इंडियन सेक्सपूर्ण

बॉस की पत्नी की मसाज और चुदाई- 2

0 बार पढ़ी गई14 मिनट का पाठलगभग ९ घंटे पहले

फक बॉस वाइफ स्टोरी में बॉस के औलाद नहीं थी. मेरा डील डौल रंग रूप अच्छा है तो बॉस ने मुझे उनकी बीवी के साथ सेक्स करके उसे प्रेग्नेंट करने को कहा.

दोस्तो, मैं रवि अपनी कहानी के पहले भाग

बॉस ने अपनी बीवी चोदने को कहा

में आपको अपने बॉस की निसन्तान पत्नी की मसाज के बारे में लिख रहा था.

चूंकि बॉस ने मुझसे स्पष्ट कह दिया था कि मैं उनकी पत्नी को गर्भवती कर दूं तो मैं बस मैडम की चूचियों की मालिश करते हुए उनको चुदाई के लिए गर्म कर रहा था.

अब आगे फक बॉस वाइफ स्टोरी:

अब मैं मैडम के सर के पीछे खड़ा हो गया, ऊपर से टॉवल के अन्दर हाथ डाल कर बूब्स को मसाज करने लगा.

तभी हाथ में उलझ कर टॉवल उतर गया और मैं मैडम के मस्त रसीले दूध देखकर पागल हो गया.

एकदम गोरे और डार्क रेड निप्पल थे.

वाओ क्या दूध थे … मन हुआ कि अभी चूस लूँ!

मुझसे रहा नहीं गया.

मैंने मैडम के दूध मसलते हुए उनसे कहा- मैडम, वाकयी आप बहुत ही ज्यादा खूबसूरत हैं!

वे हम्म कहती हुई बस मेरे हाथों का मजा ले रही थीं.

अब मैंने थोड़ा जोर जोर से बूब्स की मसाज शुरू कर दी.

निप्पलों को भी पकड़ कर थोड़ा दबा दबा कर मसाज देने लगा.

मैडम की कामुक सिसकारियां निकलने लगी थीं.

अब मैं वहीं खड़ा खड़ा मैडम के पेट के ऊपर से मैडम के चूतड़ों वाले टॉवल के नीचे तक हाथ ले जाता.

लेकिन मेरे हाथ उधर तक अच्छे से पहुंच नहीं पा रहे थे.

मैंने मैडम को दोनों हाथों से पकड़ा और उनको अपनी तरफ टेबल के कोने पर खींच लिया.

मैडम की थोड़ी सी गर्दन लटक गयी.

मेरे हाथ भी आसानी से पहुंच सकते थे.

मैडम की आँखों पर पट्टी थी.

इसी बात का फायदा उठा कर मैंने एक दो बार अपनी जीभ से मैडम के निप्पल सहला दिए.

हालांकि उन्हें मेरी जीभ के खुरदुरेपन का अहसास हुआ होगा लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं.

अब मैं आगे झुक कर मैडम की चूत के दोनों तरफ तक अपने हाथ ले जाकर मालिश कर रहा था.

तभी मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड मैडम के होंठों के एकदम सामने है.

मैंने मौका पाकर इधर उधर हिलकर टॉवल के अन्दर से थोड़ा लंड बाहर निकाल लिया.

मैं फिर से झुक झुक कर मालिश करने लगा.

मुझे साफ पता चल रहा था कि मेरा लंड मैडम के होंठों से टकरा जा रहा था.

कभी कभी मैडम की गर्म सांसें मेरे लंड से टकरा भी रही थीं.

अब मैंने उनके चूतड़ों वाला टॉवल भी हटा दिया. वहीं खड़े खड़े मैडम की चूत के आस-पास मसाज करता रहा.

उनकी चुत रिसने लगी थी, जो साफ साफ कह रही थी कि उसे लंड की जरूरत है.

थोड़ी देर बाद मैं मैडम की चूत के ऊपर वाले हिस्से को मसाज करने लगा.

मैडम काफी गर्म हो गयीं.

मैडम जैसे ही सिसकी लेने के लिए थोड़े से होंठ खोलतीं, मेरा लंड वहां चिपक जाता.

अब मैं अपनी उंगलियां ऑयल में भिगोकर मैडम की चूत सहलाने लगा.

फिर मैंने एकदम से अपनी दो उंगलियां मैडम की चूत में डाल दीं.

