दोस्त के भाई ने दारू पिलाकर गांड मारी
माय फर्स्ट ऐस्स सेक्स कहानी में मेरे दोस्त ने मुझे अपने घर पार्टी में बुलाया, वहां सबने दारू पी. दोस्त के भाई ने नशे में मुझे अपने साथ सुला लिया. उसके बाद क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम कश्वी है.
ये मेरा वास्तविक नाम नहीं है.
यह नाम मुझे मेरे किसी प्रिय ने अपने द्वारा दिया है.
मैं पंजाब की रहने वाली हूँ.
आज मैं अपनी पहली सेक्स कहानी लिखने जा रहा हूँ … या रही हूँ कि कैसे मेरे दोस्त के भाई ने पहली बार मेरी गांड मारी और मुझे गांडू बना दिया.
ये माय फर्स्ट ऐस्स सेक्स कहानी सन 2008 की है.
तब मेरी उम्र 19 साल की थी.
मेरी क्लास में में पढ़ने वाला मेरा सबसे नज़दीकी दोस्त पीयूष था. उसका ये पीयूष नाम मैंने बदल दिया है.
एक दिन उसका मुझे कॉल आया कि मम्मी डैडी दोनों दिल्ली गए हैं, रात को घर पर पार्टी होगी, तू भी आ जा. हम सब एन्जॉय करेंगे.
रात के 8 बजे मैं उसके घर गया तो वह उसका बड़ा भाई सार्थक और उसके कुछ दोस्त पहले से दारू पी रहे थे.
पीयूष भी दारू पी रहा था और डांस भी कर रहा था.
मैंने पहले कभी दारू नहीं पी थी, उस दिन पीयूष के कहने पर मैंने भी दो पैग लगा लिए और पंद्रह मिनट बाद तीसरा और फिर चौथा.
पहले बार पीने की वजह से दारू मुझे काफी चढ़ गई.
सार्थक ने मुझे एक पैग और लगवा दिया.
अब तो मैं जरा भी होश में नहीं था.
रात 11 बजे तक डांस चला और सब सोने चले गए.
मेरी हालत घर जाने वाली नहीं थी.
मैंने अपने घर कॉल कर दी कि मैं यहीं सो जाऊंगा, अभी पार्टी चल रही है.
हालांकि मुझे पापा से खूब गालियां सुनने को मिलीं पर आखिर में वे मान गए.
पीयूष ने भी बहुत पी रखी थी तो वह बिस्तर पर गिरते ही सो गया.
उसके कमरे में सिंगल बेड था.
सार्थक बोला- तू मेरे कमरे में सो जा!
हम दोनों उसके कमरे में चले गए और बातें करने लगे.
इतने में सार्थक ने एक एक पैग और बनाया और मुझे पीने को दिया.
मैंने मना किया, पर उसने ज़िद करके पिला ही दिया.
वह बोला- आज छक कर पी ले, अब कौन सा कहीं जाना है!
मुझे भी लगा कि क्या होगा … जैसे चार पैग सही, वैसे ही एक और सही!
मैं दारू पीने लगा.
वह कपड़े बदलने लगा.
उसने जीन्स और टी-शर्ट उतार दी और केवल बनियान और अंडरवियर में ही बेड पर आ गया.
वह जनवरी का महीना था.
हालांकि दारू के कारण सर्दी जरा भी नहीं लग रही थी.
मैंने सार्थक से कहा- इतनी ठण्ड में बिना कपड़े के सोओगे तुम?
उसने कहा- मुझे ज्यादा कपड़ों में नींद नहीं आती.
यह कर वह कम्बल में आ गया.
कम्बल डबल बेड का था तो एक ही कम्बल दोनों को ओढ़ना था.
मेरा सर घूम रहा था, मुझे नशा बहुत ज्यादा हो गया था.
मुझे होश नाम की कोई चीज लग ही नहीं रही थी … पूरी तरह से टुन्नी में था.
मैं सार्थक से बातें करने लगा.
उसे भी नींद नहीं आ रही थी.
वह मुझसे पूछने लगा- तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?
तो मैंने न में सर हिला दिया.
वह अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताने लगा कि कैसे उसने अपनी गर्लफ्रेंड को पिछले हफ्ते होटल में चोदा था.
