सगी भाभी की प्यासी चुत की मस्त चुदाई
रियल भाबी सेक्स स्टोरी में मेरी भाभी साड़ी में बहुत मस्त माल लगती हैं. उनका चिकना सपाट पेट और गहरी गोल नाभि तो एकदम हाहाकारी लगती है. मन करता है कि चाटता रहूँ.
हैलो, आप सभी को मेरा यानि अमित का नमस्कार!
ये रियल भाबी सेक्स स्टोरी मेरी हॉट और सेक्सी भाभी की है.
मेरी भाभी का नाम सोनिया है.
उनकी उम्र तीस साल है.
उनका फिगर 32-30-34 का है. भाभी घर पर अक्सर साड़ी ही पहनती हैं.
वे साड़ी में बहुत मस्त माल लगती हैं.
सच कह रहा हूँ मुझे उनको साड़ी में देख कर ऐसा लगता है मानो जलेबी में रबड़ी डाल दी हो.
साड़ी में उनका चिकना सपाट पेट और गहरी गोल नाभि तो एकदम हाहाकारी लगती है और वह दृश्य भाभी को और भी कामुक बना देता है.
भैया भाभी और मैं व पापा, हम सब अलग अलग कमरे में सोते हैं.
हमारी कपड़े की बड़ी दुकान है, जिस पर हम तीनों मिल कर व्यापार करते हैं.
मेरी मां का देहांत हो गया है तो भैया हमेशा पापा के साथ ही उनका संग देने के लिए बाहर जाते हैं.
उन दिनों भी भैया और पापा माल खरीदी के लिए मुंबई गए हुए थे.
उन दोनों को एक हफ्ते बाद घर लौटना था.
उस दिन मैं सुबह सो कर उठा और फ्रेश हो कर नाश्ता करने के लिए आ गया.
मैंने भाभी को आवाज़ लगाई- भाभी मेरा नाश्ता कहां है? मुझे भूख लगी है!
भाभी ने कमरे से ही आवाज लगाई- बस पांच मिनट में आई देवर जी!
मैंने कहा- ओके जल्दी आओ भाभी.
पांच मिनट बाद भाभी आईं तो मैं उनको देखता ही रहा गया.
उस दिन भाभी ने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी और ब्लैक ब्लाउज.
उन्होंने साड़ी नाभि से तीन इंच नीचे पहनी थी, जिसकी वजह से उनका मलाई जैसा पेट और नाभि पूरी साफ दिख रही थी.
ब्लाउज कर डीप गले में से उनके मम्मों के बीच की लाइन साफ दिख रही थी.
भाभी की कमर जैसे रबड़ी की तरह लग रही थी और मेरा जी कर रहा था कि बस चाटता ही रहूं.
जब भाभी मेरे पास परांठा देने आईं, तो वे अपनी साड़ी को कुछ इस तरह से करके आई थीं कि उनकी नंगी कमर मुझे एकदम मस्त लग रही थी और वे मेरे एकदम नजदीक खड़ी हो गई थीं.
मुझसे रहा न गया और मैंने भाभी के पेट और नाभि पर अपना हाथ रख दिया.
उसी वक्त भाभी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और उनके मुँह से ‘आह्ह्ह’ निकल गया.
मैंने तत्काल अपनी उंगली भाभी की नाभि में डाल दी.
भाभी ने अपने होंठ भींच लिए और शायद वे दांतों से होंठ काटने लगी थीं.
मैं बौरा गया था.
तभी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ कर हटा दिया और वे इठलाती हुई अपने कमरे में चली गईं.
मैं सिर्फ देखता ही रह गया. फिर जैसे तैसे मैंने नाश्ता खत्म किया और चला गया.
बाद में मैं दुकान पर आ गया.
रात हुई तो मैं घर वापस आया.
भाभी ने खाना लगाया और मेरे पास आकर बैठ गईं.
वे कुछ नहीं बोलीं.
मैंने कहा- भाभी, सुबह के लिए सॉरी!
भाभी ने कहा- देवर जी, मैं आपकी रियल भाबी हूँ!
तो मैंने कहा- भाभी, मैं क्या करूं, आप ब्लैक साड़ी में हॉट सेक्सी लग रही थीं और आपका पेट और नाभि तो मुझे रस मलाई जैसा लग रहा था. मुझसे रहा ही न गया!
इतना सुनते ही भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने पेट पर रख दिया.
मैंने उनकी आंखों की तरफ देखा तो उनकी आंखों में वासना साफ झलक रही थी.
मैंने अपना पूरा हाथ भाभी के पेट और नाभि पर फिराया और कुछ इस तरह से मसला, जैसे मैं किसी टैल्कम पाउडर में हाथ फेर रहा हूँ.
भाभी के मुँह से मस्ती से आह आह निकल रही थी.
करीब पंद्रह मिनट तक मैंने भाभी के पूरे पेट और नाभि पर हाथ फिराया.
भाभी ने कहा- देवर जी पहले खाना खा लो, फिर कर लेना.