रसभरी चुत में मेरी उंगलियां अन्दर तक धँसती चली गईं.

उसी वक्त कराह के लिए अचानक से मैडम का मुँह खुला और उसमें से आह निकली, मैंने अपने लंड का टोपा उनके मुँह में डाल दिया.

मैडम ने वापस होंठ बंद किए, तो लंड उनके मुँह में था.

मैं मैडम की चूत की जम कर मसाज की.

धीरे धीरे मैडम मेरा लंड चूसना स्टार्ट कर दिया.

कभी कभी मैं ज्यादा आगे झुकता, तो आधा लंड मैडम के मुँह में चला जाता.

वाह क्या नजारा था!

खूब देर लंड चुसवाने के बाद मैंने मैडम के बूब्स को मुँह में भर लिया और चूसना स्टार्ट कर दिया.

मैडम ने भी मना नहीं किया.

मैंने चूस-चूस कर मैडम के दोनों निप्पल लाल कर दिए, उनके बूब्स पर निशान बन गए.

तभी मैडम ने करवट बदली और उल्टी लेट गयीं.

उन्होंने एक बार फिर से मेरे लौड़े को चूसा और मेरे टट्टे सहलाने लगीं.

अब मैं पीछे की ओर आ गया और अपने लंड पर तेल लगाने लगा.

फिर मैडम की बैक पर किस करते करते धीरे धीरे उनके ऊपर चढ़ गया.

मेरा लंड अब मैडम के चूतड़ों में फंसा हुआ था.

लौड़े की पोजीशन उनकी चूत के बिल्कुल आस-पास ही थी.

मैंने मैडम के कान में बोला- आई एम सॉरी मैडम … अब और नहीं रहा जा रहा!

तभी मैडम ने एक हाथ से मेरा गाल और बाल सहलाए, अपना पिछवाड़ा इधर उधर इस टाइप से हिलाया कि मेरा लंड मैडम की चूत के मुहाने में आ फंसा.

अब मेरे लंड का आधा टोपा अन्दर जा चुका था.

लेकिन लंड मोटा था, मैडम की चूत टाइट थी तो अन्दर नहीं गया था.

मेरा लंड मैडम की गर्म चूत पर लगा ही था कि और अकड़ गया.

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने धीरे से एक झटका मार दिया

झटका लगते ही मेरा लंड मैडम की चूत में फिसलता हुआ आधा अन्दर चला गया.

मैडम के मुँह से चीख निकल गयी- आह उफ्फ रुको … बहुत मोटा है!

लेकिन मैडम की आह उफ्फ इतनी मादक थी कि मैं मैडम की गर्दन को चूसने और खाने लगा.

मैंने धीरे धीरे झटके मारने शुरू कर दिए.

कसम से चुत की कसावट से और गर्मी से मेरे लौड़े को जन्नत का सुख मिलने लगा था.

मैडम आह ओह उफ्फ करती रहीं.

मैं पागल होता गया.

करीब दस मिनट की चुदाई के बाद मैडम फुसफुसाईं- सामने से ऊपर आ जाओ!

मैं जैसे ही उठा, मैडम सीधी होकर लेट गयीं.

मैं मैडम की टांगों के बीच में बैठ कर अपना लंड उनकी चूत पर लगा रहा था.

तब पहली बार मैडम की चूत को गौर से देखा.

मैं उनकी चुत को देखता ही रह गया.

उनकी चुत भी चूचियों की ही तरह डार्क रेड कलर की थी और रगड़ रगड़ कर और लाल हो चुकी थी.

मैं पागल हो चुका था.

जैसे ही मैंने चूत पर अपना लंड लगाया, मैडम ने अपनी टांगें फैलाते हुए मुझे अपने ऊपर खींच लिया.

मेरा लंड एक झटके में पूरा अन्दर चला गया.

मैडम का मुँह खुला का खुला रह गया, मैडम ने मुझे दोनों हाथों और पैरों से जकड़ लिया.

मैं कुछ देर तक हिल भी नहीं पा रहा था.

तभी मैंने मैडम के खुले होंठों को किस करना स्टार्ट कर दिया.

अब मैडम भी पागलों की तरह मेरे होंठ खाए जा रही थीं.

धीरे धीरे मैडम ने अपने पैरों को ढीला छोड़ा.

मैंने फिर से झटके मारने शुरू कर दिए.

