फैमिली सेक्सपूर्ण

सौतेली बेटी की चुत चोदी और निकाह किया

0 बार पढ़ी गई11 मिनट का पाठ३ दिन पहले

यंग गर्म लड़की की चुदाई की उसके सौतेले बाप ने. दोनों को ही सेक्स की भूख सता रही थी. दोनों ने एक दूसरे की जरूरत को समझा और आपस में चुदाई का मजा लिया.

दोस्तो, मेरा सही नाम जावेद है, पर लोग मुझे रेंजर नाम से भी जानते हैं.

मेरा उपनाम रेंजर है. मैं एक अधेड़ उम्र का इंसान हूँ.

मैं उत्तर प्रदेश के शहर बिजनौर से हूँ.

मेरी इस यंग गर्म लड़की की चुदाई स्टोरी में आप सभी का स्वागत है.

मेरी सेक्स कहानी विदेश से शुरू होती है, जहां मैं पैसे कमाने के लिए गया था.

घर की गरीबी और तकदीर की मार की वजह से मुझे घर छोड़ना पड़ा था.

मेरी मां ने मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया था, मुझे अपने बाप का भी पता नहीं है.

मेरी मां गरीब थी और वे जवानी में अनेक रईसों की रखैल हुआ करती थी.

पैसों की कमी के वजह से एक तरह से वे धंधा करती थीं और अलग अलग सेठों के बिस्तर गर्म करती थीं.

पता नहीं कब किसने उनको बिना कंडोम के चोद दिया, जिसकी वजह से मैं अपनी मां के कोख में आ गया और नौ माह के बाद मैंने अपनी मां की कोख से जन्म ले लिया.

खैर … ये सेक्स कहानी मेरी मां की नहीं, मेरी सौतेली बेटी शिफा की है.

दरअसल मां ने मेरी शादी एक ऐसी औरत से करवा दी थी जिसकी कोख में किसी का बीज पल रहा था.

यह बात मुझे नहीं मालूम थी … वह तो जब पहली रात को मैंने अपनी बीवी को चोदा तो उसकी चुत न केवल खुली हुई थी बल्कि ढीली थी.

मुझे बड़ा बुरा लगा लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था तो बस चुप रह गया.

उस रात मैंने उसे चोदा और झड़ने के पहले ही लंड को अपनी बीवी की चुत से बाहर खींच लिया.

उसने कुछ नहीं कहा.

मैंने वीर्य बाहर निकाल दिया.

अगले दिन से मैंने उसे नहीं चोदा.

वह भी कुछ नहीं बोली.

मैं पैसे कमाने के लिए काफी समय से हाथ पैर मार रहा था तो शादी के दस दिन बाद ही मुझे परदेस जाने का अवसर मिल गया और मैं भारत से बाहर चला गया.

दो महीने बाद मेरी मां गुजर गईं तो मैं वापस आकर अपनी बीवी को विदेश ले गया.

उधर मैंने देखा कि मेरी बीवी का पेट फूलने लगा था.

उससे बात की, तो उसने सच बता दिया.

वह भी मेरी मां की तरह मजबूर थी, जिस वजह से उसे किसी ने चोद कर गर्भवती कर दिया था.

मेरी बीवी ने सोचा था कि मैं उसे चोदूंगा तो वह बच्चा मेरा कहलाएगा … यही सोच कर उसने हमल साफ नहीं करवाया था.

मैं उसकी मजबूरी समझता था, तो मैंने तय किया कि यह बेबी होने के बाद मैं उससे अपना बच्चा भी पैदा करूंगा.

फिर परदेस में रहते हुए ही उसकी कोख से एक बेटी पैदा हुई जो मेरी बेटी कहलाई.

उसका नाम मैंने शिफा रखा था.

शिफ़ा के जन्म के बाद ही मेरी बीवी को वेजाइनल कैंसर हो गया था.

उसके इलाज में मेरा सारा पैसा खत्म हो गया.

बीवी के मर जाने के बाद मुझे वापस अपने देश लौटना पड़ा जहां मैं और मेरी नन्ही सी गुड़िया शिफा साथ रहते थे.

