जेठ जी का काला लंड घुसा मेरी चूत में
फोर्बिडन सेक्स कहानी में शादी के बाद भी मैंने 2 यार पाल रखे हैं. एक बार मैं जेठ जी के घर में थी कि मुझे उनका बड़ा लंड दिख गया, मैंने उनको पटाना शुरू कर दिया.
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हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम आरती है और मैं 28 साल की एक मैरिड और एक हसीन किस्म की माल लेडी हूं जो किसी भी लंड का खड़े खड़े पानी निकाल दे।
मेरा फिगर 34D-28-36 है और कद 5’6″ है।
मेरा रंग एकदम गोरा है.
मेरी शादी को 3 साल हो गए हैं और मेरे पति थोड़े सांवले हैं।
मेरे पति सिंगापुर में जॉब करते हैं और वो साल में सिर्फ एक बार ही आते हैं।
घर पर मैं, मेरी सास, ससुर, मेरे जेठ और जेठानी और उनका एक बेटा रहते हैं।
मेरे 2 बीएफ हैं और मैं अक्सर उनसे चुदकर अपनी पति की कमी को पूरा करती हूं।
अब बात को ज्यादा न खींचते हुए सीधा फोर्बिडन सेक्स कहानी पर आते हैं।
ये कहानी अभी से 2 महीने पुरानी है फरवरी और मार्च की जब शादियों का सीजन चल रहा था।
मेरी जेठानी के छोटे भाई की शादी थी तो मेरी जेठानी अपने बच्चे को लेकर चली गई और मुझे घर पर ही रहना पड़ा क्योंकि मेरे जेठ भी घर पर थे और मेरे सास ससुर भी।
मेरी सास स्कूल में टीचर थी और ससुर मेरे जेठ के साथ बिजनेस में साथ देते थे।
फिर एक दिन जेठ जी घर पर आए।
उस दिन बारिश बहुत ज्यादा हो रही थी और रात के 10 बजे हुए थे।
मेरे जेठ ने गेट नॉक किया और मैंने दरवाजा खोला।
उन्हें भीगे हुए देखकर बोली, “आप चेंज कर लो, मैं आपके लिए खाना रेडी कर देती हूं!”
वो अपने रूम में चले गए।
थोड़ी देर बाद मेरी नजर उनके टॉवल पर पड़ी जो बाहर पड़ा था।
मैंने उनका टॉवल उठाया और उनके रूम की तरफ गई।
तभी मैंने दरवाजे से देखा वो कपड़े चेंज कर रहे थे।
उन्होंने शर्ट और पैंट उतारी हुई थी और वो सिर्फ अंडरवीयर में खड़े थे।
उनके पूरे शरीर पर बाल थे और उनके हट्टे-खट्टे शरीर को मैं देखे जा रही थी।
तभी मेरी नजर उनके अंडरवीयर पर गई।
मुझे उनका लंड दिखाई तो नहीं दिया लेकिन मेरी जैसी खेली-खाई लेडी लंड को अंडरवीयर के अंदर से देखकर साइज का अंदाजा लगा लेती है।
मेरे जेठ का लंड 8″ से कम नहीं था।
वो नजारा मेरी आंखों में घूमने लगा और मेरा मन मचलने लगा।
तभी मैंने गेट नॉक किया और बोली, “आपका टॉवल बाहर ही पड़ा था!”
वो बाहर आए और बोले, “सॉरी, मैंने गेट बंद नहीं किया!”
मैं बोली, “कोई बात नहीं! आप चेंज कर लो, डिनर रेडी है!”
वो फिर थोड़ी देर बाद चेंज करके बाहर आए और डाइनिंग टेबल पर बैठकर डिनर करने लगे।
खाना खाते वक्त भी मेरा ध्यान उन्हीं पर था।
फिर वो खाना खाने के बाद अपने रूम में चले गए और लैपटॉप पर कुछ काम करने लगे।
मैं थोड़ी देर बाद उनका दूध लेकर उनके रूम में गई।
देखा कि वो टेबल पर सिर रखकर सोए पड़े थे।
मैंने झुककर धीरे से उनके कान में आवाज लगाई, “जेठ जी, आपका दूध!”
वो अचानक से उठे और उनकी कोहनी मेरी चुचियों से टच हो गई।
वो सॉरी बोले और मैंने एक कातिल सी आवाज में बोला, “कोई बात नहीं!”