उसकी कामुक बातें सुनकर मुझे ठरक चढ़ने लगी.
मुझे क्या मालूम था कि ये उसकी मुझे फंसाने की चाल है.
मुझे अच्छा लगने लगा, नशा भी बहुत था तो हम दोनों में मस्ती होने लगी.
उसने सेक्सी बातें करते करते मेरे सीने पर हाथ चलाना शुरू कर दिया.
मेरे मन में तब तक कोई अहसास नहीं था कि ये ये करने वाला है.
वह गन्दी बातें करता गया और मैं वह सब सुनकर उत्तेजित होता गया.
अचानक उसने मुझे लिप किस कर दी.
ये मुझे गन्दा लगा.
मैंने कहा- ये क्या है?
तो उसने माफ़ी मांगी.
वह फिर से चुत चुदाई की बातें बताने लगा.
इस बार वह कुछ ज्यादा ही ठरकी बातें करने लगा और मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया.
उसने मेरे लंड पर हाथ फेरा और बोला- साले ठरकी, तेरा लंड तो खड़ा हो गया!
मुझे थोड़ी शर्म आई.
वह बोला- तेरा तो बहुत बड़ा है … 7 इंच का होगा!
मैं बोला- हां.
उसने बोला- मेरा तो छोटा है. ले पकड़ कर देख!
मैंने मना किया, पर वह ज़िद करने लगा.
मैंने सोचा कि इसने अंडरवियर पहन रखा है, ऊपर से चेक कर लेता हूँ.
जैसे ही मैंने उसके लंड पर हाथ लगाया तो मेरे हाथ में बिना चड्डी का उसका लोहे के जैसा सख्त लंड आ गया.
मैंने हाथ पीछे हटाया ओर कम्बल हटा कर देखा तो उसने चड्डी उतार दी थी और वह नीचे से बिल्कुल नंगा था.
में उसका लंड देखता ही रह गया. मुझसे छोटा था … साढ़े पांच इंच का … पर मोटा इतना था जैसे कोई तरोई.
मेरे मुँह से निकल गया कि इतना मोटा लंड भी होता है?
वह बोला- देख ले न!
मैंने उससे अंडरवियर पहनने को कहा तो वह मान गया और उसने अंडरवियर पहन लिया.
हम दोनों का नशा अब तक टूट चुका था.
उसने एक एक पैग और बनाया और हम दोनों ने पी लिया.
मुझे नहीं मालूम था कि उसने पैग में गड़बड़ की है.
उसने मेरे पैग में दो पैग की दारू मिला कर मुझे पीने को दे दिया था.
मैं उस पटियाला पैग को पीकर अपने आप से बाहर होने लगा.
मुझे लगा मैं गिर जाऊंगा, तो मैं बिस्तर पर लेट गया.
इस बार उसने ज्यादा हिम्मत दिखाई और उसने बदन से अपने चड्डी बनियान दोनों कपड़े उतारे और मेरे पास आकर मेरी जीन्स के ऊपर से मेरा लंड सहलाने लगा.
नशा ज्यादा होने की वजह से मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था.
मैंने मना किया तो बोला- देख नशा दोनों को चढ़ा हुआ है, लड़की हमारे पास है नहीं … थोड़ा मज़ा करते हैं. अच्छा ना लगे तो बंद कर देंगे.
यह कह कर उसने मेरा लंड जीन्स और अंडरवियर से बाहर निकाला और हिलाने लगा.
साथ ही वह मुझे किस करने लगा.
नशे में मुझे भी अच्छा लगने लगा.
वह पांच मिनट तक ऐसा करता रहा.
जब उसने देखा कि में कुछ नहीं कर रहा हूँ, तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.
उसका लंड तो रॉड की तरह सख़्त और गर्म था.
मुझे पता ही नहीं चला कि कब मैं नशे में चूर होकर उसका लंड ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा.
अब वह ज्यादा गर्म हो चुका था.
उसने मुझसे लंड चूसने को कहा.
मैंने मना कर दिया.
उसने बहुत ज़िद की, पर मैं नहीं माना.
उसने ज़बरदस्ती करने की कोशिश की मगर मैं नहीं मान रहा था.