खाना खाने के बाद भाभी ने कहा- देवर जी, आज आप मेरे साथ ही सो जाओ!
मैंने कहा- ठीक है भाभी.
मैं भाभी के कमरे में आ गया और बेड पर बैठ गया.
करीब बीस मिनट बाद भाभी आईं और मेरे सामने खड़ी हो गईं.
मैं अपने होंठों पर जीभ फिरा कर उन्हें देखा तो उन्होंने मुस्कुरा कर मेरे हाथ को अपने पेट पर रख लिया.
वे खुद अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ कर अपने पेट पर फिरवाने लगीं.
मैं उनकी नाभि में उंगली डालने लगा.
कुछ पल बाद भाभी ने मेरे हाथ को ऊपर को खींचा और अपने बूब्स पर ले गईं.
मैंने उन्हें देखा तो उन्होंने अपने हाथ से मेरे हाथ को दबाकर इशारा किया.
मैंने उनके एक दूध को दबा दिया.
आह … उनकी मदभरी सिसकारी निकली और इधर मेरी हालत उनके एकदम मुलायम दूध को दबाते ही खराब होने लगी थी.
मेरा लंड खड़ा हो गया.
भाभी ने देख लिया कि मेरे लंड ने हिचकोला मारा है.
अब भाभी थोड़ी आगे को आईं और मेरे मुँह के सामने खड़ी हो गईं.
उस वक्त उनका पेट और नाभि मेरे मुँह के सामने आ गया था.
मैंने कहा- भाभी आपकी नाभि इतनी गहरी है कि इसमें डूब जाने का मन कर रहा है!
भाभी ने कहा- डूब जाओ देवर जी … मेरी नाभि में .. मैं तो कब से तैयार हूँ.
मैंने तुरंत भाभी की कमर में हाथ डाला और अपनी तरफ खींच कर अपनी जीभ निकाल कर पेट पर फिराने लगा.
वे सिसकारने लगीं.
मैंने बीस मिनट तक भाभी के पेट को चूमा और चाटा.
भाभी का पेट लाल हो गया था.
उसके बाद मैंने उनकी नाभि में जीभ डाल दी.
भाभी ने तेज सिसकारी निकाली- आहह देवर जी धीरे!
मैंने भाभी से कहा- भाभी, आपकी नाभि तो मलाई है, बस लग रहा है कि आपकी नाभि को चूमता ही रहूँ. वे मेरे सर को अपने पेट पर दबाने लगीं.
मैंने अपने एक हाथ से उनके दूध को थामा और उनकी गहरी नाभि को को देर तक चूमता रहा.
फिर मैंने रियल भाबी की साड़ी उतार दी.
भाभी अब मेरे सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थीं.
मैंने भाभी को दीवार की तरफ किया और भाभी की कमर को चूमता रहा.
फिर मैंने भाभी के ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा का हुक भी खोल दिया.
वे ऊपर से नंगी हो गई थीं तो मैंने उन्हें घुमाया और अपने सामने कर लिया.
आह क्या मस्त जवान रसीली चूचियां मेरे सामने फुदक रही थीं.
मैंने फिर से भाभी की कमर को चूमा और मुँह को ऊपर ले जाकर उनके बूब्स को चूसने लगा.
मुझे ऐसा लगा मानो भाभी के बूब्स में दूध आ रहा हो.
मैंने भाभी के दोनों बूब्स को बारी बारी से चूसता रहा और वे मेरे सर पर हाथ फेरती हुई मुझसे अपनी चूचियों को चुसवाने का मजा लेती रहीं.
चूचियों से मुँह हटा कर मैंने एक बार फिर से भाभी के पेट और नाभि को चूमा.
भाभी बार बार सिसकारी ले रही थीं- आह अह्ह देवर जी धीरे!
मैंने उन्हें नीचे झुकाया और उनके होंठों पर अपने होंठ जमा दिए.
भाभी के होंठ शहद से रसीले थे.
मैंने भाभी के होंठों का रस पिया और उन्हें वासना से देखते हुए उनके चूतड़ों को मसलने लगा.
अब भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरा लंड हाथ में लेकर हिलाने लगीं.
मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था.
भाभी ने लंड को सहलाते हुए कहा- देवर जी, आपका तो लंड बहुत बड़ा है!
मैं कहा- तो इसे प्यार करो न!
भाभी ने लंड को मुँह में लेकर चूसा और जैसे ही झड़ने को हुआ तो उन्होंने समझ लिया.
उन्होंने कहा- देवर जी, सारा रस मेरे मम्मों पर डाल दो!
मैंने सारा वीर्य मम्मों पर डाल दिया.
कुछ देर बाद मैंने भाभी का पेटीकोट खोला और पैंटी उतार दी.
भाभी नंगी हो गईं.
मैंने भाभी को बेड पर लेटा दिया और उनके पूरे जिस्म को चूसने लगा.
होंठों का रस चूसते हुए मम्मों पर आया, पेट और नाभि सब को खूब चूसा और नीचे चुत पर आ गया.