अब मेरी वासना जाग उठी और मैं जेठ से चुदने का सोचने लगी।
मैं सोचने लगी कि जेठ जी को कैसे पटाया जाए।
थोड़ी देर बाद मैं फिर से उनके कमरे की तरफ गई।
देखा कि वो अभी तक लैपटॉप पर ही सोए पड़े थे।
रात के 12 बजे हुए थे।
मैं उनके पास गई और उनका लैपटॉप बंद किया और बोली, “आपको नींद आ रही है, बेड पर लेट जाओ!”
इतना कहते ही मैंने उनका हाथ पकड़ा और बिस्तर की तरफ खींचने लगी।
तभी मैं जानबूझकर लड़खड़ाते हुए उनके बिस्तर पर गिर गई और जेठ को ऐसे खींचा कि वो मेरे ऊपर ही आ गिरे।
अब जेठ जी पूरी तरह से मेरे ऊपर थे।
वो उठने ही वाले थे कि उसी वक्त बिजली कड़की.
और मैंने डरने का नाटक किया, उनको फिर से अपनी बाहों में जकड़ लिया।
मैं उनसे ऐसे ही लिपटी रही और मेरी सांसें गरम होने लगी।
मेरा पूरा बदन गरम हो चुका था।
तभी मैंने महसूस किया उनका लंड भी तन गया और मेरी जांघों में चुभने लगा।
मैंने नाटक करते हुए हाथ छुड़ाया और खड़ी हो गई।
लेकिन तभी फिर से बिजली कड़की और मैं फिर उनसे लिपट गई।
उन्होंने मेरा चेहरा पकड़ा और बोले, “डरो मत, मैं हूं ना!”
मेरी आंखें बंद थीं और वो मेरी कमर को सहला रहे थे।
उनका लंड अभी भी मेरी जांघों पर रगड़ रहा था।
तभी जेठ जी बोले, “अगर तुम्हें डर लग रहा है तो तुम मेरे पास सो सकती हो!”
मेरी खुशी का तो मानो ठिकाना ही नहीं रहा और मैंने हां में सिर हिला दिया और बोली, “मैं चेंज करके आती हूं!”
मैं फिर अपने रूम में आई और अपने कपड़े उतारने लगी।
मैंने अपना सूट और सलवार उतार दिया।
मैं सिर्फ ब्लैक ब्रा और पिंक पैंटी में खड़ी थी।
तभी जोर से बिजली कड़की और मैं जानबूझकर चिल्लाई।
जेठ जी मेरे रूम में आए और मैंने देखा वो सिर्फ अंडरवीयर में थे।
मैं भागकर उनसे लिपट गई और जेठ जी की नंगी कमर पर हाथ फिराने लगी।
फिर मैंने धीरे से उनको कान में बोला, “जेठ जी प्लीज मेरी ब्रा की हुक खोल दो!”
उन्होंने मेरी ब्रा की हुक खोल दी और ब्रा को अपनी तरफ खींचकर निकाल दिया।
मैं बोली, “जेठ जी ब्रा की हुक खोलने को बोला था, आपने तो ब्रा भी निकाल दी! थैंक्स एनी वे!”
वो हंसने लगे।
फिर मैं उनसे थोड़ी दूर हुई और मिरर के सामने जाकर कुछ मेकअप करने लगी।
मैंने मिरर से जेठ जी को देखा वो मेरी नंगी कमर और कभी मेरे चूतड़ों को ही देखे जा रहे थे।
फिर मैं उनके थोड़े नजदीक आई और वो बोले, “पैंटी भी उतारूं क्या?”
मैं बोली, “तब तो बहुत अच्छा होगा!”
और उन्होंने नीचे बैठकर मेरी पैंटी भी उतार दी और बेड पर फेंक दी।
अब मैं जेठ जी के सामने बिल्कुल नंगी थी और वो तभी मेरे पास आए और मुझे पीछे से पकड़ लिया।
मैं बोली, “जेठ जी!”
तभी वो बोले, “बिजली कभी भी कड़क सकती है!”
मैं हंसने लगी और तभी उन्होंने अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया।
मैंने भी फोर्बिडन सेक्स में उनका साथ देते हुए अपनी गांड को थोड़ा पीछे कर दिया।
तभी उन्होंने मेरी गर्दन पर एक किस किया।
मेरे मुंह से “आउच!” निकली।
वो बोले, “आरती यू बिना कपड़ों के बहुत अच्छी दिखती हो और सेक्सी भी!”
मैं हंसने लगी और बोली, “जेठानी से ज्यादा सेक्सी?”
वो बोले, “हां!”