उसके लंड से अब इंतज़ार नहीं हो रहा था.
उसने कहा- आज मुझे तेरी गांड मारनी है!
मैं डर गया और मना करने लगा.
उसने कोई जवाब नहीं दिया.
वह फिर से किस करते हुए मेरा लंड हिलाने लगा.
इस बार वह अपने एक हाथ को मेरी गांड पर ले गया और मेरी गांड के छेद को मसलने लगा.
सच बोलूं … मुझे ये तो नहीं पता था कि मैं गे बनने वाला हूँ लेकिन जब उसने गांड के छेद पर हाथ फेरा तो मैं पागल सा हो गया.
उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.
वह बोला- मेरे साथ बाथरूम में चल, उधर एक ऐसा मज़ा वाला सरप्राइज दूंगा कि याद करेगा!
मैंने न जाने क्या सोच कर हां कर दी और कपड़े पहनने लगा.
उसने हंस कर कहा- नंगा ही चल … रात 12 बजे का टाइम ठंड है इस वक्त कौन देखेगा.
मैं भी उसके साथ चल पड़ा.
वाशरूम में जाते ही उसने ठंडे पानी से मेरी गांड को साबुन लगा कर धोई.
ठंड के मारे मेरा बदन अकड़ने लगा.
फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसका मुझे अनुमान भी नहीं था.
गांड धोते ही उसने मेरी गांड पर अपनी जीभ लगा कर चाटना शुरू कर दिया.
मैं मचलने लगा, तो उसने ज़ोर से पकड़ कर मेरी गांड थूक से गीली कर दी और मस्ती से चाटने लगा.
मैं ठरक के मारे पागल होने लगा.
उसने मेरी गांड में उंगली डालकर तेल लगाया और बहुत प्यार से सहलाने लगा.
उस तेल में कुछ जादू था, मुझे मस्ती चढ़ने लगी.
धीरे धीरे वह अपनी उंगली मेरी गांड में डालने लगा.
आज से पहले मेरी गांड में कभी कुछ गया नहीं था, तो बहुत टाइट थी .. उसकी उंगली ज्यादा अन्दर तक नहीं गई.
उसने ढेर सारा तेल मेरी गांड पर लगाया और फिर खड़ा होकर मुझे किस करने लगा.
देखते ही देखते उसने पीछे से मेरी गांड में उंगली को चिकनी करके उतार दी.
मैं तड़प गया.
उसका शरीर काफ़ी तगड़ा था और मेरा लड़कियों जैसा कोमल था.
उसने किस करते करते धीरे धीरे मेरी गांड में उंगली चलाना शुरू कर दिया.
मैं कुछ शांत हुआ तो वह वापस किस करने लगा.
फिर पता ही नहीं चला कि कब उसने दूसरी उंगली भी मेरी गांड डाल दी.
अब मुझे मजा आ रहा था दर्द खत्म सा हो गया था.
शायद यह उस तेल का कमाल था.
मैं ठरक के आगोश में आ चुका था.
ठंड के मारे मेरी जान निकल रही थी.
वह ज़िद में था कि उसे यही बाथरूम में गांड मारनी है.
मैं मज़ा तो लेने लगा था, पर ठंड ने मेरी हालत पतली कर दी थी.
मैं था भी उससे पतला तो वह मुझे दबोचे हुए थे.
मैंने उसे मनाने के लिए कहा- भैया, आपको जो भी करना है, कर लो … पर कमरे में चलो. मैं ठंड से मर जाऊंगा!
तो उसने मेरी बात मानी और हम दोनों कमरे में आ गए.
मैंने झट से कंबल ओढ़ लिया.
वह कहां मानने वाला था, उसे तो मेरी लेनी थी.
तेल से बात ना बनती देख कर वह किचन से देसी घी ले आया और मेरी गांड में लगाने लगा.
उसने अपना लंड भी घी से तर कर लिया.
फिर कंबल हटा कर मुझे पीठ के बल लेटा दिया और मेरी दोनों टांगों को पकड़ कर अपने दोनों कंधों पर रख लीं.
अब उसने अपना लंड मेरी गांड पर सैट कर दिया और धीरे धीरे अन्दर करने लगा.