इधर मेरे पास कोई काम नहीं था, तो मैं जंगल से लकड़ियां काटता या जंगली फल तोड़ कर लाता और बाजार में बेच कर अपना गुजारा चलाता रहा.

मेरी बेटी अधिकतर समय मेरे साथ ही रहती थी क्योंकि बेटी बड़ी होती जा रही थी और उस पर भूखे मर्दों की कामुक नजरें पड़ने लगी थीं.

धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और शिफा जवान हो गई.

इधर बीवी के मर जाने के बाद से मैं अकेला रह गया था और चुदाई से महरूम हो गया था.

किसी औरत की चुत की याद में मैं अब तक मुठ मार-मार कर थक चुका था.

इधर मेरी बेटी शिफा 18 साल की उम्र में ही मस्त माल लगने लगी थी क्योंकि उसका बदन बहुत गठीला था.

मैंने कभी उसे गैर की बेटी नहीं माना था.

उसके सिवाए अब मेरा इस दुनिया में कोई और था भी नहीं.

हालांकि मैंने उसे कभी यह नहीं बताया था कि वह मेरी बेटी नहीं है.

एक दिन की बात है, जब उसे पीरियड्स आए.

वह उस दिन ज्यादा खून आया देख कर घबरा गई और भागती हुई मेरे पास आई.

उस वक्त मैं खाना बना रहा था.

उसने घबराहट के मारे अपनी पैंटी की तरफ इशारा किया.

उसके खून से सनी पैंटी उसकी चूत पर चिपक चुकी थी.

मुझे उसकी चूत का शेप देखकर करंट सा लगने लगा.

मैं भूल गया कि ये मेरी ही बेटी है.

इतने साल से मुठ मारकर जीने वाला मेरे जैसा इंसान जब अपनी बेटी की चूत देखेगा तो मदहोश हो जाएगा, तो इसमें क्या अचरज है!

उस दिन तो बात आई गई हो गई.

शिफ़ा मेरे साथ मेहनत वाला काम करने लगी थी तो उसका जिस्म काफी सुघढ़ हो गया था.

उसके बूब्स का साइज 18 साल की उम्र में ही 32 हो गया था.

फिर एक बारिश की रात की बात है.

अब शिफा 19 साल की हो चुकी थी.

हम दोनों एक साथ में ही सोते थे.

अचानक वह रात को उठी और टहलने लगी.

इतने में मेरी आंख खुली, मैं सिर्फ अंडरवियर पहन कर लेटा हुआ था.

मैंने पूछा- क्या हुआ बेटी?

तो वह चुपचाप टहलती रही.

मेरे दोबारा पूछने पर उसने कहा- अब्बू, आपको मेरी शादी करनी है लेकिन हम गरीब हैं, इसलिए कोई रिश्ता तैयार नहीं हो रहा. मैं अब जवान हो चुकी हूँ. मुझे अब मर्द की भूख लगती है, रातों को नींद नहीं आती … सुकून से नहीं सो पाती हूँ मैं!

उसने छिपे हुए शब्दों में एक तरह से साफ साफ कह दिया था कि उसे एक मर्द की जरूरत है.

उसकी बात सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ.

मैंने कहा- बेटी, यदि तुम बुरा न मानो तो मैं अपनी बात भी कह दूँ!

वह मुझे देखने लगी, फिर धीरे से बोली- अब हम दोनों को एक दूसरे का ही सहारा है अब्बू … हम अपने अपने दिल की बात एक दूसरे से नहीं कहेंगे तो किससे कहेंगे?

मैंने कहा- बेटी, जैसी भूख तुझे है, ठीक वैसी ही जरूरत मेरी भी है. भूख तो मुझे भी है, पर क्या करूँ? न खुद की शादी के पैसे हैं, न तुम्हारे दहेज के. आखिर लकड़ी काट कर कितना पैसा मिलेगा!

तभी मेरी शातिर बेटी ने अपना दिमाग लगाया और धीरे से बोली- क्यों न अब्बू, हम एक-दूसरे की भूख मिटाएं? न पैसा लगेगा, न टेंशन!