और उन्होंने मुझे फिर से एक किस कर दिया और अपने हाथ मेरे पेट पर घुमाने लगे।
मैं अब पूरी गरम हो चुकी थी और मेरी सांसें भी गरम हो रही थीं।
उनका लंड मेरी गांड पर दबाव बना रहा था।
तभी वो पीछे से किस करते हुए मेरे बूब्स को दबाने लगे और मेरे मुंह से “आह… आह्ह… ओह्ह!” की आवाज आ रही थी।
अब मैंने भी पीछे से उनके खड़े लंड को अंडरवीयर के ऊपर से पकड़कर आगे पीछे करने लगी।
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे घुमाया और मेरे होंठों पर होंठ रखकर किस करने लगे और मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी।
वो किस करते करते मेरी कमर को सहला रहे थे और कभी कभी मेरी गांड को भी दबा देते।
सच में मुझे आज पता लगा कितने रोमांटिक हैं मेरे जेठ!
करीब 10 मिनट किसिंग के बाद वो मेरी गर्दन से अपने होंठों को ले जाते हुए मेरे दूध को चूसने लगे।
जेठ जी दोनों हाथों से मेरे कंधों को पकड़कर मेरी चुचियां चूस रहे थे और मैं तो जैसे अंदर से टूट-सी जा रही थी।
मेरी चूत चुहक चुहक करने लगी और अंदर से गीली हो गई।
“आह…. आई…. उफ्फ… आह! मेरे अंदर आग सी लग रही थी!”
जेठ जी ने फिर मुझे अपनी गोद में उठा लिया।
हाय क्या सीन था वो!
और फिर उन्होंने मुझे बेड पर पटक दिया।
फिर मेरी नजर उनके खड़े लंड पर गई।
मैं बेड पर बैठ गई और जेठ जी का अंडरवीयर उतार दिया।
जेठ जी के लौड़े मियां अपनी ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।
मैं उनका मोटा काला लंड देखकर सन्न रह गई और सोचने लगी मैं आज इसी से चुदने वाली हूं।
जेठ जी का लंड 9″ लंबा और 3″ मोटा था।
जेठ जी के लंड का चिकना टोपा एकदम झक्कास लग रहा था।
मैंने जेठ जी का लंड हाथ में पकड़ा और बोली, “वाह क्या मर्दाना लंड है! ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। जेठ जी आप बहुत लकी हो, आपका लंड लाखों में एक है। मैं तो तुम्हारे लंड पर मर मिट्टी। मेरा तो दिल आ गया इस मदरचोद लंड पर। बहनचोद क्या मस्ताना लंड है! देखो तो कैसे फुंकार मार रहा है!”
जेठ जी बोले, “आरती डार्लिंग अब तेरा ही है ये लंड!”
मैं उनके लंड के टोपे पर किस करते हुए बोली, “हां हां अब तो ये मेरा ही है और अगर उस्स कुतिया ने इसकी तरफ देखा तो आंख निकाल लूंगी साली रंडी की!”
मैं अपनी जेठानी को गाली देते हुए बोली।
मैं बिल्कुल बेशर्म हो गई थी।
मुझे ना कोई शर्म थी और ना ही कोई झिझक।
मैं बिंदास अपनी जवानी का मजा लूट रही थी।
तभी जेठ जी बोले, “स्टेयर्स का गेट लॉक कर आऊं, कभी मम्मी या पापा ऊपर आ जाए।”
मैं बोली, “मुझे झांट भी परवाह नहीं है किसी की! मैं तो बस अब इस लंड से मजा लूंगी!”
और उनके लंड को चाटने लगी।
मैंने उनका लंड अपने थूक से पूरा गीला कर दिया और फिर धीरे धीरे उनके लंड को मुंह में लेने लगी।
जेठ जी का लंड मोटा था इसलिए मुझे थोड़ा दर्द भी हो रहा था लेकिन मुझे उसकी परवाह नहीं थी।
मैं उनका लंड चूसने लगी और जेठ जी भी उत्तेजित होकर अपना पूरा लंड मेरे मुंह में डालने की कोशिश करने लगे।
मैंने फिर उनका लंड मुंह से निकाला और बोली, “जेठ जी पूरा लंड भी दे देना मुंह में लेकिन आराम से!
आज से पहले इतना मोटा लंड नहीं चूसा ना इसलिए थोड़ा दर्द हो रहा है!”
और इतना कहते ही मैंने फिर से उनका लंड मुंह में ले लिया और उसको ज्यादा से ज्यादा मुंह में घुसेड़कर चूसने लगी।
मुंह के अंदर ही टोपे के चारों तरफ अपनी जीभ घुमाने लगी।
फिर क्या, जेठ जी की सिसकारियां निकलने लगी और वो मेरे मुंह में अपने लंड को अंदर तक डालकर बोले, “वाह आरती बहुत मजा आ रहा है! मेरे लंड को कभी किसी ने इतनी अच्छी तरह नहीं चूसा। यार आरती तू सच में बहुत मस्त चीज है। पूरा चूस डाल मेरा लंड!”
