सहेली की शादी में मिला पहली चुदाई का सुख- 3
वर्जिन गर्ल फर्स्ट फक स्टोरी में मैं अपनी चूत में पहला लंड लेने के लिए तैयार थी. मैंने अपना मनपसन्द लंड चुन भी लिया था, मैं उसे 2 दिन पहले ही चूस भी चुकी थी.
यह कहानी सुनें.
दोस्तो, मैं निशा अग्रवाल आपको अपनी सहेली शिल्पा की सीलपैक चुत की चुदाई की कहानी सुना रही थी.
इस सेक्स कहानी को शिल्पा खुद ही अपनी जुबानी लिख कर आपको बता रही है, सुनिए.
कहानी के दूसरे भाग
प्यासी भाभी ने रिश्ते में देवर को चूची चुसाई
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि विवेक की रिश्ते में लगने वाली भाभी वर्षा ने अपने कमरे में विवेक को बुला कर उसे अपने मम्मे चुसवा लिए थे.
अब आगे वर्जिन गर्ल फर्स्ट फक स्टोरी:
विवेक- आ जा मेरी वर्षा रानी, मैं तुझे नंगी कर दूँ … आज पूरे मजे लूँगा मेरी जान … मेरी रांड!
मैं भी विवेक को नंगा करके उसका 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड पकड़ कर सहलाने लगी.
उसका लंड बड़ी मुश्किल से मेरी मुट्ठी में आ रहा था.
मेरे होंठों को चूमते हुए उसने जीभ मेरे मुँह में डाल दी और पूरे मुँह में अपनी जीभ घुमाने लगा.
विवेक की लार मेरे मुँह में जा रही थी और मैं उसे गटकती जा रही थी.
दस मिनट किस करने के बाद उसने गर्दन पर चुम्मियों की बारिश कर दी.
मैं उसे पकड़ने को हुई तो उसने मेरे हाथ मेरी ब्रा से बांध दिए और बोला- बहनचोद … बच्चे को दूध पिलाने के समय मेहंदी लगी थी … अब हाथ घुमा रही है!
मेरे हाथ बांधकर वह मुझे तड़पाने लगा, गला, छाती, पीठ, पेट … बारी-बारी से चूमने लगा.
निप्पल और बूब्स पर काट-काटकर दांतों के निशान छोड़ दिए.
मेरी चूत से झरना बह रहा था और विवेक सिर्फ़ ऊपर ही चूमे जा रहा था.
मैं लाख गिड़गिड़ाई, पर वह चूत में लंड घुसाने को राज़ी नहीं हुआ.
आधा घंटा तड़पाने के बाद उसने मेरे बाल पकड़ कर मुझे बैठाया और लंड मेरे मुँह में घुसा दिया.
इससे पहले मैंने कभी किसी का लंड नहीं चूसा था.
उसका सुपाड़ा मेरे मुँह के अन्दर बड़ी मुश्किल से जा रहा था.
मेरे मुँह से गैलप-गैलप की आवाज़ ही आ रही थी. सांस भी बड़ी मुश्किल से ले पा रही थी.
पूरे लंड को मैंने लॉलीपॉप जैसे चूसा-चाटा.
उसने मेरे चूतड़ पर कस कसके थप्पड़ मारे तो मेरा चूतड़ लाल पड़ गया.
पूरे बदन पर चींटियां-सी रेंग गईं.
मुझे लिटाकर उसने पहले मेरी बहती हुई चूत पर एक थप्पड़ मारा.
मेरे पूरे शरीर में मानो करंट दौड़ गया.
फिर नीचे से ऊपर जीभ फेरते हुए चूत को चूसने और चाटने लगा.
उसकी जीभ मेरी चूत में गोल-गोल घूमती जा रही थी.
मेरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं.
वह बेरहमी से मेरी चूत चाट रहा था और मैं कराह रही थी ‘आह … आह … आज भोसड़ा बना दे राजा इस छिनाल चूत का तू ही मेरा असली पति है … आज से मैं तेरी रखैल हुई ओह … आह … चूस-चूस कर रबड़ बना दे इस कुतिया चूत को!’
चूसते-चूसते वह झड़ गया और सारा पानी पी गया.
फिर उसने मुझे कुत्तिया के पोज़ में करके पीछे से मेरी चूत में लंड घुसा दिया.
मेरी चीख निकल गई.
काफी महीनों से सेक्स न करने की वजह से चूत टाइट हो गई थी और विवेक का मूसल लंड एक बार में 3 इंच घुस गया.
उसने अगला धक्का दिया तो मेरी चूत फट गई.
मैं तड़पने लगी, आंखों में आंसू निकल आए.
अगले धक्के में बिस्तर पर औंधे मुँह गिर पड़ी.
ऐसा लगा मैं बेहोश हो जाऊंगी.
थोड़ी देर रुककर विवेक ने मेरे एक चूतड़ को दबा दिया.
तब तक दर्द कम हुआ.
उसने फिर धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.
मुझे भी मज़ा आने लगा.
