गदरायी पड़ोसन आंटी की टपकती चूत का रसपान
हॉट पुसी फक स्टोरी में मेरे पड़ोस में भरे पूरे बदन वाली आंटी रहती थी. अंकल बाहर जॉब करते थे. मैंने उनसे दोस्ती कर ली. उसके बाद मैंने उन्हें अपने लैपटॉप में ब्लू फिल्म दिखाई.
दोस्तो, मेरा नाम अमन राज है और मैं पिछले 14 सालों से अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ.
आज मैं अपनी पहली सेक्स कहानी लिख रहा हूँ जो मेरी और मेरे सामने वाले रूम में रहने वाली एक आंटी की है.
निजता की सुरक्षा बनाए रखने के लिए मैंने पात्रों और जगह आदि के नाम बदल दिए हैं.
यह हॉट पुसी फक स्टोरी 2010 की है, उस वक्त मैंने इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया था.
मैंने अपनी सुगमता के लिए कॉलेज के पास ही एक रूम किराए पर ले लिया था.
मैंने जिस मकान में रूम लिया था, वहां सिर्फ मैं ही कुंवारा था, बाकी सब लोग अपने परिवार के साथ रहते थे.
मेरे सामने वाले रूम में एक आंटी रहती थीं, उनका नाम ऋचा था.
आंटी की उम्र लगभग 40 साल थी.
अंकल बाहर नौकरी करते थे.
आंटी के दो बच्चे थे और वे अपनी पढ़ाई के लिए बोर्डिंग स्कूल में थे.
ऋचा आंटी गजब की खूबसूरत थीं.
उनके बड़े-बड़े बूब्स और गांड एकदम मक्खन की तरह गोरी थी.
आंटी गदराए हुए जिस्म की मालकिन थीं.
कामुकता का रस तो उनके अंग अंग से मानो टपकता था.
मैं उन्हें देखते ही उन पर फिदा हो गया था और उनसे नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करने लगा था.
धीरे-धीरे आंटी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई.
अब हाल यह हो गया था कि खाली समय में हम दोनों आपस में बातें करते रहते थे और हमारे बीच मज़ाक-मस्ती चलती रहती थी.
आंटी खाने में कुछ भी बनातीं तो मुझे भी जरूर खिलातीं.
इधर मैं भी कुछ बनाता तो आंटी को खिलाने आ जाता.
आंटी अक्सर ढीली सी नाइटी पहनती थीं, जिसमें से उनके गहरे गले के कारण अन्दर के दूध और ब्रा के कप आदि साफ दिखते थे.
आंटी की चूचियां हिलती रहती थीं.
उन्हें इस तरह से देखकर मेरा मन मचल जाता था और मुझे बाथरूम में जाकर मुठ मारनी पड़ती थी.
मैंने धीरे यह राग बना लिया था कि अब जब भी मैं आंटी के सामने जाता, तो पतला सा शॉर्ट्स पहन कर जाता, जिसमें से मेरे लंड का उभार साफ दिखने लगता था.
चूंकि मैं अन्दर चड्डी पहन कर भी नहीं जाता था और मेरा सोच यह था कि आंटी के दूध देख कर जब मेरा लौड़ा खड़ा होगा, तो आंटी को उसका आकार दिखने लगेगा और हो सकता है कि मेरी इस चाल में आंटी मुझसे फंस जाएं.
चूंकि उस समय मेरी उम्र लगभग 20 साल की थी तो मेरे अन्दर कामाग्नि जल्द ही भड़क जाती थी और लौड़े को खड़े होने में जरा सा ही वक्त लगता था.
आप लोगों को तो पता ही होगा कि इस नई जवानी की उम्र में लड़कों का लंड या तो खड़ा ही रहता है … या लड़की, आंटी, भाभी की चुत चुचे देख कर तुरंत अकड़ कर फनफनाने लगता है.
जब मैं और ऋचा आंटी साथ में बैठकर बात करते थे, तो आंटी आस-पास में किसका अफेयर किससे चल रहा है, वह वह सब मुझे बताती रहती थीं.
मुझे तो सेक्सी किस्से सुनकर ही गर्मी आ जाती थी और मेरा लंड खड़ा हो जाता था.
आंटी मेरे साथ एकदम चिपक कर बैठती थीं तो उनके कामुक कर देने वाले जिस्म की मादक महक से मैं मदहोश हो जाता था.
अब तो वे मुझसे ऐसी बात करने लगी थीं मानो हम दोनों पति-पत्नी हों.
धीरे-धीरे समय बीतता गया और अब तक हम दोनों आपस में बहुत क्लोज़ हो गए थे.
