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लड़की या औरत के साथ प्यार से सेक्स कैसे करें

0 बार पढ़ी गई8 मिनट का पाठलगभग ९ घंटे पहले

अपनी गर्लफ्रेंड या बीवी या पार्टनर के साथ प्यार भरी चुदाई कैसे करें, यही बताया गया है इस लेख में.

मैं आपको बताती हूँ कि किसी भी लड़की या औरत के साथ प्यार से सेक्स कैसे किया जाए।

1. शुरू करने से पहले का माहौल

धीमे सेक्स का असली काम पेनट्रेशन यानी लिंग प्रवेश से बहुत पहले शुरू होता है।

– कमरे की रोशनी तेज़ न हो। नरम रोशनी या अंधेरा बेहतर रहता है क्योंकि इससे शरीर आरामदायक स्थिति में होता है।

– जल्दबाजी का भाव न हो। समय की कमी का अहसास आते ही शरीर तनाव में आ जाता है और गीलापन कम हो सकता है।

– फोन दूर रखें।

– लड़की को छूने से पहले आँखों में देखें, बाल सहलाएँ, गर्दन या कमर के पास हाथ घुमाएँ। कई महिलाओं में स्पर्श का रास्ता चेहरे और गर्दन से शुरू होकर धीरे-धीरे नीचे जाता है।

चुंबन का तरीका

चुंबन को जल्दी-जल्दी मुँह चिपकाने जैसा न बनाएँ। पहले आँखों में देखते हुए होठों को बहुत हल्के से छुएँ। फिर धीरे-धीरे दबाव बढ़ाएँ। होठों को चूसें, हल्के से काटें (दर्द न हो)। जीभ को तुरंत अंदर न डालें। जब वह खुद मुँह खोले और प्रतिक्रिया दे, तभी जीभ मिलाएँ। गर्दन, कान के पीछे, कॉलरबोन और स्तनों के आसपास भी धीमे-धीमे चुंबन दें। चुंबन के दौरान उसकी साँस और शरीर की हरकत पर ध्यान दें। अगर वह और करीब आने लगे तो जारी रखें, अगर थोड़ा पीछे हटे तो हल्का करें।

– फोरप्ले सिर्फ जननांग तक सीमित न रखें। पीठ, भीतरी जांघ, कमर, स्तन के आसपास और निपल्स को धीरे-धीरे छूएँ। कुछ महिलाओं को निपल्स पर हल्का दबाव या मुँह से गीला स्पर्श बहुत उत्तेजित करता है, कुछ को नहीं—पूछें या प्रतिक्रिया देखें।

ओरल सेक्स का तरीका

जब शरीर गुनगुना हो जाए और वह आराम से साँस ले रही हो, तब ओरल की ओर बढ़ें।

पहले जांघों के अंदरूनी हिस्से और योनि के आसपास हल्के चुंबन और जीभ से चाटना शुरू करें।

सीधे क्लिट पर जोर से हमला न करें।

जीभ को सपाट रखकर धीरे-धीरे ऊपर से नीचे या गोलाकार मूवमेंट में चाटें।

दबाव बहुत हल्का रखें क्योंकि क्लिट बेहद संवेदनशील होती है।

कभी-कभी हल्के से चूसना भी अच्छा लगता है लेकिन जोर से न खींचें।

एक उंगली से बाहर के हिस्से को सहलाते हुए धीरे से अंदर प्रवेश कर सकते हैं (अगर वह सहज हो)। लय स्थिर रखें।

बीच-बीच में ऊपर आकर उसके मुँह या गर्दन पर चुंबन करें ताकि वह अकेली महसूस न करे।

अगर वह कूल्हे आपकी ओर उठाने लगे, साँसें तेज़ हों या आवाज़ निकले तो उसी लय को बनाए रखें। जबरदस्ती तेज़ न करें।

जब तक वह स्पष्ट रूप से गीली न हो, आराम से साँस न ले रही हो और उसके कूल्हे खुद आपकी ओर न बढ़ने लगें, लंड घुसाने की जल्दी न करें। “पूरी तरह गीली” का मतलब सिर्फ नमी नहीं, बल्कि शरीर का नरम होना, साँसों का गहरा होना और उसके हाथों का आपको अपनी ओर खींचना भी है।