तभी उसने अपना अंगूठा मेरी गांड में डाल दिया और अंगूठा फंसाकर घुमाने लगा.
वह मुझे चोदता जा रहा था और मैं ‘आह … आह … ’ करती हुई मजे ले रही थी.
फिर उसने एक हाथ से मेरे बाल पकड़ कर खींचे जैसे घुड़सवार घोड़े की लगाम पकड़ कर करता है.
मैं मजे की चरम सीमा पर पहुंच गई थी और मैं झड़ गई.
कुछ देर बाद विवेक भी झड़ने वाला था, तो उसने मुझे सीधा करके मेरे मुँह में स्पर्म की पिचकारी छोड़ दी.
उसका खट्टा-खारा पानी मैंने गटक लिया और दोनों चित लेट गए.
रात भर विवेक ने मुझे जिस्मानी सुख दिया और मेरी महीनों की हवस को मिटा दिया.
मैंने रात में मेहंदी से विवेक के लंड पर अपना नाम लिख दिया और कहा- अब से जब तक मेहंदी का रंग नहीं उतरता, तब तक रोज़ तुम मुझे चोदोगे.
अगली सुबह जब भाभी ने मुझे ये कहानी सुनाई तो मेरी तो चूत का झरना फूट पड़ा.
मैंने बाथरूम में जाकर उंगली से हवस शांत की और मैंने आज मन बना लिया था कि विवेक से चुदना ही है .. किसी भी हालत में.
सारा दिन उसके ख्यालों में निकल गया और रात में उसके कमरे में मैंने, प्रिया और भाभी ने डेरा डाल लिया था.
हमने ब.च्चे को एक कोने में सुला दिया और भाभी बाकी औरतों के साथ काम में व्यस्त हो गई.
रात 12 बजे मैंने विवेक को कॉल करके कमरे में बुलाया.
प्रिया ने विवेक को दरवाज़ा बंद करने को बोला.
दरवाज़ा बंद करके उसने प्रिया को किस करना शुरू कर दिया और ज़ोर-ज़ोर से टॉप के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए.
ये देखकर मैंने विवेक को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को दबाकर चूसने लगी.
आज मैं बेहद आक्रोश में उसे किस कर रही थी … पूरे मुँह में जीभ घुसाकर उसकी जीभ को चूस रही थी.
वह भी पूरे जोश में था.
विवेक ने मेरी चूचियों को टॉप के बाहर से ही दबाना शुरू कर दिया.
प्रिया एक तरफ़ खड़ी होकर देख रही थी.
अचानक प्रिया ने मेरी लोअर उतार कर पैंटी को मेरी टांगों से अलग कर दिया और मेरी चूत में मुँह लगाकर मेरा रसपान करने में लग गई.
विवेक ने मेरा टॉप निकाल कर ब्रा भी अलग कर दी और मेरे बूब्स चूसने लगा.
मैं बस इसी आनन्द में डूब गई.
फिर विवेक ने प्रिया के कपड़े उतार कर नंगी कर दिया और उसके बूब्स दबाने लगा.
मैंने विवेक के कपड़े उतारे और उसके लंड को मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया.
हम आपस में एक-दूसरे के अंगों को चूम-चाट रहे थे.
तभी गेट पर किसी ने दस्तक दी.
प्रिया ने पूछा- कौन है?
तो भाभी बाहर खड़ी हुई थी.
विवेक ने पहले थोड़ा गेट खोलकर दरवाज़े के पीछे से देखा.
भाभी को अकेली खड़ी देखकर उसने भाभी को झट से अन्दर खींच लिया.
भाभी हमें तीनों को नंगा पाकर एकदम फटी आंखों से देख रही थी और बोली- तुम लोग सामूहिक चुदाई कर रहे हो!
हमने भाभी को बताया कि ये तो हम पहले ही करना चाहते थे, पर एक रात उन्होंने चुरा ली.
बातों-बातों में प्रिया ने भाभी की साड़ी खींचकर निकाल दी.
ब्लाउज़ को विवेक ने पकड़ कर खींचा, जिससे वह फटकर बाहर निकल आया और मैंने पेटीकोट उतार फेंका.
अचानक हमले से भाभी को टाइम का पता लगे, उससे पहले ही भाभी हमारे सामने नंगी खड़ी हो गई.
भाभी कुछ बोल पाती, उसके पहले ही प्रिया ने उसके गुलाबी होंठों को अपनी कैद में कर लिया.
विवेक भाभी को गाय की तरह पकड़ कर उसके निप्पल निचोड़ कर दूध निकाल रहा था और मुझे चूत का छेद ही मिला चूसने को.
भाभी ने कहा- पहले मैं चुदूँगी क्योंकि लंड पर मेरा नाम लिखा है!
हम दोनों ने देखा तो लंड पर मेहंदी का रंग चढ़ चुका था और भाभी का नाम साफ दिख रहा था.
पर 15 मिनट बाद हमने आपस में डिसाइड किया कि पहले लंड मैं अन्दर लूँगी क्योंकि मैंने पहले कभी चुदाई नहीं कराई थी.