एक-एक बात आपस में शेयर होने लगी.
कभी-कभी मैं उनके गोद में सिर रखकर लेट जाता था और टीवी देखता रहता था.
आंटी को भी मेरा साथ बहुत अच्छा लगता था.
एक दिन आंटी मेरे लैपटॉप पर मूवी देख रही थीं और दूसरे फोल्डर में एचडी क्वालिटी में पोर्न मूवी सेव थीं.
आंटी ने उस दिन उस फ़ोल्डर को देख लिया था, उसमें जितनी भी फिल्में पड़ी थीं … उनके आइकॉन सेक्सी थे तो आंटी को समझ आ गया था कि ये सब चुदाई की फिल्में हैं.
कुछ देर तक एक हिन्दी फिल्म देखने के बाद उनका चुदाई की फिल्म देखने का मन करने लगा.
मैं समझ गया कि आंटी चुदासी हो रही हैं तो मैं किसी काम का बहाना बना कर उनके पास लैपटॉप छोड़ कर चला गया.
आंटी ने मेरे जाते ही एक ब्लूफिल्म लगाई और देखने लगीं.
उनकी चुत की आग भभक उठी और उन्हें लंड की जरूरत महसूस होने लगी.
आंटी ने मुझे फोन करके बुलाया और बोलने लगीं कि मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है.
मैं बोला- अरे क्या हुआ आंटी … चलिए, आपको डॉक्टर को दिखा लाता हूँ.
तो वे बोलीं- नहीं, डॉक्टर की जरूरत नहीं है, ऐसे ही ठीक हो जाएगा … बस तुम मेरी थोड़ी मालिश कर दो.
उन्होंने मालिश करने का कहा तो मैं समझ गया कि ये ब्लू-फिल्म का असर है.
मैं उन्हें वासना से देखते हुए बोला- ठीक है, मैं कपड़े चेंज करके आता हूँ.
उस वक्त मैं जींस पहने हुए था तो मैं सोच रहा था कि यदि चुदाई की स्थिति बनानी है तो आंटी को लंड दिखाना जरूरी है.
थोड़ी देर बाद मैं सफेद कलर वाला पतला सा शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहन कर आंटी के पास आ गया.
मैंने आंटी के कमरे में आने के बाद सबसे पहले तो रूम का गेट बंद कर दिया.
आंटी यह देखते ही पेट के बल लेट गईं और उन्होंने अपनी गांड ऊपर उठा दी.
मैंने उनके पैरों से मालिश करनी शुरू की.
मैं धीरे-धीरे मालिश करता हुआ उनकी जांघ तक आ पहुंचा.
ये मेरे जीवन का पहला सेक्स अनुभव होने वाला था, तो मेरे लौड़े ने तो मेरी हालत खराब कर रखी थी.
मुझे आंटी के गदराए हुए जिस्म को मसलते हुए मसाज देने में इतना ज्यादा मज़ा आ रहा था कि मैं उस आनन्द को शब्दों में बयां नहीं कर सकता.
मैं काम वासना से लबरेज आनन्द से भाव-विभोर हो गया था.
शायद वही हाल आंटी का भी था.
जब उनके चूतड़ों के पास मेरा हाथ गया, तो आंटी कसमसाने लगीं.
उन्होंने अपनी गांड उठाई और दोनों हाथों से अपनी पूरी नाइटी को कमर तक ऊपर कर दिया.
उनकी दूधिया गांड काले रंग की पैंटी में मस्त लग रही थी.
मैंने कहा- इसे अलग ही कर देता हूँ. तेल से खराब हो जाएगी.
आंटी ने बिना कुछ बोले उसे अपने जिस्म से पूरा निकाल दिया.
अब वे सिर्फ ब्रा और पैंटी में लेटी थीं.
उनकी जवानी को इस रूप में देख कर मेरे लौड़े में तो मानो आग लग गई थी.
मैं एकदम गर्म था और मेरा लंड फुल फॉर्म में आ गया था.
फिर आंटी बोलीं- मेरी पैंटी भी निकाल दो और अन्दर तक मालिश कर दो अमन बेटा.
मैं बोला- हां आंटी, अभी कर देता हूँ.
धीरे-धीरे मैंने आंटी के पूरे शरीर की मालिश करना शुरू कर दी.
गांड की दरार में हाथ डाला तो आंटी ने खुद ही अपनी टांगों को फैला दिया और मैंने उनकी चूत की फांक में हाथ की हथेली रगड़ कर चुत को गीला कर दिया.
फिर चुत के रस से उनकी चूचियों की स्पेशल मालिश की.