मैं अपनी चूत को सहलाते हुए उनका लंड जोर जोर से चूसने लगी।
लंड चूसते चूसते मैं 2 बार झड़ गई।
मैंने जेठ जी की टांगों को थोड़ा फैला कर उनकी गांड को अपने एक हाथ से चोदा किया और उनकी गांड चाटने लगी।
हाय क्या मदक खुशबू थी जेठ जी की गांड की।
वैसे मैं बता दूं मुझे गांड चाटने का बहुत शौक है।
मैंने अपनी पूरी जीभ जेठ जी की गांड में डाल दी और उनकी चाटने लगी।
मैं फिर से जेठ जी का लंड चूसने लगी लेकिन जेठ जी के लंड का पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था।
करीब 20 मिनट बाद उनका लंड का पानी निकला और मैं उनके लंड का सारा पानी पी गई।
क्या सॉलिड पानी था यार, एकदम नमकीन और चॉकलेटी।
मैंने उनके लंड को चाटकर अच्छे से साफ किया और खड़ी होकर बोली, “यार आपके लंड का टेस्ट सेक्सी है!”
और उनके लौड़े को पकड़कर बोली, “साले ने मुंह दुखा दिया इतनी देर में पानी निकला!”
जेठ जी हंसने लगे और मैं उनके लिप्स को किस करने लगी।
फिर जेठ जी ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी चुचियों को चूसने लगे।
चुचियों को चूसते चूसते धीरे धीरे उनका मुंह मेरी ब्राउन चूत पर आ गया और बोले, “कितनी मस्त चूत है आरती तेरी!”
और इतना कहते ही उन्होंने मेरी टांगों को फैला कर मेरी गीली चूत में अपनी जीभ डाल दी।
वो मेरी चूत में अपनी जीभ घुमा घुमा कर अपनी जीभ से ही मेरी चूत चोद रहे थे।
मैं सिसकारियां ले रही थी और मस्ती की दुनिया में डूबती जा रही थी।
कुछ देर सिसकारियां लेते हुए मैं बोली, “हाय मेरे राजा अब रुका नहीं जाता! पेल दे अपना लंड। चोद डाल मेरी चूत, फाड़ दे आज इसको!”
फिर जेठ जी ने भी देर न करते हुए अपना लंड मेरी चूत पर सट्टा दिया और मेरी चूत पर रगड़ने लगे।
मेरी तो जैसे ज्वाला भड़कने लगी।
मैं बोली, “अब डाल भी दो और मत तड़पाओ मेरे राजा!”
फिर उन्होंने गच्च से पेल दिया अपना लंड मेरी चूत के अंदर।
मेरे मुंह से जोर से चीख निकली, “आई मां मर गई! बाहर निकाल इसको!”
और जेठ जी ने अपनी पकड़ और मजबूत कर दी और मैं छटपटाती रही थी लेकिन वो मेरी सुनने को तैयार नहीं थे।
“बड़ा मोटा है बहनचोद तेरा लंड! बाहर निकाल इसको प्लीज! साले तूने एक ही बार में पूरा का पूरा लंड घुसेड़ दिया!”
मगर उन्होंने कुछ नहीं सुना और मुझे चोदने लगे।
थोड़ी देर बाद जब दर्द कम हुआ तो मैं भी अपनी गांड उठा उठाकर उनका साथ देने लगी।
उनके हर झटके का जवाब झटके से देने लगी और पूरे रूम में फच फच फच… की आवाज गूंजने लगी।
मुझे भी मजा आने लगा और मैं बोली, “जेठ जी और जोर से! आह्ह फाड़ डालो आज इसको!”
वो कहते हैं ना चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है, वो मैं फील कर रही थी।
उधर जेठ जी भी मुझे रंडी की तरह चोद रहे थे।
उनके हर धक्के से पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में समा जाता।
इतने में जेठ जी ने मुझे घोड़ी बनने को कहा और मैं जैसे ही घोड़ी बनी उन्होंने पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मुझे जोर जोर से पेलने लगे।
वो मुझे बहुत देर तक चोदते रहे और मैं भी मजे से चुदवाती रही।
ना ही मेरी चूत खल्लास हो रही थी और ना ही जेठ जी का लंड।
मैंने लंड तो बहुत ले रखे हैं लेकिन जो चरमसुख आज मिला वैसा पहले नहीं मिला।
मैं जेठ जी से बोली, “बहनचोद कितना बड़ा हक्कानी लंड है आपका और ऊपर से गजब का स्टैमिना! ऐसा लंड आज पहली बार मिला!”