मैडम अपने हाथों से अब भी मुझे जकड़ी हुई थीं.

उनके मस्त टाइट बूब्स मेरी चौड़ी छाती के नीचे मसल रहे थे.

करीब दस मिनट ही हुए थे कि मैडम अचानक इतनी गर्म हो गयीं कि मैं भी सहन नहीं कर पा रहा था.

मैडम ने मेरे बालों में हाथ फेर फेर कर किस किया.

मेरे लंड से उनकी चुत में ही पिचकारियां छूटने लगीं.

तभी मैडम ने अपने पैरों से मुझे जकड़ लिया.

एक एक बूंद अन्दर ही छुड़वा ली.

करीब पांच मिनट तक वे वैसे ही लेटी रहीं … फिर उन्होंने मुझे छोड़ा.

मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला, तो देखा कि मैडम की चूत खुली की खुली ही रह गयी.

चुत चारों तरफ से एकदम लाल हो चुकी थी.

कुछ देर रुकने के बाद मैंने अपने कपड़े पहने और उन्हें देखने लगा.

वे मुझे देख कर मुस्कुरा रही थीं.

उस दिन लाइफ की पहली चुदाई के बाद मुझे बहुत जोर से नींद आने लगी थी.

मैं उधर ज्यादा देर नहीं रुका, बस निकल कर अपने रूम में आया और बिस्तर पर गिर कर सो गया.

अगले दिन भर हम शिमला और कुफ्री घूमे.

आज मैडम थोड़ी घुली-मिली सी नजर आईं लेकिन बॉस साथ में थे, इसलिए शांत भी थीं.

शाम को मॉल रोड घूमकर होटल आ गए.

करीब आठ बजे बॉस का कॉल आया

उन्होंने ड्रिंक्स पार्टी के लिए बुलाया.

बॉस ने कहा- आज मौसम भी अच्छा है और मैच भी है.

मैं कल की तरह एकदम फ्रेश होकर, बिना अंडरवियर के बॉस के रूम पर पहुंच गया.

बेड के एक किनारे पर बॉस और दूसरे पर मैडम बैठे थे.

टीवी स्टार्ट हो चुका था.

ड्रिंक्स टेबल पर लगी थी.

एसी बंद था, पर बाहर की ठंडी फ्रेश हवा से रूम मस्त हो रखा था.

हमने ड्रिंक्स लेना स्टार्ट किया.

बॉस ने मैडम के लिए वाइन मंगवाई थी.

मैडम आधी बोतल वाइन गटक गयी थीं.

ड्रिंक्स के बाद हम लोगों ने खाना खाया.

फिर मैच देखने लगे.

रात के करीब साढ़े दस बज चुके थे.

मैंने बॉस से कहा- अब मैं चलता हूँ सर!

उन्होंने कहा- अरे अभी कैसे … अभी तो पूरा मैच बाकी है. देख लो यहीं पर … इधर बड़ी टीवी लगी है.

मैं बेड के मैडम वाली साइड विंडो के पास चेयर पर बैठ कर मैच देख रहा था.

सर और मैडम बेड पर रजाई में थे.

ग्यारह बजते बजते थोड़ी ठंड लगनी शुरू हुई.

बॉस सिगरेट पी रहे थे, इसलिए विंडो ओपन ही थी.

ड्रिंक्स के बाद भी थोड़ी थोड़ी सर्दी लगनी स्टार्ट हो गयी थी.

बॉस ने कहा- यहां आ जाओ बेड पर!

तभी मैडम बॉस के बगल में खिसक कर जगह खाली करती हुई बोलीं- हां आपको ठंड लग जाएगी, अभी काफी मैच बाकी है. यहां मेरे बाजू में आ जाओ!

थोड़ी देर बाद मैं मैडम की साइड, बेड पर लेट कर मैच देखने लगा.

करीब एक घंटा बाद बॉस को मैच देखते देखते नींद आ गयी.

दिन भर के थके होने के कारण उनके खर्राटे निकल रहे थे.

मैडम ने उन्हें रजाई ओढ़ा दी.

थोड़ी देर बाद मैडम वाशरूम गयीं.

जब वे बाहर आईं तो आंखें फटी की फटी रह गयीं.

मैडम एक हल्की ट्रांसपेरेंट शॉर्ट नाइटी टाइप ड्रेस में थीं. उन्होंने अन्दर कुछ भी नहीं पहन रखा था.