विवेक ने लंड मेरी चूत पर सैट किया.
मुझे काफी डर लग रहा था उसके लंड के साइज़ को देखकर.
भाभी मुझे किस करने लगी और प्रिया मेरे बूब्स को प्रेस करने में लग गई.
विवेक ने मेरी चूत में एकदम से धक्का मारा.
लंड अभी 2 इंच ही अन्दर गया होगा मेरी सीलपैक चूत में कि मुझे भारी दर्द होने लगा.
मैं चीख भी नहीं सकती थी क्योंकि भाभी ने मेरा मुँह पर मुँह लगा रखा था.
अगले झटके में विवेक ने मेरी चूत में आधे से ज़्यादा लंड उतार दिया.
मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे.
अगले झटके में विवेक ने पूरा 8 इंच का लंड मेरी चूत में घुसा दिया.
मेरी चूत की सील टूट चुकी थी और काफी खू.न आने लगा था.
प्रिया बोली- विवेक, इसका फर्स्ट टाइम है आराम से करना और साली को ऐसा मज़ा देना कि रोज़ यहीं चुदवाने आए!
थोड़ी देर रुककर विवेक ने आगे-पीछे करना शुरू किया.
तब तक मेरा दर्द कम हो चुका था और मुझे हल्का-हल्का मज़ा आने लगा था.
फिर भाभी ने मुँह मेरे बूब्स पर लगा दिया और वह मेरे बूब्स चूसने लगी.
उसके बूब्स मेरी आंखों के सामने लटक रहे थे.
मैंने भी उसके दूध को मुँह में रखकर उसका दूध पीना शुरू कर दिया.
उसके मम्मों से तो दूध की धार आ रही थी तो मैं चूसती गई.
तभी विवेक के झटके तेज़ होने लगे और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, पर विवेक मेरी चूत में धक्के लगाता रहा.
फिर उसका पानी छूटने वाला था तो उसने लंड निकाल कर प्रिया के मुँह में डाल दिया.
प्रिया ने विवेक के पानी की एक-एक बूँद पी गई.
वर्जिन गर्ल फर्स्ट फक के बाद मैं वहां निढाल पड़ी हुई थी, मुझमें अब उठने की शक्ति नहीं थी.
फिर भी सहारा लेती हुई बाथरूम जाकर चूत साफ करने लगी.
बाहर कमरे में भाभी विवेक के लंड को फिर से तैयार करने में लग गई.
लंड खड़ा होते ही प्रिया ने अपनी चूत फैलाते हुए कहा- अब इस मूसल को मेरी चूत में डालो … फाड़ डालो आज मेरी चूत!
विवेक ने लंड को उसकी चूत पर टिका कर ज़ोर का झटका मारा.
भाभी ने तुरंत ही उसके मुँह को हाथ से दबा दिया ताकि चीख बाहर न निकले.
फिर विवेक ने झटके मारना शुरू कर दिए.
भाभी ने थोड़ी देर बाद हाथ हटा लिया. प्रिया बोलने लगी- विवेक बहनचोद … कब से इस लंड की प्यासी थी मेरी चूत फाड़ डाल इसे और बना दे इसका भोसड़ा!
विवेक भी उसी जोश में धक्के देता रहा.
सारे कमरे में फच-फच की आवाज़ें गूंज रही थीं.
प्रिया का पानी निकल गया और विवेक ने भी लंड बाहर निकाला तो भाभी ने लपक कर लंड मुँह में ले लिया और उसके सफेद पानी को पी गई.
एक-एक बूँद साफ करके उसने मुँह लंड से हटाया और प्रिया उसे किस करने लगी.
अगली बारी भाभी की थी.
वह तैयारी के साथ लेट गई और प्रिया ने लंड मुँह में लेकर लंड को फिर से खड़ा कर दिया.
फिर विवेक और भाभी की चुदाई का सिलसिला शुरू हुआ और दोनों एक-दूसरे को कॉम्प्लिमेंट कर रहे थे.
भाभी की गुलाबी चूत में लंड सरपट अन्दर-बाहर हो रहा था और भाभी आंखें बंद करके मोअन किए जा रही थी.
भाभी 15 मिनट बाद झड़ गई और विवेक ने लंड निकाल लिया तो प्रिया ने मुझे मुँह में लेने को कहा.
सारा माल विवेक ने मेरे मुँह में डाल दिया.
मैं सारा माल पी गई.
बेड की चादर पर मेरी चुत का खून फैला हुआ था.
हमने रात में चादर बदली और तीनों नंगे साथ में सो गए.
भाभी अपने बच्चे के साथ कोने में सो रही थी.
ये चुदाई का कार्यक्रम शादी तक चला.
फिर मैं भोपाल आ गई, प्रिया अपने घर और भाभी अपने घर.
आपको यह वर्जिन गर्ल फर्स्ट फक स्टोरी कैसी लगी?
इसका फीडबैक आप मुझे ईमेल के माध्यम से मेरी मेल आईडी जरूर भेजें.
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