है!’ ये कहती हुई वह थोड़ा पीछे मेरी तरफ को हटी और अपने हाथों को दीवार पर टिकाकर उसने अपने जिस्म को हल्का सा घोड़ी स्टाईल में झुका लिया.
वह बोली- ले मेरे भाई, अब तेरी बहन की गांड और चूत की दरार दोनों हाजिर हैं, जितना चाहे चोद ले!
यही सब कहती हुई उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी गांड में सैट करती हुई बोली- ले मार धक्का.
मैंने हल्का सा धक्का लगाया और लंड सरसराते हुए गांड की गुफा में जाकर फंस गया.
मैंने निधि की कमर को पकड़ा और धक्के लगाकर रफ सेक्स करने लगा.
निधि आह-ओह आह-ओह करने लगी और अचानक से वह बोली- भाई दो-चार धक्के चूत में भी लगा दे, बड़ी खुजली हो रही है.
‘ठीक है’ कहते हुए मैंने इस बार उसकी चूत में लंड सैट किया और धक्का देना शुरू कर दिया.
सट-सट फक-फक-थप-थप की आवाज आ रही थी.
धीरे-धीरे मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी.
‘दीदी, मेरा निकलने वाला है!’
‘रूक! कंट्रोल कर और अपने लंड को बाहर निकाल!’
मैंने झट से लंड को बाहर निकाला, निधि तुरंत ही पास पड़े वाइन के गिलास को मेरे लंड के पास लाई और फिर लंड को पकड़ कर मुठ मारने लगी.
कुछ सेकेंड में ही लंड का वीर्य गिलास के अन्दर गिरने लगा.
वीर्य का एक-एक कतरा उसने निचोड़ कर गिलास के अन्दर ले लिया और फिर मेरी डर्टी कजिन लंड के चारों तरफ अपनी जीभ को फिराती हुई बचे खुचे वीर्य के बूंद को चाट गयी.
फिर कम्बोड पर बैठकर अपनी टांगों को फैलाती हुई बोली- ये मेरा माल है … और तेरा माल मेरी चूत से बह रहा है. ले चाट ले!
यह कह कर वह अपना वाइन की गिलास खाली करने लगी और मैं उसकी चूत से गिरते हुए रस को चाट-चाट कर साफ करने लगा.
चुत चाटने के बाद मैं अलग हुआ और हम दोनों शॉवर के नीचे खड़े होकर नहाने लगे.
नहा कर हम वापिस कमरे में आए और निधि जो मुर्ग मुसल्लम लायी थी, वह हम दोनों खाने लगे.
साथ ही एक बार फिर से वाइन का मजा लेने लगे.
‘दीदी, तुम्हारी गांड और चूत सब मस्त है. तुम बहुत मजेदार माल हो.’
‘हां मेरे भाई, तेरा लौड़ा भी बहुत मजे वाली चुदाई देता है.’
खाना खाने के बाद मैं दीदी के हम दोनों बाथरूम में गए और आमने-सामने खड़े होकर मूतने लगे.
फिर वापिस हम दोनों बिस्तर पर आकर लेट गए.
मैं बिल्कुल सीधा लेटा हुआ था और निधि ने अपने पैर को मेरे पैर पर रख दिया था.
थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे.
फिर धीरे-धीरे दोनों जिस्मों से गर्मी का आदान-प्रदान होने लगा.
निधि ने मेरे लंड को अपने हाथ की कैद में ले लिया और वह टोपे को अपने अंगूठे से सहलाने लगी थी.
मेरी उंगलियां उसकी चुत की दरार के बीच में टहल रही थीं.
तभी मैं पलटा और अपनी टांग को निधि के ऊपर रख कर उसकी चूची को मसलने लगा और दूसरे दूध के निप्पल को चूसने लगा.
थोड़ी देर तक मैंने यह किया.
उसके बाद मैं सीधा लेट गया और निधि ने अपनी टांग को मेरे ऊपर रख कर मेरे सीने के एक निप्पल को होंठों से दबा कर चूसने लगी थी … दूसरे को मसल रही थी.
फिर हम दोनों ने करवट बदल ली और मैंने निधि के पैर को अपनी कमर पर रखा और उसके सिर को अपने हाथ के ऊपर ले लिया.
निधि मेरे से अच्छे से चिपक गयी.
अब मेरी उंगली उसकी पीठ से होती हुई उसके चूतड़ों को सहलाते हुए गांड की दरार पर पहुंच गयी.
गांड की गुफा को सहलाते हुए उंगली चूत की गहराई में चलने लगी.
निधि की दरार को रगड़ने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था.
मैंने उसको और अपने से एकदम से सटा लिया और अब मेरी उंगली उसकी चुत के छेद में और तेज-तेज चलने लगी.
उसकी गर्म सांसें मुझसे टकरा रही थीं.
कुछ देर बाद निधि मुझसे अलग होकर एक बार फिर से सीधी लेट गयी.