उस रात मैंने पहली बार अपनी बेटी शिफा को वासना की नजर से देखा.

वह मेरे करीब आई और मेरे नग्न सीने से लग गई.

मैं उसे अपनी बांहों में लेकर यही सोच रहा था कि शिफ़ा मेरे बीज की बेटी नहीं है … लेकिन यह है तो मेरी ही बेटी!

वह चुप थी और अपनी चूचियों के मेरे नग्न सीने से बेखौफ रगड़ रही थी.

अचानक से उसने मेरे अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया तो मैं सब पाप पुण्य भूल गया और मेरे अन्दर का मर्द जाग गया.

मैंने कहा- क्या यह सही होगा शिफ़ा?

कुछ पल बाद शिफा ने जैसे ही कहा- सब सही होगा अब्बू, कमर के नीचे के अंग रिश्तों की परवाह नहीं करते हैं. आज हम दोनों एक-दूसरे की भूख मिटा लेते हैं!

उसके मुँह से इतना सब सुनकर ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

मेरी बेटी शिफा का फिगर इतना नशीला था कि पड़ोसी रोज उसके नाम की मुठ मारते थे.

मेरा लंड खड़ा हुआ तो अंडरवियर के ऊपर से ही साफ नजर आने लगा.

मेरी बेटी शिफा को अपने हाथ में जब मेरा सख्त लंड महसूस हुआ, तो वह मेरे लौड़े को देखने लगी.

मैंने अंडरवियर का नाड़ा ढीला करके उसे उतार दिया.

जैसे ही शिफ़ा की नजर मेरे लंड पर पड़ी, तो वह मुस्कुरा कर मेरे और पास को आ गई और लंड पर हाथ रख कर बोली- अब्बू, इसको मैं शांत कर दूँ?

उसका हाथ मेरे नंगे लंड पर जैसे ही पड़ा, मेरा मन करने लगा उसके बूब्स चूसने का.

फिर मैंने कहा- बेटी, लाइट ऑफ करो मुझे शर्म आ रही है. आखिर तुम मेरी बेटी हो!

शिफा ने मेरे गालों पर उंगलियां फेरकर कहा- अब शर्माना कैसा अब्बू, अब तो मैं आपकी रखैल हूँ, बेटी नहीं!

मेरी बेटी शिफा के मुँह से ये बात सुनकर मेरे बदन में आग सी लग गई.

मैंने शिफा को बेड पर उल्टा लिटा कर उसकी लेगिंग्स खींच दी.

हाय … उसकी जवान चूत पर वह छोटे-छोटे बाल और एकदम टाइट चूत देखकर रुका न गया और मैंने झट से अपनी जुबान उसकी चुत में डाल दी और जोर-जोर से चूसने लगा.

उसकी चूत को चूसते ही वह सिसकारियां लेने लगी- रेंजर अब्बू, प्लीज और ज़ोर से पेलो अब्बू … और अन्दर डालो जुबान … आआह आआ आह औह … जावेद साले बेटी चोद आह चोद दे उफ्फ्फ्फ जावेद बहन के लौड़े फाड़ दे मेरी चूत!

जब उसने मुझसे गाली देकर बात की तो मेरे अन्दर भी कामुकता भड़क उठी.

अब मैंने उसके मुँह में अपना लंड दे दिया.

वह खूब मजे से चूसती रही.

तकरीबन दस मिनट चूसने के बाद मैंने उसको घोड़ी बनाकर उसकी चूत पर अपने लंड का सुपाड़ा रख दिया.

वह फिर से सिसकारियां भरने लगी.

उसकी सेक्सी आवाज़ से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

मैंने एक धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में डालकर उसकी चूत का भोसड़ा बनाना शुरू कर दिया.

उसकी चुत फट गई और खू.न की धार बहने लगी.

वह बहुत तड़फी और चुदाई रोकने के लिए कहने लगी … मगर अब लंड को किधर चैन था.

मैं नहीं माना और अपनी बेटी को अपनी जोरू समझ कर चोदता रहा.