वे बेहद हॉट माल लग रही थीं.

इस बार बेड के थोड़ा मेरी साइड में लेट गयीं.

मैंने मन ही मन सोचा कि ये कैसा कहर ढा रही हैं मैडम, बॉस के पास ही मेरे साथ चुदाई का मूड बना रही हैं.

खैर … जैसे तैसे मैं थोड़ी देर चुपचाप टीवी देखता रहा.

फिर हिम्मत जुटाकर मैंने मैडम के पास खिसकना शुरू किया.

थोड़ा पास खिसकने के बाद मैंने अपना एक हाथ धीरे धीरे मैडम के पेट पर रखा, सहलाना शुरू कर दिया.

धीरे धीरे ऊपर की तरफ खिसकाते हुए बूब्स पर ले गया.

मैडम ने वह हाथ वहीं पकड़ लिया.

थोड़ी देर में मैडम की पकड़ ढीली हुई, मैंने हाथ फेरना शुरू कर दिया.

उंगली और अंगूठे से मैडम की चूची मसलना शुरू किया.

थोड़ी देर में मैडम थोड़ी गर्म होकर मेरी ओर करवट लेने लगीं.

अब मैंने नाइटी आगे से खोल दी.

रजाई के अन्दर थोड़ा पास जाकर मैडम से लिपट गया, मैडम की चूचियां चूसने लगा.

वे भी अपने हाथ से अपने दूध पकड़ कर चुसवाने लगी थीं.

मैंने जी भर कर मैडम की दोनों चूची चूसीं.

फिर मैंने बाहर मुँह निकाल कर मैडम को किस किया.

मैडम ने मुझे हटा दिया और खुद रजाई में घुस गयीं.

मैडम ने मेरी टी-शर्ट ऊपर की और मेरे बूब्स पर और सीने पर किस करने लगीं.

वाओ क्या मजा आ रहा था.

मैडम की गर्म सांसें मस्त थीं. उन्होंने आधी बोतल वाइन गटकी हुई थी तो वे एकदम बिंदास थीं.

मैं टीवी देखता रहा.

मैडम अन्दर ही अन्दर धीरे धीरे किस करती हुई नीचे की तरफ जा रही थीं.

मेरा लंड तंबू हो चुका था.

थोड़ी देर में ही मैडम ने लोअर के ऊपर से ही मेरे लंड पर एक दो किस कीं, लोअर नीचे खिसकाना चाहा.

मैं थोड़ा सा ऊपर हो गया.

जैसे ही लोअर नीचे खिसका, मेरा लंड फट से आकर मैडम के गाल से लग गया.

अब मैडम हाथ से मेरे आंड पकड़ कर सहलाने लगीं, लंड को मुँह में भर के चूसने लगीं.

आह जन्नत की सैर पर था मैं!

इतनी बड़ी कंपनी की मालकिन अपने अदने से मुलाजिम का लंड चूस रही थीं.

मैडम आज पूरे न/शे में थीं.

वे ऊपर आईं और कान में बोलीं- बहुत बड़ा है तुम्हारा!

मैंने वासना से उनका एक दूध दबाते हुए कहा- तो अपने मुँह में लेकर चूसो न!

वे हंस दीं और फिर से नीचे जाकर चूसने लगीं.

मैडम ने जी भर के मेरा लौड़ा चूसा. मेरे आंड चाटे … फिर ऊपर आकर मेरी ओर गांड निकाल कर लेट गयीं.

अब मेरा लौड़ा जोश में फटा जा रहा था.

मैंने जल्दी से लंड पर थूक लगाया.

मैडम की नाइटी ऊपर करके उनके पीछे चिपक गया.

थोड़ी देर तक मैडम की चूत पर अपना लंड रगड़ा.

मैडम ने अपने हाथ से पकड़ कर चूत के मुहाने पर लगा लिया.

मैंने जैसे ही जोश में आकर झटका मारा, लंड खप से अन्दर घुस गया.

मैंने एक हाथ से मैडम का मुँह पकड़ लिया था ताकि चीख ना निकले.

फिर भी एक बार तो मैडम की आंखों में आंसू आ गए.

उन्होंने पीछे मुड़कर मुझे रोकना चाहा.

मैंने उनके होंठों को अपने होंठों में लेकर किस करना स्टार्ट कर दिया.