मैंने अपनी उंगली उसकी नाक पर लगायी तो निधि ने उंगली को चूमा और मेरी तरफ कर दिया.
मैं अपनी उंगली को आईसक्रीम की तरह चाटने लगा.
फिर मैं उठा और निधि की टांगों के बीच आकर उसकी चूत की महक का आनन्द लेने लगा.
एक बार फिर से उसकी चूत पर मेरी जीभ चलने लगी.
मैं कभी उसकी चूत को अपने मुँह में भर लेता और कभी उसकी गांड से लेकर चूत तक मेरी जीभ चलती.
निधि की सांसें उसके काबू में नहीं थीं.
अपनी आंखों को बंद किये हुई और होंठों को चबाती हुई वह मेरे बालों को सहला रही थी.
उसकी चूत जब अच्छे से गीली हो गयी, तो मैंने उसकी गुफा में अपने लंड को पेवस्त कर दिया और धक्के लगाने लगा.
आह आहा की आवाजें उसके मुँह से निकल रही थीं. उसकी सांसें बेकाबू थीं.
चूत और लंड की थप थप की आवाज पूरे कमरे में शोर मचा रही थी.
मैं निधि की चूचियों को मसल रहा था और उसके होंठों को चूस रहा था.
निधि के बाल बिखर चुके थे.
वह अभी भी आ ओह ओह किए जा रही थी.
इसी बीच मैंने लंड को उसके मुँह में डाल दिया और उसके मुँह को भी चोदने लगा.
अब मैं बिस्तर पर सीधा लेट गया और निधि मेरी कमर के पास आ गई.
उसकी पीठ मेरी तरफ थी.
उसने मेरे लंड को अपनी चूत से रगड़ना शुरू किया और फिर घप से लंड को चूत के अन्दर लेकर उछलने लगी.
कुछ देर वह ऐसे ही उछल उछल कर लंड को चोदती रही.
थोड़ी देर तक ऐसा करते रहने के बाद उसने लंड को पकड़ा और अपनी गांड के मुहाने पर सैट करके धीरे-धीरे नीचे की तरफ अपने जिस्म को दबाव देने लगी.
मेरा लंड उसकी गांड में पेवस्त हो गया.
उसके बाद निधि आगे की तरफ झुकी और हौले-हौले अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगी.
थोड़ी देर तक वह मुझे इसी पोजिशन में चोदती रही.
फिर वह पलटी और एक बार फिर से मेरे लंड को उसने अपनी गुफा में कैद कर लिया.
लंड अन्दर लेकर वह उछाल भरने लगी.
जितनी तेज वह उछलती, उतनी ही तेज उसकी चूचियां भी उछल रही थीं.
मैंने झट से उसकी चूची को पकड़ लिया और दबाने लगा.
अब निधि और तेज-तेज उछल रही थी और उसके लुब्रीकेंटस से मेरा लंड गीला होने लगा था.
वह मदहोशी के साथ उसी गति से मेरे लंड को चोद रही थी.
इसी समय मेरा भी लंड अकड़ने लगा था, मेरे मुँह से आ आ हू हू की तेज तेज आवाज निकलने लगी.
तभी निधि का ध्यान मेरे अकड़ते जिस्म पर गया, तो वह तुरंत मेरे ऊपर से उतरी और 69 के पोज में आ गयी.
वह लंड पर जीभ चलाने लगी, उधर उसकी चूत मेरे नथुने के पास थी और एक बड़ी अजीब सी गंध आ रही थी.
तभी उसने अपनी कमर हिलायी और उसकी चूत मेरे होंठों से टच करने लगी.
मेरी जीभ लपलपाती हुई उसकी गीली चूत को चाटने लगी.
उधर निधि भी मेरे लंड को अच्छे से लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी.
तभी मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है, बस इसी अहसास के साथ मेरे मुँह से निकल गया- आह दीदी, मेरा निकलने वाला है.
बस फिर क्या था, निधि ने लंड को मुँह के अन्दर भर लिया और मेरे माल का एक एक कतरा पी गयी.
जब मेरा लंड सिकुड़ गया, तब वह उठी और उसने मेरा हाथ पकड़ा.
हम दोनों वापस बाथरूम में आ गए.
निधि मुझसे कसकर चिपक गयी और हम दोनों ने एक दूसरे की गांड को कसकर पकड़ लिया.
उसके बाद उसकी चूत से गर्म धार निकलने लगी, जो निश्चित रूप से पेशाब थी.
निधि जब पेशाब कर रही थी तो ठीक उसी समय मेरे लंड ने भी पेशाब की धार छोड़ना शुरू कर दिया.
जब हम दोनों फारिग हो गए तो वापिस बिस्तर पर आकर चिपक कर सो गए थे.
दोस्तो, रोहित और उसकी बहन की चुदाई वाली यह डर्टी कजिन रफ सेक्स कहानी आपको कैसी लगी?
आप सभी के मेल के इंतजार में आपका अपना शरद सक्सेना.
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