भाभी ने अपनी चुत खोल दी.
मैंने चुत को चाटा और उसे रस से गीला करके झट से चुदाई की पोजीशन में आ गया.
मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर रखा और एक झटके में पूरा लंड अन्दर घुसेड़ दिया.
भाभी जोर से चिल्ला पड़ीं- आह अह मर गई देवर जी … धीरे से डालो … अन्दर बहुत दर्द हो रहा है!
मैंने पूछा- ये दर्द क्यों हो रहा है भाभी?
वे बोलीं- तुम्हारे भैया का छोटा सा है और वे मुझे महीने में एकाध बार ही चोदते हैं.
मैंने समझ लिया कि भाई का छोटा लंड है, भाभी को बड़ा लंड चाहिए, इसी लिए मेरे साथ जल्दी सैट हो गई थीं.
अब मैंने उन्हें दम से चोदते हुए कहा- भाभी, बस थोड़ी देर दर्द होगा, फिर आपको मजा आएगा.
अब मैं भाभी को ताबड़तोड़ चोदने लगा था और अपने दोनों हाथों से भाभी के मम्मों को भी दबा रहा था.
भाभी के मुँह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं- आह अहह देवर जी, मजा आ गया!
मैंने भाभी को बीस मिनट तक चोदा और अपना सारा वीर्य भाभी की चूत में डाल दिया.
मैं झड़ कर भाभी के ऊपर गिर गया और हम दोनों नंगे ही सो गए.
अगले दिन जब मैं नाश्ता करने के लिए गया, तो भाभी ने लाल साड़ी और लाल ब्लाउज पहना था.
लाल साड़ी में भाभी का पेट और नाभि और भी ज्यादा कामुक लग रहा था.
जब भाभी मेरे पास आईं, तो मैं भाभी के पेट और नाभि को चूमने लगा.
भाभी ने अपनी आंखें बंद कर ली और सिसकारी लेने लगीं- आह आह देवर जी, धीरे करो!
जैसे ही मैंने भाभी की नाभि में जीभ डाली तो भाभी ने कहा- देवर जी, पहले नाश्ता कर लो, फिर रोमांस कर लेना.
मैंने और भाभी ने नाश्ता किया.
नाश्ता करने के बाद भाभी अपने कमरे में चली गईं, तो मैं उनके पीछे जाने लगा.
भाभी ने कहा- देवर जी दो मिनट बाद आना.
मैं दो मिनट बाद भाभी के कमरे में गया तो भाभी ब्लाउज और पेटीकोट में बेड पर बैठी थीं.
उन्होंने साड़ी उतार दी थी.
मैंने दरवाजा बंद किया और भाभी की तरफ आ गया.
मैंने उनको बेड से उठाया और उन्हें अपने सीने में भर कर किस करने लगा.
मैंने भाभी के होंठों पर किस किया, फिर नीचे आकर सीने पर किस किया.
मैं अपने हाथ से भाभी के बूब्स दबाने लगा.
उनके मुँह से मदभरी सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह आह देवर जी, धीरे करो!
मैंने ब्लाउज के ऊपर से ही मम्मों पर किस किया और अपना हाथ भाभी के पेट और नाभि पर फिरा रहा था.
फिर मैं नीचा आया और पेट और नाभि को चूमने लगा.
मुझे भाभी की नाभि और उनका पेट बहुत हॉट एंड सेक्सी लगता है.
मैंने भाभी का पेट और नाभि को बीस मिनट तक चूमा और भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया, फिर उनके ऊपर आकर ब्लाउज के हुक खोल दिए मैंने भाभी को उल्टा किया और कमर को चूमा और ब्रा का हुक भी खोल दिया.
वे मस्ती से अपनी कमर को हिलाने लगीं.
मैंने फिर से भाभी के जिस्म को चूमा और उन्हें बेड पर लेटा दिया.
अब मैं भी नंगा हो गया.
भाभी को पूरी नंगी किया और एक बार पुनः पेट और नाभि को चूस चूस कर लाल कर दिया.
भाभी बोलीं- अब पेलो न!
मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर रखा और अन्दर पेल दिया.
भाभी सिसकारियां लेने लगीं- आह आह्ह देवर जी, धीरे धीरे पेलो … बहुत दर्द हो रहा है!
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
बीस मिनट तक चोदने के बाद मैंने अपना सारा वीर्य भाभी के बूब्स और पेट नाभि पर डाल दिया.
मैंने अपने कपड़े पहने और भाभी को देखने लगा.
वे ऐसी ही नंगी बेड पर लेटी रही थीं.
फिर मैं अपने दोस्त के पास चला गया.
अब भाभी मेरे लिए एक मस्त आइटम गर्ल हो गई थीं.
भैया और पापा के दुकान पर रहने के कारण मैं लंच में घर आकर भाभी को चोद लेता हूँ.
दोस्तो, आपको मेरी यह रियल भाबी सेक्स स्टोरी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
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