जब वह पूरी तरह से गीली हो जाए और आपने उसे काफ़ी फोरप्ले दिया हो तो अपने लिंग के अगले हिस्से (टिप) को धीरे-धीरे उसके क्लिट पर रगड़ें।

ऐसा करते समय उसकी आँखों में देखें और उसे बताएँ कि आप उसके अंदर जाने के लिए कितने बेताब हैं।

2. टिप से क्लिट पर धीमा रगड़ना

लिंग के अगले हिस्से (ग्लैंस) को क्लिट पर धीरे-धीरे रगड़ने का मकसद दोहरा है:

– क्लिट बहुत संवेदनशील होती है। सीधा तेज़ रगड़ कई बार चुभन जैसा लगता है। इसलिए दबाव हल्का रखें, जैसे आप उसे सहला रहे हों, रगड़ नहीं रहे हों।

– इस दौरान आँखों में देखना और धीमी आवाज़ में कहना कि आप उसके अंदर जाने के लिए कितने बेताब हैं, मानसिक उत्तेजना बढ़ाता है। शरीर और दिमाग दोनों एक साथ गर्म होते हैं।

– सर्कुलर मोशन या ऊपर-नीचे छोटी हलचल बेहतर रहती है। एक ही जगह पर ज़ोर से रगड़ने से जलन हो सकती है।

– अगर वह पीछे हटती है या जांघें सिकोड़ती है तो दबाव और कम करें या थोड़ी देर रुककर चुंबन या गर्दन पर ध्यान दें।

यहाँ लक्ष्य यह नहीं कि तुरंत अंदर जाएँ, बल्कि यह कि वह खुद अंदर लेने के लिए तैयार महसूस करे।

3. पहले कुछ सेंटीमीटर अंदर जाना

धीरे-धीरे सिर्फ़ टिप या थोड़ा और अंदर जाएँ, पूरा नहीं।

– योनि का बाहरी हिस्सा (पहला 2–4 सेमी) सबसे अधिक तंत्रिकाओं वाला होता है। यहाँ रुकना कई महिलाओं के लिए बहुत तीव्र लगता है।

– फिर धीरे-धीरे कुछ सेंटीमीटर उसके अंदर जाएँ।

– वहीं रुकें और उसे 4 छोटे, धीमे और हल्के स्ट्रोक दें।

– पाँचवें स्ट्रोक पर, धीरे-धीरे पूरा अंदर जाएँ।

एक बार जब आप अंदर पहुँच जाएँ, तो थ्रस्टिंग (धक्के मारना) बंद कर दें और अपनी पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों को सिकोड़कर पल्स (हल्का झटका) दें।

ऐसा महसूस करें जैसे आप उसके अंदर अपने लिंग को ऊपर की ओर उठा रहे हैं।

पल्स देते समय, उसकी गर्दन पर हल्के से काटें या गहरी आवाज़ में उसके कान में कहें कि वह कितनी अच्छी लग रही है।

पीछे हटें और फिर से 4 हल्के स्ट्रोक दें।

इस पैटर्न को दोहराएँ: 4 हल्के स्ट्रोक, फिर पल्स के साथ गहरा स्ट्रोक, और फिर से 4 हल्के स्ट्रोक।

– पाँचवें स्ट्रोक पर धीरे-धीरे और गहराई तक जाएँ। अचानक पूरा अंदर धकेलना कई बार दर्द या “ठंडक” जैसा अहसास देता है, भले नमी काफी हो।

इस चरण में साँसें मिलाएँ। आप तेज़ साँस लेंगे तो वह भी तनाव में आ सकती है।

4. अंदर पहुँचकर थ्रस्ट बंद करके पल्स देना

एक बार पूरा या लगभग पूरा अंदर होने के बाद धक्के बंद कर दें।

– पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों को सिकोड़कर लिंग को अंदर ही अंदर हल्का ऊपर की ओर उठाने जैसा महसूस कराएँ। यह “पल्स” कहलाता है। बाहर-अंदर की गति नहीं, बल्कि अंदर रहते हुए दबाव का बदलना।

– कई महिलाओं को यह गहरा, भरा-भरा अहसास पसंद आता है क्योंकि यह गर्भाशय ग्रीवा के आसपास या G-स्पॉट क्षेत्र पर स्थिर दबाव देता है।

