मैं मनपसन्द लड़के से कैसे चुदी- 2
फुल फक स्टोरी में मेरी कार क्लीनर से चुदाई हो चुकी थी. उसने मुझे पूरा मजा दिया था. लेकिन खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ था. उसने मुझे कैसे कैसे मजा दिया, खुद पढ़ें.
यह कहानी सुनें.
डियर्स, मैं पिंकू आपको अपनी सेक्स कहानी में एक क्लीनर लकी के साथ सेक्स को लिख रही थी.
कहानी के पिछले भाग
मनपसन्द लड़के को कैसे पटाया मैंने
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि उस क्लीनर ने अपना लंड मेरी चुत में ठांस दिया था और मुझे नितंबों से उठा कर बाथरूम में ही झूला झुलाते हुए चोद रहा था.
अब आगे फुल फक स्टोरी:
लकी की बॉडी गठी हुई, कद लंबा और बांहें ताकतवर थीं.
उसके सामने पांच फुट की मैं केवल एक गुड़िया जैसी ही नज़र आ रही थी.
मुझे अपने लंड से धीरे से नीचे उतारते हुए वह फुसफुसाया- अभी तो तुम्हारी सारी गर्मी निकालनी है पिंकू रानी!
‘किस मुसीबत में फंस गई?’ मैंने डरते हुए सोचा.
इतना सीधा सादा सा दिखने वाला इंसान इतना बड़ा डोमिनेटिंग और एग्रेसिव चोदू निकलेगा, मैंने कल्पना भी नहीं की थी.
लकी मुझे नीचे खड़ा करके मेरे कंधों पर बाथ जैल डालने लगा जो मेरी चूचियों से होता हुआ मेरी नाभि, चूत और जांघों पर बहने लगा.
उसने काफी सारा जैल अपनी छाती पर भी गिराया.
मैं सोच ही रही थी कि अब यह क्या करने वाला है कि उसने करीब डेढ़ फीट ऊंचे बाथ स्टूल पर खड़े होकर झुकते हुए मेरी बगलों के नीचे हाथ डाला मुझे एक कपड़े की गुड़िया की तरह इतना ऊपर उठा लिया कि मेरी चूचियां उसके मुँह पर रगड़ खाने लगीं.
वह कुछ मुझे हिला हिला कर और कुछ अपना चेहरा इधर उधर करके मेरी चूचियां अपने मुँह पर एक बाथ स्पंज की तरह रगड़ने लगा.
कभी अपना चेहरा दोनों मम्मों के बीच में घुसा कर अपने दोनों गालों पर झाग बनाने लगता, कभी अपने होंठ और नाक उन पर रगड़ने लगता.
ऐसे ही मुझे थोड़ा नीचे करके दायें बाएं हिलाते हुए मेरी छातियों से अपने सीने पर झाग बनाने लगा.
इस दौरान जब भी मेरे निपल्स उसके निपल्स से रगड़ खा जाते तो मेरे मुँह से सिसकारी से निकल जाती.
यह देख कर वह भी मेरी चूचियों को देर तक अपनी छाती पर घिसता रहा.
मैं भी अपने हाथों से अपनी चूचियां पकड़ कर उसके निप्पल से रगड़ने की कोशिश करती रही.
इसी तरह मेरी चूचियों को बाथ स्पंज की तरह यूज़ करते हुए उसने अपने पेट, नाभि वगैरह पर अच्छी तरह रगड़ा.
मैं तो ऐसे हवा में झूलती झूलती थक सी गई थी लेकिन लकी महाशय किसी जंगली घोड़े की तरह थकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
आखिर जब उसने मुझे नीचे खड़ा किया, तो मैंने चैन की सांस ली.
लेकिन यह क्या?
अब मेरे बोबे ठीक उसके लंड के सामने थे.
जाहिर है, उसने अब मेरी चूचियों से अपने लंड और बाल्स पर झाग बनाना शुरू कर दिया.
ज़ोर ज़ोर से मेरी चूचियों को निचोड्ते हुए अपने गुप्तांगों पर देर तक रगड़ता रहा.
अब तक शायद वह खुद स्टूल पर खड़े खड़े थक गया था, या उसने नई पोजीशन सोची, लेकिन वह स्टूल पर बैठ गया और मुझे घुमा कर अपनी गोद में बैठा लिया.