उसका लंड मोटा था तो अन्दर नहीं जा रहा था.
उसने एक ज़ोर का झटका मारा और मेरी जान निकल गई.
मैं चीख उठा और आंखों में आंसू आ गए.
उसका पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था और मैं दर्द के मारे कराह रहा था.
उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा लिए ताकि आवाज़ बाहर ना जाये.
इसी तरह वह कुछ देर लेटा रहा. फिर जब दर्द कम हुआ तो उसने चोदना शुरू कर दिया.
मैंने उससे हटने के लिए कहा, पर वह नहीं हटा.
मैं ज़ोर लगा कर हटने की कोशिश करने लगा.
वह हटा ही नहीं और अब वह धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर करके मुझे चोदने लगा.
जब मैं नाकामयाब रहा हटाने में, तो वह मज़े से मेरी गांड मारने लगा.
धीरे धीरे मुझे भी अच्छा लगने लगा, पर दर्द भी हो रहा था.
कुछ ही देर में वह पूरे जोश से मेरी गांड मारने लगा.
उसने देखा कि मैं विरोध नहीं कर रहा हूँ तो उसने लंड बाहर निकाला.
मेरी गांड से खून निकल रहा था तो उसने कहा कि पहली बार में ये सब नार्मल है.
मैं 5 लड़कों की गांड मार चुका हूँ. सबकी में से खून निकलता ही है. मैं बाद में दवा लगा दूंगा … अभी इंजॉय कर!
उसने मुझसे घोड़ी बनने को कहा तो मैं बन गया.
इस बार जब उसने लंड डाला तो दर्द कम हुआ. पता नहीं क्यों … शायद मेरी गांड की सील टूट चुकी थी.
वह तेज रफ्तार से मेरी गांड मारने लगा.
अबकी बार मुझे कुछ अच्छा लग रहा था, पर मैं उसका साथ नहीं दे रहा था.
उसने 20 मिनट बिना रुके मेरी गांड मारी और अपना सारा माल मेरी गांड में छोड़ दिया.
फिर वह लंड निकाल कर मेरे बाजू में लेट गया.
माय फर्स्ट ऐस्स सेक्स के बाद मेरी हालत बहुत ख़राब थी, मैं हिल भी नहीं पा रहा था.
उसने मेरी उठने में मदद की और मुझे वाशरूम में ले गया.
उधर उसने मेरी गांड साबुन से धो कर साफ की और फिर से चाटने लगा.
मैं समझ गया कि ये फिर से लंड पेलने के लिए तैयार हो गया है.
मैंने उसे मना किया कि अगर अब ज़बरदस्ती की तो मैं शोर मचा दूंगा.
वह मेरे तेवर देख कर डर गया और मुझे कमरे में ले आया.
उसने मुझे दवा लगा कर मेरे कपड़े पहनाए और हम दोनों सो गए.
सुबह सबके उठने से पहले ही मैं घर निकल गया.
फिर मैं एक हफ़्ता तक किसी से नहीं मिला.
मुझे लगने लगा था कि मेरे साथ गलत हुआ है, मुझे गंदा फील हो रहा था.
पर धीरे धीरे सब ठीक हो गया और मुझे गांड में खुजली होने लगी.
अब मुझे उसकी याद पुनः आने लगी.
मेरा मन कर रहा था कि मैं उससे फिर से मिलूं, पर मैं हिम्मत ना कर सका.
डेढ़ महीने बाद जब मुझसे रहा ना गया तो मैंने उसको कॉल की.
इस बार मैंने खुद उसको अपनी गांड मारने का आमंत्रण दिया.
उसने मुझे हचक कर चोदा, वह बड़ा ही मजेदार वाकिया है.
यदि आप लोग चाहेंगे तो मैं वह सब आपको अपनी अगली गे सेक्स कहानी में जरूर बताऊंगा.
मैं अब तक 25 के क़रीब लोगों से गांड मरवा चुकी हूँ, पर जैसी चुदाई सार्थक ने की और प्यार किया, वैसा कोई नहीं कर सका.
इस तरह मैं गांडू बन गया.
मैं अपनी अगली कहानियों में आपको बताऊंगा कि कैसे में राजीव से कश्वी बना.
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