– इसी समय गर्दन पर बहुत हल्के दाँत लगाएँ या कान में धीमी, गहरी आवाज़ में कहें कि वह कितनी अच्छी लग रही है। आवाज़ और स्पर्श एक साथ आने से उत्तेजना बढ़ती है। काटना दर्दनाक न हो—सिर्फ़ त्वचा को होठों और दाँतों से महसूस कराने जितना।

अगर वह कूल्हे घुमाने लगे या आपको और अंदर खींचे, तो पल्स जारी रखें। अगर वह सिकुड़ती है तो तुरंत हल्का करें।

5. पैटर्न दोहराना: 4 हल्के + 1 गहरा/पल्स

यह पैटर्न शरीर को आदी नहीं होने देता और उत्तेजना को धीरे-धीरे चढ़ाता है।

– 4 हल्के, छोटे स्ट्रोक: ये बाहरी संवेदनशील हिस्से को उत्तेजित रखते हैं।

– फिर एक गहरा स्ट्रोक या पूरा अंदर जाकर पल्स: यह आंतरिक दबाव देता है।

– फिर वापस 4 हल्के।

लय स्थिर रखें। जल्दी-जल्दी पैटर्न बदलने से फोकस टूटता है।

हर चक्र के बाद उसके चेहरे, साँसों और कूल्हों को देखें:

– साँसें छोटी-तेज़ होने लगें।

– कूल्हे आपकी ओर उठने लगें।

– पेट या जांघें तन जाएँ।

– आवाज़ निकलने लगे या वह आपको और कसकर पकड़े।

ये संकेत आमतौर पर बताते हैं कि वह करीब आ रही है।

तब भी अचानक तेज़ न हो जाएँ।

6. जब वह चरम के करीब हो

पूरी तरह अंदर जाएँ और वहीं बने रहें।

अब बाहर-अंदर की बड़ी गति कम करें।

– ग्राइंड करें— यानी कूल्हों को गोलाकार या आगे-पीछे बहुत छोटी गति से रगड़ें, ताकि क्लिट भी साथ में दबे (खासकर मिशनरी या उसके ऊपर वाली पोजीशन में)।

– लय उसके शरीर से मिलाएँ। वह तेज़ हिल रही है तो थोड़ा तेज़, वह धीमी है तो धीमे रहें।

– “जैकहैमर” यानी तेज़ और ज़ोरदार धक्के अक्सर उत्तेजना तोड़ देते हैं, खासकर जब महिला करीब हो। कई बार ठीक उसी समय धीमा और गहरा रहना ही ऑर्गेज्म तक ले जाता है।

अगर वह कहे “रोको मत”, “वहीं”, “और अंदर” तो वही करें। अगर वह पीछे हटती है तो तुरंत हल्का करें।

7. ऑर्गेज्म के आसपास और बाद में

जब वह चरम पर पहुँचे तो अंदर ही रहकर स्थिर दबाव या बहुत छोटी ग्राइंड जारी रखें, जब तक वह खुद न सरकाए।

कई महिलाओं का ऑर्गेज्म कुछ सेकंड से लेकर लंबा लहरदार हो सकता है।

बीच में अचानक निकल जाना अहसास तोड़ सकता है।

बाद में:

– तुरंत अलग न हो जाएँ। कुछ देर गले लगाकर, पीठ सहलाकर या माथे पर चुंबन करके रहें।

– पूछें कैसा लगा, क्या और चाहिए था, क्या कम/ज्यादा था। यह अगली बार और बेहतर बनाता है।

– पानी पिलाएँ, तौलिया पास रखें, शरीर ठंडा न होने दें।

जरूरी सावधानियाँ

– हर बार एक जैसा नहीं होगा। थकान, तनाव, माहवारी का समय, मूड सब बदलता है।

– दर्द हो तो तुरंत रुकें। “धीमा सेक्स” का मतलब दर्द सहना नहीं।

– लुब्रिकेंट रखें। प्राकृतिक नमी काफी न भी हो तो शर्म की बात नहीं।

– आप खुद बहुत उत्तेजित होकर जल्दी खत्म होने वाले हों तो बीच-बीच में पूरी तरह रुककर चुंबन या स्पर्श पर ध्यान दें, या पेल्विक पल्स से अपनी उत्तेजना भी नियंत्रित करें।

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