अब मेरे नितंब उसके लंड को रगड़ रहे थे और पीठ उसकी छाती को घिस रही थी.
मैंने भी अपनी तरफ से पहल करके अपने चूतड़ उसके लंड पर घिसने शुरू कर दिए.
मुझे अब उसको उकसाने की अपनी जिद पर पछतावा सा हो रहा था.
लेकिन आखिर इतने दिनों से अपनी तरफ से उसे उकसाने के बाद यूं ही हार तो नहीं मान सकती थी न!
वह भी कहां हार मानने वाला था.
उसने भी पीछे से हाथ बढ़ा कर मेरी छातियां मसलनी शुरू कर दीं.
उसके हाथ यूं ही झाग बनाते बनाते नीचे फिसलते गए और उसकी उंगली मेरी नाभि की मसाज करने लगी.
उसी समय उसके दूसरे हाथ की दो उंगलियां मेरी कामकणिका को छूती हुई मेरी चूत में दाखिल हो गईं.
फिर क्या था, पता नहीं कितनी देर तक उसकी हथेलियां और उंगलियां मेरी चूचियों, नाभि, काम कनिका और चूत पर फिसलती रहीं, खेलती रहीं और मैं भी अपने चूतड़ हिला हिला कर उसके लौड़े की मालिश करती रही.
मेरी चूत से बहता हुआ पानी साबुन में मिक्स होकर एक नशीली महक फैला रहा था.
मैंने कई बार उत्तेजित होकर उसके लौड़े को अपनी चूत में लेने की भी कोशिश की लेकिन उसने ऐसा होने नहीं दिया और मुझे अपनी क्लिटोरिस उसके लंड पर रगड़ रगड़ कर ही संतोष करना पड़ा.
उसने मेरे पूरे पेट और जांघों पर साबुन का झाग बनाया, फिर आगे धकेल कर पीठ पर भी अच्छी तरह साबुन रगड़ा.
आखिर एक लंबे इंतज़ार के बाद उसने फिर से शॉवर ऑन कर दिया और हमने अपने शरीर से साबुन धोया.
मैं जैसे निढाल होकर स्टूल पर बैठ गई.
‘अभी से थक गईं? अभी तो बहुत कुछ बाकी है … पिंकू जानेमन!’ वह हंसा.
यह मेमसाहब से मैम, पिंकू मैम, पिंकू, बेबी, पिंकू रानी और अब जानेमन तक का सफर इतनी जल्दी पूरा हो जाएगा, मैंने कभी सोचा भी नहीं था.
‘अब क्या बचा है? चूस दूँ?’ मैंने अपने मुँह के सामने झूमते उसके तने हुए लंड को देख कर जल्दी से बोला कि कहीं यह अब मेरी गांड पर ना पिल पड़े.
’हां हां ज़रूर, लेकिन ऐसे नहीं!‘ यह कहते हुए उसने झुक कर अब मेरे हिप्स के नीचे से हाथ डाल कर मुझे एक खिलौने की तरह उठाया और मेरी टांगें अपने सिर के दोनों ओर फैलाते हुए मुझे अपने कंधे पर बैठा लिया, जैसे किसी बच्चे को बैठाते हैं.
अब मेरी टांगें उसके कंधों से होती हुई उसकी पीठ पर झूल रही थीं और उसका मुँह मेरी चूत पर था.
मैंने किसी तरह उसके पीछे की दीवार का सहारा लेकर बैलेंस बनाया, हालांकि मेरे चूतड़ उसकी हथेलियों पर टिके हुए थे.
उसकी जीभ, मेरी चुत के दाने को, तो कभी चूत के होंठों को सहला रही थी, तो कभी चूस रही थी, कभी अन्दर घुस कर मुख मैथुन कर रही थी.
‘आह उफ्फ़ फ्फ् श्ह्ह्.’ रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद, मेरे मुँह से चीखें निकल रही थीं.
मैं अपनी टांगें उसके सर के पीछे कस रही थी.
थोड़ी देर के बाद उसने फिर पोजीशन बदली और मुझे कमर से पकड़े पकड़े ही उल्टा करके शीर्षासन की मुद्रा में लटका लिया.