थोड़ी देर में मैडम नॉर्मल हुईं तो मैंने अपने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया, पीछे से चुदाई शुरू कर दी.

काफी देर चुदाई के बाद मैडम ने मेरे हाथों को जोर से जकड़ लिया.

वे पानी पानी हो गयी थीं … पर मेरा मन अभी नहीं भरा था.

फिर बॉस के पास ही मैं मैडम के ऊपर आ गया और मैडम को प्यार से खूब देर तक चोदा.

मैडम शायद दो बार पानी छोड़ चुकी थीं.

वे जोर जोर से मुझे सहलाने लगीं … किस करने लगीं.

तब जाकर मैं भी फ्री होने लगा.

मैडम कल की तरह सारा रस अन्दर ही लेकर सो गयीं.

मैं भी वहीं सोता रहा.

सुबह आंख खुली तो मेरा लंड खड़ा हो रखा था.

बॉस रूम में नहीं थे.

मैं जल्दी से उठा, दूसरे वाशरूम में जल्दी फ्रेश होकर वापस वहीं लेट गया.

थोड़ी देर बाद मैडम टॉवल में नहाकर बाहर निकलीं.

मैंने उन्हें अपनी ओर खींच लिया.

मैडम हंस कर बोलीं- ये क्या कर रहे हो, विजय आ जाएंगे!

मैंने कहा- मैडम आपके पास सोते सोते ही तो लंड तड़प उठा है. अब तो एक बार और दे ही दो. सर तो सुबह देख कर ही गए होंगे न!

मैडम कुछ बोलतीं, उससे पहले मैंने मैडम को खड़े होकर बांहों में भर लिया, चुम्मियों की बौछार कर दी.

उनके पीछे चिपक कर बूब्स दबाए.

इतने में लंड फिर से फटने लगा.

मैडम को बेड के कोने पर ही बिठाया, पहले उनकी चूचियों पर लंड रगड़ा, फिर उनके मुँह में दे दिया.

उन को भी शायद मेरा लंड बेहद पसंद आ गया था, मैडम ने भी जी भर कर लौड़े को चूसा.

मैंने कहा- प्लीज मैडम, आज घोड़ी बन जाओ ना!

मैडम ना-नुकुर और नखरे करने लगीं.

मैंने मैडम को बेड पर ही झुकाया, पीछे से पेल दिया.

अब मैडम एक बार तो उछलीं. फिर गांड पीछे निकाल कर चुदवाने लगीं.

पर अभी भी पूरा मजा नहीं आया था.

थोड़ी देर में मैडम मजे लेने लगीं.

मैंने उन्हें बेड के कोने पर उनके घुटने मोड़ कर घोड़ी बना लिया.

जैसे ही लंड मैडम की चूत में डाला, मैडम उछल कर भागने लगीं ‘आह उफ्फ बाप रे …!’

पर मैंने उन्हें पकड़ लिया.

अन्दर लंड डाले डाले थोड़ी देर बूब्स दबाए तो वे शांत हो गयीं.

फिर धीरे धीरे मैडम ने भी अपनी गांड पीछे निकाल ली और मस्ती से मेरा लंड लेने लगीं.

उस सुबह मैडम को बहुत जबरददस्त चोदा.

आठ दस झटके तो बहुत ही जोर जोर के मारे.

फिर पानी निकला तो मैं मैडम के ऊपर ही गिर गया.

थोड़ी देर बाद मैडम ने मेरी एक पप्पी ली और मुझे अपने ऊपर से नीचे उतारा.

मैं मैडम की लेकर अपने रूम में चला गया.

करीब नौ बजे बॉस वापस आए.

फिर हम सब दिल्ली आ गए.

उस दिन के बाद मैं अपने काम में व्यस्त हो गया.

बाकी सब अपने काम में लग गए.

करीब पंद्रह दिन बाद बॉस मेरे लिए एक गिफ्ट लेकर आए थे.

उसमें एक महंगी वॉच थी.

बॉस ने कहा- हम लोग इस वीकेंड पर बैंगलोर शिफ्ट हो रहे हैं. यह गिफ्ट नेहा ने तुम्हें दी है.

मैं समझ गया कि शायद नेहा मैडम प्रेग्नेंट हो चुकी थीं.

उस दिन के बाद मैडम कभी नहीं मिलीं.

बस उनकी यादें हैं. इस सच्ची सेक्स कहानी में मैंने सारे नाम बदले हुए हैं.

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