कुछ देर की चुदाई में वह अपना दर्द भूल गई और अब वह कभी मेरा लंड मुँह में लेकर चूसती, कभी मैं उसकी चूत में उंगलियां डालकर उसकी सिसकारियां सुनता.

ऐसा आधा घंटा चलता रहा.

फिर वह बोली- अब्बू, बेडरूम में कब तक चोदोगे? मेरी तमन्ना है कि आओ मुझे वॉशरूम में ले जाकर चोदो. मेरे पूरे बदन पर साबुन लगा कर मुझे रगड़ो!

मैंने उसकी खुशी के लिए उसको गोद में उठाया और वॉशरूम की तरफ चल दिया.

मैंने दरवाज़ा भी नहीं बंद किया क्योंकि घर में हम दोनों के सिवा कोई नहीं रहता था.

उसको वॉशरूम में ले जाकर पहले मैंने उसके पूरे बदन पर पानी गिराया. फिर उसके निप्पलों पर साबुन लगाकर खूब हाथों से मसला.

वह मस्ती से चीखने लगी.

फिर मैंने उसके मुँह पर हाथ रखकर उसको उल्टा घुमाया.

हाय उसकी बड़ी-बड़ी गांड में मेरा लंड टच करने लगा.

फिर वहां मैंने उसको दस मिनट चोदा.

उसकी चूत में लंड डालकर उसकी चूत के होंठों को बड़ा करने लगा.

मेरे लंड के धक्कों से शिफा की चूत सूजने लगी.

वह रोने लगी- अब्बू बस करो.

पर मैं इतने साल का भूखा मर्द था तो मैंने अपनी शिफा बेटी को खूब चोदा.

उसकी आंखों से आंसू आने लगे, वह तड़पने लगी.

वह चलने लायक न बची तो मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में लेकर आया.

उस रात मैंने अपनी बेटी शिफा की चूत को 4 बार चोदा.

उस दिन के बाद से एक साल तक न जाने कितनी दफा मैं उसकी चूत को चोद चुका हूँ.

मैं बार बार उसे सच बताने की सोचता लेकिन रह जाता कि कहीं शिफ़ा मेरे हाथ से न निकल जाए.

अब हम बाप-बेटी एक-दूसरे के जिस्म की भूख मिटाते रहते हैं.

जब मन चाहता है, मैं अपनी बेटी शिफा की चूत से जंग लड़ने लगता हूँ.

फिर एक दिन वही हुआ, जो मैं चाहता था.

मेरी बेटी मेरे बीज से हमल से रह गई.

अब मामला जग जाहिर होने की स्थिति आ गई थी.

शिफ़ा ने कहा- अब्बू, हम लोग बिजनौर छोड़ कर कहीं और चलते हैं. मैं आपसे निकाह कर लूँगी और इस बच्चे को जन्म दूँगी.

मैं झट से मान गया और आखिर मैंने उससे कह ही दिया- शिफ़ा, तुम मेरे बीज से जाई औलाद नहीं हो, तुम्हारी अम्मी ने किसी दूसरे से तुमको अपने हमल में लिया था.

यह सुनते ही वह रो पड़ी और मेरे सीने से लग गई.

फिर मैंने उसे अपनी पैदाइश के बारे में भी बताया- मैं भी हराम की औलाद हूँ. मुझे भी अपने बाप का नाम नहीं मालूम है.

शिफ़ा बोली- शायद रब को हम पर दया आ गई और वह नहीं चाहता था कि हमारी औलाद हरामी कहलाए. इसलिए हम दोनों निकाह करके इस बच्चे को अम्मी अब्बू का नाम देंगे.

मैं राजी हो गया था.

उसी रात मैं शिफ़ा को लेकर निकल गया और महाराष्ट्र के एक गांव में आ गया.

उधर सब कुछ सैट करके मैं वापस आया और उसी रात अपना किराए वाला घर खाली कर दिया और सामान आदि लेकर अपने महाराष्ट्र वाले गांव में आ गया.

इधर हम दोनों ने निकाह कर लिया और अब औलाद के जन्म लेने का इंतजार कर रहे हैं.

मुझे उम्मीद है कि आपको ये यंग गर्म लड़की की चुदाई पसंद आई होगी.

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