आंटी मेरे हाथों की मदमस्त मालिश के बाद एकदम खुश हो गई थीं और उनकी चुत ने रस झाड़ दिया था, जिससे उनकी तबीयत भी बिल्कुल ठीक हो गई थी.
अब वे मुझसे बोलीं- अमन बेटा, तुमने मेरी इतनी अच्छी मालिश की, मुझे सच में मजा आ गया. तुम भी थक गए होगे तो लाओ अब मैं भी तुम्हारी मालिश कर देती हूँ.
मैं उनके सामने आ गया.
उन्होंने मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगा लिटा दिया और मेरे भी लौड़े की मालिश कर दी.
मुझे अपने लंड की मालिश करवाने में बहुत मज़ा आ रहा था.
आंटी ने मुझे पलटा और मेरी गांड के छेद में उंगली डाल कर उसकी स्पेशल मालिश की.
फिर मेरे चूतड़ मसले और वापस लंड पर अपने हाथ चलाने लगीं.
चित अवस्था में लिटाने के बाद आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं और उन्होंने मेरे निप्पल को अपने होंठों से दबा कर चूसना शुरू कर दिया.
मैंने इसकी कल्पना भी नहीं की थी.
वे नंगी थीं तो उनके दूध भी मेरे सीने से रगड़ रहे थे. हम दोनों एकदम चुदाई की पोजीशन में थे.
मेरा लंड उनकी चुत में मुँह मार रहा था.
कुछ मिनट तक आंटी ने मेरे दोनों निप्पलों को बारी बारी से चूसा. मेरा लंड यह आघात सह न सका और उनसे आंटी की चुत के मुँह पर ही अपना माल उगल दिया.
मेरा माल आंटी की चूत और पेट पर लग गया था.
उस टाइम मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि पहले कभी नहीं आया.
अब आंटी नीचे को सरकीं और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं.
मेरा मुरझाया लंड टनटना कर खड़ा हो गया.
उसके बाद मैंने आंटी के चूचे पिए, चूत को चूसा.
आंटी एकदम तड़पने लगीं और उनके मुँह से आह आह की मादक आवाज निकलने लगी.
अब मैंने लंड को आंटी की बुर के छेद पर सैट किया और फांक में लौड़े के सुपारे से मालिश करने लगा.
आंटी ने गाली दी- साले पेल दे न!
मैंने उसी पल उनकी चुत में लंड डाल दिया.
आंटी की आह निकल गई और मैं धकापेल हॉट पुसी फक में लग गया.
आंटी काफी प्यासी थीं और हम दोनों ही एक एक बार झड़ चुके थे तो दोनों में से कोई भी जल्दी झड़ने वाला नहीं था.
मैंने करीब बीस मिनट तक आंटी की चुत को ताबड़तोड़ चोदा.
उस दिन हम दोनों ही चुदास के मूड में थे तो हम दोनों ने 3 राउंड चुदाई का मजा लिया.
उसके बाद साथ में नहाया और मैं अपने रूम में आकर सो गया.
उस दिन आंटी की चुदाई के बाद काफी थकान हो गई थी तो मुझे बहुत गहरी नींद आई.
मैं ऐसा सोया कि कुछ होश ही न रहा, सीधा अगली सुबह में ही जागा.
वह भी तब जागा, जब आंटी ने दरवाज़ा खटखटाया.
आंटी चाय लेकर आई थीं.
मैं फ्रेश हुआ और चाय पी.
मैंने आंटी से पूछा- तबीयत कैसी है?
तो वे आंख मारती हुई बोलीं- अच्छी है!
मैंने कहा- इतनी अच्छी कैसे हो गई?
उन्होंने मेरे लौड़े को पकड़ा और बोलीं- डॉक्टर लंड ने मुझे चोद कर मस्त कर दिया था.
मैं हंस दिया.
उस दिन से आंटी को जब भी चुदने का मन होता तो वे इशारे में कह देतीं कि डॉक्टर को दिखाना है, तबियत काफी खराब है.
बस उस दिन डॉक्टर लंड आंटी की चुत में घुस कर उसका इलाज कर देते.
खुल कर चुदाई होने के बाद से हमारा आपस का रिश्ता बिल्कुल बदल गया था.
ऐसा लगता था जैसे हम दोनों पति-पत्नी ही हैं, लेकिन किसी को पता न चले इसलिए बाहर मर्यादा में रहते थे.
एक दिन रविवार था, तो कॉलेज जाना नहीं था.
थोड़ी देर बाद आंटी बोलने आईं- अमन बेटा, आज शॉपिंग करने चलेंगे.
शाम को हम लोग मॉल गए.