मेरी कॉलेज के ज़माने की जिम्नास्टिक्स की प्रैक्टिस और अभी का डेली योगा काम आ रही थी, नहीं तो अब तक कई जगह मोच आ चुकी होती.
बाद में उसने बताया कि उसे मेरे स्टेट लेवल की जिम्नास्टिक चैंपियन होने के बारे में पता था.
वह खुद भी वेट लिफ्टिंग का चैंपियन रह चुका था.
खैर … अब हम दोनों खड़े खड़े ही सिक्सटीनाईन की पोजिशन में आ चुके थे.
सारा खून तेजी के साथ मेरे सिर की तरफ दौड़ कर मुझे हवा में उड़ने का अहसास दे रहा था और मेरी चूत के दाने और चूत पर घूमती उसकी जीभ मुझे पागल बना रही थी.
उसके लौड़े को लपक के अपने मुँह में भरने के लिए मुझे उसके कहने की जरूरत नहीं पड़ी.
मैंने भी उसके लंड को कुल्फी की तरह चाटना, सुपाड़े को रसगुल्ले की तरह चूसना और पोटों को सहलाना चालू कर दिया.
अब कौन किसको ज्यादा मजा दे रहा था या कौन किसको चोद रहा था, कहना मुश्किल था.
मैंने उसकी गोलियों को भी मुँह में लेकर चूसा.
आखिरकार उसने मेरे मुँह में में अपना लावा छोड़ दिया.
मेरी चूत तो लगातार पानी छोड़ ही रही थी.
उल्टा लटका होने की वजह से उसका वीर्य मेरी नाक में भर कर मेरा दम ही घोंट देता, लेकिन उससे पहले ही उसने मुझे सीधा करके खड़ा कर दिया तो मेरी जान में जान आई.
मैंने जल्दी से उसके वीर्य को निगला और एक लंबी सांस ली.
फुल फक करके हम एक बार और स्खलित हुए.
उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे को रगड़ रगड़ कर साबुन लगाया, नहलाया और अठखेलियां करते हुए एक दूसरे के बदन को तौलिया से सुखाया.
जब लकी कपड़े पहन कर जाने लगा तो मैंने मज़ाक में पूछा- दो हज़ार रूपय काफी हैं या और दूँ?
‘अब रुपयों से काम नहीं चलेगा मेम साहब, शाम को रेडिसन में डिनर कराना पड़ेगा!’
‘चलो फिर शाम को ठीक आठ बजे रेडिसन के बाहर मिलना और ढंग के कपड़े खरीद लेना.’
मैंने एक और दो हज़ार का नोट ज़बरदस्ती उसकी जेब में डालते हुए बोला.
मैंने भी यह सोच कर हां कर दी कि चलो एक बार इसका स्टार होटल में जाने का ख्वाब भी पूरा कर देती हूँ.
आज के सेशन के दोबारा रिपीट होने की उसकी उम्मीद पर भी सख्ती से लगाम कस देती हूँ.
मैं अपने किसी पार्टनर के साथ लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप का झंझट नहीं पालती और इसका तो सोशल स्टेटस भी मुझे पेरता रहेगा.
तब तक डिलिवरी बॉय बर्गर लेकर आ गया था. मैंने बीयर के साथ बर्गर का लाइट लंच लिया और आज के धमाकेदार सेक्स सेशन, अपनी बेबसी को भी एंजॉय करने की यादों के साथ लंबी तान कर सो गई.
शाम को नहाने बाथरूम में घुसी तो एकाएक दोपहर की सारी घटना आंखों के आगे सिनेमा की तरह घूम गई.
मैं अपने पूरे बदन में हो रहे मीठे मीठे दर्द के साथ रंगीन दोपहर की मीठी मीठी यादों में खोई खोयी … कब नहा कर बाहर आई, कब तैयार हुई, मुझे होश ही नहीं रहा.
‘चलो यह किस्सा भी खत्म करती हूँ!’ मैंने सोचा और कार स्टार्ट कर दी.
होटल पहुंची तो जनाब कहीं दिखाई नहीं दिए.
शायद फाइव स्टार को देख कर डर ही गया होगा, कहीं वापस न चला गया हो और कल फिर से और माल मसाले की उम्मीद में, घर पर ना टपक पड़े.