जेठ जी मेरी बात सुनकर थोड़ा मुस्कुराए और उन्होंने चोदने की स्पीड बढ़ा दी और मैं भी अपनी गांड आगे पीछे करती हुई चुदाई का आनंद ले रही थी।
10-12 मिनट में मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया और ढीली हो गई।
फिर मुझे महसूस हुआ कि जेठ जी भी झड़ने वाले हैं तो मैंने घूमकर अपना मुंह लंड के सामने कर दिया और उनका लंड चूसने लगी।
फिर जैसे ही वो झड़े तो उनके लंड का वीर्य सारा का सारा मेरे मुंह में जा गिरा और मैं गटक गई।
उसके बाद हम दोनों ऐसे नंगे लिपटकर सो गए।
सुबह 4 बजे मेरी आंख खुली तो मैंने देखा जेठ जी का लंड सोया पड़ा था और टोपा एकदम बाहर निकला हुआ था।
मुझे उस पर प्यार आ गया।
मैंने अपनी जीभ से लंड का टोपा उठाया और आराम से लंड को मुंह में भरने लगी।
मैंने जैसे ही अपनी जबान लंड पर घुमाई जेठ जी उठ गए और बोले, “हाय मेरी रानी! तुझे फिर से चोदूंगा!”
और उन्होंने मुझे चिपका कर अपना लंड मेरी चूत से सट्टा दिया और आराम आराम से अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे।
इस बार मुझे दर्द कम हुआ।
जेठ जी चोदने का आनंद ले रहे थे और मैं चुदने का।
हम दोनों चुदाई का आनंद ले रहे थे और मैं भी 2 बार झड़ चुकी थी।
फिर मैं जेठ जी से बोली, “झड़ने से पहले बता देना। मैं मुंह में लूंगी!”
थोड़ी देर में जेठ जी बोले, “मेरा होने वाला है!”
तो मैंने तुरंत उनका लंड बाहर निकालकर मुंह में ले लिया और वो मेरे मुंह को जोर जोर से चोदने लगे।
तभी उनके लंड से पिचकारी निकली और गरम गरम वीर्य निकल गया और मैं गटक गई।
सच में जेठ जी के लंड का पानी का टेस्ट मुझे बहुत अच्छा लगा।
मैं जेठ जी के लंड को किस करते हुए बोली, “साला मस्त चोदता है!”
जेठ जी बोले, “आरती तू भी बहुत चुदक्कड़ है!”
मैं हंसने लगी और आंख मारते हुए बोली, “चलो अच्छा हुआ आपको पता लग गया!”
मैं खड़ी हुई और बोली, “अब आप अपने रूम में जाओ।”
जेठ जी बोले, “यहीं सो जाता हूं तुम्हारे पास।”
मैं बोली, “चूतिये, मम्मी पापा उठने वाले हैं!”
जेठ जी अपने रूम में चले गए और मैं फिर से अपने रूम का गेट लॉक करके सो गई।
सच में जेठ जी के लंड से मुझे आज चुदाई का भरपूर आनंद मिला।
मैं 6 बजे सोकर उठी और कपड़े पहन लिए।
मैं किचन में गई।
मुझसे चला भी नहीं जा रहा था और मेरी चूत में जलन सी हो रही थी।
मम्मी मुझे देखकर बोली, “क्या हुआ आरती?”
मैं बोली, “मम्मी रात को पैर में मोच आ गई थी, अब आराम है।”
मैंने अपनी सास ससुर को चाय दी और फिर जेठ जी को उठाने चली गई।
मैं चाय लेकर उनके रूम में गई और देखा तो नंगे ही बेड पर सोए हुए थे।
उनका लंड एकदम खड़ा हो रखा था।
मैंने उनके लंड के टोपे पर एक किस की और जेठ जी को बोली, “साला अभी भी खड़ा है!”
जेठ जी बोले, “तेरी याद आ रही है इसको!”
मैं बोली, “रात को निचोड़ दूंगी इसको, अब उठ जाओ और चाय पी लो!”
उस दिन के बाद मेरे जेठ जी मुझे अच्छे से चोदते और मैं भी उनके लंड के बिना अब नहीं रह सकती।
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लेखिका की पिछली कहानी थी: पड़ोसी चाचा से चूत चुदवा कर सील तुड़वाई
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