वहां आंटी ने बहुत से सेक्सी कपड़े लिए, रेस्टोरेंट में खाना खाया और कुछ पैक भी करवा करा लिया ताकि रात को खाना न बनाना पड़े.
घर आने पर मेरा फिर से चुदाई का मन कर रहा था.
मैंने आंटी से कहा, तो वे बोलीं- आस पास के सब लोगों को सो जाने दो, फिर आऊंगी तुम्हारे रूम में ही, आज जी भरके चोदा-चोदी खेलेंगे.
मैंने सर हां में हिला दिया.
लगभग 10 बजे रात में आंटी आईं और चुदाई का कार्यक्रम चालू हुआ.
अलग-अलग पोजीशन में लगभग 3 बजे तक चुदाई की.
मैं आंटी से अपने निप्पल चुसवाता था और खुद आंटी की बुर को चूस कर उसका रस पीता था.
इसमें मुझे बहुत आनन्द आता था
अब हमारा यह हमेशा का काम हो गया था.
जब भी मौका मिलता, हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में समा जाते थे.
हम लोग बिना कंडोम के चुदाई करते थे इसलिए आंटी प्रेग्नेंट भी हो गई थीं.
उस समय आंटी ने अपनी परिचित की एक डॉक्टर से अपना अबॉर्शन करवा लिया था.
पर अब वे चुदाई के बाद गर्भ निरोधक दवाई लेने लगी थीं.
आंटी को गांड मारवाने का भी बहुत शौक था, इसलिए मैं जब भी चुत का एक राउंड मारता था तो दूसरे राउंड में मैं उनकी गांड भी मारता था.
मैं चाहता था कि मैं अपना एक बच्चा ऋचा आंटी के गर्भ से पैदा करूँ लेकिन आंटी रेडी नहीं हुईं तो मैंने भी ज़िद नहीं की.
एक बार आंटी की बहन दस दिन के लिए उनके पास रहने आई थीं क्योंकि आंटी को किसी काम से बाहर जाना था.
उस दौरान आंटी की बहन से भी मेरी सैटिंग हो गई.
उनका नाम प्रभा आंटी था.
वे मुझसे दो दिन में ही सैट हो गई थीं.
उसके बाद जब तक आंटी वापस नहीं आ गईं, तब तक मैंने उन्हें भी खूब चोदा.
प्रभा आंटी को हार्डकोर सेक्स पसंद था.
वे ऋचा आंटी से दो साल छोटी थीं.
प्रभा आंटी एक दिन मेरे लिए वियाग्रा टैबलेट बाज़ार से लाई थीं और उन्होंने वह दवा मुझे दूध में मिला कर खिला दी.
उसके बाद हम दोनों में चुदाई का जो दौर चला, ओए होए … बहुत ही लंबा सेशन चला था.
मेरा माल निकल ही नहीं रहा था, मैं खुद परेशान था कि यह क्या हुआ, साला लौड़ा रस क्यों नहीं छोड़ रहा है.
मैंने उस दिन प्रभा आंटी को जबरदस्त तरीके से ठोका.
बाद में मुझे मालूम हुआ कि ये उन दोनों बहनों की प्लानिंग का ही हिस्सा था कि मुझसे प्रभा आंटी की चुदाई करवाई जाए.
चूंकि प्रभा आंटी अकेली चुदना चाहती थीं तो उन्होंने ऋचा आंटी को अपने घर भेज दिया था.
बाद में जब खुलासा हुआ तो मैंने दोनों को एक ही बिस्तर पर चोदा.
मैं लगभग 2 साल वहां रहा और हम लोग चुदाई का आनन्द लेते रहे.
बाद में हमारे इस सेक्स ग्रुप में 2 आंटियां और शामिल हो गई थीं.
हम चारों मिल कर चुदाई का आनन्द लेते थे.
उस सेक्स कहानी में मुहल्ले की हेमा आंटी मेरे एक निप्पल चूसती थीं और उनकी पड़ोसन रेखा आंटी मेरा दूसरा निप्पल चूसती थीं.
हम सबकी प्यारी गदराई जिस्म की मालकिन ऋचा आंटी मेरा लंड चूसती थीं.
फिर स्थान बदल बदल कर हम सब चुदाई व चुसाई का मज़ा लेते थे.
उस ग्रुप सेक्स वाली कहानी को मैं बाद में लिखूँगा, आप लोगों को उसे भी पढ़कर बहुत मज़ा आएगा.
दोस्तो, हॉट पुसी फक स्टोरी में अपने कमेंट जरूर दें और बताएं कि आपको कहानी कैसी लगी.
आपका अजीज दोस्त
अमन राज
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