यह सब मैंने डर कर सोचा.
तभी एक वेटर ने मुझे एक पर्ची पकड़ाई. उस पर लिखा था कि इस वेटर के साथ साथ चली आओ मेमसाहब. कब से इंतज़ार कर रहा हूँ.
नीचे कोई साइन नहीं थे, लेकिन ‘मेम साहब’ और साथ में बनी इस्माईली ने कोई शक की गुंजाइश नहीं छोड़ी थी.
वेटर ने एक कमरे के डोर पर नॉक किया और दरवाजे को खोल कर मुझे झुक कर सलाम बजाते हुए अन्दर जाने का इशारा किया.
मेरे अन्दर जाते ही दरवाजा बंद हो गया.
‘वैल्कम वैल्कम माय सेक्सी डॉल!’
जानी पहचानी आवाज़ सुन कर मैंने पलट कर देखा तो लकी जैसी सूरत वाला शख्स झकाझक अरमानी सूट, वन गौग ग्लासेज़, राडो वॉच में मेरे सामने खड़ा था.
‘यह सब क्या है?’ मैंने कांपती हुई आवाज़ में अपने चारों तरफ फटी फटी आंखों से लक्ज़री एक्सिक्यूटिव सूट को देखते हुए पूछा.
‘घबराओ मत, अभी सब क्लियर करता हूँ. मैं एक कामयाब बिज़िनेस मैन हूँ. एक बार कहीं पर तुम्हारी सेक्सी बॉडी और नटखट अदाओं को देख कर तुम्हारा दीवाना हो गया. मुझे पता चला कि तुम ऐसे किसी को भाव नहीं देती हो, कितना भी अमीर हो, पहले अपने पीछे कुत्ते की तरह लार टपकवाते हुए घुमाती हो, फिर मूड बना तो हाथ धरने देती हो.’
वह मुझे देखने लगा और एक पल के लिए रुक गया.
‘मैंने भी तुमसे तुम्हारी तरफ से ही पहल करवाने की ठान ली. सेक्स एक्सपर्ट अमीरों की आदतों की तो तुम जानकार हो ही, इसलिए मैं एक गरीब तबके का आदमी बन कर तुमसे मिला. तुम्हारे गाड़ी वाले को मैंने दोगुनी तनख्वाह देकर पहले ही अपने यहां लगा लिया था और अपने नाम का रेफेरल भी उसी से एक मज़ाक बता कर करवा लिया.’
पुनः एक पल रुक कर लंबी सांस लेते हुए लकी ने आगे कहा- खैर … जैसी मुझे उम्मीद थी, तुम एक गरीब लेकिन सेक्सी बॉडी वाले मजदूर के नयेपन से ही एक्साईटेड हो गईं. आगे का किस्सा तो तुम जानती ही हो!
ऐसे अमीरज़ादों को अपने पीछे पीछे कुत्तों की तरह टहलाने वाली मैं, अपनी खुद की हीट में आई हुई कुतिया जैसी कामातुरता एक रईसजादे के सामने खुल जाने से शर्म से पानी पानी हुई अवाक खड़ी थी.
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया था.
उसने आगे बढ़ कर मुझे बांहों में लेते हुए चूम चूम कर मेरे कपोल और लाल कर दिए और फिर गोद में उठा कर बेड पर ले गया.
वह रात हम दोनों ने अलग अलग आसनों में सेक्स करते हुए ही गुज़ारी.
डिनर रूम सर्विस पर ही ऑर्डर कर दिया था, लेकिन वह भी ऐसे ही रखा रह गया.
तब से हमारी दोस्ती ऐसी ही चली आ रही है, अब तो सोनू भी हमारे साथ है. हम तीनों ही आपस में किसी लॉन्ग टर्म कमिटमेंट में नहीं हैं.
सेक्स के अलावा एक दूसरे के बारे में ना तो ज्यादा जानने की कोशिश करते हैं, ना ही किसी मामले में दखल देते हैं.
फुल फक स्टोरी पर प्लीज यहां कमेंट्स में या मेल आईडी पर प्रतिकृया देकर मेरा हौसला अवश्य बढ़ाएं.
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